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अपने दोस्तों को करीब और दुश्मनों को और भी ज़्यादा करीब रखें।”

अपने दोस्तों को करीब और दुश्मनों को और भी ज़्यादा करीब रखें।”

BREAKING NEWS, सामाजिक
--------------------------------------------------- ---------- अगर हमें अपने सबसे अच्छे दोस्त के बारे में जरा सा भी आभास हो जाए तो क्या होगा? आप उस पर आँख बंद करके विश्वास नहीं करेंगे और आपकी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय हम थोड़ा सावधान रहेंगे। आपको आसानी से धोखा नहीं मिलेगा। यहां तक कि आपके साथ विश्वासघात भी हुआ, पहले मामले की तुलना में आपके दिल को नुकसान कम होगा। इसमें हम अमेरिका और भारत के संबंधों का उदाहरण ले सकते हैं। यद्यपि हम दावा करते हैं कि अमेरिका भारत का स्वाभाविक भागीदार है, हम अंतर्राष्ट्रीय मंचों में अमेरिका की नीतियों का पालन नहीं करते हैं और आगे भी हम अपने हितों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं। इसलिए हमें अपने दोस्तों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखना है न कि "निकटतम"। -डॉ सत्यवान सौरभ यदि हम अपने आसपास के लोगों को पारिवारिक संबंधों से बाहर श्रेणीबद्ध करें तो ...
*भारत की भूमिका के विस्तार का समय*

*भारत की भूमिका के विस्तार का समय*

BREAKING NEWS, राष्ट्रीय
                           -बलबीर पुंज वर्ष 2022 कैसा था, उसे हम भुगत चुके है। परंतु नया साल भारत और शेष विश्व के लिए कैसा होगा? कुछ माह पहले तक विश्व कोविड-19 के प्रकोप से लगभग मुक्ति पा चुका था, किंतु इस महामारी के उद्गमस्थल चीन में पुन: कोरोना विस्फोट ने नववर्ष में दुनिया को फिर चौकस कर दिया है। संतोषप्रद बात यह है कि हम इस संक्रमण के बहरूपिये चरित्र से पहले से अधिक परिचित, जागरूक और उससे संघर्ष करने हेतु तत्पर है। किंतु इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि कोरोना समाप्त हो गया है और हम इससे निश्चिंत हो जाए। सच तो यह है कि हमारी लापरवाही से कोरोना संक्रमण पुन: मानवता पर हावी हो सकता है।  विश्व यदि बीते वर्ष कोविड-19 से लगभग मुक्त रहा, तो फरवरी के अंतिम सप्ताह शुरू यूक्रेन-रूस युद्ध ने दुनिया में ईंधन-खाद्य आपू...
वर्षांत समीक्षा-2022: पंचायती राज मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा-2022: पंचायती राज मंत्रालय

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स्वामित्व (सर्वे ऑफ विलेजेस एंड मैपिंग विद इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरियाज़) – इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 24 अप्रैल, 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर किया था। इसका संकल्प था कि गांवों के हर गृहस्वामी को “मालिकाना दस्तावेज” प्रदान करके ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को सक्षम बनाना। पहला चरण – प्रायोगिक योजना (अप्रैल 2020 – मार्च 2021): इसके दायरे में हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, आंध्रप्रदेश राज्य हैं। साथ ही हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब और राजस्थान में निरंतर परिचालन संदर्भ प्रणालियों (कंटिन्यूअस ऑप्रेटिंग रेफेरंस सिस्टम्स - सीओआरएस) की प्रतिस्थापना को भी रखा गया। दूसरा चरण (अप्रैल 2021 – मार्च 2025): वर्ष 2025 तक शेष बचे गांवों का आमूल सर्वेक्षण और 2022 तक देशभर में सीओआरएस नेटवर्क की स्थापना। वर्ष 2022...
सामाजिक नीति के बजाय जाति आधारित वोट-बैंक की राजनीति

सामाजिक नीति के बजाय जाति आधारित वोट-बैंक की राजनीति

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
सामाजिक नीति के बजाय जाति आधारित वोट-बैंक की राजनीति ग्राम स्तर पर भी पंचायत राज चुनावों में जाति व्यवस्था हावी रही है। जोधपुर संभाग में चुनाव के दौरान जाति आधारित मुद्दों जैसे जाटों को आरक्षण आदि के लिए पार्टियां चलती हैं। इसी तरह उड़ीसा में भूमिहार, कायस्थ और राजपूत चुनाव के समय अलग-अलग दिशाओं में खींचते हैं और अपनी जाति के उम्मीदवारों को कार्यालय में देखने की इच्छा रखते हैं।  जाति भारत में राजनीति को प्रभावित नहीं कर रही है, बल्कि इसका प्रभाव अधिक बलपूर्वक और प्रभावी ढंग से है। स्वतंत्र भारत में यह आशा की जाती थी कि जाति धीरे-धीरे अपना प्रभाव समाप्त कर देगी। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि चीजें हमारी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हैं और जाति अभी भी राजनीति को प्रभावित करती है। -डॉ सत्यवान सौरभ भारत में सामाजिक संरचना की प्रमुख विशेषता जाति व्यवस्था है। जाति व्यवस्था अपने सबसे सा...
तकनीकी के साथ – योगी आदित्यनाथ !

तकनीकी के साथ – योगी आदित्यनाथ !

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
- प्रशांत पोळ  १९ मार्च, २०१७ को रविवार था. भारतीय तिथि के अनुसार चैत्र कृष्ण सप्तमी थी. इस दिन लखनऊ के काशीराम स्मृति उपवन में, एक भगवे वस्त्र पहने हुए ४४ वर्ष का युवा, भारत के सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहा था.  भारतीय जनता पार्टी का, योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय, अनेकों को अचरज भरा लगा था. कुछ तथाकथित बुध्दिजीवियों ने तो खुलकर कहा की ‘उत्तर प्रदेश में तो अब परंपरावादी, दकियानूसी और धार्मिक कट्टरता का राज चलेगा.‘ एक भगवाधारी संत के मुख्यमंत्री बनने पर ऐसी प्रतिक्रियाएं देश के विभिन्न भागों से निकल कर आ रही थी. उत्तर प्रदेश पहले से अविकसित राज्य की श्रेणी में था. उद्योगों की संख्या बहुत कम थी. इसलिए रोजगार के अवसर भी नगण्य थे. उत्तर प्रदेश के युवा, रोजगार की तलाश में देश के अन्य शहरों में जाते थे. पर्यटन ...
ये तनातनी और न्याय के लिए भटकते नागरिक

ये तनातनी और न्याय के लिए भटकते नागरिक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
इस न्यायालयीन प्रशासन के लिए किसे दोष दें ? हमारे देश भारत में,प्रति 10 लाख जनसंख्या पर लगभग 20 न्यायाधीश हैं, जो बेहद कम हैं। वर्ष 2016 से अब तक की अवधि में, मुकदमों की लंबित संख्या जिला अदालतों में 2 करोड़ 65 लाख से बढ़कर 4 करोड़ 11 लाख हो गई है, जो कि 54.64 प्रतिशत की वृद्धि है। चार करोड़ मामले निचली अदालतों में जबकि 42 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। उच्चतम न्यायालय में भी 68435 मामले लंबित हैं।उच्च और सर्वोच्च नयालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर तनातनी जारी है | सरकार और न्यायपालिका के बीच यह तनातनी कोई नयी बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ समय से मामला गहराता दिख रहा है। ख़ास तौर पर केंद्रीय कानून मंत्री के उस बयान के बाद जिसमें उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल उठाए।   आंकड़ों की बात करें तो 30 नवंबर, 2022 तक उच्च न्यायलय के...
श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, समाचार
यह बड़ी अजीब सी बात है कि साहित्यिक होते हुए भी मैं किसी कवि या लेखक की जीवनगाथा पढ़ कर उतना द्रवित कभी न हो सका जितना श्रीनिवास रामानुजन के बारे में पढ़ते हुए होता रहा। रामानुजन का छोटा सा जीवन शीत की कुहेलिका में डूबे किसी दिव्य सरोवर सा है जो क्षण-क्षण अपना रूप खोलता है । उसमें अनिर्वच काव्यात्मकता,करुणा, ताप, आह और आनंद है। उस सरोवर में उतरना तो हम जैसे मनुष्यों के लिए असंभव ही है--उसकी दिव्यता को छू भर लेना ही हमारे लिए परमाद्भुत रत्न को पाने जैसा है । उनके जन्म की कहानी, बचपन की विस्मयकारी प्रज्ञा, बहुत छोटी उम्र में उनके द्वारा पूछे गए गूढ़ प्रश्न और धीरे-धीरे गणित में धंसते हुए कुछ विलक्षण सोचना या करना, यह सब अपवादात्मक या प्रतीयमान ही है । रामानुजन की दिव्यता का आभास यों तो छोटी आयु से ही होने लगता है तथापि उनकी अपूर्व प्रतिभा का प्राकट्य तेरह-चौदह वर्ष की उम्र में होता ह...
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की चिट्ठी के क्या हैं मायने? क्या देश में फिर लगने वाली हैं बड़ी पाबंदियां?

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की चिट्ठी के क्या हैं मायने? क्या देश में फिर लगने वाली हैं बड़ी पाबंदियां?

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आशीष तिवारी Corona Update: कोविड कंट्रोल करने वाली कमेटी से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य कहते हैं कि ऐसी किसी भी चिट्ठी को आज के हालात के मद्देनजर राजनीति से नहीं देखना चाहिए। उनका कहना है कि चूंकि यह चिट्ठी कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के लिए लिखी गई है, तो उसका राजनीतिकरण होना स्वाभाविक है। (Corona Update) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में भारत जोड़ो यात्रा को स्थगित करने की अपील की है। इस यात्रा को स्थगित करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह मनसुख मंडाविया ने कोविड के हालातों में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की बात कही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की इस चिट्ठी के बाद चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास इस बात के इनपुट पहुंच चुके हैं कि आने वाले दिनों में एक बार फिर से कोविड के हालात भयावह हो सकते हैं। हाला...
भारतीय नौसेना को पांचवीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागीर’ की डिलीवरी

भारतीय नौसेना को पांचवीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागीर’ की डिलीवरी

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
प्रोजेक्ट -75 कलवरी क्लास सबमरीन की पांचवीं पनडुब्बी यार्ड 11879 आज दिनांक 20 दिसंबर 2022 को भारतीय नौसेना को सौंपी गई । प्रोजेक्ट- 75 में स्कॉर्पीन डिजाइन की छह पनडुब्बियों का स्वदेशी निर्माण शामिल है । इन पनडुब्बियों का निर्माण मैसर्स नेवल ग्रुप, फ्रांस के सहयोग से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई में किया जा रहा है । दिनांक 12 नवंबर 2020 को लॉन्च की गई, वागीर ने दिनांक 01 फरवरी 2022 से समुद्री परीक्षण शुरू किया और यह बहुत गर्व की बात है कि इस पनडुब्बी ने पहले की पनडुब्बियों की तुलना में कम से कम समय में हथियार और सेंसर परीक्षणों सहित सभी प्रमुख परीक्षणों को पूरा किया है । पनडुब्बी निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि कठिनाई तब बढ़ जाती है...
सीबीडी कॉप-15: साल 2030 तक के लिए तय किए गए 23 लक्ष्य

सीबीडी कॉप-15: साल 2030 तक के लिए तय किए गए 23 लक्ष्य

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23 लक्ष्यों में कृषि सब्सिडी को कम करना, व्यवसायों को उनके जैव विविधता प्रभावों का आकलन और आक्रामक प्रजातियों के संकट से निपटना शामिल है By Dayanidhi जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (सीबीडी) के पक्षकारों के 15वें सम्मेलन (कॉप 15) समाप्त हो गया। इस सम्मेलन में 2030 तक कम से कम 30 प्रतिशत धरती की रक्षा करने का लक्ष्य तय किया गया। की बात कही गई है। कुल मिलाकर 23 लक्ष्य तय किए गए, जिन्हें दुनिया को 2030 तक हासिल करना है। सम्मेलन में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि अमीर देश, विकासशील देशों को हर साल 30 बिलियन डॉलर की सहायता देंगे, ताकि उनके पारिस्थितिक तंत्र को बचाया जा सके।   यह प्रस्ताव शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधित्व कर रहे देश चीन ने प्रस्तुत किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक लाख प्रजातियां खतरे में हैं, इन सब को बचाने के लिए अगले दशक की का...