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Author: dindiaadmin

अब निपटेगी डी एन डी टोल कम्पनी पूरी तरह

अब निपटेगी डी एन डी टोल कम्पनी पूरी तरह

TOP STORIES, घोटाला
चोरी और सीनाजोरी। डीएनडी टोल कम्पनी की यही कहानी है। इलाहबाद उच्च न्यायलय द्वारा टोल वसूली बंद करने के आदेश के बाद टोल कम्पनी आदेश पर रोक के लिए उच्चतम न्यायलय तो चली गयी, किंतू वहां उसे मुँह की खानी पड़ी। न्यायलय ने टोल वसूली रोकने के आदेश को रद्द ही नहीँ किया, उलटे कम्पनी के खातों की सी ए जी से जांच के आदेश दे दिए। मौलिक भारत ने जब सी ए जी को कम्पनी के कारनामो का सबूतों सहित कच्चा चि_ा भेजा तो मौलिक भारत के सदस्यों विकास गुप्ता, अनुज अग्रवाल, अमरनाथ ओझा और पंकज गोयल पर 80 करोड़ रूपये का मानहानि का नोटिस भेज धमकाने की कोशिश की। अब सी ए जी ने अपनी जांच रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौप दी है तो उम्मीद है कि टोल कम्पनी के काले कारनामे और लूट के किस्से जगजाहिर होंगे और अपराधियों को सजा मिलेगी। मौलिक भारत के उपाध्यक्ष विकास गुप्ता ने उच्चतम न्यायलय में इस बिषय में विशेष अनुमति याचिका भी डाली हुई...
यह तूफानी कार्यवाही का समय है योगी जी – मौलिक भारत

यह तूफानी कार्यवाही का समय है योगी जी – मौलिक भारत

Today News, TOP STORIES
आयकर विभाग भी जनता और सरकार की आँखों में धूल ही झोंकता रहता है। कल विभाग ने मायावती के भाई आनंद की कंपनियो का सर्वे किया। कारण विभाग को शक है कि आनंद ने बड़ी मात्रा में कालाधन बनाया है। कितना हास्यास्पद है कि जब हम काफी समय पूर्व ही मौलिक भारत के माध्यम से आनंद और यादव सिंह की जुगलबंदी और सैकड़ो फर्जी कंपनियो के सबूत काले घन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी एस आई टी, सी बी आई, अन्य जांच एजेंसियो केंद्र और यू पी सरकार सहित मीडिया को भी दे चुके हैं उसके बाद भी उथली और दिखाबे की कार्यवाही करना जनता की आँखों में धूल झोंकने के समान है। सच तो सबको ही पता है कि मायावती ने अपने शासनकाल में बेतरह लूट मचाई और अपने भाई और यादव सिंह जैसी सेकड़ो कठपुतलियों के माध्यम से लाखों करोड़ का माल बनाया और सेकड़ो फर्जी कम्पनियों के माध्यम से सफ़ेद कर देश विदेश में निवेश किया। सन् 2009 में स्वयं भाजपा ने माया...
योगी सरकार तूफानी रफ्तार – सुशासन की बहार

योगी सरकार तूफानी रफ्तार – सुशासन की बहार

राज्य
उत्तर प्रदेश को पटरी से उतरा हुआ प्रदेश माना जाता था। उत्तर प्रदेश के निवासी यह आशा नहीं करते थे कि कोई सरकार ऐसी भी हो सकती है जिसके द्वारा उत्तर प्रदेश की शिथिल नौकरशाही के पेंच कस सके। उत्तर प्रदेश की पुलिस, गुंडों और माफियाओं पर बिना किसी राजनैतिक दवाब के कार्यवाही कर सके। प्राइवेट स्कूल की मनमानी रुक सकें। शिक्षा माफिया बाज़ार मूल्य पर किताबें देने लगे। मुस्लिमों के तुष्टीकरण के नाम पर बहुसंख्यकों का शोषण बंद हो सके। अफसर समय पर ऑफिस पहुचने लगे। पर उत्तर प्रदेश में ऐसा होने लगा है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो नायक फिल्म के हीरो से भी तेज़ काम कर रहे हैं। बदलाव की ओर बढ़ चले उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की कार्यशैली पर अमित त्यागी प्रकाश डाल रहे हैं। र्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने मोदी ने मंत्र दिया था कि 'न खाऊँगा न खाने दूंगाÓ। 2017 में उत्तर प्रदेश के ...
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) में 2,500 करोड़ का घोटाला ?

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) में 2,500 करोड़ का घोटाला ?

घोटाला
मौलिक भारत ट्रस्ट ने वित्त मंत्रालय को इस बारे में पत्र भी लिखा था। केंद्र सरकार के ई पोर्टल त्रद्गरू (गवर्नमेंट ई-मार्केट) में क्या करोड़ों का घोटाला हुआ है' यह बात भले ही पत्रकारों से कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कही लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट की माने तो बीजेपी के ही 7 सांसदों ने वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर बताया है कि सरकार के ई-पोर्टल के जरिये करोड़ों के घोटाले की आशंका है। डायलॉग इंडिया ने अक्टूबर 2016 को अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था। इन सांसदों में केन्द्रीय मंत्री फगन सिंह कुलस्ते, अशोक नेटे, कौशल किशोर, आलोक संजर, हरीश द्विवेदी, राजेश द्विवेदी, अर्जुनलाल मीणा और अजय निषाद का नाम हैं। डायलॉग इंडिया की रिपोर्ट में सामने आया कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) में 2,500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला हो सकता है। उस वक्त 'मौलिक भारत ट्रस्ट' वित्त म...
तो क्या अखिलेश गुट ने भी चुनाव आयोग को रिश्वत दे खरीदा था चुनाव चिन्ह? – मौलिक भारत

तो क्या अखिलेश गुट ने भी चुनाव आयोग को रिश्वत दे खरीदा था चुनाव चिन्ह? – मौलिक भारत

घोटाला, राज्य
तमिलनाडू में अन्नाद्रमुक पर कब्जे की लड़ाई में शशिकला के भांजे को पार्टी के चुनाव चिन्ह पर शशिकला गुट के कब्जे को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों को 50 करोड़ रूपये की रिश्वत देने की कोशिश में स्नढ्ढक्र दर्ज की गयी है और दलाल की गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पर कब्जे को लेकर अखिलेश और मुलायम गुट का था और मामला चुनाव आयोग पहुंचा था। उस समय विभिन्न चेनलों पर अनेक संविधान विशेषज्ञ और पूर्व चुनाव आयुक्त यह दावा कर रहे थे कि इस विवाद पर जाँच कर निर्णय देने में आयोग को कम से कम छ: महीने लगेंगे। किंतू कुछ ही दिनों बाद अचानक आयोग ने अखिलेश गुट को साइकिल चुनाव निशान आबंटित कर दिया। इस मामले में चुनाव आयोग का निर्णय अगर आप लोग पढ़ेंगे तो पाएंगे कि बिना परीक्षण अखिलेश गुट के बहुत से दावो को मान लिया गया। जिस प्रकार की जल्दबाजी इस निर्णय को देने में की गयी उससे स...
मौलिक भारत की मुहिम हुई कामयाब

मौलिक भारत की मुहिम हुई कामयाब

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ंचुनाव आयोग ने चुनावो के समय उम्मीदवारों के द्वारा भरे जाने वाले शपथ पत्रों की जांच की प्रक्रिया तय की। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को दिए हाल ही में सम्पन्न पांच राज़्यों के विधानसभा चुनावों में उतरे उम्मीदवारों के शपथपत्र जांचने के आदेश। 30 जून तक पूरी करनी होगी प्रकिया। नप सकते हैं कई माननीय। मौलिक भारत सदस्यों द्वारा दिनांक 17जनवरी 2017 को भारत के मुक्चय निर्वाचन आयुक्त श्री नसीम ज़ैदी को चुनाव सुधार के लिए पत्र लिखकर आवश्यक कार्यवाही हेतु निवेदन किया गया था कि - चुनाव लडऩे वाले सभी प्रत्याशियों द्वारा (Conduct of Elections Rules- 1961 के नियम 4 ए के अंतर्गत नामांकन के साथ (फॉर्म 26) में भरे जाने वाले शपथ पत्र में बयान किये गए तथ्यों की सत्यता की जांच निर्वाचन आयोग द्वारा की जानी चाहिए। पांच राज्यों के चुनाव प्रक्रिया के चलते प्रार्थीगण के पत्र उपरोक्त का भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्...
अब निर्वाचन आयोग में सुधार की बारी

अब निर्वाचन आयोग में सुधार की बारी

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अरुण तिवारी ज़ाद भारत का पहला चुनाव 1952 में हुआ था। किंतु भारत के निर्वाचन आयोग की शक्तियों का एहसास जनता को पहली बार तब हुआ, जब 1990 में टी. एन. शेषन मुक्चय चुनाव आयुक्त हुए। इसके बाद से निर्वाचन आयोग ने हर चुनाव में अपने को बेहतर करने की कोशिश की; बावजूद इसके हर चुनाव ने साबित किया कि निर्वाचन आयोग में सुधार की गुजांइश अभी काफी है। बीते चुनाव के बाद उपजी अपेक्षाओं में से एक अपेक्षा यह भी है। एक चरण में मतदान करा पाने में अक्षम बीते चुनाव ने बताया कि कई चरण में चुनाव होने से न सिर्फ मतदान प्रभावित होता है, बल्कि दलों, उक्वमीदवारों और खुद निर्वाचन आयोग का चुनाव खर्च बढ़ जाता है। चुनाव प्रक्रिया की लंबी अवधि के लंबे समय के लिए शासन में सब कुछ ठप्प पड़ जाना, तीसरा नुकसान है। इस दौरान मीडिया में भी बस चुनाव का ही शोर रहता है। तात्कालिक महत्व के कई मुद्दे चर्चा से गायब हो जाते हैं। ज...
Centre for Science and Environment (CSE)   Press Release

Centre for Science and Environment (CSE) Press Release

प्रेस विज्ञप्ति
Centre for Science and Environment (CSE) Press Release uzaffarpur Makes Substantial Gains Swachh Survekshan, 2017Barely Six Months into the implementation of Swachhtha-Swasthya-Samridhi programme The City gets encouraging results on several parameters of the recent Swachh Survekshan, 2017 Survey says 75 percent of the residential and commercial parts of the city were substantially clean Over 67 percent residents were satisfied with the door to door collection and 55 percent said that they found improvement in the litterbins in the market areas Under the Swachhtha Swasthya Samridhi programme, 5 wards of the city have already adopted decentralised waste management New Delhi, May 5, 2017: In the latest ‘Swachh Survekshan’ ranking issued by the Ministry of U...
CIC Bimal Julka recommends for RTI stamps: Recommendations by other CICs not implemented: CICs should jointly take up the matter with DoPT

CIC Bimal Julka recommends for RTI stamps: Recommendations by other CICs not implemented: CICs should jointly take up the matter with DoPT

आर्थिक
CIC-verdict dated 05.05.2017 in petition-number CIC/KY/C/2016/000286-BJ by Central Information Commissioner Bimal Julka has again recommended issue of RTI-stamps or numbered RTI-coupons as mode for payment of RTI-fees. Earlier a full-bench CIC-order by a bench consisting of commissioners Satyananda Mishra, ML Sharma and Basant Seth had for the first time made recommendations in this regard. Subsequently several other Commissioners including like Professor Madabhushnam Sridhar Acharyulu also made similar recommendations in their respective verdicts. Even Joint Secretary at CIC on directions of present Chief Information Commissioner Radha Krishna Mathur wrote to DoPT in this regard. But red-tapism made DoPT and Postal Department rejecting the recommendations. It is non-sensible for p...
Why Water Privatization Is a Bad Idea for People and the Planet

Why Water Privatization Is a Bad Idea for People and the Planet

सामाजिक
As climate change drives water scarcity, there may be more efforts to privatize water systems. By Adam Hudson / AlterNet April 18, 2017 From a years-long drought in California to poisoned water in Flint, Michigan, the issue of access to clean water is increasingly pertinent. Climate change will only exacerbate this problem as water becomes more scarce in numerous parts of the world. As water becomes more scarce and infrastructure deteriorates, there could be more efforts to privatize water systems, which does not help the situation. Climate change and water scarcity It is a fact that climate change is occurring and human activities, particularly carbon and other greenhouse gas emissions, play a large role in driving it. The 2014 Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) repo...