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पहलवानों के धरना का अंत तत्काल नहीं

पहलवानों के धरना का अंत तत्काल नहीं

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अवधेश कुमार जंतर - मंतर पर पहलवानों का धरना धीरे-धीरे उस अवस्था में पहुंच गया जहां से इसका अंत होना इस समय कठिन लग रहा है। किसान संगठन और खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने अपना जो तेवर दिखाया उससे साफ है कि धरने को लंबा खींचने की रणनीति बना दी गई है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की आगे सुनवाई करने से इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि महिला पहलवानों को कोई शिकायत है तो संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय या उच्च न्यायालय में जाएं। उच्चतम न्यायालय ने महिला पहलवानों की ओर से मामले की जांच की निगरानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराए जाने की मांग भी खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि याचिका में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई थी वह हो गई है और सुरक्षा की बात थी वह भी उद्देश्य पूरा हो गया है। ध्यान रखिए, पीठ में प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति जे पी पार...
संघीय ढांचे व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये जरूरी ये फ़ैसले

संघीय ढांचे व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये जरूरी ये फ़ैसले

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की शीर्ष अदालत के उन फ़ैसलों से जनमत को जोड़ा है जो देश में कथित “डबल इंजिन” की सरकार जैसी कल्पनाओं को नकारता हैं। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नतीजे शायद यही संदेश की ओर इशारा करते दिखे कि “जिन मुद्दों को लोकतांत्रिक मूल्यों व सर्वमान्य कायदों के आधार पर सुलझाया जा सकता है, उन्हें राजनीतिक जिद और अहंकार इतना जटिल बना देता है कि उन पर अदालतों को निर्णय देने पड़ते हैं।“ इस सबमें जन कल्याण और विकास पीछे छूट जाता है। देश के बड़े दलों के लिए जनता का कर्नाटक और सुप्रीम कोर्ट के ताजे फ़ैसले मर्गदर्शी सिद्धांत हो सकते हैं। चुनी हुई सरकार गिराने [महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार] के लिये चले राजनीतिक प्रपंच में राज्यपाल की भूमिका और गुट विशेष की राजनीतिक तिकड़मों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाये, वहीं एक अन्य फैसले में दिल्ली सरकार को अधिकार देकर दायि...
द केरल स्टोरी’ और ‘रैंट’ का राजरोग…

द केरल स्टोरी’ और ‘रैंट’ का राजरोग…

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------------------------------------- कथित बुद्धिजीवियों, लिबिर-लिबिर गैंग और कौमियों का प्रिय शब्द है- 'रैंट'। इसका ढीला-ढाला अनुवाद तो बकवास या फिर प्रलाप होगा, लेकिन 'लेली' (लेफ्ट-लिबिर)गैंग के मुताबिक उनके अलावा दुनिया में जिस किसी ने दूसरे तरह की कोई भी बात कही तो वह रैंट है, उसे डिस्क्रेडिट करने का जरिया है। जैसे, अब्राहमिक मजहब बताते हैं कि उनके पैगंबर और उनकी किताबों में दुनिया का सारा सत्य समाहित है, उसके अलावा कुछ भी कहना 'कुफ्र' है, कहना क्या सोचना भी और दुनिया को एकरंगा कर देना उनकी पवित्र ड्यूटी है।--------------'द केरल स्टोरी' रैंट है, 'द कश्मीर फाइल्स' रैंट है, सीताराम गोयल के सवाल रैंट हैं, राम जन्मभूमि मामले में के के मोहम्मद की गवाही रैंट है, लेकिन डी एन झा की 'हिंदू भी गोमांस खाते थे' वाली बात आप्तवचन हैं, अल्लाह का हुक्म है और जीजस की मंशा है। यही बात रोमिला थापर के...
यूपी में भगवा लहर का जलवा कायम

यूपी में भगवा लहर का जलवा कायम

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राष्ट्रीय फलक पर योगी जी का बढ़ेगा कदमृत्युंजय दीक्षितमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भगवा राजनीति का गढ़ बनने की दिशा में अग्रसर प्रतीत हो रहा है। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी दलों के साथ पहली बार 73 सीटों पर विजय प्राप्त की थी, 2017 में भी पार्टी को प्रचंड विजय मिली और अब गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश में जितने भी चुनाव हो रहे हैं हर चुनाव में भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ रहा है, 2017 में नगर निगम चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव, 2022 के विधानसभा चुनाव और अब 2023 के नगर निकाय चुनावों ने तो एक नया अध्याय लिखा है।निकाय चुनाव 2023 में मुख्यमंत्री योगी जी के नेतृत्व में भाजपा ने सभी 17 नगर निगमों औरउसके बाद नगर पंचायत और पालिका चुनावों में भी सीट व वोट प्रतिशत के हिसाब से अब तक की सबसे बड़ी जीत अर्जित कर ...
समुद्र में पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत 25 हजार करोड़

समुद्र में पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत 25 हजार करोड़

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समुद्र के रास्ते नशीले पदार्थों के भारत आने का सिलसिला जारी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, एनसीबी और भारतीय नौसेना ने शनिवार को समुद्र में एक विशेष अभियान के तहत भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त की। इसकी कीमत 25 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। एनसीबी के अधिकारियों के मुताबिक, एनसीबी और भारतीय नौसेना द्वारा जब्त की गई हाई क्वालिटी वाली मेथामफेटामाइन के वजन और कीमत की गणना की गई है। एनसीबी से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, कुल जब्ती 2,525 किलो होने की है और इसकी कीमत 25 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। एक बार ढाई टन से ज्यादा नशीले पदार्थ का पकड़ा जाना बड़ी बात है। पिछले कुछ समय से अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक में इस तरह की कई खेप पकड़ी गई है। अधिकारियों ने बताया है कि इसके आकलन में 23 घंटे से ज्यादा समय लगा। इसकी कीमत इसलिए अधिक आंकी गई है क्योंकि यह उच्च ग्रेड मेथामफेटामाइन है। अधिकारियों...
सशक्त देश के निर्माण में परिवार अभूतपूर्व संस्था (15 मई विशेष

सशक्त देश के निर्माण में परिवार अभूतपूर्व संस्था (15 मई विशेष

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
प्रत्येक वर्ष 15 मई को इंटरनेशनल फैमिली डे यानी कि 'विश्व परिवार दिवस' के रूप में मनाया जाता है। देखा जाए तो यह संपूर्ण धरती ही एक परिवार है और दुनिया के हरेक देश में परिवार है। वास्तव में, परिवार के साथ हमें बड़ों ,अपने बुजुर्गों की छांव मिलती है, प्रेम , सहानुभूति परवरिश, देखभाल, परम्परा, संस्कृति से जुड़ाव के साथ-साथ अकेलेपन से दूर रखने में अहम भूमिका परिवार ही निभाता है।संस्कृत में 'वसुधैव कुटुम्बकम'( संपूर्ण धरती ही परिवार है) की कल्पना यूं ही नहीं की गई है। यहाँ हम यह बात कह सकते हैं कि परिवार का प्राथमिक कार्य बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करना है, जैसे-भोजन, आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक समर्थन आदि लेकिन एक परिवार की भूमिका केवल इन कार्यों तक सीमित नहीं है, वास्तव में, यह नागरिकता का पहला स्कूल भी है। परिवार से ही समाज बनता है और समाज से ही देश। परिवार है तो सबकुछ है, परिवा...
कर्नाटक का झटका

कर्नाटक का झटका

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किसी भी चुनाव में हारना अथवा विजय प्राप्त करना मात्र एक सामान्य सी बात है, परन्तु कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार, भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। कर्नाटक प्रदेश, भारतीय जनता पार्टी के दक्षिण भारतीय अभियान का मुख्य द्वार था। इसी प्रदेश के द्वारा, भाजपा पार्टी का दक्षिण भारत का विजय अभियान होकर जाता था, परन्तु अब यदि कोई विशेष घटना घटित नहीं होती है तो, यह द्वार बंद होता प्रतीत हो रहा है। इस द्वार के बंद होने से आगामी वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में, पार्टी के लिए नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार का निष्पक्ष मंथन करना भाजपा पार्टी के लिए अत्यंत आवश्यक है। भाजपा, भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत, संस्कारवान, ईमानदार, लोकप्रिय और जनता के हित को सर्वोपरी रखने वाली एक राजनीतिक पार्टी है, जिसको राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सीचा एवं पल्लवित किया है।कर्...
भाजपा का पराजय: कर्नाटक

भाजपा का पराजय: कर्नाटक

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कर्नाटक भाजपा के 5 साल के शासनकाल में चार चार मुख्य मंत्रियों ने शपथ ली। लेकिन जब चुनावी लड़ाई की बात आई तो पूरी की पूरी जिम्मेवारी नरेंद्र मोदी ने अपने माथे उठा ली। कर्नाटक भाजपा की चुनावी लड़ाई में नरेंद्र मोदी भाजपा परिवार के एक ऐसे अभिभावक की भूमिका में आते हैं, जो हारी हुई लड़ाई को न केवल अपनी पूरी हिस्सेदारी से लड़ता है, बल्कि अपने सभी आश्रितों के हिस्से से भी अंतिम सांस तक लड़ता है, ठीक भीष्म पितामह की तरह। नरेंद्र मोदी वाली भाजपा कभी भी उस तरह की सरकार चलाने में विश्वास नहीं रखती, जैसा कि कर्नाटक में पिछले 5 बरस हुआ। '14 के बाद वाली भाजपा स्थाई, स्थिर और मजबूत सरकार के लिए जानी जाती है। 2018 के असेंबली चुनाव में केवल बहुमत से 9 सीट कम होने व क्षत्रिय फैक्टर आदि के कारण, कर्नाटक भाजपा ने सीएम के चार-चार दावेदारों को ढोया। 2023 की चुनावी तैयारी भाजपा ने उस हिसाब से की थी, जिस...
सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन – हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ?-अनुज अग्रवाल

सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन – हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ?-अनुज अग्रवाल

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सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन -हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ? - अनुज अग्रवाल1) अपनों (येदियुरप्पा एवं जगदीश शेट्टियार) को दरकिनार कर पराये (बासवराव बोम्मई) को मुख्यमंत्री बनाने का संदेश पार्टी व वोटरो में बहुत ख़राब गया। पार्टी कार्यकर्ता भी हाशिए पर आते गए और नवआगंतुकों का पार्टी पर कब्जा हो गया।2) बासवराव बोम्मई कभी भी येदियुरप्पा के साए से बाहर नहीं निकल पाए और अपनी बड़ी व अच्छी छवि नहीं बना पाए। साथ में येदियुरप्पा की समानांतर सरकार चलती रही। मोदी - शाह का राज्यो में मैनेजर बैठाकर अपनी छवि के भरोसे चुनाव जीतने की रणनीति इस बार बिखर गयी।3) अटल आडवाणी युग के नेताओ को किनारे करने व भक्तों और लाभार्थी जाति के भरोसे बैठे मोदी शाह की जोड़ी ने जब जगदीश शेट्टियार को भी पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर दिया तो पार्टी के परंपरागत समर्थकों व संघ के स्वयंसेवकों का मनोबल टूट ...