दक्षिण में हिन्दी का विरोध क्यों?
गतदिनों बंगलूरू के गणेशबाग में एक जैन आचार्य के चातुर्मास के लिए लगाए गए हिंदी बैनर कोे कथित तौर पर फाड देने एवं तोड़फोड़ करने की हिंसक घटना न केवल विडम्बनापूर्ण बल्कि एक राष्ट्र-विरोधी त्रासदी है। इनदिनों दक्षिण भारत में हिन्दी भाषा का विरोध करते हुए संघर्ष एवं आन्दोलन की स्थितियां देखने को मिल रही है। इस आन्दोलन के उग्र होने का कारण हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में दक्षिण के गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने का आरोप है। हालांकि इससे पहले की यह मुद्दा 1960 के दशक की भांति हिंदी विरोधी आंदोलन की तरह राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता, केंद्र सरकार ने विवादित प्रावधान को खत्म कर दिया और आश्वासन दिया कि हिंदी किसी पर थोपी नहीं जाएगी। प्रश्न हिन्दी को थोपने या न थोपने का नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एकता एवं अस्मिता की रक्षा का है। प्रश्न भाषा के नाम पर एक शांतिप्रिय अह...









