
चुनौतियों के बीच पहला वर्ष
प्रिय दोस्तों,
मैं
यह सम्पादकीय ऐसे समय में लिख रहा हूँ जब डॉयलाग इंडिया का एक वर्ष पूरा हो चुका है
और हम अपना वार्षिकंाक निकाल रहे हैं। पीछे मुड़कर देखें तो इतने कम समय में बिना
किसी राजनीतिक आका और कारपोरेट के सहयोग से मीडिया की तथाकथित चर्चित हस्तियों के
बिना हमने सम्पादन, लेखों, मौलिक चिन्तन एवं दृष्टि बेबाकी व स्पष्टवादिता तथा
प्रसार के क्षेत्रों में अपने आपकों न केवल स्थापित ही किया वरन एक बड़े बु़िद्धजीवी,
राजनीतिक एवं पत्रकारिता वर्ग की सोच एवं चिंतन को नये आयाम दिये। पर्दे के पीछे की
बातों को मंच पर लाने वाले प्रकाशनों की हिन्दी भाषा में कमी ही रही है राष्ट्र में
परिवर्तन की वाहक हिन्दी ही हो सकती है अत: हमने अपने प्रकाशन को हिन्दी में ही
प्रारम्भ किया। Read more..












