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Balakot Air Strike: See Proof Don’t Ask for It

Balakot Air Strike: See Proof Don’t Ask for It

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What proof the Opposition is asking for? That the Indian Air Force air strike on Jaish-e- Mohammad on February 26 did not damage the training centers and hideout of the terrorist. There is a saying in Sanskrit, “Prtayakhsam kim Pramanam” which translated roughly into English means what is visible does not require any proof. The satellite imagery of the devastation caused to the structure in the Pakistan Occupied Kashmir is clear proof of our Air Force fighters hitting the target with 100 percent precision which is also the official statement of the Indian Air Force. Are our Opposition leaders suspecting the veracity of the statement of IAF? What the Opposition is questioning is how many or if any terrorist was killed in the operation. Well, one does not have to be an expert to know the fa...
आक्रोश का अंत…आक्रमण

आक्रोश का अंत…आक्रमण

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आखिर वर्षों से जिहादियों की दिनचर्या से भयभीत व पीड़ित राष्ट्रवादी समाज को जैश-ए-मोहम्मद के गढ़ पाकिस्तान स्थित बालाकोट पर विनाशकारी हवाई स्ट्राइक के बाद अब जिहाद से मुक्ति की कुछ आशा बंधी है। जिहादियों के कारण नित्य अपमानित होने वाले अब अपने स्वाभिमान के प्रति जागरूक हो रहें हैं। निःसंदेह वर्षो बाद भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया गया है। देश की सशक्त सेना का अवसरानुसार सदुपयोग करके समस्त शत्रुओं सहित विश्व को भी अब भारत ने अपने आक्रामक रूप के दर्शन करा दिये हैं। आज देश को समझना होगा कि राजनैतिक अदूरदर्शिता के कारण सैन्य रणनीति अपने शौर्य प्रदर्शन से वंचित हो रही थी।  उदारता, सहिष्णुता, अहिंसा व क्षमा आदि मानवीय गुणों की महत्ता बनाये रखने के कारण हमारी वीरता व रणनीतिज्ञ कौशल प्रभावित होता रहा। जिससे हम अत्याचार सहने क...
बालाकोट एयरस्ट्राइक पर विपक्षी नेताओं के नाम खुला पत्र

बालाकोट एयरस्ट्राइक पर विपक्षी नेताओं के नाम खुला पत्र

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मेरे प्यारे विपक्षी नेताओ, बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गये आतंकवादियों की संख्या को लेकर आप लोगों को इतना संदेह नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से “उल्टे बांस बरेली को” वाली कहावत के चरितार्थ होने का पूरा-पूरा ख़तरा है। पूछिए, कैसे? तो मैं आपको बता रहा हूं। हमारी महान वायु सेना के अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने स्पष्ट कर दिया है कि सेना ने सही टार्गेट को हिट किया है और अगर हमने पेड़ गिराए होते, तो पाकिस्तान जवाब नहीं देता। बात को ज़रा ठीक से समझ लीजिए। अगर सेना ने सही टार्गेट को हिट किया, तो इसका मतलब ही है कि उस टार्गेट पर बड़ी संख्या में आतंकवादी होंगे, वरना चंद पेड़ गिराने के लिए दुनिया की कोई भी वायु सेना अपने 12 विमानों और पायलटों को दूसरे मुल्क की सरहद में 80 किलोमीटर भीतर तक भेजने का रिस्क नहीं ले सकती। इसलिए मुझे तो पक्का विश्वास है कि उस टार्गेट पर कम से कम 2...
कश्मीर में हमला : आतंकियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल की इजाजत क्यों?

कश्मीर में हमला : आतंकियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल की इजाजत क्यों?

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हमले के बाद जैश-ए-मोह मद ने हमलावर आदिल अहमद का वीडियो जारी करके सोशल मीडिया के माध्यम से मजहबी ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी। सोशल मीडिया के जवाबी युद्ध में भारतीय उपमहाद्वीप में राष्ट्रवाद का जोश छलकने लगा है। ज मू-कश्मीर में तीस साल के आतंकवाद के दौर में सुरक्षा बलों पर सबसे बड़े हमले के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार आतंकियों ने तकनीकी और इंटरनेट का इस्तेमाल करके सुरक्षा बलों के काफिले की रेकी की थी। हमले के बाद जैश-ए-मोह मद ने हमलावर आदिल अहमद का वीडियो जारी करके सोशल मीडिया के माध्यम से मजहबी ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी। वैलेनटाइन-डे के रूमानी पर्व के दिन आदिल अहमद के फिदायीन वीडियो के प्रसारण से तकनीक के विनाशकारी चेहरे का भी घिनौना एहसास होता है। सवाल यह है कि क्या इंटरनेट और सोशल मीडिया के पहले आतंकवाद की घटनाएं नही...
युद्धघोष : आतंक पर आर-पार

युद्धघोष : आतंक पर आर-पार

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पुलवामा में हुये हमले के बाद देश में विमर्श की दिशा बदल गयी है। इस बार स्थिति आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की बन गयी है। काफी समय से संयम रखने और अपने सैनिकों की शहादत देने के बाद भारत का रुख इस बार काफी कड़ा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बालाकोट हिस्से में सेना द्वारा अंदर घुसकर जैश-ए-मोह मद के सैंकड़ों आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्र प का यह बयान कि भारत इस बार कुछ बड़ा करने वाला है इस बात का संकेत है कि भारतीय संप्रभुता पर हमला इस बार सिर्फ कड़ी निंदा तक सीमित नहीं होगा। पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेना इस क्रम में एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है। सिंधु नदी के पानी पर बांध बनाना उसका वृहद स्वरूप है। चूंकि, पुलवामा में स्थानीय आतंकवादी शामिल थे इसलिए आंतरिक स्तर पर भी कड़े संदेश की आवश्यकता थी। हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटाकर वह संदेश भी दे दि...
क्यों घुटनों के बल आया पाकिस्तान

क्यों घुटनों के बल आया पाकिस्तान

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आर.के.सिन्हा विंग कमांडर अभिनंदन पूरे धमाके के साथ भारत लौट आए हैं। भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान का पायलट, जो शत्रु के घर पर हमला करता है, उसकी तुरंत दो दिनों के अन्दर स्वदेश वापसी का हो जाना हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह नए भारत का असर है कि पाकिस्तान ने घुटनों को टेक कर अभिनंदन को ससम्मान भारत भेज दिया। क्या आपको इस तरह का दूसरा उदाहरण विश्व में कहीं और मिलेगा? पुलवामा हमलेसे नाराज भारत का पाकिस्तान की सरहद के अंदर घुसकर सैकड़ों आतंकियों को मार गिराना उस भारत की तस्वीर पेश करता है,जो आत्म विश्वास से लबरेज है। उस भारत में अब धैर्य नहीं बचा है कि वह अपने ऊपर होने वाले हमलों को निरीह बनकर झेलता ही रहे। सारी दुनिया ने देखा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के भयाक्रांत चेहरे को जब वे अपने देश की संसद में अभिनंदन की रिहाई की घोषणा कर रहे थे। उन्होंने बिना किसी शर्त के अभि...
मोदी सरकार के पांच साल क्या खोया, क्या पाया

मोदी सरकार के पांच साल क्या खोया, क्या पाया

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फरवरी 12 को सोलहवीं लोकसभा का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होते ही नई यानी 17वीं लोकसभा के चुनावों की आहट सुनाई देने लगी। सियासी फिज़ां में यह सवाल तैरना स्वाभाविक है कि अगले चुनाव के बाद दिल्ली की रायसीना पहाडिय़ों पर स्थित साउथ और नॉर्थ ब्लॉक की चमचमाती कुर्सियों पर किसे बैठने को मिलेगा? सवाल यह भी है कि अपनी लोकप्रियता के दम पर क्या मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दल-बल के साथ फिर से वापस लौट पाएंगे, या फिर कोई नया चेहरा विदेशों में देश की नुमाइंदगी करेगा और अपनी धरती पर अपने लोगों की अगुवाई करेगा? इन सवालों का जवाब तो आने वाले चुनाव के नतीजे देंगे, लेकिन वे नतीजे मौजूदा लोकसभा के प्रति जवाबदेह रही मौजूदा सरकार की उपलब्धियों और नाकामियों पर कहीं ज्यादा निर्भर करेगा। ऐसे में इसकी पड़ताल स्वाभाविक है कि मौजूदा सरकार ने अपने पौने पांच साल के कार्यकाल में क्या खोया और क्या पाया? ...
जहरीले जिहाद का जुनून

जहरीले जिहाद का जुनून

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क्या यह उचित है कि दुश्मन के छद्म युद्धों का सिलसिला बना रहें और हम उसे कायराना हमला कहकर निंदा करके अपने दायित्वों से भागते रहें? निस्संदेह केवल आक्रोशित होकर उत्साहवर्धक बयान तक सीमित रह जाने वाला नेतृत्व आज हमारे देश की नियति बन चुका है। 14 फरवरी 2019 ज मू-कश्मीर हाईवे पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा में सी.आर.पी.एफ. के 2500 सैनिकों से अधिक के काफिले पर लगभग 100 किलो आर.डी.एक्स. (विस्फोटक) से भरी 'कार बम’ बनी एक स्कॉर्पियो गाड़ी से आत्मघाती आतंकवादियों ने आक्रमण करके एक बार फिर हमको ललकारा है। इस जिहादी जुनून में हमारे लगभग 40 जवानों का बलिदान हुआ और 25 से अधिक घायल हुए हैं। इस्लामिक आतंकवादियों के दुस्साहस को बार-बार कायराना हमला कहकर हम केवल शब्दवीर बन जाते हैं। जबकि ऐसे नरसंहारों से जिहादियों के हौंसले आसमान को छूने लगते हैं। हम शत्रुओं की जिहादी सोच को समझने के बाद भी अपनी रणनीति को ...
भारत में चुनाव से ठीक पहले आतंकवादी हमले के पीछे क्या है पाकिस्तान की मंशा?

भारत में चुनाव से ठीक पहले आतंकवादी हमले के पीछे क्या है पाकिस्तान की मंशा?

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बड़ा औपचारिक सा लगने लगा है और थोड़ा-थोड़ा फज़ऱ्ी भी, जब एक आतंकवादी हमला होता है और हम अपना गुस्सा प्रकट करने के लिए ज़ोर-ज़ोर से बहुत कुछ बोलना शुरू कर देते हैं। लेकिन सच यह है कि ऐसे आतंकवादी हमले झेलना भारत की नियति है। इसके साथ ऐसा होता रहा है और आगे भी होता रहेगा। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं, जऱा ठंडे दिमाग से सोचिएगा और समझिएगा। हमारा देश एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जिसे फस्र्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम वाली चुनाव प्रणाली के ज़रिए चुने गए जनप्रतिनिधियों द्वारा बहुमत से बनाई गई सरकार चलाती है। सबसे पहले समझिए कि फस्र्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम क्या है? फस्र्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम यह है कि चुनाव में जिस भी उ मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वह निर्वाचित हो जाएगा, भले ही वह बहुमत यानी आधे से अधिक लोगों द्वारा नापसंद किया गया हो। नतीजा यह है कि वे लोग चुनकर आ रहे हैं, जिन्हें सौ में केवल 30-3...
आईआईटी शोधकर्ताओं ने नेत्रहीनों के लिए बनाया ब्रेल लैपटॉप

आईआईटी शोधकर्ताओं ने नेत्रहीनों के लिए बनाया ब्रेल लैपटॉप

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं ने डॉटबुक नामक एक ऐसा ब्रेल लैपटॉप विकसित किया है, जो नेत्रहीनों के लिए उपयोगी हो सकता है। यह ब्रेल डिस्प्ले युक्त रिफ्रेशेबल लैपटॉप है, जिसमें नेत्रहीनों के अनुकूल ईमेल, कैलकुलेटर और वेब ब्राउजर जैसे एप्लीकेशन्स शामिल हैं। इसके अलावा, लैपटॉप में थर्ड पार्टी ऐप्स का उपयोग भी किया जा सकता है। डॉटबुक को 20पी और 40क्यू समेत दो वेरिएंट्स में लॉन्च किया गया है। विशेष रूप से डिजाइन किए गए इसके हैंड-रेस्ट की मदद से अधिक कुशलता के साथ लंबे समय तक काम किया जा सकता है। इन दोनों लैपटॉप में रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले लगाया गया है। 40क्यू वेरिएंट में एक पंक्ति में अधिकत 40 कैरेक्टर होते हैं, जो क्वर्टी कीबोर्ड और ब्रेल कीबोर्ड से लैस है। जबकि, इस लैपटॉप के 20पी वेरिएंट की एक पंक्ति में 20 कैरेक्टर होते हैं। वाईफाई, ब्लूटुथ और यूएसबी ...