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महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

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  अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार कर ही लिया कि कोरोना महामारी नहीं वरन उनके देश पर चीन का आक्रमण है। उनके देश पर ही नहीं वरन पूरी दुनिया पर। बिना हथियार चलाए चीन ने एक वायरस के माध्यम से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और पूरी दुनिया मौत के साए में नपुंसक सी अपनी बर्बादी का यह ख़ौफ़नाक दृश्य 24 घंटे देख रही है। मजेदार बात यह कि जिस लेब में यह वायरस पैदा किया गया उसकी फंडिंग अमेरिका से हो रही थी। शांति पूर्ण ढंग से वायरोलॉजी के उपयोग के लिए संयुक्त प्रयासों से चल रही इस लेब का इतना खतरनाक उपयोग कोई शायद ही सोच पाया हो। क्या विडंबना है कि जिस विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया के बड़े देश चीन की कठपुतली मां चुके हैं उसी के निर्देशों पर ही दुनिया के देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। क्या इस संस्था के माध्यम से चीन दुनिया को अपने इशारों पर चला रहा है और बर्बा...
सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था

सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था

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सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। लेकिन सऊदी के कबीलों को यह नहीं पसंद था कि तुर्की का खलीफा उस पर राज करें क्योंकि अरबी मुस्लिम अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे और तुर्क अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे। तुर्की के खलीफा ने इस्तांबुल से अम्मान फिर अम्मान से दमास्कस यानी दमिश्क़ फिर दमास्कस से होते हुए सऊदी अरब के विशाल रेगिस्तान को पार करके मक्का और मदीना तक रेलवे लाइन बिछाई थी जिसे हेजाज रेलवे कहते हैं मैंने इसके बारे में पहले भी विस्तार से लिखा हुआ है तुर्की का खलीफा सऊदी अरब के लोगों से एक गुलाम की तरह व्यवहार करता था और उसका कमांडर जब चाहे तब अरबों को मार डालता था उसी समय अंग्रेज तुर्की के खलीफा का पतन करना चाहते थे अंग्रेजों को यह बहुत अच्छा मौका मिला और उन्होंने कैप्टन लॉरेंस को इस गुप्त ऑपरेशन पर लगा दिया । लॉरेंस पहले भी इजिप्ट लीबिया सीरिया इत्याद...
आधुनिक और विकसित देशों के नागरिक स्वदेश लौटने को तैयार नहीं

आधुनिक और विकसित देशों के नागरिक स्वदेश लौटने को तैयार नहीं

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कोरोना वायरस के असर से अब संसार का कोई भी देश बचा नहीं है। कोरोना वायरस ने सच में सारी दुनिया को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया है। हर जगह कोरोना से रोज हजारों मौतें हो रही हैं। दुनिया इस वायरस के असर के कारण डरी-सहमी है। पर इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन, जहां से इस वायरस की उत्पति हुई और अन्य कई विकसित देशों के पेशेवर मैनेजर मल्टीनेशनल कंपनियों के भारत में रहने वाले हजारों नागरिक अपने को यहां पर अपने खुद के देश की बजाय ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल ये अपने देशों में वापस जाने के लिए भी तैयार नहीं हैं। विमान की और मुफ्त सफ़र की व्यवस्था के बावजूद आनाकानी कर रहे हैं । अगर बात अमेरिका से शुरू करें तो वहां पर रोज बड़ी संख्या में लोग कोरोना के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। अपने को सर्वशक्तिमान समझने वाले अमेरिका की दर्दनाक स्थिति अब तो इतनी खराब हो ग...
चीन द्वारा 10 दिन में अस्पताल खड़ा करना क्रूरता, बर्बरता व धूर्तता पूर्ण सामाजिक-धोखा

चीन द्वारा 10 दिन में अस्पताल खड़ा करना क्रूरता, बर्बरता व धूर्तता पूर्ण सामाजिक-धोखा

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  चीन में प्रतिदिन कई-कई हजार लाशें क्रेमेशन सेंटर्स (शवदाह गृहों) में लाद-लाद कर पहुंचाई जा रहीं थीं। लेकिन चीन दुनिया के सामने फर्जी दावा ठोंक रहा था कि पूरे कोरोना-काल में केवल कुछ हजार ही मौतें हुईं हैं। (जितनी कुल मौतें चीन ने बताई, उतनी तो लाशें हर रोज क्रेमेशन सेटर्स पहुंच रहीं थीं)। चीन ने दुनिया को धोखे में रखा, दुनिया के अनेक देशों ने कोरोना को हल्के में लिया, गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण देशों को भारी व अकल्पनीय क्षतियां उठानी पड़ीं। चीन में लाखों लोग बीमार थे। डाक्टरों के पास साधारण मास्क तक नहीं थे। मरीजों के लिए बिस्तर तक नहीं थे। अस्पताल कोरोना मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे थे। लोग अपने माता-पिता, रिश्तेदारों व मित्रों को अपनी आंखों के सामने तड़प-तड़प कर मरता देख रहे थे। लाखों लोग छोटे-छोटे माचिस के डब्बेनुमा घरों में कोरोना संक्रमित लोगों के साथ रहने को ब...
मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

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  दिल्ली में तलबीगी मरकज में हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमितों के साथ छिपकर देश को कोरोना वायरस के जाल में फंसाने वाले ये तथाकथित खुदा के बंदे बाज नहीं आ रहे हैं। जब तबलीगियों पर थोड़ा सा शिकंजा कसने लगा तो उनके हमदर्द मुम्बई में लॉकडाउन तोड़ने लगे। बांद्रा और थाणे में हजारों की संख्या में बिला वजह इकट्ठे होकर पुलिस और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने लगे और मुरादाबाद से लेकर इंदौर तथा बिहार के मोतिहारी और औरंगाबाद में पुलिस और डाक्टरों की टीम पर पथराव करने लगे। जरा इनकी हिम्मत तो देखें। अब कोई यह तो न कहे कि सरकार इन्हें दोयम दर्जे का नागरिक-मानती समझती है। ये तो सरकार और बहुसंख्यकों के सिर पर चढ़कर खुलेआम पेशाब कर रहे हैं। डाक्टरों से मारपीट, महिला नर्सों से अश्लीलता और सफाई कर्मचारियों पर थूकना आम्बत है। इनकी महिलायें छतों से ईंटे बरसा कर पुलिस पर हमला कर रही हैं। उत्तर प्रदेश ...
इस्लामिक देश बनाने के लिए तबलीगी जमात का भारत सरकार पर वार

इस्लामिक देश बनाने के लिए तबलीगी जमात का भारत सरकार पर वार

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दिल्ली के भीड़भाड़ भरे निजामउद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय से निकाले गए हजारों लोगों में इंडोनेशिया, मलेशिया बंगला देश आदि देशों के नागरिकों का होना भारतीय समाज की आंखें खोलने वाली घटना है. जमात ने तो भारत की पीठ पर वार किया है. वह तो भारत को इस तरह का घाव देना चाह रहा था ताकि भारत कभी उबर ही न सके. अब इस आशंका को तो ठोस आधार मिल चुका है कि तबलीगी जमात के विदेशी कार्यकर्ता भारत को कोरोना वायरस से भयंकर रूप से संक्रमित करना चाह रहे थे. यानी वे भारत की एक बड़ी आबादी को कोरोना का शिकार बनाकर यहां पर इस्लामिक देश बनाने का सपना देख रहे थे. मोटा-मोटी तबलीगी जमात का लक्ष्य तो भारत के मुसलमानों को कट्टरपंथी बनाने और गैर-मुसलमानों को इस्लाम से जोड़ना ही है. यह तो कहने की बातें हैं कि तबलीगी जमात के लोग मुसलमानों को बेहतर मुसलमान बनाने के मार्ग पर लेकर जाते हैं. राजधानी की तबलीगी जमा...
सड़कों पे दौड़ते बदहवास लोग

सड़कों पे दौड़ते बदहवास लोग

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1894 में स्पैनिश फ्लू से भारत में लगभग 2 करोड़ लोग मारे थे जबकि उस वक्त भारत की आबादी 20 करोड़ थी। कोरोना का असर कब तक, कितना घातक और किस किस इलाके में होगा उसका अभी कोई आँकलन नहीं है। कारण यह है कि जब से चीन में कोरोना फैला है तब से दुनिया भर से लगभग 15 लाख लोग भारत आ चुके हैं और ये पूरे भारत में फैल गए हैं। इनमें से कितने लोग कोरोना के पॉजिटिव हैं कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता। क्योंकि कोरोना के परीक्षण करने की बहुत सीमित सुविधाएँ देश में उपलब्ध हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के अलग अलग विशेषज्ञों द्वारा भारत में कोरोना के सम्भावित असर पर अनेकों तरह की भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं। जो झकझोरने और आतंकित करने वाली हैं। इन सब विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बहुसंख्यक गरीब आबादी जिसके लिए सामाजिक दूरी बना कर रहना असम्भव है, अगर वो इस बीमारी की चपेट में आ गई तो इस भयावक स्तिथि पर काबू पाना दुष्कर हो...
तबलीग़ी जमात के प्रपंच से  कैसे बचेगा भारत

तबलीग़ी जमात के प्रपंच से कैसे बचेगा भारत

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गैर-मुसलमानों को इस्लाम से जोड़ने और मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनाने के नाम पर कट्टरपंथी और आतंकवादी बनाने के रास्ते पर चलने की शिक्षा देने वाले तबलीग़ी जमात ने भारत की कोरोना वायरस के खिलाफजारी जंग को भारी क्षति पहुंचाई है। सच पूछा जाए तो इन्होंने देश को एक बड़े संकट में डाल दिया है। अब इस कठिन हालातों से देश कैसे निकलेगा यह एक अब बड़ा सवाल है।  जब कोरोना के कारण काबा बंद हो गया,मक्का मदीना बंद हो गये,ईसाइयों का तीर्थ स्थल वेटिकन सिटी पर ताले लग गए, मंदिर, मस्जिद गुरूद्वारे  बंद हो गए, तब्लीगी जमात दिल्ली के निजामउद्दीन इलाके में हजारों देशी-विदेशी मौलानाओं को इकट्ठा कर अपनाजलसा कर रहे थे। प्रधानमंत्री की अपीलों को क्यों किया नजरअँदाज  अब इनके हक में दलीलें देने वाले जरा यह तो बताएं कि क्या इन्हें इतनी भी समझ नहीं थी कि जब पूरे विश्व में कोरोना का प्रकोप है और जब देश लॉक डाउन और सो...
सउदी अरब की बहाबी विचारधारा पैसों के प्रभाव में कट्टरपंथी होते भारतीय मुसलमान

सउदी अरब की बहाबी विचारधारा पैसों के प्रभाव में कट्टरपंथी होते भारतीय मुसलमान

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  भारतीय इस्लाम पर खुद अरब के इस्लाम में आए बदलाव का असर देखा जा रहा है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सऊद परिवार ने अरब खाड़ी के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। यह परिवार इस्लाम की कट्टर विचारधारा – वहाबी का समर्थक है और इसकी वजह से सऊदी अरब में मुसलमान वहाबी धारा को सबसे ज्यादा मानते हैं। जैसे-जैसे पूरे विश्व में औद्योगीकरण बढ़ता गया, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ती गई वैसे-वैसे सऊदी अरब और समृद्ध होता गया। भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों का उच्च तबका इस समय इन अरबी शब्दों को अपनी सांस्कृतिक पहचान मानकर अपना रहा है। इसके जरिए वे आम मुसलमान नहीं बल्कि उस तरह के मुसलमान बन रहे हैं जो सऊदी अरब द्वारा प्रचारित हैं। भारत से लगभग 32 लाखमुस्लिम विदेश में प्रवास में रह रहे हैं। उनकी पहली पसंद अरब खाड़ी के देश होते हैं जहां वहाबी इस्लाम का ही बोलबाला है। ऐतिहासिक रूप से, इस्लाम को मानने वालों ने ...
अकेले चीन ही नहीं पश्चिमी देशों के कुकर्मों का परिणाम भी है कोरोना वायरस का संकट

अकेले चीन ही नहीं पश्चिमी देशों के कुकर्मों का परिणाम भी है कोरोना वायरस का संकट

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दुनिया को बाज़ार बना कर लूटने के पश्चिमी देशों के षड्यंत्रों का पिछले 500 बर्षो से दुनिया गवाह रही है। तीसरी दुनिया का हर नागरिक इस दर्द की पीड़ा की जानता है। आज कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया के 200 देशों तक फैल चुका है। दुनिया इसके लिए चीन को दोषी ठहरा रही है मगर उसके साथ पश्चिमी देश भी उतने ही दोषी है। इसके लिए पिछले कुछ दशकों के दुनिया के घटनाक्रमो को समझना होगा। 1) इसमें पहला चरण एशिया, अफ्रीका व लेटिन अमेरिकी देशों को गुलाम बनाकर लूटने का रहा जो इन देशो में पिछले 100 सालों में आयी जनजागृति के कारण आजादी के आंदोलनों में बदल गया और अंततः इन देशों को मुक्त करना पड़ा। मगर आजादी देने से पूर्व " ड्रेन ऑफ वेल्थ" की रणनीति पर अमल करते हुए 400 बर्षो तक इन देशों का यथासंभव शोषण व लूट के खेल चलते रहे। विकसित देशों की प्रचुर दौलत व शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के पीछे यही लूट का माल है। जितने भी पि...