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अनलाॅक भी लाॅकडाउन जैसा बंदिशों भरा

अनलाॅक भी लाॅकडाउन जैसा बंदिशों भरा

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कोरोना महामारी ने हमारे जीवन के मायने ही बदल दिये है, संकट अभी भी चहूं ओर पसरा हुआ है, भले सरकार की जागरूकता, प्रयत्नों एवं योजनाओं ने जनजीवन में आशा का संचार किया हो, लेकिन इस महाव्याधि मुक्ति के लिये अभी लम्बा संघर्ष करना होगा, मानव निर्मित कारणों से जो कोरोना महासंकट हमारे सामने खड़ा है उसका समाधान भी हमंे ही खोजना होगा, उसके लिये धैर्य, संयम एवं विवेक का प्रदर्शन करना होगा। देश लॉकडाउन के नए फेज में प्रवेश कर गया है जिसे अनलॉक 2.0 कहा गया है। लॉकडाउन के चलते घरों में बंद लोग ऊब चुके हैं, उनके आर्थिक संसाधन चरचरा रहे हैं, बंदिशों को लेकर उनमें छटपटाहट है। उन्हें यह उम्मीद थी कि अनलॉक 1.0 में जितनी छूटें उन्हें मिली थीं, उसके अधिक छूटें इस दूसरे अनलॉक में भी मिलेंगी और कुल मिलाकर बंदिशें इतनी कम हो जाएंगी कि कुछ सावधानियों के साथ वे सामान्य जीवन का आनंद ले पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं ह...
झूठ इमरान का और सच बलूचिस्तान में विद्रोह का

झूठ इमरान का और सच बलूचिस्तान में विद्रोह का

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इमरान खान को अपने मुल्क में लग रही आग दिखाई नहीं दे रही है। वे समझ ही नहीं पा रहे हैं, या जानना ही नहीं चाहते कि पाकिस्तान के कब्जे की विवादित बलूचिस्तान सूबे में विद्रोह की चिंगारी भड़क चुकी है। पाकिस्तान के क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़े प्रान्त बलूचिस्तान  में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी नाम का संगठन किसी भी सूरत में पाकिस्तान से अपने बलूचिस्तान को अलग करना चाहता है। इसके लिए यह संगठन अब हिंसक रास्ते पर चल पड़ा है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची के स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग में बीते दिनों हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ही ली। पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश की संसद में बेशर्मी से दावा कर रहे हैं कि कराची में आतंकी घटना के पीछे भारत का हाथ है। आतंकी हमले के अगले ही दिन उन्होंने इस तरह का बिना किसी तथ्य का यह खोखला दावा कर दिया। हालांकि, उससे पह...
समस्याओं के अंधेरों में आत्म-निर्भरता का उजाला

समस्याओं के अंधेरों में आत्म-निर्भरता का उजाला

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भारत इस समय न केवल कोरोना महासंकट से जूझ रहा है, बल्कि सीमाओं पर बढ़ रही युद्ध की आशंकाओं, बढ़ती बेरोजगारी, अस्त-व्यस्त व्यापार, आसमान छूती महंगाई आदि चैतरफा समस्याओं से संघर्षरत है। इन्हीं समस्याओं का पूर्वानुमान लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की योजना प्रस्तुत की है, यही एक रास्ता है जो हमें इन और ऐसी तमाम समस्याओं से बचा सकता है। भारत जितना आर्थिक दृष्टि से ताकतवर बनेगा, उतना ही चीन, पाकिस्तान, नेपाल आदि आंख दिखाने एवं दादागिरी करने वाले राष्ट्रों को माकूल जबाव मिलेगा, वे निस्तेज होंगे और भारत की ओर आंख उठाने का दुस्साहस नहीं कर पायेंगे। बड़ी सचाई है कि भारत मजबूत है, संकटों से लड़ने की ताकत उसमें हैं। पाकिस्तान की नासमझी को छोड़ दे तो कोरोना महामारी से कराह रही मानवता को चीन एवं भारत से इस समय सर्वश्रेष्ठ अक्लमंदी की उम्मीद है। दोनों देश इस अपेक्षा को महसूस भी ...
मत बांटों सेना को प्रांत या मजहब के नाम पर

मत बांटों सेना को प्रांत या मजहब के नाम पर

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भारत-चीन के बीच हालिया निहत्थे संघर्ष में हमारे शूरवीरों ने दुश्मन सेना की कमर तोड़ी। उनके पराक्रम को पूरी दुनिया ने देखा। लद्दाख की गलवान घाटी में तक़रीबन 14 हजार फुट की ऊंचाई पर हुए संघर्ष में शहीद हुए भारतीय फ़ौजी बिहार रेजिमेंट के 16वीं बटालियन के थे। उनमें से ज्यादातर बिहार और झारखण्ड से थे। पर वे सभी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए लड़ रहे थे। पर देखने में यह आ रहा है कि कुछ संकुचित मानसिकता के लोग बिहार रेजिमेंट का मतलब बिहार समझ रहे हैं। उन शूरवीरों पर तो सारे भारतवासियों को गर्व है। शहीद हुए योद्धा तो वैसे भी देश के अलग-अलग राज्यों से थे। बिहार रेजीमेंट को जो लोग बिहार से जोड़ रहे हैं, वे भारतीय सेना के अखिल भारतीय चरित्र के साथ घोर अन्याय कर रहे हैं। भारतीय सेना को धर्म,जातिया प्रांत से बांटने वालों को करारा जवाब देने की जरूरत है। इन्हें कौन बताए कि बिहार रेजीमेंट में सिर्फ बिहारी ...
सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकारी सेवाएँ क्यों हैं ज़रूरी?

सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकारी सेवाएँ क्यों हैं ज़रूरी?

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दुनियाभर में कोरोनावायरस रोग (कोविड-19) महामारी ने हम सबको यह स्पष्ट समझा दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पर्याप्त निवेश न करने और उलट निजीकरण को बढ़ावा देने के कितने भीषण परिणाम हो सकते हैं. इसीलिए इस साल के संयुक्त राष्ट्र के सरकारी सेवाओं के लिए समर्पित दिवस पर यह मांग पुरजोर उठ रही है कि सरकारी सेवाओं को पर्याप्त निवेश मिले और हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिले. पब्लिक सर्विसेज इंटरनेशनल की एशिया पसिफ़िक सचिव केट लेप्पिन ने कहा कि यदि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पूर्ण रूप से सशक्त होती तो कोविड-19 महामारी के समय यह सबसे बड़े सुरक्षा कवच के रूप में काम आती. आर्थिक मंदी से बचाने में भी कारगर सिर्फ पूर्ण रूप से पोषित सरकारी सेवाएँ ही हैं जिनको पिछले 40 सालों से नज़र अन्दाज़ किया गया है. केट लेप्पिन ने सही कहा है कि जिन देशों में सशक्त सरकारी आकस्मि...
चीन भारत से युद्ध क्यों चाहता है?

चीन भारत से युद्ध क्यों चाहता है?

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चीन पर अमरिका सहित कई देशों का दबाव है। उधर दूसरे पड़ोसी देशों से उसके संबंध पहले से ही खराब चल रहे हैं। कोरोना को लेकर चीन की नकारात्मक इमेज पूरी दुनिया में बन चुकी है। चीन की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है। फिर वह भारत से युद्ध क्यों चाहता है? जबकि भारत उसके व्यापार के लिए बड़ा केंद्र है?? विदेशी कम्पनियां चीन छोड़कर जा रही हैं। कई कम्पनियों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग की बात की है। सालाना 30 लाख फुटवेयर बनाने वाली कम्पनी वॉन वेल्क्स चीन छोड़ रही है। वह भारत में 110 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने जा रही है। यही नहीं मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स, लेदर, ऑटो पार्ट्स और सिंथेटिक फैब्रिक्स बनाने वाली लगभग 300 कम्पनियां चीन छोड़ सकती हैं। इनमें से बहुत सी कम्पनियां भारत का रुख कर सकती हैं। राजनीतिक परिदृश्य से चीन की स्थिति इस समय 1962 जैसे ही है। चीन की ज...
चीन छेड़ेगा तो भारत इसबार छोड़ेगा नहीं

चीन छेड़ेगा तो भारत इसबार छोड़ेगा नहीं

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भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुई तीखी खूनी झड़प के बाद चीन को अब समझ में आ गया है कि अब उसका पाला 2020 के नये भारत से पड़ा है। भारत अपनी एक-एक इंच भूमि के लिए कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार है। भारत के 20 शूरवीर शहीद अवश्य हुए पर चीनी सैनिकों के हमले के बाद तत्काल जवाबी कारवाई में उन्होंने चीन को भारी क्षति पहुंचाई। 43 से अधिक चीनी जवान उनके कमांडिंग ऑफिसर समेत मारे गए। झड़प के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिक्रिया को ध्यान से देखने और समझने की जरूरत है । बड़े ठंढे दिमाग से नपे-तुले शब्दों में उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। भारतीय सैनिक मारते हुए मरे हैं। यानी प्रधानमंत्री का कहना था कि केवल भारतीय सैनिकों का ही नुक़सान नहीं हुआ है। उनके वक्तव्य को समझने की जरूरत है। संदेश साफ दे दिया गया है कि अब भारत किसी हालत में 1962 की तरह पीछे नहीं हटेगा। चीन की द...
तीसरा विश्वयुद्ध : प्रत्यक्ष युद्ध का तीसरा चरण

तीसरा विश्वयुद्ध : प्रत्यक्ष युद्ध का तीसरा चरण

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प्रथम चरण में जैविक युद्ध के रूप में प्रारंभ हुआ अमेरिका व चीन के गुटों के बीच का विश्व युद्ध अब तीसरे चरण में प्रवेश करने जा रहा है। पहले चरण में ही चीन ने जो ब्रह्मास्त्र चला उससे दुनिया के थाने का एसएचओ अमेरिका अपने ही मातहत सब इंस्पेक्टर चीन के हाथों चारों खाने चित्त हो गया। अमेरिका सहित पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण से फैली महामारी के कारण एक ओर जहाँ अपने अपने नागरिकों की लाशें गिन रही है वहीं लॉकडॉउन के कारण बर्बाद हुई अर्थव्यवस्था से बिगड़ते हालातों को देख रही है। पिछले कुछ बर्षों में चीन ने कब अमेरिकी व अन्य देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के शेयर भारी मात्रा में खरीदे व उन पर नियंत्रण स्थापित करता गया यह किसी को भी न पता और अभी भी पूरी दुनिया में उसका यह खेल जारी है। चीन ने पूरी दुनिया को कर्ज बांटकर भी उनको अपने नियंत्रण में ले रखा है तो दुनिया की उत्पाद फेक्ट्री होने के कारण भी दुनि...