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नृत्य के नाम पर अश्लीलता परोसना ‘शर्मनाक’

नृत्य के नाम पर अश्लीलता परोसना ‘शर्मनाक’

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(29 अप्रैल - अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस विशेष) एक कथन है कि ‘मनुष्य जब खुश होता है, तो वह नृत्य करने लगता है। जड़ हो या चेतन सब आनंद में विभोर होकर अपने अंदर के तनाव या विषाद को नृत्य कर समाप्त कर सकता है। इसलिए तो जिसे भी नाचना न आता है, उनके भी हाथ-पैर थिरकने लगते हैं और अपने ख़ुशी का इजहार करता है। नृत्य की भी कई शैली होती है। धरती पर हर देश, हर प्रदेश और हर क्षेत्र की अपनी खास नृत्य शैली होती है जिसकी अपनी अलग पहचान होती है। साधारणतया ‘शास्त्रीय नृत्य’, ‘लोक नृत्य’ और ‘आधुनिक नृत्य’ जैसी तीन श्रेणियों में विभक्त किया गया है जिसके अंतर्गत भरतनाट्यम, कथकली, कत्थक,ओडिसी, मणिपुरी, मोहनी अट्टम, कुची पुडी, भांगड़ा, भवई, बिहू, गरबा, छाऊ, जात्रा, घूमर, पण्डवानी आदि को रखा गया है। जनसाधारण के बीच नृत्य की महत्ता का अलख जगाने के उद्देश्य से ही प्रत्येक वर्ष 29 अप्रैल को विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्...
आखिर साध्वी से परहेज़ क्यों है ?

आखिर साध्वी से परहेज़ क्यों है ?

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साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित करते ही देश में जैसे एक राजनैतिक भूचाल आता है जिसका कंपन कश्मीर तक महसूस किया जाता है। भाजपा के इस कदम के विरुद्ध में देश भर से आवाज़ें उठने लगती हैं। यहां तक कि कश्मीर तक ही सीमित रेहने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे दलों को भी भोपाल से साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने पर ऐतराज़ है।  इन सभी का कहना है कि उन पर एक आतंकी साज़िश में शामिल होने का आरोप है और इस समय वे जमानत पर बाहर हैं इसलिए भाजपा को उन्हें टिकट नहीं देना चाहिए। लेकिन ऐसा करते समय ये लोग भारत के उसी संविधान और लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं जिसे बचाने के लिए ये अलग अलग राज्यों में अपनी अपनी सुविधानुसार एक हो कर या अकेले ही चुनाव लड़ रहे हैं। क्योंकि ये लोग भूल रहे हैं कि जो संविधान इन्हें अपना विरोध दर्ज करने का अधिकार देता है वो ही संविधान साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने ...
अबकी बार किसकी सरकार

अबकी बार किसकी सरकार

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भारत में 17वें लोकसभा के लिए 7 चरणों में चुनाव हो रहा है। इसमें 89 करोड़ 88 लाख मतदाता अपना मत डालेंगे, इस मायने में यह दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव कहा जा रहा है जिसके लिए 10 लाख मतदान केंद्र की व्यवस्था की गयी है। साथ ही ईवीएम, वीवीपैट आदि में कुल मिलाकार एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी चुनाव को सफलता दिलाएंगे। इससे पहले लगातार ईवीएम पर प्रश्नचिन्ह खड़े किये जाते रहे। इसी के मद्देनजर इस बार चुनाव आयोग ने सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट की व्यवस्था किया है ताकि किसी को भी चुनाव परिणामों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करने का कोई आधार न हो। इतना ही नहीं जीपीएस माध्यम से सभी मशीनों पर नजर रखी जा रही है जिससे यह आसानी से पता चल जाएगा कि कौन मशीन कहां है। कुल मिलाकर देखा जाए तो66 दिनों तक चलने वाला यह चुनाव अपने आप में काफी महत्वपूर्ण और हाईटेक है। इस लोकसभा चुनाव में एक ही महत्वपूर्ण सवाल सबों के जेहन में घूम रहा है क...
वैज्ञानिकों ने विकसित की खारे पानी में उगने वाली चावल की नई प्रजाति

वैज्ञानिकों ने विकसित की खारे पानी में उगने वाली चावल की नई प्रजाति

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भारतीय वैज्ञानिकों ने आमतौर पर उपयोग होने वाले चावल की किस्म आईआर-64-इंडिका में एक जंगली प्रजाति के चावल के जींस प्रविष्ट करके चावल की नई प्रजाति विकसित की है। इस प्रजाति की विशेषता यह है कि यह नमक-सहिष्णु है और इसे खारे पानी में उगाया जा सकता है। जिस जंगली प्रजाति के जींस का उपयोग चावल की इस नई प्रजाति को विकसित करने में किया गया है उसे वनस्पति-विज्ञान में पोर्टरेशिया कॉरक्टाटा कहते हैं। इसकी खेती मुख्य रूप से बांग्लादेश की नदियों के खारे मुहानों में की जाती है। चावल की यह किस्म बांग्लादेश के अलावा भारत, श्रीलंका और म्यांमार में भी प्राकृतिक रूप से पायी जाती है। इस अध्ययन से जुड़े कोलकाता स्थित जगदीश चंद्र बोस इंस्टीट्यूट के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अरुणेंद्र नाथ लाहिड़ी मजूमदार ने बताया कि यह नई प्रजाति 200 माइक्रोमोल प्रति लीटर तक खारे पानी को सहन कर सकती है जो समुद्र के पानी की तुलन...
भड़काऊ व बिगड़ैल आज़म खां 

भड़काऊ व बिगड़ैल आज़म खां 

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लोकतांत्रिक मूल्यों का इतना अधिक बलात्कार सम्भवतः पहले कभी नही हुआ होगा। प्रजातंत्र में राज सत्ता पाने के लिए नेताओं में ऐसी कोई योग्यता अनिवार्य होनी चाहिये जिससे वह कम से कम सभ्यता व संस्कृति के विरुद्ध कोई आचरण न कर पाये। उसकी प्राथमिकता राष्ट्रहित व समाज के प्रति सकारात्मक होनी चाहिये। लोकतंत्र में अनेक अधिकार होने का अर्थ यह नही है कि उनका अपनी इच्छानुसार दुरुपयोग करो। समाज के सार्वांगिक विकास के साथ साथ उसका नैतिक व चारित्रिक उत्थान भी नेताओं का दायित्व होता है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मो.आज़म खान के द्वारा सुश्री जयप्रदा के प्रति किये गये अमर्यादित व अश्लील आचरण से आज सभ्य समाज व मानवता लज्जित हुई है। पिछले 2-3 दिनों में ही आजम खान के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर आने से चुनावी वातावरण और मैला होता जा रहा है। सरकारी अधिकारियों को बंधुआ मजदूर बनाने की मानसिकता से ग्रस्त आज़म ख...
मोदी के खिलाफ विवादित बयानों की आंधी

मोदी के खिलाफ विवादित बयानों की आंधी

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आम चुनाव के प्रचार में इनदिनों विवादित बयानों की बाढ़ आयी है, सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, गाली-गलौच, अपशब्दों एवं अमर्यादित भाषा का उपयोग कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में लोकतांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात है। विशेषतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और उनकी जन-कल्याण की योजनाओं से भड़के कांग्रेस एवं महागठबंधन के नेता अपनी जुबान संभाल नहीं पा रहे। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का उग्र प्रचार होता जा रहा है वैसे-वैसे प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विभिन्न राजनीतिक दलाओं के नेताओं की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। नरेन्द्र मोदी के दर्शन, उनके विकासमूलक कार्यक्रमों, उनके व्यक्तित्व, उनकी बढ़ती ख्याति व उनकी कार्य-पद्धतियांे पर कीचड़ उछालने की हदें पार हो रही हैं, उनके खिलाफ अमर्यादित भाषा का उपयोग हो रहा हैं और उन्हें गालियां देकर विपक्षी नेता स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।...
आज़म को चुनाव से बाहर करे चुनाव आयोग

आज़म को चुनाव से बाहर करे चुनाव आयोग

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जिस बात को लेकर मन में भय था वह लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिखाई देने लगी है। अभी तो चुनाव प्रचार को काफी समय तक चलना है I पर देख लीजिए कि रामपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आजम खान ने अपनी मुख्य प्रतिद्ददी भाजपा की उम्मीदवार जयप्रदा के खिलाफ कितनी ओछी और अश्लील टिप्पणी कर डाली है। आजम खान की टिप्पणी को यहां पर बताना नारी शक्ति का घोर अनादर होगा। इसलिए उसे यहां पर दुहराने का सवाल ही नहीं होता है। जब वो जयप्रदा के खिलाफ बदबूदार बयानबाजी कर रहे थे तब  मंच पर  अखिलेश यादव समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता तालियाँ बजा रहे थे। आज़म खान जैसे धूर्त , बेग़ैरत इंसान के खिलाफ चुनाव आयोग को तुरंत कठोर कार्रवाई कर भी दी है । उन्हें तीन दिन तक घर बैठने का आदेश हुआ है I इसी प्रकार, एक भड़काऊ बयान के लिए मुख्मंत्री योगी, पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती और केन्द्रीय मंत्री मानेका गाँधी को भी क्रमशः तीन और ...
Bank of Baroda should introduce seven-day per week working after merger of Dena Bank and Vijaya Bank with reduced number of branches

Bank of Baroda should introduce seven-day per week working after merger of Dena Bank and Vijaya Bank with reduced number of branches

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Bank of Baroda should initiate process of merging nearby small branches of erstwhile Dena Bank and Vijaya Bank into the nearing bigger branch after merger on 01.04.2019 for a drastic cut in useless overheads, rent, salaries and other expenses. Surplus staff available after reduction of number of branches should be better utilised for unique seven-day per week working without any weekly or public holiday by providing two weekly-offs by rotation or by mutual consent amongst employees with bank-services taken as essential services like air, road or rail travel. Already some small private banks have started giving such seven-day per week banking. Thereafter even two-shift banking from 8 am to 8 pm can be started initially in select branches. Such a unique initiative will make public rush to...
नारे विहीन 2019 के लोकसभा चुनाव

नारे विहीन 2019 के लोकसभा चुनाव

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लोकसभा चुनाव के पहले दौर के लिए संपन्न मतदान हो चुका है Iपर इस बार अभी तक कोई नये खास नारे सामने नहीं आये हैं। इस बार चुटीले और तुरंत अपनी तऱफ ध्यान आकर्षित करने वाले नारों का कुल जमा अभाव दिखाई दे रहा है। नारे ही तो चुनावों की जान रहे हैं। नारों के बिना चुनाव का आनंद आधा-अधूरा सा ही रहता है। पिछले 2014 में भाजपा का नारा था- 'मोदी जी आएंगे, अच्छे दिन लाएंगे'। तब भाजपा का एक और चर्चित नारा भी था- "अबकी बार मोदी सरकार'। भाजपा ने 2019 में फिर लगभग इसी नारे को आगे बढ़ाया है। इसबार का नारा है- 'फिर एकबार, मोदी सरकार'। इस बारभाजपा ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘भारत नया बनाने दो,मोदी को फिर से आने दो’ जैसे नारे लेकर भी आई है। माकपा ने देश को मोदी सरकार की नीतियों से मुक्त कराने की रणनीति को लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान के केंद्र में रखते हुए ‘इस बार, मोदी बेरोजगार’ नारे को प्रचार का मूलमंत्र बनाया...
सशक्त सेना – सुरक्षित भारत

सशक्त सेना – सुरक्षित भारत

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भारतीय सेना समूचे विश्व की दूसरी बड़ी सेना है और भारतीय सेना का वार्षिक खर्च समूचे विश्व में उसे 5वाँ स्थान प्रदान करता है। वर्ष 2018 में भारतीय सेना का बजट शिक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बजट का 5 गुना था, फिर भी पाकिस्तान और चीन के साथ लगती सीमाओं पर आये दिन तनाव के दृष्टिगत रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह बजट और अधिक होना चाहिए। लगभग 3 लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सेवा निवृत्त सैनिकों को पेंशन वितरित की जाती है। अब तक भारतीय सेना के लिए रक्षा उपकरण बहुतायत विदेशों से आयात किये जाते थे, परन्तु अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ आह्वान के कारण भारत में कई प्रकार के रक्षा उपकरणों के निर्माण प्रारम्भ कर दिये गये हैं जिससे निकट भविष्य में भारत रक्षा उपकरणों का निर्यातक देश बनने की अवस्था में आ सकता है। माॅरीशस, श्रीलंका, वियतनाम तथा संयुक्त अरब अमीरात (यू.ए.ई.) जैसे देशों क...