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Scientists figure out Salmonella bacteria infect plants

Scientists figure out Salmonella bacteria infect plants

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Contamination of salad vegetables by E.coli and Salmonella bacteria are the most common causes of food poisoning. Although most Salmonella outbreaks are linked to contamination during handling and transportation of the vegetables, there are also cases where the infectious bacterium had entered the plant when it was still in the farmland. How does it enter the plant? So far, the mechanism was not known. A new study by researchers at the Indian Institute of Science (IISc) and the University of Agricultural Sciences (UAS), Bengaluru, has solved the mystery. They have found that unlike other disease-causing bacteria that enter the root, fruit or leaf by producing enzymes to break down the plant’s cell wall, Salmonella sneaks in through a tiny gap created when a lateral root branches out...
प्रयागराज के समान पूज्यनीय तीर्थ रामेश्वर बदहाली के दशं से है घायल

प्रयागराज के समान पूज्यनीय तीर्थ रामेश्वर बदहाली के दशं से है घायल

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घाट,रामेश्वर(पिथौरागढ़)/रमाकान्त पन्त/हिमालयी भूभाग में बहनें वाली सरयू और रामगंगा के पवित्र संगम रामेश्वर तट में भिनभिनाती गंदगी के अंबार से इन नदियों का गंगत्व खतरे में पड़ गया है।श्रद्वा व भक्ति के इस संगम में यहां का जल आचमन योग्य भी नही रहा। गंदगी से पटे रामेश्वर घाट में लोगो को दाह संस्कार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।उल्लेखनीय है, कि रामेश्वर के तट पर दूर दराज क्षेत्रों से लोग यहां शव दाह को लाते है।ऐसी मान्यता है रामेश्वर के तट पर शव दाह के पश्चात् परम व दुर्लभ मुक्ति की प्राप्ति होती है।विभिन्न त्योहारों के अवसर पर यहां बड़े बड़े मेले लगते है। मकर सक्रांन्ति व शिवरात्री पर लगनें वाले मेले की रौनक समूचे क्षेंत्र में प्रसिद्व है।लेकिन यहां के पावन सगंम पर बजबजाती गंदगी के अम्बार से भक्तजनों के श्रद्वा व भक्ति को ठेस पहुंच रही है। दाह संस्कार से बची लकड़ी व कपड़ों के विखराव ने...
सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम

सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम

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भारत की राजनीति का वो दुर्लभ दिन जब विपक्ष अपनी विपक्ष की भूमिका चाहते हुए भी नहीं नहीं निभा पाया और न चाहते हुए भी वह सरकार का समर्थन करने के लिए मजबूर हो गया, इसे क्या कहा जाए? कांग्रेस यह कह कर क्रेडिट लेने की असफल कोशिश कर रही है कि बिना उसके समर्थन के भाजपा इस बिल को पास नहीं करा सकती थी लेकिन सच्चाई यह है कि बाज़ी तो मोदी ही जीतकर ले गए है। “आरक्षण",  देश के राजनैतिक पटल पर वो शब्द,जो पहले एक सोच बना फिर उसकी सिफारिश की गई  जिसे,एक संविधान संशोधन बिल के रूप में प्रस्तुत किया गया, और अन्ततः  एक कानून बनाकर देश भर में लागू कर दिया गया। आजाद भारत के राजनैतिक इतिहास में 1990 और 2019 ये दोनों ही साल बेहद अहम माने जाएंगे। क्योंकि जब 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह ने देश भर में भारी विरोध के बावजूद मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर  "जातिगत आरक्षण" को लागू किया था तो उनका यह क...
राज्य सरकार के लोकायुक्त कानून न बनाने पर होगा आंदोलन !

राज्य सरकार के लोकायुक्त कानून न बनाने पर होगा आंदोलन !

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लोकपाल लोकायुक्त कानून संसद के दोनों सदनों ने 17 दिसंबर और 18 दिसंबर 2013 को पास किया है। 01 जनवरी 2014 को कानून बन गया। 16 जनवरी 2014 को गॅझेट निकाला है। लेकिन केंद्र सरकार लोकपाल कानून का अंमल नहीं कर रही है। लोकायुक्त कानून लोकपाल कानून बनने के बाद एक साल के अंदर हर राज्योंने करना है। ऐसा कानून कह रहा है। लेकिन लोकपाल कानून बनकर 2013 से आज 2018 तक पांच साल बीत गए है। फिर भी राज्य सरकार लोकायुक्त कानून नही बना रहीं है। इसलिए कार्यकर्ताओंने अपने अपने राज्यों में आंदोलन करना होगा। मै 30 जनवरी 2019 को महाराष्ट्र राज्य मे लोकायुक्त कानून बने इसलिए मेरे गांव रालेगणसिद्धी में आंदोलन कर रहा हूं।   देश में बढते भ्रष्टाचार को रोकथाम लगे इसलिए 16 अगस्त 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान पर लोकपाल लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। उस आंदोलन में देश की जनता रास्ते पर उतर गई थी। तत्क...
आर्थिक आरक्षण की सुबह का होना

आर्थिक आरक्षण की सुबह का होना

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नरेन्द्र मोदी सरकार ने आर्थिक निर्बलता के आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण देने का जो फैसला किया है वह निश्चित रूप से साहिसक कदम है, एक बड़ी राजनीतिक पहल है। इस फैसले से आर्थिक असमानता के साथ ही जातीय वैमनस्य को दूर करने की दिशा में नयी फिजाएं उद्घाटित होंगी। निश्चित ही मोदी सरकार ने आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए यह आरक्षण की व्यवस्था करके केवल एक सामाजिक जरूरत को पूरा करने का ही काम नहीं किया है, बल्कि आरक्षण की राजनीति को भी एक नया मोड़ दिया है। इस फैसले से आजादी के बाद से आरक्षण को लेकर हो रहे हिंसक एवं अराजक माहौल पर भी विराम लगेगा। देशभर की सवर्ण जातियां आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग करती आ रही हैं। भारतीय संविधान में आरक्षण का आधार आर्थिक निर्बलता न होकर सामाजिक भेदभाव व शैक्षणिक पिछड़ापन है। आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को नौकरियों में आरक्षण देने का फैसला एक सकारात्मक परिवेश का द्योतक है,...
कुंभ में भीड़ पर रखना होगा काबू

कुंभ में भीड़ पर रखना होगा काबू

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अब फिर से कुंभ मेला का शंखनाद हो गया है। प्रयागराज में एक बार फिर आस्था का ऐसा जमघट लगने जा रहा है जिसमें संगम की त्रिवेणी में डुबकी लगाने जहाँ करोड़ों भक्त देशभर के कोने-कोने से इकट्ठे होंगें वहीं महाकुम्भ के अद्भुत और विहंगम नज़ारे को कैमरे में कैद करने और नजारे को नजदीकी से देखने के लिए सारे संसार से करोड़ों पर्यटक भी आएंगे। ये सब प्रयाग के संगम में आस्था की डुबकी भी लगाएंगे। इस दौरान घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र और धूप-दीप की सुगंध से सारा शहर ही नहीं पूरा प्रयाग मंडल महकेगा। हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में गंगा-यमुना और भूगर्भ सरस्वती के संगम पर पवित्र मन से तीन डुबकी लगाने से मनुष्य को जन्म-पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति होती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। पर इसके साथ यह  भी उतना ही सच है कि इतने विशाल स्तर पर  कुंभ मेले के आयोजन की व्यवस्थाएं करना किसी सर...
सफलता का महत्वपूण मंत्र है ‘फॉलोअप’

सफलता का महत्वपूण मंत्र है ‘फॉलोअप’

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हालही में मैंने एक अत्यधिक प्रतिष्ठित संगठन के लिए रणथंभौर में ऑफसाइट/आउटबाउंड कार्यक्रम आयोजित किया था। मेरी एक गतिविधि मेरे द्वारा डिजाइन की गई एक विस्तृत प्रश्नावली के माध्यम से आत्म-विश्लेषण की थी। इसके दो भाग हैं- 'अपने आप को एक व्यक्ति के रूप में जानें’ और दूसरा भाग है 'अपने आप को एक प्रोफेशनल के रूप में जानें’। एक प्रश्न में मैंने पूछा कि अपनी पांच कमजोरियों को लिखें, तो एक व्यक्ति ने अपनी एक कमजोरी के रूप में लिखा था 'फॉलो अप में कमजोर’। जिस क्षण मैंने यह देखा, इसने मेरे कान खड़े कर दिए। मैं स्वयं इस कमजोरी का शिकार रहा हूं और जो लोग मुझे जानते हैं वे इससे सहमत भी होंगे। और तथ्य यह है कि, मैंने लंबे समय तक इसकी उपेक्षा की है। मैंने इस पर हाल ही में आधे-अधूरे मन से काम करना शुरू किया है। मेरे मन में हमेशा यह डर था कि अगर मैं बार-बार फॉलो अप करता हूं, तो दूसरा व्यक्ति परेशान हो सक...
ऑस्ट्रेलिया डायरी : विकास के मापदंडों पर विकसित देश व भारत

ऑस्ट्रेलिया डायरी : विकास के मापदंडों पर विकसित देश व भारत

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विभिन्न देशों में वेतनमान और पेट्रोल की कीमतें -     ऑस्ट्रेलिया में न्यूनतम वेतन लगभग 1,55,000 रुपए (एक लाख पचपन हजार रुपए) महीना है। पेट्रोल की कीमत औसतन 78 रुपए प्रति लीटर है। -     फ्रांस में न्यूनतम वेतन लगभग 1,20,000 रुपए (एक लाख बीस हजार रुपए) महीना है। पेट्रोल की कीमत औसतन 112 रुपए प्रति लीटर है। -     इंग्लैंड में न्यूनतम वेतन लगभग 1,20,000 रुपए (एक लाख बीस हजार रुपए) महीना है। पेट्रोल की कीमत औसतन 105 रुपए प्रति लीटर है। -     जर्मनी में न्यूनतम वेतन लगभग 1,20,000 रुपए (एक लाख बीस हजार रुपए) महीना है। पेट्रोल की कीमत औसतन 120 रुपए प्रति लीटर है। -     अमेरिका में न्यूनतम वेतन लगभग 85,000 रुपए (पिच्चासी हजार रुपए) महीना है। पेट्रोल की कीमत औसतन 65 रुपए प्रति लीटर है। -     चीन मेंं सरकारी घोषित न्यूनतम वेतन (एक्चुल वेतन बहुत कम है) लगभग 20,000 रुपए (बीस हजार रुपए...
स्वयंसेवी संस्थाओं की  धूमिल होती छवि

स्वयंसेवी संस्थाओं की धूमिल होती छवि

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  भारत को स्वयं सेवी संस्थाओं का देश कहा जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने संपूर्ण देश में पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं की गणना कराई थी। इसके अनुसार देश भर के राज्यों में 38 लाख से कुछ अधिक एवं संघीय प्रदेशों में 72000 स्वयं सेवी संस्थाएं पंजीकृत थी। तीन राज्यों ने अपने आंकड़े नहीं भेजे थे। इस प्रकार ऐसी संस्थाओं की संख्या 35 लाख अनुमानित की जा सकती हैै। भारत में कुल 35 लाख सरकारी स्कूल काम कर रहे हैं एवं सरकारी अस्पतालों की संख्या केवल 36000 के लगभग है। पूरे देश में 89 लाख 30 हजार पुलिस कर्मी कार्यरत हैं जबकि इनकी स्वीकृत संख्या 39 लाख है। ऐसा अनुमान लगाया गया है पूरे विश्व में स्वयं सेवी संस्थाओं की संख्या एक करोड़ के लगभग है एवं दुनिया की कुल आबादी लगभग 8 अरब से कुछ ज्यादा है। इस प्रकार हमारे देश में विश्व की जनसंख्या का लगभग 16-17 प्रतिशत निवास क...
मेघालय हाई कोर्ट के एक सही फैसले पर सियासत?

मेघालय हाई कोर्ट के एक सही फैसले पर सियासत?

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भारत का विभाजन 1947 में धर्म के आधार पर हुआ था। अलग हो कर पाकिस्तान ने स्वयं को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया जबकि भारत ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र रहना पसंद किया। भारत को भी उस समय स्वयं को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था। जो हिंदू उस समय भारत नहीं आ पाए वो और उनकी पीढ़ी तीन पड़ोसी देशों में तरह तरह के अत्याचार सह रही हैं। पड़ोसी देशों अथवा दुनिया के किसी भी कोने से कोई हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध,  गारो, खासी जयंती, पारसी, ईसाई जब भी भारत आए भारत सरकार को उन्हें तुरंत नागरिकता देनी चाहिए और बहुत ज्यादा कागज़ात प्रमाण के तौर पर नहीं मांगने चाहिए।’’ मेघालय होई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुदीप रंजन सेन ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट के एक मामले में साहसिक फैसला सुनाते हुए भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की वर्तमान प्रक्रिया को सुधारने और समान कानून लाने का अनुरोध किया है। उ...