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Posted Wed, 02/01/2012 - 22:03 by admin

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उत्तर प्रदेश में सत्ता वापसी के लिए समाजवादी पार्टी की कोशिशों पर हमारे संवाददाता अभिषेक गुप्ता की सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजभूषण तिवारी से बातचीत।
उत्तर प्रदेश में जगह-जगह अखिलेश यादव के नेतृत्व में साइकिल रैली हुई, उसे कितना समर्थन मिला?
इस समय उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार का है। अखिलेश यादव की साइकिल यात्रा और क्रांति रथ यात्रा में प्रदेश की जनता और विशेष कर नौजवान उमड़ कर आए हैं। इसी कारण अखिलेश यादव की यात्रा का असर भी बहुत हुआ। आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सपा की होगी।
उत्तर प्रदेश का बंटवारा इस चुनाव में क्या कोई मुद्दा होगा? सपा का इस पर क्या रुख है?
समाजवादी पार्टी छोटे राज्यों के बनने के खिलाफ रही है। हमारी पार्टी यह मानती है कि बड़े राज्य की राजनीति केंद्र को प्रभावित करती है। उत्तर प्रदेश ने किसी प्रकार की क्षेत्रियता के कारण किसी से भेदभाव नहीं किया। अब मायावती के पास कोई मुद्दा है ही नहीं। इसी कारण वह नकली मुद्दों से प्रदेश की जनता को ठगना चाहती हैं।
कांग्रेस व बसपा एक दूसरे के खिलाफ बोल रही हैं, क्या ये दोनों पार्टियां सपा को मैदान से बाहर मानती हैं?
कांग्रेस और बसपा नूरा कुश्ती लड़ रहे हैं। कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबे हुए हैं। इसी कारण एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर अपने को साफ-सुथरा साबित करने में लगे हुए हैं। झगड़ा इनमें यह है कि ज्यादा भ्रष्ट कौन है।
समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवारों में बदलाव कर रही है। क्या इससे पार्टी में असंतोष नहीं फैल रहा है?
पार्टी को जीतने वाला प्रत्याशी चाहिए। उम्मीदवारों के चयन के कई मापदण्ड होते हैं- पहला जीतने वाला हो, दूसरा साफ-सुथरे चेहरे वाला और तीसरा जातीय समीकरण में फिट हो, तब ही पार्टी टिकट देती है। लेकिन व्यापक तौर पर असंतोष ना के बराबर है।
क्या समाजवादी पार्टी अपने पुराने आदर्श भुला चुकी है? पहले कीे और अब की समाजवादी पार्टी में क्या अंतर आया है?
अंतर और बदलाव परिस्थितियों के कारण होते हैं। आज की राजनीति में सत्ता नजदीक है। उस सत्ता तक पहुंचने के लिए हर कोशिश होती है। सत्ता तक पहुंचने के लिए जिन वस्तुओं की आवश्यकता होती है, उसे दृष्टि में रख कर राजनीति चलती है। राजनीति पूरी तरह से सधुक्कड़ी नहीं हो सकती।
सपा को इस बार चुनाव में कितनी सीटें मिलने की संभावना है? क्या रालोद और कांग्रेस के गठबंधन से पार्टी को फर्क पड़ेगा?
समीक्षाओं और सर्वे के मुताबिक सपा को १७० सीटें मिल रही हैं। चुनाव जब जोर पकड़ेगा तो सपा ही सबसे आगे होगी। हमारी पहली प्राथमिकता अपने दम पर सरकार बनाने की होगी। रालोद और कांग्रेस गठबंधन से पार्टी पर कोई असर नहीं होगा। प्रदेश की जनता बसपा के खिलाफ बोल रही है और सपा से उम्मीद लगाए बैठी है।
 

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