
राष्ट्रवाद की अग्निपरीक्षा
2019 का लोकसभा चुनाव मोदी के राष्ट्रवाद पर आकर टिक गया है। एक ओर मोदी की मजबूत राष्ट्रवाद की परिकल्पना है तो दूसरी तरफ कमजोर विपक्ष है। एक तरफ मोदी के द्वारा पांच साल में कराये गए कार्यों की रूपरेखा है तो दूसरी तरफ इस दौरान पूरी तरह बिखर चुका विपक्ष है। एक तरफ अबकी बार 400 पार का नारा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन के जरिये स्वयं को जीवित रखने के लिए संघर्ष करता विपक्ष है। इन सबके बीच 'मैं भी चौकीदार’ का नारा लगाते भाजपाई सिर्फ और सिर्फ मोदी के नाम को जपते दिख रहे हैं। चाय से चौकीदार का यह खेल खेलने में मोदी की टीम सफल होती दिख रही है। 2014 में अपने शपथ ग्रहण के दौरान मोदी ने सार्क देशों के सभी प्रतिनिधियों को बुलाकर एक नयी तरह की मोदी कूटनीति की शुरुआत की थी। अभिनंदन की समय से वापसी उसी कूटनीति का एक परिणाम थी। इस समय सभी इस्लामिक देश भारत के साथ दिखाई दे रहे हैं। समय के साथ साथ मोदी...