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Budding researchers take centre stage at young scientist conference

Budding researchers take centre stage at young scientist conference

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In the 8th edition of India International Science Festival (IISF) 2022, the Young Scientist conference is one of the 15 events organised from 22nd -24th January 2023, at Maulana Azad National Institute of Technology (MANIT), Bhopal, Madhya Pradesh. Hundreds of young scientists and researchers, including persons from the scientific Industry, faculty members, Postdoctoral fellows, PhD students, and final-year MSc and B.Tech students from across the country, will participate in the conference. The young scientist conference aims to familiarise young researchers with the scientific policies of India and share with them the stories of India’s scientific achievements. Aligned with the G20 theme -One Earth, One Family, One Future, and LiFE (Lifestyle for Environment), the conference is aimed...
जी20 इंडिया प्रेसीडेंसी

जी20 इंडिया प्रेसीडेंसी

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भारत की जी20 अध्‍यक्षता के तहत स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक 18 से 20 जनवरी, 2023 तक तिरुवनंतपुरम (केरल) में आयोजित की जाएगी। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारत ने 1 दिसंबर, 2022 को जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की। भारत वर्तमान में जी20 ट्रोइका का हिस्सा है, जिसमें इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील शामिल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि ट्रोइका में तीन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह दोहराया कि भारत की जी20 अध्‍यक्षता समावेशी, कार्य उन्‍मुख और निर्णायक होगी। प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत थीम: 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' भारत के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के दर्शन का प्रतिपादन करता है। यह दुनिया के लिए महामारी के बाद एक स्वस्थ विश्‍व के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान है। भारत की जी20 अध्‍यक्षता के स्‍वास्‍थ्‍य ट्रैक में चार हेल्‍...
विज्ञान महोत्सव में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर होगी नज़र

विज्ञान महोत्सव में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर होगी नज़र

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नई दिल्ली, 16 जनवरी (इंडिया साइंस वायर): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 21 से 23जनवरी तक आयोजित होने वाले इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ)-2022के दौरान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के प्रयास किये जाएंगे।गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से संबंधित गतिविधियों के अंतर्गत मोटा अनाज वर्ष (Year ofmillets) पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित किया गयाहै। इसमें भोपाल के 1500 से ज्यादा छात्रों द्वारा एक साथ रोबोटिक सिस्टम से बीज बोने कारिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जाएगी।गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़ी गतिविधियों के दौरान भविष्य के उभरते युवा वैज्ञानिक एक साथप्रयोग करते हैं और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करते हैं। विश्व रिकॉर्ड बनाने के इन प्रयासों मेंप्रोटोटाइप मॉडल की एक साथ असेंबली और व्यावहारिक विज्ञान मॉडल का प्रदर्शन शामिल है।गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड क...
Students’ innovation festival to buoy up novel ideas in science and technology Students’

Students’ innovation festival to buoy up novel ideas in science and technology Students’

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Students’ innovation festival to buoy up novel ideas in science and technologyNew Delhi, January 16 (India Science Wire): The Students' Innovation Festival (SIF) is aLaunchpad for young minds to present their ingenious ideas, display creativity, and showcasetheir projects/products. Such avenues help prepare the youth to tackle society’s problemsthrough scientific and technological interventions. The festival is a part of the 8th edition of theIndia International Science Festival (IISF)-2022, to be held in Bhopal from 21-24 January 2023.A total of 3392 entries have been received out of these 792 entries were shortlisted for furtherscreening to select 100 innovations for physical presentation at Bhopal during 22nd and 23rdJanuary 2023. “The participants need to bring their own projects or m...
वृद्धावस्था में सदैव सकारात्मक कैसे रहें

वृद्धावस्था में सदैव सकारात्मक कैसे रहें

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गर्भावस्था के पश्चात जन्म लेने के बाद मानव विभिन्न अवस्थाएँ धारण करता है- यथा- शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था तथा अन्त में वृद्धावस्था। इन सभी अवस्थाओं में जीव विभिन्न रूपों से होता हुआ अनेक क्रियाकलापों में संलग्र रहता है और अन्त में वृद्धावस्था को प्राप्त होता है। अपने पूर्व जन्मांतरों में किए गए शुभ-अशुभ कर्मों के अनुसार फलों को भोगकर अन्त में परमधाम की यात्रा पर चला जाता है।इन सभी अवस्थाओं में वृद्धावस्था जीवन का अन्तिम पड़ाव है। इस अवस्था में मानव परिपक्व हो जाता है। उसके पास अनुभवों का विशाल खजाना होता है। इस अवस्था में शारीरिक रूप से व्यक्ति कमजोर हो जाता है। बेटे-बहू, पोते-पोती, नाती-नातिन के मध्य वह अपने आपको सुरक्षित अनुभव करता है। भारतीय संस्कृति की यही विशेषता रही है। हर भारतीय इस सत्य से परिचित ही है।पाश्चात्य संस्कृति ने जिन घरों में प्रवेश कर ...
गंगाविलास पूज्य है या अपूज्य ?

गंगाविलास पूज्य है या अपूज्य ?

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या'अपूज्यां यत्र पूज्यन्ते' के आइने मेंपहाड़ विध्वंसक और गंगाविलास अरुण तिवारी 16 जून, 2013 को केदारनाथ जल प्रलय आई। उससे पहले शिलारूपिणी परम्पूज्या धारी देवी को विस्थापित किया गया। ऐसा श्रीनगर गढ़वाल की एक विद्युत परियोजना को चलाते रहने की जिद्द के कारण किया गया था। भाजपा की तत्कालीन शीर्ष नेत्री स्वर्गीया श्रीमती सुषमा देवी जी इसे धारी देवी का तिरस्कार माना था। इस तिरस्कार को केदारनाथ प्रलय का कारण बताते हुए श्रीमती स्वराज ने अपने संसदीय उद्बोधन में एक श्लोक का उल्लेख किया था: अपूज्यां यत्र पूज्यन्ते, पूज्यानाम् तु व्यत्क्रिम्।त्रिण तत्र भविष्यन्ति, दुर्भिक्षम् मरणम् भयम्।। मतलब यह कि जहां न पूजने योग्य की पूजा होती है अथवा जिसकी पूजा की जानी चाहिए, उसका तिरस्कार होता है, वहां तीन परिणाम होते हैं: अकाल, मृत्यु और भय। https://www.youtube.com/watch?v=aS2n-YPxOPY आइए, इ...
पाकिस्तान को एक मोदी चाहिए’

पाकिस्तान को एक मोदी चाहिए’

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक पाकिस्तान के आजकल जैसे हालात हैं, मेरी याददाश्त में भारत या हमारे पड़ौसी देशों में ऐसे हाल न मैंने कभी देखे और न ही सुने। हमारे अखबार पता नहीं क्यों, उनके बारे में न तो खबरें विस्तार से छाप रहे हैं और न ही उनमें उनके फोटो देखे जा रहे हैं लेकिन हमारे टीवी चैनलों ने कमाल कर रखा है। वे जैसे-तैसे पाकिस्तानी चैनलों के दृश्य अपने चैनलों पर आजकल दिखा रहे हैं। उन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, क्योंकि पाकिस्तानी लोग हमारी भाषा बोलते हैं और हमारे जैसे ही कपड़े पहनते हैं। वे जो कुछ बोलते हैं, वह न तो अंग्रेजी है, न रूसी है, न यूक्रेनी। वह तो हिंदुस्तानी ही है। उनकी हर बात समझ में आती है। उनकी बातें, उनकी तकलीफें, उनकी चीख-चिल्लाहटें, उनकी भगदड़ और उनकी मारपीट दिल दहला देनेवाली होती है। गेहूं का आटा वहां 250-300 रु. किलो बिक रहा है। वह भी आसानी से नहीं मिल रहा है। बूढ़े, म...
धनखड़: संसद बड़ी या अदालत ?

धनखड़: संसद बड़ी या अदालत ?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय न्यायपालिका को दो-टूक शब्दों में चुनौती दे दी है। वे संसद और विधानसभाओं के अध्यक्षों के 83 वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वे स्वयं राज्यसभा के अध्यक्ष हैं। आजकल केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर लंबा विवाद चल रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का चयन-मंडल बार-बार अपने चुने हुए जजों की सूची सरकार के पास भेजता है लेकिन सरकार उस पर ‘हाँ’ या ‘ना’ कुछ भी नहीं कहती है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि सरकार का यह रवैया अनुचित है, क्योंकि 1993 में जो चयन-मंडल (कालेजियम पद्धति) तय हुई थी, उसके अनुसार यदि चयन-मंडल किसी नाम को दुबारा भेज दे तो सरकार के लिए उसे शपथ दिलाना अनिवार्य होता है। इस चयन-मंडल में पांचों चयनकर्त्ता सर्वोच्च न्यायालय के जज ही होते हैं। और कोई नहीं होता। इस पद्धति में कई कमियाँ देखी गईं। उसे बद...
नोएडा-दुबई जैसा बनेगा कानपुर तो नारायणमूर्ति भी करेंगे कानपुर में निवेश

नोएडा-दुबई जैसा बनेगा कानपुर तो नारायणमूर्ति भी करेंगे कानपुर में निवेश

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आर.के. सिन्हा गंगा किनारे बसे प्राचीन कानपुर शहर में आपको अब भी इस तरह के अनेक लोग मिल जाएंगे, जिन्हें अच्छी तरह से याद है जब उनके शहर की पहचान एशिया के मैनचेस्टर के रूप में हुआ करती थी। भारत में कपड़े का सबसे अधिक उत्पादन इसी कानपुर शहर में होता था। इसलिए ही इसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता था। जाहिर है, देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में कानपुर का बेहद महत्त्वपूर्ण योगदान हुआ करता था। कुछ दशक पहले तक कानपुर में सायरन, मशीनों की गड़गड़ाहट और अपनी-अपनी मिलों के लिए सड़क किनारे भागते श्रमिकों के साइकिल की घंटियों की आवाजें सुनाई दिया करती थीं। फिर महान स्वाधीता सेनानी और शहीद ए आजाम भगत सिंह के गुरु गणेश शंकर विद्यार्थी के शहर कानपुर का चेहरा-मोहरा धीरे-धीरे बदलने लगा। यहां से कपड़ा मिलें बंद होने लगीं। मजदूर बेरोजगार होते चले गए। कानपुर जैसा जीवंत शहर अपनी पहचान खोने लगा। ...
बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को रोका जाये-ललित गर्ग

बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को रोका जाये-ललित गर्ग

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बच्चों के प्रति समाज को जितना संवेदनशील होना चाहिए, उतना नहीं हो पाया है। कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते फिर भी उनकी बाल-सुलभ संवेदनाओं को कुचला जाना लगातार जारी है। बच्चों के प्रति संवेदनहीनता को सिर्फ जघन्य अपराधों में ही नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि कई ऐसे मौके हैं, जब समाज के संवेदनहीन व्यवहार का हमें अहसास भी नहीं होता, वैसा व्यवहार लगातार बच्चों पर होता रहता है। सोशल मीडिया पर बच्चों के बारे में की गई टिप्पणियों के आईने में समाज को अपना चेहरा देखना चाहिए। क्यों हम नन्हें बच्चों को अपनी विकृत मानसिकता एवं वीभत्स सोच का शिकार बनाते हैं? ऐसी ही एक त्रासद एवं विडम्बना घटना ने एक बार फिर बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाया है। क्रिकेट जगत की दो हस्तियों महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली की बेटियों पर की गई अभद्र एवं अश्...