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Fake game of NAAC & NIRF

Fake game of NAAC & NIRF

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India is an academic powerhouse. At least, that is the picture you get from the records of the National Assessment and Accreditation Council (NAAC). Of India’s accredited universities, 140 or one of every three has a top A grade. Of these, 42 are at pole position with an impressive A++. When it comes to colleges, 546 have an A grade, 319 an A+ and 87 an A++.The stakes are high because such ratings allow a college to open its doors to foreign students, seek grants or even acquire autonomy to grant degrees. Eight universities, largely private and deemed, have so far been accorded scores by this body of evaluators that are even higher than those for the Indian Institute of Science, which is India’s pre-eminent institute, according to National Institutional Ranking Framework (NIRF) rankin...
जी-20 देशों ने कश्मीर की बदलती तस्वीर को देखा

जी-20 देशों ने कश्मीर की बदलती तस्वीर को देखा

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-ललित गर्ग - श्रीनगर में जी-20 के पर्यटन कार्यसमूह के तीन दिवसीय सम्मेलन से जम्मू-कश्मीर के बदलते सुखद एवं लोकतांत्रिक स्वरूप, पर्यटन को नई दिशा मिलने एवं बॉलिवुड के साथ रिश्ते मजबूत होने का आधार मजबूत हुआ है। बीते 75 साल से जो हालात रहें, जिनमें विदेशी ताकतों का भी हाथ रहा है, उसमें एक पनपी सामाजिक शोषण, आतंक, अन्याय, अशांति एवं पक्षपात की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिये जाने की तस्वीर सामने आयी है। वैश्विक और टिकाऊ पर्यटन को प्रोेत्साहन देने की दृष्टि से सम्मेलन का कश्मीर में आयोजन जम्मू कश्मीर की 1.30 करोड़ की आबादी के लिए गौरव की बात है।श्रीनगर में डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर इंटरनैशनल कन्वैंशन सेंटर में भारत सरकार ने जी-20 से जुड़े इस आयोजन को भव्य एवं सुरक्षित परिवेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। चीन एवं पाकिस्तान के विरोध के बावजूद भारत ने अपने आंतरिक मामलों में किसी अन्...
शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है।

शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है।

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शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है। और आजकल हमारे देश के बड़े शहरों में बहुत अधिक शोर प्रदूषण हो रहा है। यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर शोर प्रदूषण है क्या ? और इसके दुष्प्रभाव क्या हैं ? वास्तव में, शोर प्रदूषण अनुपयोगी ध्वनि होती है जिससे मानव तो मानव यहां तक कि जीव-जंतुओं तक को भी परेशानी होती है। वास्तव में,जब शोर की तीव्रता पर्यावरण में अत्यधिक हो जाती है तब उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। आज हमारे देश की लगातार जनसंख्या बढ़ रही है और जनसंख्या वृद्धि के साथ ही यातायात के साधनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। विकास के साथ ही विभिन्न औधोगिक कल-कारखानों में भी अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है और यही कारण भी है कि शोर(ध्वनि) प्रदूषण में भी इजाफा हुआ है। ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌इसके अलावा बिजली कड़कना, बिजली गिरना आदि जैसी कई प्राकृतिक घटनाएं, जो शोर उत्पन्न करतीं हैं, भी म...
आम के बहाने पसमांदा मुसलमानों के साथ योगी

आम के बहाने पसमांदा मुसलमानों के साथ योगी

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आर.के. सिन्हा मिर्जा ग़ालिब मीठे आम के लिए जान देते थे। वे अपने दोस्तों-यारों के साथ आम खाना पसंद करते थे। उनकी आम की पार्टियाँ मशहूर हैं I वे वर्ष 1827 में दिल्ली से कोलकाता गए थे। वे दिल्ली से कोलकाता जाते वक्त कानपुर, लखनऊ, बाँदा, इलाहाबाद होते हुए बनारस पहुँचे। वे बनारस में छह महीने ठहरे थे। उन्होंने अपने सफर के दौरान उत्तर प्रदेश के मशहूर दशहरी या लंगड़ा आम का जमकर स्वाद स्वाद चखा । आम की अलग-अलग प्रजातियां सारे देश में मिलेंगी पर उत्तर प्रदेश में मिलने वाले मिश्री जैसे रसीले आमों की बात ही अलग है। अजीब सा संयोग है कि राज्य में आम की खेती और व्यापार में मुसलमानों की अच्छी-खासी भूमिका है। आपको सारे प्रदेश में आम की खेती करते हुए ज्यादातर मुसलमान ही मिलेंगे। कुछ समय पहले राज्य के कुछ इलाकों में बेमौसमी बारिश तथा ओला वृष्टि से आम किसानों के स...
किरण रिजूजू को हटाया गया या उनका टास्क पूरा हो गया..??

किरण रिजूजू को हटाया गया या उनका टास्क पूरा हो गया..??

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पहले तो समझिए कि किरण रिजूजू बहुत जूनियर मंत्री थे जिन्हें एकाएक कानून मंत्रालय जैसा बड़ा पोर्टफोलियो दिया गया था। जाहिर है जिसने दिया है उसने कुछ टास्क भी दिया था। अब किरण रिजूजू क्या कर रहे थे?अपने टास्क अनुसार लगातार न्यायपालिका पर हमलावर थे।उन्होंने हर उस तरह न्यायपालिका पर हमला किया जो अभी तक आमजन के अंदर था लेकिन कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के डर से आमजन उसे बोलने से डरता था। उन्होंने अपने टास्क के तहत आमजन को वो ताकत दी कि करो न्यापालिका को एक्सपोज, कंटेम्प्ट होगा तो पहले मेरा होगा। इसके बाद वो खुद भी कोर्ट पर हमलावर हुए।उन्होंने भाई भतीजावाद पर हमला किया कि ये खुद से खुद ही जज चुन लेते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि इनके कुछ जज तो रिटायर होने के बाद एन्टी इंडिया फोर्स जॉइन कर लेते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि ये 4-5 जज बैठकर भारत का फैसला नही कर सकते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि ये जज तो अपन...
कर्नाटक में कांग्रेस की नई कथा शुरू

कर्नाटक में कांग्रेस की नई कथा शुरू

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आख़िर कड़ी मशक़्क़त के बाद कांग्रेस कर्नाटक में सत्तारूढ़ हो गई। भारी बहुमत से जीत के बावजूद मुख्यमंत्री तय करने को लेकर जो गतिरोध कांग्रेस पार्टी में चल रहा था, आखिरकार उसका पटाक्षेप आर हो ही गया। राजयोग सिद्धारमैया के हिस्से में आया डी के शिवकुमार के हिस्से में तपस्या। जहां कुर्सी काँटों का ताज़ा होती है तो तपस्या फ़ौरन फलीभूत होने के उद्देश्य से की जाती है। औपचारिकताओं के निर्वहन के बाद ताजपोशी हो गई। कांग्रेस के नेता कहते रहे हैं कि लोकतांत्रिक पार्टी होने के कारण सहमति पर मंथन जारी रहा ,लेकिन आम विमर्श में यह मुद्दा हावी रहा कि विधानसभा चुनाव में 135 सीटें जीतने के बावजूद दल का नेता चुनने में इतनी देरी क्यों हुई? सब कुछ ठीक नहीं है। कर्नाटक में पार्टी की जीत का नेतृत्व करने वाले डीके शिवकुमार कहते रहे हैं कि ‘उन्होंने पांच साल पार्टी के लिये संघर्ष किया, जेल भी गये। वे वफादार ...
<strong>क्यों भारत को चाहिएं कई सुधा मूर्ति</strong>

क्यों भारत को चाहिएं कई सुधा मूर्ति

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क्या पैसे वाले मनुष्यता में नहीं करते यकीन या क्यों भारत को चाहिएं कई सुधा मूर्ति आर.के. सिन्हा श्रीमती सुधा   नारायणमूर्ति की शख्सियत से कोई बिना प्रभावित हुये नहीं रह सकता। उन्होंने अपने पति एन. नारायणमूर्ति को अपनी कंपनी खोलने के लिए अपने प्रिय गहने तक बेच डाले थे। उन्होंने पति को पैसे देकर उन्हें प्रेरित किया कि वे अपने हिस्से के आकाश को छू लें। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की सास सुधा मूर्ति जब कोई बात कहती हैं तो उसके पीछे उनके जीवन भर का अनुभव और दर्शन छिपा होता। उन्होंने कुछ दिन पहले एक टीवी के कार्यक्रम में उन लोगों को प्यार-प्यार में कसा जिनके लिए जीवन में  पैसा ही सब कुछ होता है। इस तरह के लोग पैसे के आगे शेष सभी चीजों को गौण ही मानते हैं। ये उन स्त्रियों को भी दोयम दर्जे का ही मानते हैं जो साड़ी या सवार-कमीज पहनती हैं। सुधा जी ने इस बाबत अपने साथ घटी एक सच्...
<em>आखिर क्यों बंद होने जा रहे हैं दो हजार रूपये के नोट ?</em>

आखिर क्यों बंद होने जा रहे हैं दो हजार रूपये के नोट ?

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डॉ. अजय कुमार मिश्राभारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने एक आदेश के तहत दो हजार के नोटों को वापस लेने का फैसला लिया है | वर्ष 2016 में जब नोटबंदी हुई थी तब उस समय की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए इन्हें बाजार में लाया गया था | नोटों को वापस लेने के पीछे आर.बी.आई. का कहना है की 89% दो हजार के नोट मार्च 2017 के पहले जारी किये थे और ये नोट अपनी अवधि पूरी कर चुके है | प्रचलन में इन बैंक नोटों का कुल मूल्य, 31 मार्च, 2018 को अपने चरम पर ₹6.73 लाख करोड़ से घटकर ₹3.62 लाख करोड़ हो गया है | 31 मार्च, 2023 तक, प्रचलन में कुल नोटों का केवल 10.8% ही दो हजार के नोट थे | आर.बी.आई. का यह भी कहना है की दो हजार के नोट साधारणतया प्रयोग में नहीं है | ऐसे में दो हजार की नोट को लेकर आम आदमी के जेहन में कई बातें है जिसकी जानकारी से ही उद्देश्यों की पूर्ति हो पायेगी | आइये जानते है की आखिर क्यों बंद होने जा रहें ह...
छोटी छोटी बचतों से अर्थव्यवस्था को मिलता है बल

छोटी छोटी बचतों से अर्थव्यवस्था को मिलता है बल

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यह सनातनी संस्कार ही हैं जो भारत के नागरिकों को छोटी छोटी बचतें करना सिखाते हैं। भारतीय परम्पराओं के अनुसार हमारे बुजुर्ग हममें बचत की प्रवृत्ति बचपन में ही यह कहकर विकसित करते हैं कि भविष्य में आड़े अथवा बुरे वक्त के दौर में, पुराने समय में की गई बचत का बहुत बड़ा सहारा मिलता है। भारतीय परिवारों में तो गृहणियां घर खर्च के लिए उन्हें प्रदान की गई राशि में से भी बहुत छोटी राशि की बचतें करने का गणित जानती हैं एवं वक्त आने पर अपने परिवार के सदस्यों को उक्त बचत की राशि सौंप कर संतोष का भाव जागृत करती हैं। आजकल के आर्थिक दौर में केवल धन का अर्जन करना ही काफी नहीं है बल्कि अर्जित किए गए इस धन का कुछ भाग, बचत के रूप में सही स्थान पर सुरक्षित निवेश करना भी जरूरी है। यदि कमाए गए धन को बचत के रूप में निवेश नहीं किया जाता है तो उस राशि का बाजार में मूल्य, मुद्रा स्फीति के चलते, कम होते होते भव...
बागेश्वर बाबा का जादू

बागेश्वर बाबा का जादू

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
एक पच्चीस वर्ष का युवा कथावाचक बिहार जैसे राज्य में आता है और दूसरे ही दिन आठ से दस लाख की भीड़ उमड़ पड़ती है, तो यह सिद्ध होता कि अब भी इस देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका धर्म है। मैं यह इसलिए भी कह रहा हूँ कि इसी बिहारभूमि पर किसी बड़े राजनेता की रैली में 50 हजार की भीड़ जुटाने के लिए द्वार द्वार पर गाड़ी भेजते और पैसे बांटते हम सब ने देखा है। वैसे समय में कहीं दूर से आये किसी युवक को देखने के लिए पूरा राज्य दौड़ पड़े, तो आश्चर्य होता है। मेरे लिए यही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का सबसे बड़ा चमत्कार है।वह दस लाख की भीड़ किसी एक जाति की भीड़ नहीं है, उसमें सभी हैं। बाभन-भुइंहार हैं, तो कोइरी कुर्मी भी... राजपूत हैं तो बनिया भी, यादव भी, हरिजन भी... यह वही बिहार है जहां हर वस्तु को जाति के चश्मे से देखने की ही परम्परा सी बन गयी है। उस टूटे हुए बिहार को एक युवक पहली बार में इतना बांध देता है, ...