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प्रधानमंत्री ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई से मुलाकात की

प्रधानमंत्री ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई से मुलाकात की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गूगल के सीईओ श्री सुंदर पिचाई से मुलाकात की और अन्य बातों के अलावा नवाचार और प्रौद्योगिकी के बारे में चर्चा की। सुंदर पिचाई के एक ट्वीट के जवाब में, प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया; “सुंदर पिचाई, आप से मिलकर और नवाचार, प्रौद्योगिकी एवं कई अन्य बातों पर चर्चा करके खुशी हुई। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि दुनिया मानव समृद्धि और सतत विकास के लिए तकनीक का लाभ उठाने हेतु मिलकर काम करना जारी रखे। ***** एमजी/एएम/आर ...
भारत सरकार ने यूट्यूब पर व्यापक पैमाने पर फैली फर्जी खबरों पर हमला बोला

भारत सरकार ने यूट्यूब पर व्यापक पैमाने पर फैली फर्जी खबरों पर हमला बोला

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चालीस से अधिक फैक्ट-चेक श्रृंखला के क्रम में पत्र सूचना कार्यालय की फैक्ट-चेक इकाई (एफसीयू) ने यूट्यूब के ऐसे तीन चैनलों का भंडाफोड़ किया है, जो भारत में फर्जी खबरें फैला रहे थे। इन यूट्यूब चैनलों के लगभग 33 लाख सब्सक्राइबर थे। इनके लगभग सभी वीडियो फर्जी निकले; बहरहाल इन्हें 30 करोड़ से अधिक बार देखा गया है। यह पहली बार है जब पत्र सूचना कार्यालय ने सोशल मीडिया पर व्यक्तियों द्वारा झूठी बातें फैलाने को मद्देनजर रखते हुए सभी यूट्यूब चैनलों की कलई खोलकर रख दी है। पत्र सूचना कार्यालय ने तथ्यों की जो पड़ताल की है, उसका विवरण इस प्रकार हैः क्र.सं.यूट्यूब चैनल का नामसब्सक्राइबरों की संख्याकितनी बार देखा गया न्यूज हेडलाइन्स9.67 लाख31,75,32,290 सरकारी अपडेट22.6 लाख8,83,594 आज तक LIVE65.6 हजार1,25,04,177 यूट्यूब के उपरोक्त चैनल माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय मुख्य न्या...
धानमंत्री ने नायक (सेवानिवृत्त) भैरों सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

धानमंत्री ने नायक (सेवानिवृत्त) भैरों सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नायक (सेवानिवृत्त) भैरों सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा; "नायक (सेवानिवृत्त) भैरों सिंह जी को राष्ट्र के प्रति उनकी सेवाओं के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने हमारे देश के इतिहास के महत्वपूर्ण अवसर पर अदम्‍य साहस का प्रदर्शन किया। मैं उनके निधन से बहुत दुखी हूं। दुःख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ओम शांति।" ...
इनोवेशन चैलेंज एटीएल-2022-23 मैराथन के लिए आवेदन शुरू

इनोवेशन चैलेंज एटीएल-2022-23 मैराथन के लिए आवेदन शुरू

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नवाचार और उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग द्वारा अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) संचालित किया जारहा है। एआईएम की ओर से नवाचारी युवाओं से ‘एटीएल मैराथन - 2022-23’ नामक एकप्रतियोगिता के अंतर्गत नवोन्मेषी आइडिया पर आधारित आवेदन आमंत्रित किये गए हैं।एआईएम के अटल टिंकरिंग लैब्स कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई ‘एटीएल मैराथन’ भारत केयुवा नवप्रवर्तकों के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय स्तरीय इनोवेशन प्रतियोगिता है। यह प्रतियोगिताउन ऐसे नवोन्मेषी युवाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है, जो अपने आसपास कीसामुदायिक समस्याओं को हल करने और कामकाजी प्रोटोटाइप या न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद(एमवीपी) के रूप में अभिनव समाधान विकसित कर सकते हैं।एटीएल मैराथन के इस संस्करण की थीम "भारत की जी20 प्रेसीडेंसी" है। जैसा कि भारत नेइस वर्ष जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की है, तो एआईएम ने फोकस के संबंधित क्षेत्रों मे...
राष्ट्र के विकास की धुरी है किसान

राष्ट्र के विकास की धुरी है किसान

BREAKING NEWS, आर्थिक
या सृष्टि के सौंदर्यीकरण का सूत्रधार है किसान डॉ. शंकर सुवन सिंहभारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की आधी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर रहती है।किसान अनाज उगाकर अपना जीवन यापन करता है और लोग इसी अनाज को खाकरजीवित रहते हैं। जब किसान अनाज उगाता है तब वह लोगों के थाली में आता है। खेतीसम्बन्धी कार्य को करने वाला व्यक्ति किसान कहलाता है। किसान को कृषक या खेतिहर केनामों से भी पुकारा जाता है। खाद्यान्न के उत्पादन से लेकर विपणन तक की व्यवस्थाकिसानों के जिम्मे होती है। किसान खेत का मालिक हो सकता है। कृषि भूमि के मालिकद्वारा काम पर रखा गया मजदूर भी किसान हो सकता है। श्रम के बिना किसान या श्रमिकहोना असंभव है। अतएव किसान और श्रमिक एक दूसरे के पूरक हैं। कृषक शब्द श्रम से बनाहै। श्रम का मतलब मेहनत होता है। मेहनत दो प्रकार की होती है शारीरिक मेहनत औरमानसिक मेहनत। शारीरिक मेहनत करके आजीविका चलान...

Meet India’s most respected Christians

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Meet India’s most respected Christians Vivek Shukla As Christmas is just around, the festive mood is visible all around. Churches and Christian homes would be lit from Bandra in Mumbai to Civil Lines in Delhi and across India as well soon. And this is a perfect time when we celebrate the life and times of some of the most respectable names from the Christian community that is making its presence felt in their respective fields. Let’s start with veteran Supreme Court Advocate Harish Salve. He  grew up in a multi-religious family with a liberal secularism at his home.He did his schooling in Nagpur. Salve  completed his Chartered Accountancy from ICAI and LLB from Nagpur University. The former chief Justice of India Sharad Arvind Bobde was his classmate in school. Before he b...
सार्वजनिक बहसों का गिरता स्तर

सार्वजनिक बहसों का गिरता स्तर

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ह्रदय नारायण दीक्षित सतत् संवाद लोकतंत्र का प्राण हैं। संवादरत समाज गतिशील होते हैं। संवाद से सामाजिक परिवर्तन होते हैं। संवाद का मुख्य उपकरण भाषा है। प्रख्यात भाषाविद मोलनीविसी ने 1923 में कहा था कि ‘‘भाषा सामाजिक संगठन का काम करती है।‘‘ दुनिया के सभी समाज भाषा के सदुपयोग द्वारा ही गढ़े गए हैं। ज्ञान, विज्ञान, इतिहास और दर्शन भाषा के कारण सार्वजनिक सम्पदा बनते हैं। इसके लिए सार्वजनिक बहसों की गुणवत्ता जरूरी होती है। लेकिन भारतीय राजनीति में सार्वजनिक बहसों का स्तर लगातार गिर रहा है। सर्वोच्च न्यायपीठ ने भी सार्वजनिक बहस के गिरते स्तर पर बेबाक टिप्पणी की है। न्यायालय ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते सोमवार को कहा, ‘‘यदि आप सार्वजनिक बहस को इस स्तर तक गिरा देंगे तो आपको अंजाम भुगतने होंगे।‘‘ सिसोदिया ने प्रेस वार्ता में असम के मुख्यमंत्री व...
इस देश में ‘राज्यपाल’ कैसे हों ?

इस देश में ‘राज्यपाल’ कैसे हों ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
केंद्र सरकार के इशारों  पर चलती “राज्यपाल” नामक संस्था हमेशा विवादों में रही है | कभी उसकी राज्य सरकार के साथ पटरी नहीं बैठती तो कभी वो समाज के मुद्दों पर केंद्र से भी दो-दो हाथ करने से गुरेज नहीं करते | इन दिनों  अब महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की देश के गृहमंत्री अमित शाह को लिखी एक चिट्ठी चर्चा में है। इस चिट्ठी में उन्होंने गृहमंत्री से ‘मार्गदर्शन’ मांगा है। आरिफ मोहम्मद खान,जगदीप धनखड़, अपने राज्य की सरकार से टकरा चुके हैं | मेघालय,  और अरुणाचल के राजभवनों की दस्तान भी जग जाहिर है | वैसे पश्चिम बंगाल, केरल, मेघालय आदि के राज्यपाल इतर कारणों से भी चर्चा में रहे हैं। केंद्रशासित राज्यों के लेफ्टिनेंट गवर्नर भी चुनी हुई सरकारों के निर्णयों में बाधा डालने के लिए आलोचना के शिकार होते रहे हैं। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और अधिकांश राज्यों में भी का...
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं 

महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं 

BREAKING NEWS, सामाजिक
मौजूदा पितृसत्तात्मक मानदंड सार्वजनिक या बाजार सेवाओं को लेने में एक महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न करते हैं। चाइल्डकैअर और लचीले काम के मुद्दे को संबोधित करने से सकारात्मक सामाजिक मानदंडों को शुरू करने में मदद मिल सकती है जो अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम के बोझ के पुनर्वितरण को प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं के कुशल लेकिन अवैतनिक कार्यों का एक बड़ा स्पेक्ट्रम अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान देता है। फिर भी, 'काम' के लिए जिम्मेदार नहीं होने के कारण इसका अवमूल्यन महिलाओं की स्थिति को कमजोर करता है, जिससे उनकी भेद्यता बढ़ जाती है। सार्वजनिक सेवाओं में अवसर की समानता सुनिश्चित करके लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालाँकि, इन समाधानों का एक सीमित प्रभाव होगा जब तक कि प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार परिवर्तन को लक्षित न किया जाए। -प्रियंका सौरभ  जबकि शिक्षा और पोष...
सोशल मीडिया पर खबरों के दौर में अखबारों पर भरोसा

सोशल मीडिया पर खबरों के दौर में अखबारों पर भरोसा

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* जहां तक राष्ट्रीय मीडिया की लोकप्रियता का सवाल है, यह कहना कठिन है कि उसके प्रति आम लोगों का प्रेम या आदर बढ़ा है लेकिन उसके दर्शकों और पाठकों की संख्या तो काफी बढ़ी ही है। जब आज से लगभग 45 साल पहले मैं नवभारत टाइम्स में काम करता था तो देश के इस सबसे बड़े अखबार की 4—5 लाख प्रतियां छपती थीं लेकिन अब तो हिंदी और अन्य भाषाओं के कई अखबारों की प्रसार—संख्या कई—कई लाखों में हैं और उनके पाठकों की संख्या करोड़ों में है। पहले किसी अखबार के दो—तीन संस्करण निकलते थे तो उन्हें बड़ा अखबार माना जाता था लेकिन अब कुछ अखबार ऐसे हैं, जिनके दर्जनों संस्करण छपते हैं।  यही स्थिति टीवी चैनलों की है। शुरू-शुरू में चार-पांच न्यूज़ चैनल ही दिखाई पड़ते थे, लेकिन आज विभिन्न भाषाओं में देश में सैकड़ों चैनल कार्यरत हैं। अब उनके दर्शकों की संख्या भी लाखों नहीं, करोड़ों में है। कई सर्वे...