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क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

क्या हिंदू और मुसलमान मिलकर नहीं रह सकते ?

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हाल ही में रामजन्मभूमि पर आए निर्णंय के बाद देश के बहुसंख्यक मुसलमानों ने जिस शांति और सदभाव का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। सारी आकांक्षाओं को निर्मूल करते हुए, अल्पसंख्यक समुदाय ने इस फैसले के विरूद्ध कोई भी उग्र प्रदर्शन या हिंसक वारदात न करके, ये बता दिया है कि साम्प्रदायिक वैमनस्य समाज में नहीं होता बल्कि राजनैतिक दलों के दिमाग की साजिश होती है। कोई भी दल इसका अपवाद नहीं है। इतिहास में इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि अगर ‘रामजन्भूमि मुक्ति आन्दोलन’ को राजनैतिक रंग न दिया जाता, तो ये मामला तीन दशक पहले सुलझने की कगार पर था। दरअसलआम आदमी को अपनी रोजी, रोटी और रोजगार की चिंता होती है। ये चिंता भारत के बहुसंख्यक लोगों को आजादी के 72 वर्ष बाद भी सता रही है। जब पेट भरे होते हैं, तब धर्म और राजनीति सूझती है। जो राजसत्ताऐं अपनी प्रजा की इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पातीं, वही धार्मिक उ...
एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष

एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष

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(विश्व एड्स दिवस पर लेख)   सरकार के 2030 तक एड्स उन्मूलन के वादे को पूरा करने की दिशा में सराहनीय प्रगति तो हुई है परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर में वांछित गिरावट नहीं आई है जिससे कि आगामी 133 माह में एड्स उन्मूलन का स्वप्न साकार हो सके. इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी की संचालन समिति में एशिया पैसिफ़िक क्षेत्र के प्रतिनिधि और एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि “2020 तक, विश्व में नए एचआईवी संक्रमण दर और एड्स मृत्यु दर को 5 लाख से कम करने के लक्ष्य से हम अभी दूर हैं. 2018 में नए 17 लाख लोग एचआईवी संक्रमित हुए और 7.7 लाख लोग एड्स से मृत. दुनिया में 3.79 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं. भारत में अनुमानित है कि 21.4 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं, जिनमें से 13.45 लाख लोगों को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा प्राप्त हो रही है. एक साल में 88,000 नए लोग एचआईवी से ...
गांधी दृष्टि और पर्यावरण विमर्श

गांधी दृष्टि और पर्यावरण विमर्श

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गांधी जी ने अपनी जीवन यात्रा पहले पूरी की, 'पर्यावरण' शब्द बाद में अस्तित्व में आया; यही कोई 20वीं सदी के छठे दशक में। पर्यावरण चुनौतियों का उभार, उनकी चिंता, चिंताओं को सामने रखकर विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्देश, पर्यावरण संरक्षण के नाम पर संगठनों की स्थापना, आंदोलन, एक विज्ञान और तकनीकी विषय के रूप में पर्यावरण की पढ़ाई... ये सभी कुछ बहुत बाद में सामने आए। लिहाजा, गांधी साहित्य में ’वातावरण’ शब्द का उल्लेख तो है, किंतु ’पर्यावरण’ शब्द का नहीं। यह कहना उचित ही है; बावजूद इसके, गांधी जी की 105वीं जयंती के दिन साहित्य अकादमी ने पर्यावरण विमर्श को गांधी दृष्टि से देखने संबंधी आलेख पाठ करने और सुनने हेतु हमें आमंत्रित किया है। यह सुखद भी है और गांधी दृष्टि को गहराई से जानने की साहित्य अकादमी की उत्तम लालसा का परिचायक भी। इसके लिए अकादमी बधाई और आभार... दोनो की पात्र...
संयम व दृढ़ता की विजयगाथा

संयम व दृढ़ता की विजयगाथा

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यह अपनी गलती सुधारने जैसा तो है ही, साथ ही अपनी जड़ों से जुडऩे की कोशिश भी है। राम जन्मभूमि के अस्तित्व को स्वीकार करने व उस पर भव्य राम मंदिर के निर्माण की स्वीकृति देने के उच्चतम न्यायालय के आदेश हम भारतीयों के लिए एक 'क्रांति’ के समान है। राम के अस्तित्व को स्वीकार करना यानि वैदिक सनातन संस्कृति के अस्तित्व को स्वीकार करना है। यह इंडिया पर भारत की जीत है। यह सैकड़ों सालों के उस संघर्ष की जीत है जो अरब देशों के विदेशी इस्लामी आक्रमणकारी लुटेरों के विरुद्ध भारत की जनता ने पिछले 500 से अधिक वर्षों से संयम व दृढ़ता से हज़ारों लोगों की जान गंवाकर भी की। ये हर भारतीय के रोम रोम में बसने वाले दुनिया में प्रथम आदर्श या संपूर्ण व्यक्तित्व एवं आदर्श राज्य की स्थापना करने वाले राजा रामचंद्र के प्रति संपूर्ण भारत का प्रायश्चित भी है और विश्व को यह संदेश भी कि कई सौ सालों की गुलामी से मुक्त हुई भारत...
मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी! – लाला लाजपत राय

मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी! – लाला लाजपत राय

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लाला लाजपत राय 28 जनवरी 1865 को पंजाब के मोगा जिले के एक अग्रवाल परिवार में हुआ र्था वह देश के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। आजीवन ब्रिटिश राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने वाले जज्बे तथा जुनून के कारण पंजाब केसरी भी कहा जाता है। उन्हें ‘पंजाब के शेर’ की उपाधि भी मिली थी।  लाला लाजपत राय को भारत के महान क्रांतिकारियों में गिना जाता है।  लालाजी के पिता अध्यापक लाला राधाकृष्ण लुधियाना जिले के जगराँव कस्बे के अग्रवाल वैश्य थे। वे उर्दू तथा फारसी के अच्छे जानकार थे। इसके साथ ही इस्लाम के मन्तव्यों में भी उनकी गहरी आस्था थी। वे मुसलमानी धार्मिक अनुष्ठानों का भी नियमित रूप से पालन करते थे। नमाज पढ़ना और रमजान के महीने में रोजा रखना उनकी जीवनचर्या का अभिन्न अंग था। अपने पुत्र लाला लाजपत राय के आर्य समाजी बन जाने पर उन्होंने वेद के दार्शनिक सिद्धान्त ‘त्रेतवाद’ को समझने म...
Central government should act swiftly to form trust for construction of Ram Temple at Ayodhya before AIMPB files review-petition at Supreme Court

Central government should act swiftly to form trust for construction of Ram Temple at Ayodhya before AIMPB files review-petition at Supreme Court

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All India Muslim Personal Board (AIMPB) in a second thought may file review-petition on recent verdict by Constitution Bench of Supreme Court allowing construction of Ram Temple at the site of Ram birth-place, and ordering a five-acre plot at some other place in Ayodhya for construction of a mosque. Before any such review-petition is filed, central government should swiftly form the Trust for construction of Ram Temple as ordered by Supreme Court, so that construction-work of much awaited grand temple at Ram birth-place may be started even before Supreme Court may hear filing of any such review-petition by AIMPB. In case review-petition is allowed to be filed, then parties in favour of construction of Ram Temple, should also file review-petition for shifting mosques from Vishwanath T...
श्रीराम मन्दिर आंदोलन के प्रणेता याद आते हैं

श्रीराम मन्दिर आंदोलन के प्रणेता याद आते हैं

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आज हम हिन्दुओं के सदियों पुराने ज़ख्मों पर मरहम लगा है । इस ऐतिहासिक अवसर पर उन हज़ारों सन्तों व  भक्तों को हमारी भावभीनी श्र्द्धांजली जिन्होंने पिछली सदियों में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया। उल्लास के इस इस अवसर पर राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए इस वर्तमान आंदोलन को शुरू करने में तीन प्रमुख हस्तियों के योगदान को विशेष रूप से याद करना आवश्यक है । इस क़तार में सबसे आगे खड़े हैं ; स्वर्गीय श्री दाऊ दयाल खन्ना जी, जो मुरादाबाद से लम्बे समय तक विधायक और श्री चन्द्रभान गुप्ता की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। उन्होंने सबसे पहले 1983 में एक विस्तृत तार्किक आलेख तय्यार करके तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी को प्रस्तुत किया। जिसमें अयोध्या, काशी और मथुरा को अवैध रूप से बनी मस्जिदों से मुक्त करके भव्य मंदिर बनाने को  हिंदू समाज को सौंपे जाने...
और देश जीत गया

और देश जीत गया

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 दोस्तों , आज का दिन ऐतिहासिक है। नौ नवम्बर का दिन भारत ही नहीं दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। नौ नवम्बर १९८९  आज ही के दिन बर्लिन की दीवार  टूटी   थी और ४५ साल बाद दो दिल मिल गये।  भारत पाक बॅटवारे के बाद गुरु नानक देव जी  का बोधि स्थल जो सिख समाज के लिए तीर्थ है पाकिस्तान में होने के कारण अपने गुरु स्थान पर जाने से वंचित था।  आज करतारपुर कॉरिडोर खुलने से दर्शन के लिए तीर्थ स्थल जाने का मार्ग भी खुल गया है। गुरु नानक देव जी के ५५० वर्ष पूरे होने पर आज ही के दिन पूरी दुनिया के सिख समाज और हिन्दू समाज को आज ही के दिन यह अनमोल तोहफा मिला है। आज का दिन भारत के इतिहास का सबसे सुखद दिन  है जब ५०० वर्षो से हिन्दू समाज के लिए कलंक की तरह बाबरी मस्जिद विवाद का सुप्रीम कोर्ट के पांच माननीय जजों की संवैधानिक पीठ ने तमाम तरह के शक सुबहे और आशंकाओं को ख़तम करते हुए ऐसा न्याय किया जो समाज के स...
Ram Gets Justice in His Land

Ram Gets Justice in His Land

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At long last in the land of Ram a Ram Temple will be built where he was born. Supreme Court of India has on the basis of evidence has said that Babri Masjid was built at the place which was birth place of Lord Ram. This judgment of the Supreme Court is significant since it was delivered unanimously by the 5 –Judge Constitution Bench which also included Justice S Abdul Nazeer who belongs to Muslim community. All Judges admitted that it was the place of birth of Ram. That the place was the birth place of Ram was based on research oriented excavation of the site by the Archeological Survey of India. The ASI had discovered that there was a Ram Temple at the site where Mir Baqi, a Minister of Mughal Emperor Babar built Babri Masjid in 1528. This helped the Supreme Court in deciding the case. T...
शुरू होने जा रहा है वायुसेना का स्वर्णिम युग

शुरू होने जा रहा है वायुसेना का स्वर्णिम युग

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  भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत उसके विदेशी लड़ाकू विमान, जेट व उनपर लगी मिसाइलें और युद्ध सामग्री नहीं है बल्कि उसके जांबाज अधिकारी, पायलट व सैनिक हैं। इस वर्ष के 87 वें वायुसेना दिवस के मौके पर हिंडन एयरबेस पर आयोजित समारोह में एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर के विशेष अतिथि के रूप में मुझे बहुत करीब से वायुसेना की मौजूदा स्थिति, क्षमता व गतिविधियों को देखने का मौका मिला। अपने मित्र कर्नल राहुल सिन्हा व उनके पुत्र यश व मेरे छोटे पुत्र सहज के साथ मैंने बहुत गहराई से हमारी वायुसेना की ताकत व विशेषताओं का आंकलन किया। यह आश्चर्यजनक व अफसोसजनक था कि पिछले तीन दशकों में भारत की वायुसेना को आधुनिक हथियारों, प्रशिक्षण व लड़ाकू विमानों से वंचित रखा गया और पुराने होते मिग व मिराज विमानों से जूझते हमारे वायुसेना अधिकारियों व पायलटों की एक पीढ़ी ही बूढ़ी हो गयी। मगर अब दिन बदल रहे हैं।...