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यह गांधी परिवार गाथा

यह गांधी परिवार गाथा

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दिल्ली के राजघाट से प्रियंका गांधी का भाषण सुनने योग्य है। उनके भाषण में दो बातें आज स्पष्ट सुनाई दी- *पहला 'मेरा*' और दूसरा *'तुम्हारा'*। उन्होंने मेरा किसको कहा? 'मेरा भाई', 'मेरा परिवार' और जब देश की बात आई, प्रधानमंत्री की बात आई, तब उन्होंने कहा- 'आपका प्रधानमंत्री', 'आपका देश', 'आपकी लड़ाई', 'आपकी मीडिया', 'आपकी आवाज'। खून को भुनाकर सत्ता प्राप्त करना कांग्रेश की सबसे सुविधाजनक राजनीति रही है। प्रियंका गांधी के आज का भाषण भी पिता के खून से ही शुरू हुआ। तिरंगा की तरफ इशारा करके उन्होंने कहा इस तिरंगे में राहुल के पिता का खून है। इस धरती में राहुल के पिता का खून है। राहुल अपने पिता के जनाजे के पीछे पैदल चले थे। इसलिए इस देश में राहुल का अपमान नहीं होना चाहिए। क्या विचित्र माँग है कांग्रेस की! राजीव गांधी की हत्या हो गई, सबसे पहला प्रश्न तो यह है कि जिस देश का पूर्व प्रधानमंत्री ...
क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह दुराग्रह है?-ललित गर्ग

क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह दुराग्रह है?-ललित गर्ग

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दशकों तक भारत पर राज करने वाले गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत ने सजा सुनाई तो कांग्रेस देशभर में सड़कों पर हंगामा कर रही है, गांधी की समाधि पर सत्याग्रह कर रही है, कांग्रेस एवं उसके तथाकथित सत्याग्रही नेता क्यों नहीं सत्य को समझ रहे कि सजा मोदी सरकार ने नहीं, सूरत की एक कोर्ट ने सुनाई है। क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह कहीं अधिक स्पष्टता से ‘दुराग्रह’ को उजागर नहीं कर रहा है? महात्मा गांधी ने भारत को एकजुट करने के लिए लड़ाई लड़ी, सत्याग्रह को हथियार बनाया। जबकि राहुल गांधी भारत का, गरीब और कमजोर समुदायों, सिख समुदाय और संविधान का अपमान करने के लिये सत्याग्रह का सहारा ले रहे हैं। भले वे यह सब करते हुए स्वयं को सत्याग्रही कैसे मान सकते हैं?कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के विरुद्ध कांग्रेस द्वारा क...
नई तकनीक से 30 सेकंड में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ 

नई तकनीक से 30 सेकंड में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ 

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(इंडिया साइंस वायर): दूध में मिलावट एक चुनौती है और इसके कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारतीय शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो दूध का दूध और पानी का पानी’ कहावत को सही अर्थों में चरितार्थ कर सकता है। 3डी पेपर के उपयोग से बनाया गया यह एक पोर्टेबल उपकरण है, जो महज 30 सेकंड के भीतर दूध में मिलावट का पता लगा सकता है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस उपकरण की मदद से दूध का परीक्षण घर पर भी आसानी से किया जा सकता है। यह उपकरण यूरिया, डिटर्जेंट, साबुन, स्टार्च, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, सोडियम-हाइड्रोजन-कार्बोनेट और नमक सहित मिलावट के लिए आमतौर पर उपयोग होने वाले पदार्थों का पता लगा सकता है।दूध की शुद्धता का परीक्षण करने के लिए पारंपरिक प्रयोगशाला-आधारित विधियों, जो महँगी और समय लेने वाली हैं, की तुलना में यह अपेक्षाकृत किफायती त...
सावधान ! कोरोना दुष्काल चक्र फिर घूमा है 

सावधान ! कोरोना दुष्काल चक्र फिर घूमा है 

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कोरोना दुष्काल का चक्र भारत में फिर घूमना शुरू हुआ है । फिर एक बार कोरोना संक्रमण की दस्तक चिंता का सबब है। हमें पुराने अनुभव के अनुरूप मास्क लगाने, भीड़भाड़ से बचने, खांसते समय मुंह ढकने तथा सेनिटाइजर के उपयोग पर ज़ोर देना शुरू कर देना चाहिए । वैसे तुलनात्मक रूप से जहां भारत में जहां संक्रमण की दर एक प्रतिशत है, वहीं अमेरिका में उन्नीस व रूस में बारह प्रतिशत है। फिर भी सावधानी ही बचाव है । पिछले चौबीस घंटे में एक हजार से कुछ कम नये संक्रमितों का पता चला तथा महाराष्ट्र व गुजरात में दो-दो मौतों की बात कही जा रही है। संक्रमण पिछले पांच महीनों में सबसे ज्यादा है। कुल संक्रमितों की संख्या साढ़े नौ हजार व दैनिक संक्रमण दर 1.56 बतायी जा रही है। हालांकि देश में अब तक 220.65 करोड़ कोविड रोधी टीके की खुराकें लगायी जा चुकी हैं। जिसने देश को नया आत्मविश्वास दिया है।साथ ही यह तथ्य आत्मविश्वास को ड...
ऑनलाइन गेमिंग की दलदल में फंसती हमारी युवा पीढ़ी ! 

ऑनलाइन गेमिंग की दलदल में फंसती हमारी युवा पीढ़ी ! 

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कम्प्यूटर, एंड्रॉयड, लैपटॉप आदि पर गेमिंग (खेल खिलाना) आज अरबों-खरबों का कारोबार हो चुका है। एंड्रॉयड मोबाइल फोन तो आज कमोबेश हर व्यक्ति के हाथ में नजर आता है। एंड्रॉयड की व सस्ते इंटरनेट की उपलब्धता से आज हमारे बच्चों में विडियो गेमिंग की लत पड़ चुकी है। बच्चे ही नहीं आज हमारे देश के बुजुर्ग तक भी इस लत से अछूते नहीं हैं। कम्प्यूटर तो कम्प्यूटर आज एंड्रॉयड फोन(स्मार्टफोन) पर लगातार गेमिंग का क्रेज़ बढ़ता चला जा रहा है और आज कम्प्यूटर के साथ ही एंड्रॉयड फोन पर गेम खेलना एक फैशन बन गया है। आदमी थोड़ा सा भी कहीं फ्री हुआ नहीं कि गेम खेलना शुरू। घर तो घर, आफिस हो या बस, ट्रेन हो या मेट्रो फुरसत के पलों में आज बच्चों से लेकर युवा पीढ़ी, बुजुर्ग सभी गेमिंग लत में फंस चुके हैं और इससे गेमिंग के धंधे में लगी कंपनियों की पौ बारह हो रही है और वे अरबों रुपये इस धंधे से कमा रहे हैं। आज अखबारों में इ...
राहुल को बोलने की सद्बुद्धि दे भगवान!-ललित गर्ग

राहुल को बोलने की सद्बुद्धि दे भगवान!-ललित गर्ग

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युगीन भारतीय राजनीतिक मनोरचना में शालीनता एवं शिष्टता के स्थान पर स्वच्छन्दता, अशालीन एवं अभद्र भाषा के व्यवहार का अधिक सक्रियता से प्रचलन चिन्ताजनक है। ऐसी स्थिति में शीर्ष राजनेता राजनीतिक शिष्टता एवं लोकतांत्रिक मर्यादा में अपना योगदान कैसे दे सकते हैं? यह प्रश्न समूचे विपक्ष के साथ कांग्रेस के राहुल गांधी को लेकर व्यापक चर्चा में हैं। किसी को कुछ भी कह देना और यहां तक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना गैर जिम्मेदाराना हरकत ही नहीं स्वयं को अति विशिष्ट समझने की अहंकारी मानसिकता भी है, जो एक बड़ी राजनीतिक विसंगति बनती जा रही है। सार्वजनिक जीवन में ऐसी सामंती मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। इसीलिये सूरत की एक अदालत की ओर से आपराधिक मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी संसद सदस्यता भी चली गयी है। यह एक बड़ी राजनीतिक घटना है, इस तरह की सज...
आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान की समस्या उसके जन्म के कारण से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है।

आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान की समस्या उसके जन्म के कारण से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है।

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आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान की समस्या उसके जन्म के कारण से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। दरअसल पाकिस्तान का निर्माण जिस इस्लामी अवधारणा के आधार पर हुआ, उसमें आर्थिक चिंतन जैसी कोई चीज ही नहीं है। कुरान और हदीस में पूरी चिंता सबको मुसलमान बनाने और दुनिया पर इस्लामी एकाधिकार की है। इस बीच, जब जहां भी इस्लामी सत्ता कायम हुई, वहां टैक्स वसूल कर राज करना, आगे ऐसे हमले जारी रखना और कब्जा करने का ही रक्तरंजित इतिहास रहा है।* *किसी इस्लामी राज्य के मुख्यतः चार आर्थिक स्रोत रहे हैं। खाम (लूट का माल), खिराज (कब्जा किए क्षेत्र में किसानों से टैक्स), जजिया (काफिरों से टैक्स) और जकात (मुसलमानों से चंदा या दान)। इसके अतिरिक्त कोई अन्य आर्थिक माडल इस्लामी किताबों में नहीं मिलता। चूंकि मुस्लिम अपने पैगंबर और मूल इस्लामी ग्रंथों को ही संपूर्ण मानते हैं, इसलिए वे इस माडल से बाहर निकलकर सुधार नहीं कर ...
प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है

प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है

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प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है । 2014 के आम चुनावों से पहले मौनी बाबा मनमोहन की सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को शहाबुद्दीन केस में फसाकर झूठी साजिश रची थी और उस वक्त सरकार में बैठे हुए दोयम दर्जे के नेताओं ने शहाबुद्दीन को अपना दामाद तक घोषित कर दिया था । लेकिन उसके बाद उस केस का क्या हुआ यह सभी जानते है । इस समय केंद्र की सारी जांच एजेंसियां किसके इशारे पर और कैसे काम करती थी यह भी जगजाहिर है । लोग तो ऐसा भी कहते थे कि उस समय एक डमी प्रधानमंत्री था और देश का शासन कोई और कहीं और से चला रहा था । खैर वक्त बदला सरकार बदली और जो कांग्रेस और जो कांग्रेसी इस देश की जनता को और इस देश को अपनी पैतृक संपत्ति समझते थे वो अभी खुद अपना वजूद बचाने में लगे हुए है । इतिहास को अगर खंगाला जाए तो काफी ऐसी कहानियां सुनने मिलती है जिससे कांग्...
बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी!

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी!

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रजनीश कपूरबात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे। कफ़ील आज़र अमरोहवी ने जब अपनीये नज़्म लिखी होगी तब उन्हें शायद इस बात का ध्यान नहीं होगा कि उनकी नज़्म के शेर कई परिस्थितियों मेंइस्तेमाल किए जाएँगे। जब भी कभी किसी रहस्यमयी घटना का आंशिक पर्दाफ़ाश होता है तो अक्सर इसी शेर कोयाद किया जाता है। आपने संसद में भी माननीय सांसदों से इस शेर को कई बार सुना होगा। आज इस शेर को एकबार फिर से याद किया जा रहा है। कारण है जम्मू कश्मीर की घाटी में घटी एक घटना का, जिसने पूरे देश कोअचंभे में डाल रखा है।पिछले दिनों एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक शख़्स ने ख़ुद को प्रधान मंत्री कार्यालय का एक बड़ाअधिकारी बता कर जम्मू कश्मीर में ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा ले ली और उन्हीं के संरक्षण में सीमावर्ती राज्य केकई संवेदनशील इलाक़ों में भी चला गया। डॉ किरण पटेल नाम के इस अधिकारी ने सरकारी चिन्ह...
बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

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हमारे देश में बड़ी मुश्किल है, सत्ता से दूर या नज़दीक का नाता रखने वालों के लिए भारत जो कुछ है, वह नरेंद्र मोदी में सिमट गया है। प्रतिपक्ष राहुलगांधी, शरद पंवार,ममता बनर्जी और जाने किस किस की प्रतिच्छाया में भारत को पहचान रहे हैं। और यही वह भारत है, जिसे सत्ता लूटती है, जनता से छीनती है–और उसी को असली भारत बताकर का प्रचार करती है। भारत की राजनीति में इन दिनों का प्रिय विषय है, राहुल गांधी द्वारा विदेश में जाकर देश के लोकतंत्र पर वक्तव्य, सभी आजकल इसी में व्यस्त हैं। इस सबके बीच स्वीडन की संस्था, वी-डेम (वेरायटीज ऑफ़ डेमोक्रेसी) ने डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2023 प्रकाशित की है, जिसमें कुल 179 देशों के लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 97वें स्थान पर चुनावी प्रजातंत्र इंडेक्स में 108वें स्थान पर है, यह 75 वर्ष की उपलब्धि है?। पिछले वर्ष के इंडेक्स में भारत का स्थान 100वां था। तंज़ानिया, बोलीविय...