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राजनाथ सिंह की बढ़ती सक्रियता का सबब

राजनाथ सिंह की बढ़ती सक्रियता का सबब

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इनदिनों एक अलग तरह की सक्रियता को लेकर चर्चा में है। उनका राजनीतिक प्रभुत्व एवं कद में उछाल भले ही भारतीय जनता पार्टी के एक वर्ग के लिये हैरानी का कारण बन रहा हो, लेकिन इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम पार्टी के हित में होने वाले हैं। इन्हीं राजनाथ सिंह के कारण नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने एवं भाजपा को अमाप्य ऊंचाइयों मिली हंै। संघ के विश्वासप्राप्त होने की बजह से वे अनेक अन्दरूनी बाधाओं एवं विरोध के बावजूद शीर्ष के आसपास बने रहे हैं और वे ऐसी पात्रता रखते हैं कि भविष्य में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सके। यह सर्वविदित है कि जब नरेन्द्र मोदी ने अपने बल पर भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाई थी तो राजनाथ सिंह को कमजोर करने एवं उन्हें किनारेे करने का अहसास दिलाने के लिये महत्वपूर्ण कैबिनेट समितियों में जगह नहीं दी गयी, लेकिन सुबह लिये गये इन निर्णयों को सांय होने से पहले ब...
अच्छी तरह पहचानिए CAA-NRC का विरोध करने वालों को

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आप गौर करें कि देश में एक तबका संसद में पारित कानूनों से लेकर विभिन्न न्यायालयों के फैसलों का भी सार्वजनिक तौर पर घनघोर अपमान करने लगा है. इसका ताजा उदाहरण नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) है. इन्हें संसद के दोनों सदनों ने भारी बहुमत से पारित किया गया, पर इसके बावजूद इनका पिछले डेढ़ महीने से देश के कुछ भागों में विरोध भी हो रहा है. नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आकर देश में बरसों पहले से ही रह रहे हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामलीला मैदान के अपने संबोधन में भी यह स्पष्ट तौर पर कहा कि इस कानून से किसी भी भारतीय नागरिक की,चाहे वह किसी भी समुदाय का हो नागरिकता नहीं जाएगी. पर भारी बहुमत से निर्वाचित देश के प्रधान...
गंगा चुनौती की अनदेखी अनुचित

गंगा चुनौती की अनदेखी अनुचित

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गंगा की अविरलता-निर्मलता के समक्ष हम नित् नई चुनौतियां पेश करने में लगे हैं। अविरलता-निर्मलता के नाम पर खुद को धोखा देने में लगे हैं। घाट विकास, तट विकास, तट पर औषधि उद्यान, सतही सफाई, खुले में शौच मुक्ति के लिए गंगा ग्रामों में बने शौच गड्ढे...खुद को धोखा देने जैसे ही काम हैं। अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरक, खरपतवारनाशक व कीटनाशाकों का बेलगाम प्रयोग भी इसी श्रेणी में आता है। तक़लीफदेह तथ्य यह है कि ऐसा करते हुए हम उन कहानी, शोध, निष्कष व आंखों देखी तक़लीफों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं, जो प्रमाण हैं कि चुनौती तो हम खुद अपने लिए पेश कर रहे हैं। पत्रकार अभय मिश्र ने वेंटिलेटर पर ज़िन्दा एक महान नदी की कहानी लिखी है। वह महान नदी, हमारी गंगा है। हक़ीकत में 'माटी मानुष चून' उपन्यास, गंगा के वेंटिलेटर पर जाने की कहानी नहीं है; यदि भारत की नदियों की अनदेखी हुई तो 2075 आते-आते, यह पूरे भारत...
बजट में सस्ते घरों- स्मार्ट सिटीज को मिल सकती है सौगात

बजट में सस्ते घरों- स्मार्ट सिटीज को मिल सकती है सौगात

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ऐसी आशा की जा रही है कि सकारात्मक बजट प्रस्तावों से करोड़ों लोगों को रोजगार देने  वाले रीयल एस्टेट सेक्टर के दिन सुधर सकते हैं। उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट प्रस्तावों में रीयल एस्टेट सेक्टर  के लिए कोई ठोस प्रस्ताव लेकर आयेंगीं। निश्चित रूप से कोई भी सरकार आज की मॅंद अर्थव्यवस्था में एस्टेट सेक्टर के  मसलों को नजरअंदाज नहीं कर सकती है, क्योंकि कृषि के बाद रीयल एस्टेट क्षेत्र ही सबसे बड़ा रोजगार देने वाला सेक्टर है। प्राय: प्रत्येक बजट के पहले  अफोर्डेबुल हाउसिंग सेक्टर की बात होने ही लगती है।सबको अपना मकान हो यह मोदी जी का वायदा भी तो है। उम्मीद है कि सरकार देश में हरेक हिन्दुस्तानी के छत के सपने को साकार करने के लिए निजी बिल्डरों के साथ मिलकर सस्ते घर भी उपलब्ध कराने की कोई योजना ला सकती है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि सरकार प्रमुख शहरों में या उससे सटे शहरों में ...
‘भारत तत्व’ को स्थापित करने का समय

‘भारत तत्व’ को स्थापित करने का समय

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ह दुखद व आश्चर्यजनक है कि भारत के मुसलमान स्वयं को मध्य पूर्व एशिया के अरबी, तुर्क, शिया व सुन्नी मतबों से जोड़ते हैं यद्यपि इतिहास गवाह है कि भारत में अधिसंख्य मुस्लिम भारत मूल के ही हैं व भारत में इस्लामिक आक्रमणकारियों द्वारा बलात व मजबूरी में इस्लाम मत में परिवर्तित लोग हैं। मुख्यधारा के इस्लामिक देश आज भी भारत के मुसलमानों को सच्चा मुसलमान नहीं मानते। किंतु भारत के मुसलमानों का एक वर्ग अपनी जड़ें आज भी मध्यपूर्व के देशों में ही तलाशता है जो सही नहीं। सच्चाई तो यह है कि भारत पर आक्रमण व राज करते समय इस्लामिक आक्रमणकारियों ने भारत की हिंदू संस्कृति, गुरुकुल, भाषा, वेषभूषा, मंदिर व सभ्यता को नष्ट करने व उसको इस्लामिक बनाने के लिए हर संभव वैध व अवैध तरीके अपनाए। इस्लाम के बाद जब भारत पर ईसाइयों का शासन स्थापित हुआ तब उन्होंने भी वही क्रम दोहराया जो मुस्लिम आतताइयों ने अपनाया था यानि भारत ...
जेएनयू, शाहीन बाग और कश्मीर के संबंधों को समझिए

जेएनयू, शाहीन बाग और कश्मीर के संबंधों को समझिए

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष राजधानी के शाहीन बाग में जाकर कहती हैं कि  कश्मीर को अलग करते हुए हम आंदोलन नहीं जीतसकते। शाहीन बाग में तथाकथित स्थानीय लोग नागरिकता संशोधन कानून 2019 के खिलाफ धरना दे रहे हैं। बताया तो यह भी जाता है कि दिहाडी मजदूरों को दुगना-तिगुना पैसा देकर उन्हे बैठाया जा रहा है। फूड पैकेट अलग से।खैर, किसी को भी धरना देने का तो  अधिकार है। पर कोई  धरना देने वालों को गुमराह करे तो क्याकिया जाए। शाहीन बाग में घोष आकर कहती हैं कि जो लड़ाई चल रही है उसमें हम कश्मीर को पीछे नहीं छोड़ सकते। कश्मीर से ही संविधान में छेड़छाड़ शुरू हुई है।साफ है कि उनका इशारा जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 हटाने की ओर था। कश्मीर के लिए बने इस अनुच्छेद के तहत जम्मू और कश्मीर को विशेषदर्जा का लाभ मिलता था, जिसे केंद्र ने 5 अगस्त 2019 को समाप्त कर दिया था। सरकार के उस...
‘जल जीवन हरियाली’ से बिहार दिखाता देश को दिशा

‘जल जीवन हरियाली’ से बिहार दिखाता देश को दिशा

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देशभर में व्याप्त चौतरफा नकारात्मक वातावरण से हटकर बिहार ने  ‘जल जीवन हरियाली’ की अहम जरूरत पर एक महत्वपूर्ण अभियान  को शुरू करके देश को अवश्य ही एक नई  दिशा दिखाने का सकारात्मक प्रयास तो किया ही है। दरअसल, बिहार जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सार्थक पहल कर देश और विश्व के सामने एक नजीर रखना चाहता है।  देखिए, अब ऐसी स्थितियां बनती जा रही हैं कि जल, जीवन और  हरियाली के सॅंरक्षण से जुडे कार्यक्रम तो सारे देश में ही चलाने होंगे। इसमें सरकार और समाज को मिल-जुलकर भाग लेना होगा। हमें उन तालाबों को फिर से जीवित करना होगा जो विकास की दौड़ में दफन हो गए या दुष्टों के द्वारा अतिक्रमित कर लिये गये। अगर बात दिल्ली की ही करें  तो जब देश आजाद हुआ था, उस समय दिल्ली में 363 गांव थे, जिनके आसपास 1012 तालाब थे। आबादी बढ़ने और दिल्ली के विकास के साथ ही कुछ गिने- चुने  तालाबों को छोड़कर बाकी खत्म हो गए। कई ताला...
चंद सिक्कों के लिए देश के शत्रु बनने वाले पुलिसकर्मी

चंद सिक्कों के लिए देश के शत्रु बनने वाले पुलिसकर्मी

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर  सिंह की गिरफ्तारी के बाद लगातार जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं, , वह वाकई दिल दहलाने वाले हैं। यकीन ही नहीं होता कि कोई पुलिस अफसर चंद सिक्कों के लिए इतना गिर जाएगा कि देश के दुश्मनों से ही हाथ मिला लेगा। पर अफसोस है कि कश्मीर में यही हुआ। देविंदर  सिंह आतंकियों के साथ मिलकर न केवल सिर्फ दिल्ली को दहलाने की साजिश रच रहा था,  बल्कि उसके निशाने पर जम्मू, पंजाब और चंडीगढ़ भी थे। बेशक, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किए गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी)देविंदर सिंह ने अपने कृत्य से पुलिस महकमें को बुरी तरह शर्मसार कर दिया है। देविंदर सिंह केस के बहाने पुलिस महकमें में व्याप्त गड़बडी को समझने और उन्हें दूर करने के उपाय तो खोजने ही होंगे। आखिर यह कोई सामान्य केस नहीं है। देविंदर सिंह से पहले नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण को भी आपर...
सत्ता की चाबी हथियाने की कुचेष्टाओं का चुनाव

सत्ता की चाबी हथियाने की कुचेष्टाओं का चुनाव

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 ललित गर्ग  दिल्ली में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे निकट आता जा रहा है, अपने राजनीति भाग्य की संभावनाओं की तलाश में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस तीनों ही दल जनता को लुभाने एवं ठगने की हरसंभव कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाकर भारतीय राजनीति में अपना सितारा आजमाने वाले अरविन्द केजरीवाल अब खैरात बांटने एवं मुफ्त की सुविधाओं की घोषणाएं करके मतदाताओं को ठगने एवं लुभाने की कुचेष्टाओं में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वैसे कांग्रेस एवं भाजपा भी इस दृष्टि से पीछे नहीं हैं। तीनों ही दलों में मुफ्त बांटने की संस्कृति का प्रचलन बढ़-चढ़ कर हो रहा है। लोकतंत्र में इस तरह की बेतूकी एवं अतिश्योक्तिपूर्ण घोषणाएं एवं आश्वासन राजनीति को दूषित करते हैं, जो न केवल घातक है बल्कि एक बड़ी विसंगति का द्योेतक हैं। राजनीतिक दलों में पनप रही ये मुफ्त बांटने की स...
रेप केस के नाबालिग दोषियों पर भी तो चले कानूनी चाबुक

रेप केस के नाबालिग दोषियों पर भी तो चले कानूनी चाबुक

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निर्भया के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या करने वाले चारों गुनाहगारों को आगामी 22 जनवरी को फांसी की सजा दे दी जाएगी। फांसी का समय सुबह 7 बजेरहेगा। पर इस भयानक केस से जुड़ा एक नाबालिग दोषी  के खिलाफ कोई एक्शन नहीं होगा। खैऱ, आखिरकार, इस तरह 7 साल 37 दिन के बाद ही सही निर्भया कोइंसाफ मिलेगा। यह घटना इतनी दिल दहला देने वाली थी कि आम आदमी उस हालात की कल्पना तक नहीं कर सकता था जिन हालातों में उसे इलाज के लिएअस्पताल में लाया गया था। उसे देख कर उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों तक के रोंगटे खड़े हो गए थे। इस बेटी का नाम रखा था “निर्भया” और यह घटना घटितहुई थी दक्षिण दिल्ली के एक बस स्टॉप के पास। यह क्रूर हादसा 16 दिसम्बर की रात साल 2012 में हुआ था। पर बलात्कार की शिकार हुई हजारों अन्य महिलाओं को इंसाफ कब मिलेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यही ढीलापन की  स्थिति तो बलात्कारियों के हौंसलेबुलंद करती हैं।...