Shadow

Today News

उत्तर प्रदेश में गठबंधन चूक या चौका

उत्तर प्रदेश में गठबंधन चूक या चौका

addtop, Today News, विश्लेषण
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का औपचारिक गठबंधन होने पर भाजपा के माथे पर बल पड़ गये। एक दशक पूर्व ये दोनों क्षेत्रीय दल उत्तर प्रदेश की राजनीति में नंबर एक और दो की हैसियत रखते थे। 2014 में भाजपा का ग्राफ बढऩे एवं 2017 की प्रचंड जीत के बाद भाजपा एक नंबर का दल हो गयी। अब अपनी राजनैतिक हैसियत बचाने के लिए सपा-बसपा का एक साथ आना एक बड़ा राजनैतिक दांव है। कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल न करके जब इन दलों ने तीसरे मोर्चे की तैयारी तेज़ की ही थी कि तभी कांग्रेस ने प्रियंका वाड्रा को महासचिव का पद देकर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया और इस तरह सपा-बसपा का चौका दिखता गठबंधन अब कहीं चूक न बन जाये। अमित त्यागी त्तर प्रदेश में पूरे भारत की आत्मा निवास करती है। देश को उत्तर प्रदेश 80 लोकसभा की सीटें देता है। 2014 में भाजपा को 73 सीटों पर प्रचंड जीत मिली थी। सपा को 05, कांग्रेस को 02 और बस...
सबको खुश करता, सबका बजट

सबको खुश करता, सबका बजट

addtop, Today News, आर्थिक
नरेन्द्र मोदी सरकार में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष ने साल 2019-20 के अंतरिम बजट प्रस्तावों से  मिडिल क्लास, किसान, सेना, रेलवे और अन्य सभी संभव क्षेत्रों को दिल खोलकर बांटा है। इस तरह से उन्होंने सबको खुशकर  करदिया है। अगर बात मिडिल क्लास के लिए टैक्स स्लैब की करें तो अब 5 लाख रुपये तक की आय पर किसी तरह का आयकर नहीं लगेगा, यह सीमा पहले 2.5 लाख रुपये तक की थी। इस तरह के देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को एक बड़ी राहत मिली है। दरअसल मिडिल क्लास कहीं न कहीं ये मानने लगा था कि सरकारें उनसे टैक्स तो कसकर लेती हैं, पर उन्हें राहत कभी नहीं देती। अब कम से कम  इस वर्ग को शिकायत करने का कोई मौका नहीं रहा है।  अब सालाना 5 लाख तक की व्यक्तिगत आय वालों को इनकम टैक्स से मुक्त कर दिया गया है। मतलब  जिसकी सालाना आय 5 लाख से कम है उसे कोई भी टैक्स देना नहीं पड़ेगा। बेशक,हमारे देश के एक बहुत बड़े नौकरीपेशा...
आम आदमी को अच्छे दिनों का अहसास कराता बजट

आम आदमी को अच्छे दिनों का अहसास कराता बजट

addtop, Today News, आर्थिक
विपक्ष भले ही वर्तमान सरकार के इस आखरी बजट को चुनावी बजट कहे और कार्यवाहक वित्तमंत्री पीयूष गोयल के बजट भाषण को चुनावी भाषण की संज्ञा दे,लेकिन सच तो यह है कि इस आम बजट ने अपने नाम के अनुरूप देश के आम आदमी के दिल को जीत लिया है। जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, यह सर्वव्यापी, सरस्पर्शी,सरसमवेशी, सर्वोतकर्ष को समर्पित एक ऐसा बजट है जो भारत के भविष्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के सपने अवश्य जगाता है जो कितने पूर्ण होंगे यह तो समय ही बताएगा। यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने चुनावी साल में बजट प्रस्तुत किया हो।  लेकिन हाँ, यह पहली बार है जब भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में जहाँ अब तक लगभग हर सरकार चुनावी साल के बजट में केवल आगामी लोकसभा चुनावों को ही ध्यान में रखकर बजट प्रस्तुत करती थीं, वहां इस सरकार ने आगामी दस सालों को ध्यान में रखकर बजट प्रस्तुत किया है। यही मोदी की श...
फिर आया मौसम ईवीएम में मीख-मेख निकालने का

फिर आया मौसम ईवीएम में मीख-मेख निकालने का

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
लोकसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही ईवीएम यानी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता पर तरह-तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस तरह की आशंका भी की जा रही थी कि आम चुनाव से पहले ईवीएम में मीने-मेख निकाली जाने की एक बार फिर मुहीम चलने लगेगी। जो इन मशीनों में छेड़छाड़ या गड़बड़ी के दावे कर रहे हैं, वे  देश के महान वैज्ञानिकों का सीधे तौर पर घोर अपमान भी कर रहे हैं। वे जाने-अनजाने में यह भूल रहे हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत करके दिन रत खून-पसीना बहाकर ही इस ईवीएम मशीन को ईजाद किया था, ताकि चुनावों में होने वाली धांधलियों और गड़बड़ियों को रोका जा सके। इन मशीनों का सीधे ही इस्तेमाल लोकसभा या विधान सभा चुनावों में नहीं किया गया । पहले ईवीएम मशीनों से मजदूर संघों के सफल चुनाव संपन्न कराए गए। वहां पर इनके सफल प्रदर्शन के बाद...
लोकतंत्र के महाकुंभ पर धुंधलके क्यों?

लोकतंत्र के महाकुंभ पर धुंधलके क्यों?

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
अप्रैल-मई 2019  में संभावित लोकसभा चुनाव को देखते हुए अनेक प्रश्न खडे़ हैं, ये प्रश्न इसलिये खड़े हुए हैं क्योंकि महंगाई, बेरोजगारी, बेतहाशा बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम, आदिवासी-दलित समाज की समस्याएं, भ्रष्टाचार आदि समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये। आज भी आम आदमी न सुखी बना, न समृद्ध। न सुरक्षित बना, न संरक्षित। न शिक्षित बना और न स्वावलम्बी। अर्जन के सारे स्रोत सीमित हाथों में सिमट कर रह गए। समृद्धि कुछ हाथों में सिमट गयी है। स्वार्थ की भूख परमार्थ की भावना को ही लील गई। हिंसा, आतंकवाद, जातिवाद, नक्सलवाद, क्षेत्रीयवाद तथा धर्म, भाषा और दलीय स्वार्थों के राजनीतिक विवादों ने आम नागरिक का जीना दुर्भर कर दिया। सरकार अब नाराज लोगों की नाराजगी दूर करने, उन्हें लुभाने एवं वोटों को आकर्षित करने के कुछ तदर्थ किस्म के झुनझुने थमा रही हैं। क्या स्वस्थ एवं...
जेल का फाटक टूटेगाजार्ज फर्नांडीज छूटेगा

जेल का फाटक टूटेगाजार्ज फर्नांडीज छूटेगा

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
एक जमाने में बिहार में एक लोकप्रिय नारा था “जेल का फाटक टूटेगा-जार्ज फर्नांडीज छूटेगा।” ये उन दिनों की बातें हैं जब देश में इमरजेंसी लगी थी। जार्ज फर्नांडिस पर झूठा राजद्रोह का मुकदमा लगाकर इंदिरा सरकार ने उन्हें और उनके सहयोगी लाडली मोहन निगम को जेल में ठूंस दकय था। जार्ज भले ही दक्षिण भारत से आते थे, पर बिहार उन्हें अपना मानता था और वे बिहार को अपना मानते थे । बिहार ने उन्हें तहेदिल से आदर भी दिया। उन्होंने भी बिहार को पूरी तरह अपना लिया था। वे भोजपुरी भाषा और मैथली भाषा भी मजेकी बोल लिया करते थे।  जॉर्ज साहब कई वर्षों से बीमार थे,उनकी स्मरण शक्ति भी जा चुकी थी।पर उनका अपने बीच होना एक सुखद अहसास अवश्य कराता रहता था कि अभी एक दिग्गज राष्ट्र भक्त नेता की छत्रछाया हमारे ऊपर है। उनका व्यक्तित्व सम्मोहित करने वाला था। बिखरे बाल, बिना प्रेस कियाहुआ खादी का कुर्ता-पायजामा, मामूली सी चप्पल पहनन...
तू डाल डाल, मैं पात पात

तू डाल डाल, मैं पात पात

addtop, Today News, TOP STORIES
देश एक दिलचस्प मगर चुनौतीपूर्ण मोड़ पर है। पूर्व में एकतरफा दिख रही, हाल ही के पांच राज्यों के चुनावों के परिणाम के बाद लोकसभा चुनावों की जंग बड़े कांटे की हो गयी है। स्थितयां लगभग सन 2009 जैसी हैं जब सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध कोई बड़ी लहर या हवा नहीं थी तो यह भी पता नहीं था कि पक्ष में कौन है, वैसी ही कुछ मोदी सरकार की वर्तमान स्थिति है। मोदी सरकार को अस्थिर व बदनाम करने के लिए जो झूठ व अतिरंजित आरोपों व बयानों का सहारा विपक्षी पार्टियों विशेषकर कांग्रेस पार्टी ने लिया वह देश मे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अत्यंत निराशाजनक है। राफेल डील पर जिस प्रकार राहुल गांधी मोदी सरकार को घेर रहे थे व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा रहे थे उससे जनता में यह विश्वास बनने लगा था कि हो सकता है कोई घोटाला हुआ हो किंतु जब संसद में इस विषय पर हुई बहस के जवाब में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस डील के सभी त...
ग्राम विकास व राष्ट्र-धर्म के अग्रदूत भारत रत्न नानाजी देशमुख

ग्राम विकास व राष्ट्र-धर्म के अग्रदूत भारत रत्न नानाजी देशमुख

addtop, Today News, राष्ट्रीय, सामाजिक
यूं तो हमारा देश पुरातन काल से ही ॠषियों, मुनियों, मनीषियों, समाज सुधारकों व महापुरुषों का जनक रहा है जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर जगत कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। किंतु आधुनिक युग की बदलती हुई परिस्थितियों में ऐसे महापुरुष बिरले ही हैं। ग्यारह अक्टूबर, 1916 को महाराष्ट्र के परभणी जिले के एक छोटे से ग्राम कडोली में जन्मे चंडिका दास अमृतराव देशमुख ने अपने बाल्यावस्था में शायद ही ऐसी कल्पना की होगी कि वह अपने जीवन काल में किये गये सेवा, संस्कार व शिक्षा के प्रसार के माध्यम से 50,000से अधिक विद्यालयों की स्थापना, 500 से अधिक ग्रामों का विकास, भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, दीनदयाल शोध संस्थान, राष्ट्र, धर्म, पांचजन्य व‘दैनिक स्वदेश’ का संपादन/प्रबंधन के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम पूरे विश्व में फैलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा पायेगा। भारत सरकार उ...
परिवारवाद की राजनीती में हुआ नये चेहरे का पदार्पण

परिवारवाद की राजनीती में हुआ नये चेहरे का पदार्पण

addtop, Today News, विश्लेषण
भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक कांग्रेस ने बुधवार दोपहर जब प्रियंका गाँधी वाड्रा को महासचिव बनाने के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया तो कांग्रेस समर्थको में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी, इसी के साथ इस कथन पर भी मुहर लग गयी कि “भारत की राजनीती में परिवारवाद” हमेशा की तरह हावी रहेगा, फिर चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल में ही क्यों न हो. वंशवाद अथवा परिवारवाद सत्ता के शासन की वह प्रणाली है जिसमे एक ही परिवार, वंश से एक के बाद एक कई शासक बनते जाते है. भाईभतीजावाद का जनक इसका ही एक रूप है. ऐसा माना जाता है कि लोकतंत्र में परिवारवाद के लिए कोई स्थान नही है, परन्तु यह फिर भी हावी है. भारत में हर चुनाव से पहले लगभग हर राजनीतिक दल का एक दूसरे पर भाषणों के द्वारा किये जाने वाले हमलों का प्रमुख मुद्दा परिवारवाद एवं वंशवाद ही होता है, फिर चाहे वो भारतीय जनता पार्टी हो या समाजवादी पार्ट...
देवकांत बरूआ जैसी चाटुकारिता करते शशि थरूर

देवकांत बरूआ जैसी चाटुकारिता करते शशि थरूर

addtop, Today News, विश्लेषण
चाटुकारिता और चमचागिरी की भी हद होती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने तो शब्दकोश में लिखीं सारी हदें तक पार कर दी हैं।पुराने ज़माने में राजाओं के यहॉं "भॉट" रहा करते थे। वे होते तो थे वैसे आशुकवि क़िस्म के बुद्धिमान इन्सान , पर उनका काम होता था रोज़ सुबह राजा जब सिंहासन पर विराजमान हों, राजा की स्तुति गान मे नई- नई रचनाओं का पाठ या गान करना। उसे चारण पाठ भी कहते थे। शशि थरूर भी उच्च कोटि के विद्वान और समझदार पढ़े लिखे इन्सान हैं। पर वे कब से भॉटगिरी करने लगे,चारणपाठ करने की क्या मजबूरी आ गई उनके लिए, मैं समझ नहीं पा रहा। मैं शशि के पूरे परिवार को पॉंच दशक से ज़्यादा समय से जानता हूँ । सत्तर के दशक में जब शशि के पिता चन्द्रन थरूर दैनिक स्टेट्समैन में ऊंचे पद पर थे, तब से मैं उन्हें जानता था। जब बांग्लादेश युद्ध के जोखिम भरे असाइनमेंट के बाद मैं कोलकाता लौटा था, तब चन्द्रन ने मेरे लिए ...