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Author: Dialogue India

Supreme Court strengthens RTI Act by bringing CJI-office under RTI Act

Supreme Court strengthens RTI Act by bringing CJI-office under RTI Act

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Five-member Constitution Bench of Supreme Court headed by the Chief Justice of India on 13.11.2019 gave a land-mark verdict (Civil Appeal 2683 of 2010) dismissing appeal by its own CPIO thus holding office of Chief Justice of India under RTI Act, added yet other milestone in an era requiring transparency. Verdict coupled with another recent Supreme Court verdict dated 17.09.2019 (Civil Appeal 9828 of 2013) declaring DAV College Trust and Management Society public-authority under RTI Act because of substantial government-funding, will have far reaching positive implications where it has set an example for many such bodies affecting day-to-day public-life till now resisting to be under purview of RTI Act. Bringing more bodies affecting day-to-day public-life under RTI Act Earlier Centr...
प्रधानमंत्री ने मेजर ध्यानचंद के जन्म दिवस  29 अगस्त से फिट इंडिया मूवमेंट की शुरूआत की

प्रधानमंत्री ने मेजर ध्यानचंद के जन्म दिवस 29 अगस्त से फिट इंडिया मूवमेंट की शुरूआत की

राष्ट्रीय
3 दिसम्बर - मेजर ध्यानचंद की पुण्य तिथि पर शत शत नमन! अगले ओलम्पिक खेल 2020 में विश्व के सबसे युवा भारत के खिलाड़ियों का एकमात्र लक्ष्य सर्वश्रेष्ठ तथा ऐतिहासिक प्रदर्शन का होना चाहिए     - प्रदीप कुमार सिंह, लेखक हाकी के सर्वश्रेष्ठ सितारे मेजर ध्यानचंद की 3 दिसंबर 1979 में मृत्यु बीमारी के कारण हो गयी थी। हम इस महान खिलाड़ी की पुण्य तिथि पर सभी देशवासियों की तरफ से शत शत नमन करते है। आस्ट्रिया की राजधानी विएना में चार हाकी स्टिक पकड़े चार हाथों वाली उनकी मूर्ति स्थापित है जो उनके खेल कौशल को दर्शाती है। वियना की यह मूर्ति जिसके चार हाथ और चार स्टिक हैं, जैसे वो हाॅकी के देवता हों। मेजर ध्यानचन्द का कहना था कि मेरा देश क्या देता है मुझे जरूरी नही, पर मेरा फर्ज है मैं देश को क्या देता हूँ। इस उच्च जज्बे के धनी दिलो बसने वाले मेजर ध्यानचंद सदैव देशवासियों तथा खेल प्...
गडकरी जी : ट्रैफिक जाम से निजात दिलवाओ  शहरों को

गडकरी जी : ट्रैफिक जाम से निजात दिलवाओ  शहरों को

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आज के दिन हमारे  देश का शायद ही कोई  छोटा-बड़ा शहर या महानगर बच गया हो, जो दिन भर ट्रैफिक जाम से नहीं जूझ रहा होता है। दिल्ली से लेकर देश कीआई टी  राजधानी बंगलूरू, और आर्थिक राजधानी मुंबई से लेकर पटना, रांची और लखनऊ, कानपुर आदि तक सभी शहरों की सड़कें आज भारी जाम से त्रस्त हैं। किसी केसमझ ही नहीं आ रहा कि सारे देश में  जाम की समस्या अचानक इतनी विकट कैसे हो गई?  आखिर, हालात ही क्यों इस हद तक बिगड़ने दिए गये। गाड़ियां जिस तरहरेंग रही होती हैं लगता है कि पैदल चलना ही ज्यादा बेहतर है। पर अफ़सोस यह है कि पैदल यात्री चलें भी तो कहा चलें । या तो फुटपाथ ही नहीं हैं और जहाँ हैं भी, वेखोमचों, सब्जी वालों के ठेलों से भरे पड़े हैं। 10-15 साल पहले तक बंगलुरु को देश का आदर्श शहर माना जाता था । मौजूदा हालत यह है कि यहां तो एयरपोर्ट से ले कर शहर के किसी भी मुहल्ले की ओर जानेपर जाम ही जाम मिलता है । एयरपोर्ट जान...
एक देश – अनेक भाषाएँ – एकात्म भाषाएँ

एक देश – अनेक भाषाएँ – एकात्म भाषाएँ

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कुछ दिनों पूर्व गृहमंत्री श्री अमित शाहने कह दिया एक देश, एक भाषा और यह एक विवादका विषय बन गया। मुझे लगा कि इस पूरी चर्चामेंतकनीकीकी भूमिका भी है, उसकी चर्चा करूँ। यह है संगणकीय (कम्प्युटर) तकनीक। संयोगसे यह विषय भी शाहके गृहमंत्रालयका हिस्सा है। हम एक राष्ट्र, एक भाषाका नारा क्यों लगाते हैं? क्योंकि एक स्वतंत्र राष्ट्रके रूपमें आज भी हम विश्वको यह नही बता पाते कि हमारी राष्ट्रभाषाकौनसी है? फिर वैश्विक समाज अंग्रेजीको हमारे देशकी de facto भाषा मानने लगता है। उनकी इस अवधारणाकी पुष्टि हम भारतीय ही करते हैं।जब दो भारतीय व्यक्ति विदेशमें एक दूसरेसे मिलते हैं तब भी अंगरेजीमे बात करते है। देशके अंदर भी कितने ही माता- पिता जब अपने बच्चोंकेसाथ कहीं घूमने जा रहे होते हैं तब उनके साथ अंगरेजीमें ही बोलते हैं। ये बातें देशके गृहमंत्रीको अखर जायें और वह सोचे कि काश हमारे देशकीएक घोषित राष्ट्रभाषा हो...
अब गरीबी नहीं, अमीरी समस्या है

अब गरीबी नहीं, अमीरी समस्या है

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देश की प्रति व्यक्ति आय मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़कर 10,534 रुपये महीना पहुंच जाने का अनुमान है। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में मासिक प्रति व्यक्ति आय 9,580 रुपये थी। प्रति व्यक्ति औसत आय का बढ़ना देश की समृद्धि का स्वाभाविक संकेत है। आम आदमी की औसत आय का बढ़ना हो या देश अरबपतियों-करोडपतियों की संख्या का बढ़ना है, इन स्थितियों के बीच ऐयाशी, प्रदर्शन एवं वैभवता के अतिशयोक्तिपूर्ण खर्च की विकृत मानसिकता का पनपना नैतिक एवं चारित्रिक गिरावट कारण भी बन रही है। समस्या दरअसल गरीबी को समाप्त करने की उतनी नहीं, जितनी कि संतुलित समाज रचना को निर्मित करने की है। अमीरी का बढ़ना भी समस्या बन रहा तो गरीबी भी बड़ी समस्या है। यदि समय रहते समुचित कदम नहीं उठाए गए तो विषमता की यह खाई और चैड़ी हो सकती है और उससे राजनैतिक व सामाजिक टकराव की नौबत आ सकती है। भारत के अमीर और ज्यादा अमीर होते ...
तो अब भीड के हवाले करो रेप के गुनाहगारॉ को

तो अब भीड के हवाले करो रेप के गुनाहगारॉ को

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सोमवार को राज्य सभा में हैदराबाद में हुई दरिंदगी पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान श्रीमती जया बच्चन ने हैदराबाद की एक नवयुवती डाक्टर की गैंग रेप केबाद हत्या और कम्बल में लपेटकर शव जलाकर फेंकने के जघन्य कांड  पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अब तो यही उपाय बचा दिखता है कि रेप केगुनहगारों को बीच शहर में भीड के हवाले कर दिया  जाये। यह शायद व्यावहारिक न दिखे लेकिन पिछले सात सालों से निर्भया हत्या कांड  के बाद पुलिस, प्रशासनऔर न्यायपालिका का भी जो रवैया रहा है, उसको देखते हुये शायद यह भावना वर्तमान में आम जन की भावना के करीब लगती है। दिल्ली में करीब सात साल पहले निर्भया रेप केस के कारण देश दहल गया था। तब उसके गुनहगारों को फ़ासी पर लटकाने की  देशव्यापी माँग हुई। कोर्ट ने उन्हें फाँसी की सज़ा दे भी दी, पर वे अब भी जेल में  सुरक्षित हैं और सरकारी खर्चे पर आराम की जिन्दगी जी रहे ह...
Parents of three boys killed in illegal bike-ride responsible rather than Delhi Police

Parents of three boys killed in illegal bike-ride responsible rather than Delhi Police

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It is indeed regretful that Delhi Police is being unnecessarily targeted for death of three boys killed near Turkman Gate in Delhi on night of 30.11.2019 when their speeding bike hit a pole during their joy-ride. It is significant that the three boys broke all traffic-rules by having three riders on a bike that too all without helmets and overspeed. It may also be possible that the killed boys might have been minors. Fault lied with parents of the three killed boys who did not care to control their children for such unlawful scooter-ride. Delhi witnesses havoc created by bikers on busy Delhi roads including in high security-zone of Leyton Delhi with parents enjoying driving-skill of their children through all traffic-rules. Higher authorities in Delhi should issue necessary notificat...
क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

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हाल ही में रामजन्मभूमि पर आए निर्णंय के बाद देश के बहुसंख्यक मुसलमानों ने जिस शांति और सदभाव का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। सारी आकांक्षाओं को निर्मूल करते हुए, अल्पसंख्यक समुदाय ने इस फैसले के विरूद्ध कोई भी उग्र प्रदर्शन या हिंसक वारदात न करके, ये बता दिया है कि साम्प्रदायिक वैमनस्य समाज में नहीं होता बल्कि राजनैतिक दलों के दिमाग की साजिश होती है। कोई भी दल इसका अपवाद नहीं है। इतिहास में इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि अगर ‘रामजन्भूमि मुक्ति आन्दोलन’ को राजनैतिक रंग न दिया जाता, तो ये मामला तीन दशक पहले सुलझने की कगार पर था। दरअसलआम आदमी को अपनी रोजी, रोटी और रोजगार की चिंता होती है। ये चिंता भारत के बहुसंख्यक लोगों को आजादी के 72 वर्ष बाद भी सता रही है। जब पेट भरे होते हैं, तब धर्म और राजनीति सूझती है। जो राजसत्ताऐं अपनी प्रजा की इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पातीं, वही धार्मिक उ...
परीक्षा प्रणाली में बदलाव के सार्थक कदम

परीक्षा प्रणाली में बदलाव के सार्थक कदम

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लम्बे अरसे से कहा जा रहा है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली जड़ होकर महज शारीरिक एवं बौद्धिक विकास को प्राथमिकता देती रही है, जबकि मानसिक एवं भावनात्मक विकास भी शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग होते हुए भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बौद्धिकता शिक्षा का एक अंग है, पर पूरा नहीं, चाहते सभी है कि शिक्षा से अच्छे-सच्चे, मौलिक सोच वाले, सुसंस्कारित, रचनात्मक-सृजनात्मक ऊर्जावान एवं कार्यक्षम बच्चे प्राप्त हो। लेकिन यह चाह मात्र चाह बनकर रह गयी है, क्योंकि साध्य प्राप्ति का साधन अधूरा है। अब इस अधूरेपन को दूर करने के लिये केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा के प्रश्नपत्रों के प्रारूप में बुनियादी बदलाव लाने का फैसला किया है। इस परिवर्तन का मकसद शिक्षा-परीक्षा को मशीनी प्रक्रिया से बाहर निकालकर उनमें मौलिकता, तर्क क्षमता और कल्पनाशीलता के लिए गुंजाइश बढ़ाना है। निश्चित ही य...
स्तन कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए और जागरूक होने की जरूरत

स्तन कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए और जागरूक होने की जरूरत

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हमारे यहां कैंसर शब्द आज भी डराता है, लेकिन पश्चिमी देशों में कैंसर का इलाज आज उसी तरह हो रहा है, जैसे अपने यहां तपेदिक का। लेकिन अपने देश में महिलाओं में स्तन का कहर तेजी से बढ़ रहा है। कुछ सर्वेक्षणों से चौकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। वहीं नई खोजों से स्तन कैंसर का इलाज अब आसान बड़ा हो गया है। गत कुछ सालों में देश में महिलाओं में स्तन कैंसर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। अपने देश में महिलाओं में यह रोग नगरों की महिलाओं में अधिक पाया जाता रहा है। कम उम्र में विवाह और अधिक गर्भधारण भारतीय महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का एक बड़ा कारण रहा है। लेकिन विवाह को अधिक उम्र तक टालते जाने, गर्भधारण का फासला बढ़ाने या स्वेच्छा से इससे बचने की शहरी औरतों की प्रवृत्ति उनमें स्तन कैंसर की संभावना बढ़ा रही है। नए शोधों से यह पता चला कि किसी भी कैंसर के होने में आनुवांशिक कारण सबसे बड़ा कारण है औ...