
Posted Wed, 02/01/2012 - 21:09 by admin
सरकार और थलसेना प्रमुख के बीच जन्मतिथि के विवाद ने अप्रिय स्थितियों को जन्म
दे दिया है। भारत के इतिहास में यह अभूतपूर्व है। डा. सारिका अग्रवाल का विश्लेषण।
भारत के इतिहास में पहली बार किसी सेना प्रमुख ने कोर्ट की शरण ले ली है। थल
सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उनके जन्म
का साल 1950 माना गया है। जबकि जनरल सिंह का दावा है कि उनकी जन्म का साल 1951 है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में वीके सिंह ने कहा है कि ये मामला उनकी
इज्जत का है। जनरल वीके सिंह की उम्र पर चल रहा सारे बखेड़ा उस समय शुरू हुआ, जब
सेनाध्यक्ष के सर्विस रिकॉर्ड में उनकी दो जन्मतिथि पाई गई, पहली 10 मई 1950 और
दूसरी 10 मई 1951, जो सर्विस रिकॉर्ड्स के मुताबिक सेनाध्यक्ष के मैट्रिक
प्रमाणपत्र में उनकी जन्मतिथि बताई गई है। लेकिन सेना में प्रवेश के लिए संघ लोक
सेवा आयोग (यूपीएससी) के फॉर्म में उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 है।
पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 मानी थी और इस तरह जनरल वीके
सिंह को इस साल मई में रिटायर होना है। लेकिन जनरल वीके सिंह चाहते हैं कि 10 मई
1951 को उनकी जन्मतिथि माना जाए। पिछले दिनों उन्होंने ये तो जरूर कहा कि वे इस
मुद्दे पर सार्वजनिक बहस नहीं चाहते, लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट कर दिया था कि अब
ये मामला उनके सम्मान और ईमानदारी से जुड़ गया है। उनका कहना था कि वे नहीं चाहते कि
उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए, लेकिन वे ये भी नहीं चाहते कि उन्हें झूठा समझा जाए।
थलसेना अध्यक्ष जनरल वी के सिंह की उम्र पर उठे विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए रक्षा
मंत्री ए के एंटनी ने कहा कि उन्हें इस मामले पर अफसोस और दुख है तथा इस पर निर्णय
उच्चतम न्यायालय को करना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना मुख्यालय और सरकार कई बार
फैसले लेते हैं, लेकिन इस बार सवाल उठे हैं। सरकार के फैसले पर सवाल उठाने के लिए
संवैधानिक फोरम हैं। एंटनी ने कहा कि सरकार आयु विवाद पर ज्यादा से ज्यादा संयम और
धैर्य बरत रही है। उन्होंने दलील दी कि इसे सनसनीखेज तरीके से नहीं निपटाया जा सकता।
उधर पत्रकारों से बातचीत में कानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा था कि इस मामले में
सेनाध्यक्ष की ईमानदारी पर सवाल की कोई बात नहीं और न ही कोई ये कह रहा है कि
सेनाध्यक्ष झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा था कि नियम नियम होते हैं और उनका पालन
जरूरी होता है।
उम्र विवाद पर सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह को पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल शंकर राय चौधरी
का साथ मिल गया है। जनरल वी के सिंह के इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने को पूर्व
सेनाध्यक्ष ने उचित ठहराया है। उन्होंने कहा कि जनरल वी के सिंह बहुत सम्मानित
व्यक्ति हैं। सेना ईमानदारी और निष्ठा पर टिकी हुई है। मैं नहीं समझता कि वह सम्मान
के मुद्दे पर कोई समझौता करेंगे।
क्या सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह के उम्र विवाद और सुकना जमीन विवाद में चली जांच
का आपस में कोई लेना-देना है? कहा जा रहा है कि सेना के भीतर एक लॉबी है जो नहीं
चाहती कि वी के सिंह अपना कार्यकाल पूरा कर सकें। कहा जा रहा है कि उम्र विवाद ने
2006 से जोर पकड़ा और इसके बाद सेनाध्यक्ष, मिलिट्री सेक्रेटरी और रक्षा मंत्रालय के
बीच चि_ियों का ऐसा सिलसिला चला कि मामला उलझता चला गया। साल 2008 में सुकना जमीन
घोटाला खुल चुका था और जनरल वी के सिंह ने ईस्टर्न कमांडर के तौर पर उसकी कोर्ट ऑफ
एन्क्वायरी के आदेश दिए थे। इस वक्त तक लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश मिलिट्री
सेक्रेटरी बन चुके थे जिन्हें कोर्ट मार्शल के बाद सुकना जमीन घोटाले का दोषी पाया
गया। ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि सेना से जुड़े भ्रष्टाचार के दो मामले इसी
दौरान सामने आए हैं। इसमें सुकना और आदर्श घोटाला सबसे बड़ा है। ये भी किसी से छिपा
नहीं कि इन दोनों घोटालों में सेना के कई बड़े अफसरों की मिलीभगत सामने आई है। ऐसे
में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन घोटालों और सेनाध्यक्ष के उम्र विवाद के बीच
कोई रिश्ता है।
इस बीच चालू वित्त वर्ष में अब तक सेना के बजट आवंटन का केवल 70 फीसदी ही खर्च हो
सका है। और आशंकाएं जताई जा रही हैं कि सरकार और जनरल के बीच उम्र के विवाद के कारण
हो सकता है कि इस बार सेना को आवंटित बजट पूरा खर्च न हो पाये।
क्या है विवाद की असली वजह
असल मे सेना प्रमुख वी के सिंह यूरो जेट फाइटर के सौदे के खिलाफ है और उन्होंने इस
प्रस्ताव को खारिज कर दिया है क्योकि ये यूरो जेट फाइटर यूरोप के ठंडे माहौल को
ध्यान मे रखकर डिजाइन किया गया है।
लेकिन अब जो खुलासे हो रहे हैं वो बड़े चौकाने वाले हैं। फ्रांस की राष्ट्रपति
निकोलस सरकोजी की पत्नी कार्ला ब्रूनी इटली की हैं और सोनिया गाँधी की एक बहन की
पुत्रवधु की ममेरी बहन हैं।
और यूरो जेट फाइटर यूरोप के बीस देशों की साझा कम्पनी एयर बस इण्डस्ट्रीज बनाती है
जिसके इटली वाले डिविजन का मलिक क्यात्रोची का छोटा बेटा है। ये वही जनरल वीके सिंह
है जिन्होंने घोटाले में वहां की जमीन पर सेना का दावा आखिरी तक नहीं छोड़ा और कई
नेताओं की गद्दी और इज्जत चली गयी।
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