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Posted Wed, 02/01/2012 - 22:00 by admin

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अगर किसी प्रदेश पर राज करने वाला अपने ही राज में डरा हुआ रहे तो उस प्रदेश के आम लोगों का क्या हाल होगा, इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। आम तौर पर अपनी प्रेस वार्ताओं और रैलियों में दहाड़ने वाली मायावती के कुछ कदमों से ऐसा लगता है कि वे अनजाने भय से काफी डरी हुई हैं। कुछ लोगों को इस बात पर यकीन नहीं हो सकता लेकिन अगर आप कुछ तथ्यों पर निगाह डालें और उत्तर प्रदेश की सत्ता के संचालन केंद्र राजधानी के पंचम तल में काम करने वाले कुछ अधिकारियों से बात करें तो आपको साफ तौर पर यह पता चल जाएगा कि मायावती किस कदर डरी रहती हैं।
जब २००७ में मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनींतो उन्होंने मॉल एवेन्यू के निवास में रहना शुरू किया। जब वे वहां रहने गईं तो उस समय तक उनके निवास स्थल के आसपास जो मकान थे उनमें रहने वालों को यह अहसास तक नहीं था कि आने वाले दिनों में मायावती का उनके पड़ोस में रहना उन पर कितना भारी पड़ने वाला है। मायावती को इस मकान में रहते हुए साल भर भी नहीं हुआ था कि उन्हें अपने आवास से सटे गन्ना आयुक्त के कार्यालय से खतरा महसूस होने लगा। यह बात २००८ की है। जब मायावती को यह लगा कि यह कार्यालय तो उनके लिए खतरा है और इससे उनकी सुरक्षा में अड़चन आती है तो उन्होंने इस दोमंजिला कार्यालय को तुड़वा दिया। इसके बाद जिस जमीन पर गन्ना आयुक्त का कार्यालय था उसे भी मायावती के आवास की जमीन से मिला लिया गया। इसके लिए गन्ना आयुक्त के कार्यालय की जमीन को घेर दिया गया।
इसके बाद कुछ दिनों के अंदर ही उन्होंने यह फरमान जारी कर डाला कि उनके आवास की बढ़ी जमीन, जिसमें गन्ना आयुक्त के कार्यालय की जमीन को भी शामिल किया गया था, को १८ फुट ऊंची दीवार से घेर दिया जाए। आनन-फानन में उनके फरमान पर अमल किया गया और कुछ दिनों में यह नया घेरा तैयार कर दिया गया। इस घेरे के बाद उन्होंने कहा कि प्रवेश गेट की सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया जाए। इसके बाद करोड़ों रुपये खर्च करके उनके आवास के प्रवेश द्वार पर तरह-तरह के सुरक्षा उपकरण लगाए गए। इनमें गाड़ियों की स्कैनिंग करने वाली मशीन भी शामिल है। जानकार बताते हैं कि इतनी सुरक्षा व्यवस्था तो देश के किसी भी मुख्यमंत्री ने नहीं की है जितनी मायावती ने की है। इतनी चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मायावती का डर खत्म नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें आसपास के बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले लोग खटकने लगे। मायावती को यह डर सताने लगा कि आसपास की बहुमंजिली इमारतें उनकी सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
धीरे-धीरे उस इलाके में मायावती के डर की बात फैल गई और वहां रहने वाले लोगों को यह डर सताने लगा कि कहीं मायावती प्रशासन उन लोगों को अपनी ही संपत्ति से बेदखल न कर दे। मायावती की सुरक्षा व्यवस्था में लगे सुरक्षाकर्मियों ने जानबूझकर मुख्यमंत्री बंगले के आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें पैदा करनी शुरू कर दीं। बंगले के सामने से होकर गुजरने वाले रास्ते पर कोई भी आता-जाता तो उसे सुरक्षाकर्मी परेशान करते। मायावती को अपने बंगले के पास के रेस्टोरेंट से भी खतरे का अहसास होने लगा। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने रेेस्टोरेंट में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशान करना शुरू कर दिया।
इतना सब करने के बावजूद भी मायावती का डर खत्म नहीं हुआ। मायावती भाजपा नेता को लालजी टंडन को अपना राखी वाला भाई बताती रही हैं। लालजी टंडन मायावती के बंगले के सामने वाले बंगले में रहते थे। लेकिन मायावती को वे भी खतरा लगने लगे। यही वजह है कि मायावती प्रशासन ने उन्हें बेहद विनम्रता के साथ वह बंगला खाली करने को कहा। लालजी टंडन को भी मायावती की डर के आगे झुकना पड़ा। इसके बाद उस बंगले में मायावती की बहुजन समाज पार्टी का एक कार्यालय बन गया।
जानकार बताते हैं कि मायावती के जत्थे में सबसे ज्यादा बुलेटप्रूफ गाड़ियां हैं और उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था बेहद मजबूत है। इसके बावजूद उन्हें सताने वाले अनजाने डर का असर यह है कि वे कभी-कभार ही अपने कार्यालय जाती हैं। इस बात की पुष्टि उत्तर प्रदेेश सचिवालय के अधिकारी भी करते हैं। कुछ अधिकारी तो यहां तक कहते हैं कि मायावती तो इस कदर डरी हुई हैं कि वे थोड़ा सा भी जोखिम नहीं उठाना चाहतीं। अधिकारी उन्हें सचिवालय एनेक्सी में देखने के लिए तरस जाते हैं। यह मायावती का डर ही था कि उन्होंने जनता दरबार भी बंद कर दिया। अपने पिछले कार्यकालों में उन्होंने जनता दरबार की शुरुआत लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए की थी। लेकिन २००७ में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें अनजाने डर ने इस कदर सताया कि उन्होंने इसे बंद ही कर दिया।

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