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भारतीय संस्कारों को अपनाकर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हर क्षेत्र में हो रहे हैं सफल

भारतीय संस्कारों को अपनाकर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हर क्षेत्र में हो रहे हैं सफल

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, संस्कृति और अध्यात्म
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (यूएस सेंसस ब्यूरो) द्वारा अमेरिका में निवास कर रहे विभिन्न देशों के मूल के अमेरिकी नागरिकों की औसत आय एवं अन्य कई मानदंडो पर जारी की गई जानकारी के अनुसार अमेरिका में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 119,858 अमेरिकी डॉलर है, जो अमेरिका में निवासरत समस्त अन्य देशों के मूल के अमेरिकी नागरिकों की औसत आय में सबसे अधिक है। दूसरे क्रमांक पर ताईवान मूल के अमेरिकी नागरिक आते हैं जिनकी वार्षिक औसत आय 95,736 अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। इसी प्रकार चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 81,497 डॉलर, जापानी मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 80,036 एवं अमेरिकी मूल के गोरे नागरिकों की वार्षिक औसत आय 65,902 आंकी गई है। इसी प्रकार, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे अमेरिकी मूल के नागरिकों की संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या का 13 प्रतिशत है, एशिया के स...
राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता में आदि शंकराचार्य का योगदान

राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता में आदि शंकराचार्य का योगदान

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भारत की विविधता पश्चिमी जगत के लिए तो सदैव से आकर्षण, आश्चर्य एवं शोध की विषयवस्तु रही ही है, अनेक भारतीय विद्वान भी इसे लेकर मतिभ्रम एवं सतही-सरलीकृत निष्कर्ष के शिकार रहे हैं। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि स्थूल, भेदकारी एवं कोरी राजनीतिक बुद्धि एवं दृष्टि से संपूर्ण भारतवर्ष में व्याप्त राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का अनुभव-आकलन किया ही नहीं जा सकता। उसके लिए तो बड़ी गहरी-सूक्ष्म-समग्रतावादी-सांस्कृतिक दृष्टि चाहिए। जो लोग पश्चिमी राष्ट्र-राज्य की कसौटी पर भारत को कसते हैं, उन्हें अंततः निराशा ही हाथ लगती है। वस्तुतः भारत की सत्ता-संप्रभुता तंत्र में न होकर जन में है, राज्य(स्टेट) में न होकर धर्म, समाज और संस्कृति में है। ध्यान रहे कि भारत के लिए धर्म कर्त्तव्य-बोध या आचरणगत सदाचार है, पूजा-पद्धत्ति या निश्चित मत-पंथ का अनुसरण नहीं। हमने एक जन, एक तंत्र(स्टेट), एक भाषा, एक मत-पंथ-संप्रदाय, ...
चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा।

चीन से आगे होंगे तो आगे सोचना भी होगा।

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बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 19 अप्रैल को 142।86 करोड़ की आबादी के साथ भारत अब चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश हो गया है। चीन अब 142।57 करोड़ की जनसंख्या के साथ दूसरे नंबर है। भारत की आबादी चीन से अधिक होने की बात की है, उसी दिन से हम फूल रहे हैं। सोच रहे हैं कि आबादी के बूते हम चीन को मात दे देंगे। लेकिन सिर्फ आबादी ही सब कुछ नहीं है। हेडकाउंट और क्वालिटी वाली आबादी में अंतर होता है। - *डॉ प्रियंका सौरभ* स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनकर चीन को पीछे छोड़ चुका है। इसके अलावा, भारत में करीब 50% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है और इसलिए पूरी तरह से महसूस करने के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश की संभावना, युवा लोगों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण नौकरियों में निवेश किया जान...
हम जो कुछ भी हैं वह हमारी सोच का परिणाम है।

हम जो कुछ भी हैं वह हमारी सोच का परिणाम है।

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औपनिवेशिक शासन के समय जब हर कोई बिना किसी नए विचार के अपने जीवन और नींद में व्यस्त था, उस समय हमारे स्वतंत्रता सेनानी ब्रिटिश सरकार से आजादी पाने के लिए अपनी रणनीति बनाने में व्यस्त थे। सुभाष चंदर बोस, चंदर शेखर आज़ाद, सरदार भगत जैसे सेनानी ये सभी नई सोच के साथ आते हैं क्योंकि वे एक स्वतंत्र, निडर या मजबूत भारत बनाना चाहते हैं। वे अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहे कभी सफलता मिली तो कभी असफल लेकिन वे अपने विचारों पर अडिग रहे। यदि हमें अपने जीवन में सफल होना है या खुद को समाज में एक आदर्श व्यक्ति के रूप में रखना है तो हमें अपनी सोच सदैव सकारात्मक रखनी चाहीए। नकारात्मक विचारों के साथ आप खुद को और दूसरों को भी निराशा की ओर ले जायेंगे। जीवन में सफलता की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति को सकारात्मक सोच के साथ ही अपना कार्य सम्पन्न करना चाहिए। हमारी हमेशा यही कोशिश होनी चाहिए कि हमारी मित्रता एक सकारात्म...
युगांडा से सूडान संकट तक:बदलती भारतीय विदेश नीति

युगांडा से सूडान संकट तक:बदलती भारतीय विदेश नीति

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आर.के. सिन्हा सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल के बीच चल रहे भीषण गृहयुद्ध के चलते वहां हालात तो बद से बदतर होते चले जा रहे हैं। ऐसे में वहां फंसे हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने को लेकर सारा देश चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूडान में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकासी के लिए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं । मतलब यह कि अब सरकार एक्शन मोड में आ गई है। यह बदले हुए मजबूत भारत का नया चेहरा है। अब जहां पर भी भारतवंशी या भारतीय संकट में होते हैं, तो भारत सरकार पहले की तरह हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठती। आपको याद ही होगा कि रूस-यूक्रेन जंग के कारण हजारों भारतीय मेडिकल छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंस गए थे। उन्हें भारत सरकार तत्काल सुरक्षित स्वेदश लेकर आई। भारत के हजारों विद्यार्थी यूक्रेन में थे। वे वहां पर मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग औ...
सोशल मीडिया के खतरों से कैसे बचें ?

सोशल मीडिया के खतरों से कैसे बचें ?

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विनीत नारायणजब देश में सोशल मीडिया का इतना प्रचलन नही था तब जीवन ज्यादा सुखमय था। तकनीकी की उन्नति ने हमारेजीवन को जटिल और तानवग्रस्त बना दिया है। आज हर व्यक्ति चाहे वो फुटपाथ पर सब्जी बेचता हो या मुंबई केकॉर्पोरेट मुख्यालय में बैठकर अरबों रूपये के कारोबारी निर्णय लेता हो, चौबीस घंटे मोबाइल फ़ोन और सोशलमीडिया के मकड़जाल में उलझा रहता है। जिसका बेहद ख़राब असर हमारे शरीर, दिमाग और सामाजिक संबंधोंपर पड़ रहा है।नई तकनीकी के आगमन से समाज में उथल पुथल का होना कोई नई बात नही है। सामंती युग से जब विश्वऔद्योगिक क्रांति की और बड़ा तब भी समाज में भरी उथल पुथल हुई थी। पुरानी पीढ़ी के लोग जीवन में आए इसअचानक बदलाव से बहुत विचलित हो गए थे। गाँव से शहरों की और पलायन करना पड़ा, कारखाने खुले औरशहरों की गन्दी बस्तियों में मजदूर नारकीय जीवन जीने पर विवश हो गये। ये सिलसिला आज तक रुका नही है।भारत जैसे देश में...
24 अप्रैल – राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

24 अप्रैल – राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

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बिखर गई पंचायतें, रूठ गए है पंच।भटक राह से है गए, स्वशासन के मंच।। राज्य सरकार स्थानीय नौकरशाही के माध्यम से स्थानीय सरकारों को बाध्य करती हैं। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए अक्सर ग्रामीण विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों से तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमोदन की आवश्यकता होती है, सरपंचों के लिए एक थकाऊ प्रक्रिया जिसके लिए सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता होती है। स्थानीय कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने की सरपंचों की क्षमता सीमित है। कई राज्यों में, पंचायत को रिपोर्ट करने वाले स्थानीय पदाधिकारियों, जैसे ग्राम चौकीदार या सफाई कर्मचारी, की भर्ती जिला या ब्लॉक स्तर पर की जाती है। अक्सर सरपंच के पास इन स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने की शक्ति भी नहीं होती है। -डॉ सत्यवान सौरभ आजकल हमें ऐसी ख़बरें सुनंने और पढ़ने क...
22 अप्रैल अक्षय तृतीया: भगवान परशुराम जी का अवतार दिवस

22 अप्रैल अक्षय तृतीया: भगवान परशुराम जी का अवतार दिवस

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सबसे व्यापक और प्रचण्ड अवतार है परशुरामजी का झूठी है उनके क्रोधी होने और क्षत्रिय क्षय की बातें --रमेश शर्मा पृथ्वी पर सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना के लिये भगवान् नारायण ने अनेक अवतार लिये हैं। इनमें परशुरामजी का अवतार पहला पूर्ण अवतार है । जो सर्वाधिक व्यापक है । संसार का ऐसा कोई कोना, कोई क्षेत्र या कोई देश ऐसा नहीं जहाँ भगवान् परशुरामजी की स्मृति या चिन्ह नहीं मिलते हों । उन्होंने संसार में शाँति और मानवता की स्थापना के लिये पूरी पृथ्वी की सतत यात्राएँ की । यदि यह कहा जाय कि विश्व में आर्यत्व की स्थापना भगवान् परशुरामजी ने की तो यह सच्चाई का महत्वपूर्ण तथ्य होगा ।भगवान् परशुरामजी का चरित्र वैदिक और पौराणिक इतिहास में सबसे प्रचण्ड और व्यापक है । उन्हे नारायण के दशावतार में छठे क्रम पर माना गया । वे पहले पूर्ण अवतार हैं । उन्हे चिरंजीवी माना गया इसीलिए ऊनकी उपस्थित हरेक युग में म...
April 22, Earth Day 2023 Special

April 22, Earth Day 2023 Special

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धरती माता की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर जगह बनाएं महात्मा गांधी ने एक बार कहा था - पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रदान करती है, लेकिन हर आदमी के लालच को नहीं। मनुष्यों ने पिछले 25 वर्षों में पृथ्वी के जंगल के दसवें हिस्से को नष्ट कर दिया है और यदि प्रवृत्ति जारी रहती है तो एक सदी के भीतर कुछ भी नहीं बचा हो सकता है। करंट बायोलॉजी जर्नल में कुछ महीने पहले प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दो अलास्का के आकार का एक विशाल क्षेत्र - लगभग 3.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर - 1993 के बाद से मानव गतिविधि से कलंकित हो गया है। मनुष्य पृथ्वी पर सभी बायोमास का केवल 0.01% खाता है, लेकिन ग्रह का इतना छोटा हिस्सा होने के बावजूद, उन्होंने सभी जंगली स्तनधारियों के 83% और सभी पौधों के आधे हिस्से का विनाश किया है। हमें खुद को यह याद दिलाने की आवश्यकता बढ़ रही है कि हमें अपनी आन...
भारत में शिक्षा – “मौलिक भारत” के स्थान पर “भ्रमित भारत” बनाने के खेल – अनुज अग्रवाल, संपादक, डायलॉग इंडिया

भारत में शिक्षा – “मौलिक भारत” के स्थान पर “भ्रमित भारत” बनाने के खेल – अनुज अग्रवाल, संपादक, डायलॉग इंडिया

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भारत के शिक्षा संस्थानों में भारतीय परंपरागत ज्ञान व विद्या को नहीं पढ़ाया व सिखाया जाता वरन् हमारा शिक्षा तंत्र , पश्चिमी शिक्षा तंत्र की कॉपी मात्र है।चूँकि भारत का शासन तंत्र भी पश्चिम की कॉपी है तो शिक्षा तंत्र भी वैसा ही होना स्वाभाविक है। मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति में भारत के शिक्षा तंत्र व शासन व्यवस्था का भारतीयकरण करने का उद्देश समाहित है किंतु क्या ऐसा हो पाना संभव है? वैसे भी लागू होने की प्रक्रिया में ही इस नीति में इतने अधिक संशोधन हो चुके हैं व कई प्रस्तावों को लागू करने में टालमटोल हो रही है कि मूल उद्देश्यों को पाना असंभव सा हो गया है।देश का वर्तमान शिक्षा तंत्र कितना प्रभावी अथवा खोखला है इसका गहन विश्लेषण आवश्यक है ताकि सच से सामना हो सके।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति का गठन किया है जो देश के प्रत्येक वकील की डिग्री की वैधता की जाँच करेगा। देश में ला कॉ...