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सप्तर्षि से उपमित दूरगामी अमृत बजट

सप्तर्षि से उपमित दूरगामी अमृत बजट

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-ः ललित गर्ग:-अमृत काल का पहला बजट अनेक दृष्टियों एवं दिशाओं से महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक है, क्योंकि इसमें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सात फोकस क्षेत्रों की बात की, जिन्हें उन्होंने सरकार का मार्गदर्शन करने के लिए ‘सप्तऋषि’ कहा। कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज, इन सात ऋषियों को सप्तर्षि कहा जाता है, जो सृष्टि का संतुलन बनाने में अपनी योगदान देते हैं। भारत आर्थिक विकास एवं संतुलन में इन ऋषियों को आधार बनाने की बात एक मौलिक सोच एवं दिशा है। दुनिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक चमकते सितारे के रूप में स्थापित करने एवं सुदृढ़ आर्थिक विकास के लिये इस सप्तर्षि रूपी बजट में सात फोकस क्षेत्रों में समावेशी विकास, वंचितों को वरीयता, बुनियादी ढांचे और निवेश, क्षमता विस्तार हरित विकास, युवा शक्ति, वित्तीय क्षेत्रों पर बल दिया गया हैै, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, डि...
केंद्रीय बजट 2023 की मुख्य बातें 

केंद्रीय बजट 2023 की मुख्य बातें 

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केंद्रीय बजट 2023 में नई कर व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत कर छूट की सीमा बढ़ाकर ₹7 लाख की गई है और वेतनभोगी व्यक्तियों को ₹50,000 की मानक कटौती देने की घोषणा की गई है। नई व्यवस्था के तहत सर्वाधिक सरचार्ज रेट को 37% से घटाकर 25% किया गया है और पूंजीगत निवेश को बढ़ाकर ₹10 लाख करोड़ किया गया है। भारत की आजादी के 75वें वर्ष में पूरी दुनिया ने यह भली भांति स्‍वीकार कर लिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक चमकता सितारा है क्योंकि कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्‍तर पर व्यापक सुस्‍ती दर्ज किए जाने के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो कि सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सर्वाधिक है। यह बात  केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 01 फरवरी, 2023 को संसद में केन्‍द्रीय बजट 2023-24 पेश करते हुए कही। वित्त मंत्री ने विशेष जोर देते ह...
परीक्षा पे चर्चा 2023

परीक्षा पे चर्चा 2023

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“परीक्षा पे चर्चा 2023" में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ नमस्ते! शायद इतनी ठंड में पहली बार परीक्षा पे चर्चा हो रही है। आमतौर पर फरवरी में करते है। लेकिन अब विचार आया कि आप सबको 26 जनवरी का भी लाभ मिले, फायदा उठाया ना जो बाहर के है उन्होंने। गए थे कर्तव्य पथ पर। कैसा लगा? बहुत अच्छा लगा। अच्छा घर जाकर क्या बताएंगे? कुछ नहीं बताएंगे। अच्छा साथियों समय ज्यादा लेता नहीं हूं, मैं लेकिन मैं इतना ...
कपड़ा उद्योग से निकले अपशिष्ट जल के शोधन की नई पद्धति

कपड़ा उद्योग से निकले अपशिष्ट जल के शोधन की नई पद्धति

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (इंडिया साइंस वायर): कपड़ा उद्योग से उत्सर्जित कृत्रिम रंगों कीविस्तृत श्रृंखला मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकती है। इसीलिए,कपड़ा उद्योग से निकले अपशिष्ट जल के शोधन के लिए नवीन उपचार तकनीकों कीआवश्यकता है, जिससे अपशिष्ट जल में डाई अणुओं को पूरी तरह नष्ट किया जा सके।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ताओं ने अपशिष्ट जल-शोधनकी दो-चरणीय नई पद्धति विकसित की है, जिससे कपड़ा उद्योग से निकले रंगीन अपशिष्टजल का शोधन कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह उपचारित जल का अन्यउद्देश्यों के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है।अपशिष्ट जल-शोधन के पहले चरण में दूषित जल का इलेक्ट्रोकेमिकल पद्धति से प्रसंस्करणकिया जाता है। जल-शोधन के दूसरे चरण में कार्बन नैनोफाइबर पर नये ZnO कैटरपिलर केउपयोग से वास्तविक समय में फोटोकैटलिटिक निम्नीकरण किया जाता है। आईआ...
भारतीय गणतंत्र के लिए खतरे

भारतीय गणतंत्र के लिए खतरे

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(74वां गणतंत्र दिवस 2023) यह सच है कि भारत ने महान लोकतांत्रिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं, लेकिन स्वतंत्रता के बाद हमें इस देश और समाज में जिन उच्च आदर्शों की स्थापना करनी चाहिए थी, हम आज ठीक इसके विपरीत दिशा में जा रहे हैं और भ्रष्टाचार, दहेज, मानव घृणा, हिंसा जैसी समस्याएं अश्लीलता और बलात्कार अब जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। लेकिन हमारा देश प्राचीन काल से ही अनेक समस्याओं को आगे बढ़ा रहा है, वर्तमान भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, ऐसे में युवाओं को अपनी भागीदारी बढ़ाकर देश, समाज और परिवार का लोकतंत्रीकरण करना होगा। -डॉ सत्यवान सौरभ  हर साल भारत में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को उस तारीख को मनाने के लिए मनाया जाता है जिस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था और देश एक गणतंत्र बना था। हर साल, 26 जनवरी को देश भर में उत्सव और देशभक्ति के उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल भार...
74वां गणतंत्र दिवस— आत्मचिंतन करने का समय

74वां गणतंत्र दिवस— आत्मचिंतन करने का समय

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बलबीर पुंज आज भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। सभी पाठकों को इसकी असीम शुभकामनाएं। यह अवसर जहां जश्न मनाने का है, तो आत्मावलोकन करने का भी है। इसके लिए कुछ प्रश्नों का उत्तर खोजना स्वाभाविक है। यह ठीक है कि 1950 में भारत संप्रभु गणराज्य बना, किंतु क्या एक राष्ट्र के रूप में उसे पहचान भी तब ही मिली? क्या भारत में पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र और बहुलतावाद रूपी जीवनमूल्य, ब्रितानियों से मिले उपहार है? यदि ऐसा है, तो भारत को छोड़कर भारतीय उपमहाद्वीप में हमारे पड़ोसी देश या यूं कहे कि एक समय सांस्कृतिक भारत का हिस्सा रहे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इन मूल्यों का अकाल क्यों है? आखिर भारत में यह मूल्य किसके कारण अब तक जीवंत है? भारत केवल इसलिए ही पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलतावादी नहीं है, क्योंकि अंग्रेजों ने अपने 200 वर्षों के राज के दौरान देश को कथित रूप से इन मूल्यो...
प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

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प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आज के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा करते हुए ट्वीट की एक श्रृंखला साझा की।
भारत का गगनयान मिशन 2024 में: इसरो प्रमुख

भारत का गगनयान मिशन 2024 में: इसरो प्रमुख

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भारत अंतरिक्ष में अपना पहला मानव मिशन गगनयान-3 अगले साल 2024 में लॉन्च कर सकता है। इसे लेकर हरस्तर पर बारीकी से परीक्षण किए जा रहे हैं। एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा की दृष्टि से इसरो पहले मानव रहित तरीके सेगगनयान की लॉन्चिंग करेगा। यह बात भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के चेयरमैन डॉ एस. सोमनाथने विशेष साक्षात्कार में कही है। वे मंगलवार को 8वें भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ)-2022 केसमापन सत्र में शामिल होने के लिए भोपाल पहुँचे थे। इसरो प्रमुख डॉ एस. सोमनाथ से हितेश कुशवाहा / राहुलचौकसे की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं।प्रश्न: भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में छात्रों एवं प्रतिभागियों का उत्साह देखकर कैसा लग रहा है?उत्तर: सब मुझे उत्साह से लबरेज नज़र आए। युवाओं की जबरदस्त सहभागिता दिखी है। इस आयोजन में अभूतपूर्वप्रतिसाद देखने को मिला।प्रश्न:...
भारतबोध कराता है भारतीय पर्यटन

भारतबोध कराता है भारतीय पर्यटन

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डॉ. सौरभ मालवीयपर्यटन देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाता है। इससे सरकार को राजस्व तथा विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इसके कारण विकास कार्यों को भी बढ़ावा मिलता है। भारत एक विशाल देश है। यहां के विभिन्न राज्यों की भिन्न-भिन्न संस्कृतियां हैं। सबकी अपनी परम्पराएं हैं। इसके साथ ही यहां प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत पर्यटन स्थल हैं। यहां पर ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां पर असंख्य धार्मिक स्थल भी हैं।राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का प्रारम्भदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों के प्रचार एवं प्रसार के लिए केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 1948 को प्रथम बार राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया था। तब से प्रतिवर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसके पश्चात एक पर्यटन यातायात समिति भी गठित की गई। इस समिति के गठन के तीन वर्ष पश्चात 1951 में कोलकाता और चेन्नई में पर्यटन दिवस के क्षेत्रीय कार्यालयों में वृद्धि होती गई। दि...
नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

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-ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत ने खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। तेहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा रहा। लेकिन अब इन राष्ट्रीय पर्वों को मनाते हुए संप्रभुता का अहसास होने लगा है। गणतंत्र का जश्न सामने हैं, जिसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी है तो अब तक कुछ न कर पाने की बेचैनी भी है। हमारी जागती आंखो से देखे गये स्वप्नों को आकार देने का विश्वास है तो जीवन मूल्यों को सुरक्षित करने एवं नया भारत निर्मित करने की तीव्र तैयारी है। अब होने लगा है हमारी स्व-चेतना, राष्ट्रीयता एवं स्व-पहचान का अहसास। जिसमें आकार लेते वैयक्तिक, सामुदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थ की सुनहरी छटाएं हैं।राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस हमारी ...