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महान फुटबॉलर पेले का निधन

महान फुटबॉलर पेले का निधन

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महान फुटबॉलर पेले का निधन:82 साल की उम्र में साओ पाउलो के अस्पताल में ली अंतिम सांस, पेट के कैंसर से पीड़ित थे ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले का गुरुवार देर 82 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी बेटी कैली नैसिमेंटो ​​​​​ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी दी। पेले पेट के कैंसर से जूझ रहे थे। उन्हें 29 नवंबर को साओ पाउलो के अल्बर्ट आइंस्टीन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कीमोथेरेपी के जरिए उनका ट्रीटमेंट किया गया, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा था। इसके बाद कीमोथेरेपी बंद कर उन्हें दर्द कम करने की दवाइयां दी जाने लगीं। उन्हें किडनी और कार्डियक डिसफंक्शन भी था। बेटी ने कहा - हम जो भी हैं सब आपकी बदौलतपेले की बेटी कैली ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'हम जो कुछ भी हैं, आपकी बदौलत हैं। हम आपको बहुत प्यार करते हैं। रेस्ट इन पीस।' 25 दिसंबर को परिवार ने क्रिसमस का त्योहार पेले के साथ अस्प...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की माता जी 100 वर्ष की उम्र में निधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की माता जी 100 वर्ष की उम्र में निधन

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मोदी जी की अपनी माँ को श्रद्धांजलि - शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम… मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला तो उन्होंने एक बात कही थी, जो हमेशा याद रहती है कि કામ કરો બુદ્ધિથી, જીવન જીવો શુદ્ધિથી यानि काम करो बुद्धि से और जीवन जियो शुद्धि से। ...
राहुल गांधी की तुलना राम से?

राहुल गांधी की तुलना राम से?

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद के बयान पर आजकल काफी लत्तम-धत्तम चल रही है। उन्होंने कह दिया कि जहाँ राम नहीं पहुँच सकते, वहाँ उनकी खड़ाऊ पहुंच जाएगी याने राहुल गांधी जहाँ-जहाँ नहीं पहुंच पाएंगे, वहाँ-वहाँ उनकी खड़ाऊ पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। यह तो सबको पता है कि उन्होंने राहुल को राम नहीं कहा है। मैंने उनके वाक्यों को पढ़कर नहीं, सुनकर यह लिखा है लेकिन कुछ भाजपा नेताओं ने खुर्शीद को यह कहकर निंदा की है कि उन्होंने राहुल को राम बना दिया है। उन्होंने राहुल को राम नहीं बताया है बल्कि सिर्फ खड़ाऊ पर जोर दिया है। राहुल के जो फोटो अखबारों में छप रहे हैं और टीवी पर दिखाई पड़ रहे हैं, उनमें वे जूते पहने दिखाई पड़ रहे हैं तो फिर खुर्शीद के बयान का अर्थ क्या निकला? यही कि उन्होंने उपमा का इस्तेमाल किया है। क्या सलमान खुर्शीद जैसे पढ़े-लिखे नेता इतनी बड़ी गलती कर सकते ...
29 दिसम्बर 1666 : गुरु गोविन्द सिंह का जन्म 

29 दिसम्बर 1666 : गुरु गोविन्द सिंह का जन्म 

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राष्ट्र और संस्कृति के रक्षा के लिये   समर्पित जीवन और बलिदान  -- रमेश शर्मा  दसवें सिख गुरु गोविन्द सिंह जी की गणना यदि हम अवतार की श्रेणी में करें तो अनुचित न होगा।  उनका पूरा जीवन भारत राष्ट्र, सत्य, धर्म और संस्कृति की रक्षा केलिये समर्पित रहा । मानों वे इस राष्ट्र के लिये ही संसार में आये थे । उन्होंने मुगल सल्तनत द्वारा भारत के इस्लामिक रूपान्तरण अभियान रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका रही।  गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पौष शुक्ल पक्ष सप्तमी को बिहार के पटना नगर में हुआ था । यह 1666 ईस्वी का वर्ष था । इस वर्ष यह तिथि 29 दिसम्बर को पड़ रही है । पर उस वर्ष यह पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी 22 दिसम्बर को थी । उनके पिता गुरू तेग बहादुर नौंवे सिख गुरु थे । उन्होने भी धर्म रक्षा केलिये बलिदान दिया था । उनकी माता का नाम गुजरी देवी थी। जिनका भी क्रूर यातनाओं के ...
संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित

संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित

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महत्‍वपूर्ण बिंदु : संसद द्वारा पारित किए गए  : उत्तर प्रदेश के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 तमिलनाडु के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) बिल, 2022 कर्नाटक के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) बिल, 2022 संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित किए गए। तमिलनाडु राज्य के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022, राज्यसभा में 22.12.2022 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। संसद में पारित होने के बाद यह विधेयक तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों की सूची में नारिकोरवन और कुरीविकरण समुदायों को शामिल करेगा। यह विधेयक पहले 15.12.2022 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। ...
गर्भस्थ शिशु और माता की चिकित्सीय देखभाल के लिए नया ऐप

गर्भस्थ शिशु और माता की चिकित्सीय देखभाल के लिए नया ऐप

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भारतीय शोधकर्ताओं ने गर्भस्थ शिशु और गर्भवती महिलाओं की चिकित्सीय देखभाल के लिए ‘स्वस्थगर्भ’ नामक नया मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह ऐप दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिनके लिए डॉक्टर तक पहुँचना कठिन होता है। यह गर्भावस्था के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया ऐप है, जो चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित होने के साथ-साथ विश्वसनीय भी है। इसकी मदद से डॉक्टरों तक तुरंत ऑनलाइन पहुँचा जा सकता है, और चिकित्सीय सलाह प्राप्त की जा सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह मोबाइल ऐप विकसित किया है। मरीज और डॉक्टर दोनों ‘स्वस्थगर्भ’ मोबाइल ऐप का निशुल्क लाभ उठा सकते हैं। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। ‘स्वस्थगर्भ’ चिकित्सीय जटिलताओं को कम करने और गर्भावस्था के दौरान के त...
नेपालः कुर्सी ही ब्रह्म है

नेपालः कुर्सी ही ब्रह्म है

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* लगभग हजार साल पहले राजा भर्तृहरि ने राजनीति के बारे में जो श्लोक लिखा था, नेपाल की राजनीति ने उसकी सच्चाई उजागर कर दी है। उस श्लोक में कहा गया था- ‘वारांगनेव नृपनीति्रनेकरूपा:’ अर्थात राजनीति वेश्याओं की तरह अनेकरूपा होती है याने वह मौके-मौके पर अपना रूप बदल लेती है। नेपाल में कल तक पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ और शेरबहादुर देउबा मिलकर सरकार बना रहे थे लेकिन अब प्रचंड और के.पी.ओली आपस में अचानक मिल गए हैं और वे अब अपनी सरकार बना रहे हैं। ये तीनों बड़े नेता तीन पार्टियों के संचालक हैं। पहली नेपाली कांग्रेस है और शेष दो कम्युनिस्ट पार्टियाॅं हैं। ये तीन पार्टियाँ एक-दूसरे की भयंकर विरोधी रही हैं। इनके कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे की हत्याएं भी की हैं और इन्होंने एक-दूसरे से मिलकर सरकारें भी बनाई हैं और अनबन होने पर बीच में ही वे सरकारें गिरती भी रही हैं। याने कुर्सी ही...
भारतभूमि

भारतभूमि

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दिल्ली में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं‌ इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के बड़े शहर इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के महानगर न्यूयॉर्क जैसे महानगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी की खाई है किन्तु सांस्कृतिक फांक नहीं है। यहां एक बड़ी सांस्कृतिक फांक है। सहजता से दृश्य भी। यहां सभ्यता और संस्कृति ग्राम्य जीवन के साथ प्रवहमान है। वह बड़े महानगरों में भी ग्राम्य चरित्र के साथ भासित होती है। मैंने इस महानगर में अतिसाधारण मनुष्यों के बीच होते हुए यह अनुभव किया है कि आधुनिकता ने हमें लीला नहीं है।‌ बल्कि भारतीयता यहां भाषा में अनुस्वार और अन्य वर्णों की तरह अनिवार्यत: उपस्थित है। किसी बुझते हुए घूरे को देखकर हम मान लेते हैं कि यह ठंडा पड़ चुका है।‌किन्तु जरा सा कुरेदने पर राख के नीचे से लहकती काष्...
विश्व शांति के लिए जरूरी है हिन्दुत्व : सुनील आंबेकर

विश्व शांति के लिए जरूरी है हिन्दुत्व : सुनील आंबेकर

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डॉ. इन्दु‍शेखर तत्पुरुष की पुस्तक 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन प्रख्यात कवि, आलोचक एवं संपादक डॉ. इन्दु‍शेखर तत्पुरुष की पुस्तक 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि विश्व शांति के लिए हिन्दुत्व बेहद जरूरी है। आधुनिक समय में हिन्दुत्व के नियमों को भूलने का परिणाम हम जीवन के हर क्षेत्र में महसूस करते हैं। इस अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने की। संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय में वरिष्ठ आचार्या प्रो. कुमुद शर्मा ने किया। श्री आंबेकर ने कहा कि हिन्दुत्व का मूल तत्व एकत्व की...
रोजगार : आंकड़ों और हकीकत में भारी अंतर

रोजगार : आंकड़ों और हकीकत में भारी अंतर

BREAKING NEWS, आर्थिक
राकेश  दुबे  अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन अर्थात आइएलओ ने दो रिपोर्टें जारी की हैं, जिनमें कोविड  दुष्काल के बाद वैश्विक रोजगार की स्थितियों के बारे में चर्चा की गई है। दरअसल, कोविड दुष्काल  के चलते बहुत सारे लोगों का रोजगार छिन गया और परिस्थितियां काफी खराब होती चली गर्इं। दुष्काल का प्रभाव कम होने के बाद कुछ लोग तो वापस रोजगार से जुड़ गए, मगर अब भी बहुत सारे लोगों को उनका खोया रोजगार नहीं मिल पाया है।भारत की बात करें, सरकारी पक्ष और आंकड़ों में बेहद अंतर है | भारत में न्यूनतम वेतन 2006 के 4,398 रुपए से बढ़ कर 2021 में 17,017 रुपए प्रतिमाह हो गया। यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का आंकड़ा है। जब इसमें मुद्रास्फीति आंकी गई तो वास्तविक वेतन वृद्धि 2006 के 9.3 प्रतिशत से गिरकर 2021 में  – 0.2 प्रतिशत पर आ गई। इस तरह वेतन और महंगाई में बढ़ोतरी का औ...