तमिल टाइगर्स तथा फादर गेस्पर एवं 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला

टू जी स्पैक्ट्रम की कडिय़ां तमिलनाडु के फादर गेस्पर से भले सीधे नहींजुड़ी हों लेकिन वो वो न केवल कनिमोझी के बेहद करीबी हैं बल्कि उनके यहां भी टूजी संबंधी छापे पड़े हैं। फादर गेस्पर करुणानिधि परिवार के भी खास हैं। उन्हें लिट्टे का फंडरेजर भी माना जाता रहा है। उनका नाम इस प्रकरण में आना बड़े षडयंत्र की ओर इशारा भी करता है

सुरेश चिपलूनकर

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चर्च द्वारा तमिल टाइगर्स को करोड़ों की फंडिंग करने के मामले में पहले भी कई बार विभिन्न अखबारों में लेख प्रकाशित हो चुके हैं , यह बात भी काफी लोग जान चुके हैं कि प्रभाकरण असल में तमिल नहीं बल्कि धर्मान्तरित ईसाई था। श्रीलंका सरकार द्वारा तमिल चीतों की धुलाई और खात्मे के बावजूद तमिलनाडु में कई ऐसे लोग एवं संस्थाएं आज भी मौजूद हैं जो तमिल टाइगर्स से सहानुभूति रखती हैं , पृथक तमिल राज्य (तमिल ईलम) के लिये भीतर ही भीतर संघर्षरत हैं। द्रविड मुनेत्र कणगम (डीएमके) पार्टी अपनी राजनैतिक मजबूरियों की वजह से खुले तौर पर भले ही टाइगर्स के समर्थन में नहीं बोलती हो , लेकिन यह बात सभी जानते हैं कि प्रभाकरण के करुणानिधि से कितने मधुर सम्बन्ध थे।

हाल ही में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सिलसिले सीबीआई द्वारा चेन्नई में मारे गये कई छापों में एक नाम चौंकाने वाला रहा , ये साहब हैं फादर जेगथ गेस्पर , जो गतमिल मय्यम नामक एनजीओ चलाते हैं। केन्द्र सरकार की हाल की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी चर्चों द्वारा सबसे अधिक पैसा दिल्ली व तमिलनाडु में भेजा गया है तथा अरबों रुपये दान में पाने वाली टॉप 15 संस्थाओं में से 13 संस्थाएं ईसाई समूह या इससे जुड़ी संस्थाएं या एनजीओ हैं। तमिल मय्यम नाम के इस एनजीओ में फादर गेस्पर सर्वेसर्वा की तरह काम करते हैं जबकि करुणानिधि की बेटी एवं केन्द्रीय मंत्री कनिमोझि इस एनजीओ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में प्रमुख पद पर हैं। कनिमोझि के सरकारी और गैर-सरकारी कार्यक्रमों में अक्सर इस फादर गेस्पर को कनिमोझि के पीछे-पीछे कान में फुसफुसाते देखा जाता था।

फिलीपींस स्थित कैथोलिक रेडियो वेरिटास तथा श्रीलंका के कैथोलिक चर्च की तमिल टाइगर्स के लिए पैसा उगाहने में प्रमुख भूमिका थी , यह फादर गेस्पर भारत में तमिल टाइगर्स को पैसा मुहैया करवाने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। रेडियो वेरिटास , मंदारिन , सिंहली , तमिल , फिलीपोनो एवं उर्दू जैसी कई भाषाओं में रेडियो कार्यक्रम पेश करता है , इसी के जरिये संगीत , राजनीति और नेताओं से संबंधों के चलते फादर गेस्पर ने करोड़ों रुपये तमिल टाइगर्स की झोली में पहुँचाये।

जयललिता द्वारा संचालित गजया टीवी ने एक संगीत कार्यक्रम के फुटेज जारी किये , जिसमें फादर गेस्पर के साथ मंच पर तमिल टाइगर्स का प्रमुख धन उगाहीकर्ता नचिमुथु सोक्रेटीस नजर आ रहा है। इस नचिमुथु को अमेरिका के जासूसों ने रंगे हाथों पकड़ा था , जब ये तमिल टाइगर्स को बेचने के लिए मिसाइल का सौदा करने हेतु अमेरिकी अधिकारियों को रिश्वत देने का प्रयास कर रहा था। फादर गेस्पर ने कनिमोझि से चेन्नई में मरीन बीच पर आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करोड़ों रुपये का सरकारी अनुदान भी लिया है , जाहिर है कि इसमें से बड़ा हिस्सा तमिल टाइगर्स की जेब में गया।

इस करोड़पति फादर गेस्पर ने 1995 में दस हजार रुपये मासिक की तनख्वाह से रेडियो वेरिटास में नौकरी शुरू की थी , निम्न-मध्यम वर्गीय फादर गेस्पर पहले कन्याकुमारी के सुदूर गाँवों के चर्च में पदस्थ रहा , लेकिन यह व्यक्ति आज न केवल करोड़ों में खेल रहा है , बल्कि तमिलनाडु के सबसे भ्रष्ट करुणानिधि परिवार के नजदीकी व्यक्तियों में एक है। यह सब चर्च की महिमा है।

रेडियो वेरिटास के ईसाई धर्म प्रचार एवं इसकी लिट्टे से सहानुभूति को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने कई बार इस रेडियो स्टेशन पर आपत्ति जताई , लेकिन फिलीपींस से बज रहे रेडियो को वह रोकने में नाकाम रही। जाफना में तमिल उग्रवादी एवं भोले-भाले तमिल ग्रामीण इस रेडियो से किये गये दुष्प्रचार में आते रहे , यह फादर जगथ गेस्पर इस रेडियो की नौकरी की वजह से तमिल गुरिल्लाओं में काफी लोकप्रिय हुआ।

बाद में इसे तमिलनाडु में एक एनजीओ खोलकर दे दिया गया ताकि वह वहाँ से पैसा एकत्रित कर सके। फर्जी एनजीओ चलाने में चर्च को महारत हासिल है। इन्हीं चर्च और लिट्टे का नेटवर्क इतना जबरदस्त रहा कि फादर गेस्पर ने तमिलनाडु से लिट्टे को करोड़ों रुपये का चन्दा दिलवाया। मनीला की पेरिस बैंक की शाखा से छह लाख डॉलर का चंदा इन्होंने श्रीलंकाई सेना के अत्याचारों की कहानियाँ सुना-सुनाकर एकत्रित किया। तमिल अनाथ बच्चों के नाम पर फादर गेस्पर ने कितना पैसा बटोरा , ये आजतक किसी को नहीं पता , क्योंकि श्रीलंकाई सेना द्वारा सफाया किये जाने के दौरान तमिल चीतों के कई प्रमुख नेता मारे गये थे। फादर का यह राज उन्हीं के साथ दफन हो गया।

तमिल मय्यम नाम के इस एनजीओ की स्थापना 2002 में हुई थी , एनजीओ का लक्ष्य बताया गया तमिलों की कला-संस्कृति एवं साहित्य को बढ़ावा देना , इसे तत्काल धारा 80-जी के अन्तर्गत टैक्स में छूट की सुविधा भी मिल गई। इसके ट्रस्टियों में खुद फादर गेस्पर के साथ कनिमोझि , फादर लोरदू , फादर जेरार्ड , मिस्टर जोसेफ ईनोक तथा फादर विन्सेंट आदि शामिल हैं।

अब कुछ संयोगवश घटित घटनाओं पर नजर डालिये

  1. राजीव गाँधी की हत्या श्री पेरूंबुदूर में हुई।
  2. उस दिन राजीव गाँधी की सभा पेरूंबुदूर में नहीं थी फिर भी अन्तिम समय में उन्हें जबरन वहाँ ले जाया गया।
  3. तमिल टाइगर्स (जो कि राजीव गाँधी के हत्यारे हैं) से करुणानिधि और द्रमुक के रिश्ते सहानुभूतिपूर्ण हैं इसके बावजूद सोनिया गाँधी ने सत्ता की खातिर उनसे केन्द्र में गठबंधन बनाये रखा।
  4. कनिमोझि चर्च पोषित संगठनों की करीबी हैं और ए.राजा दलित कार्ड खेलते हुए चर्च के नजदीकी बने हुए हैं दोनों को ही गम्भीर आरोपों के बावजूद सोनिया गाँधी ने मंत्रिमण्डल में तब तक बनाये रखा जब तक कि राडिया के टेप्स लीक नहीं हो गये।