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सात समंदर पार बसे भारतीय जुड़े भारत से

सात समंदर पार बसे भारतीय जुड़े भारत से

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15 वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 21 जनवरी से वाराणसी में उस समय  शुरू हुआ है, जब अमेरिका में बसी दो भारतीय मूल की महिलाओं की चर्चा विशेष रूप से विश्व भर में हो रही है। पहली गीता गोपीनाथ हैं। उन्होंने अंतर राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अध्यक्ष का पद भार संभाल लिया है। दूसरी हैं चैन्नई में पैदा हुई इंदिरा नूई। कभी कोका कोला जैसी प्रख्यात शीतलपेय बनाने वाली कंपनी की प्रमुख रही इंदिरा नूर्इ को विश्व बैंक का प्रमुख बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। दरअसल ये दोनों उदाहरण मात्र हैं, यह सिद्ध करने के लिए कि सारी दुनिया में भारतीय अपने ज्ञान, मेहनत,लगन के बल पर आगे बढ़ते ही चले जा रहे हैं।हालांकि, ये दोनों प्रवासी सम्मेलन में अपरिहार्य कारणों से नहीं उपस्थित हो पा रही हैं, पर इनकी चर्चाएं होती ही रहेगी। दरअसल कुंभ मेला और गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए आ रहे  सात समंदर पार बसे भारती...
राष्ट्रीय सरकार क्यों न बने?

राष्ट्रीय सरकार क्यों न बने?

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संसदीय चुनाव दस्तक दे रहा है। सत्ता पक्ष खम ठोक कर अपने वापिस आने का दावा कर रहा है और साथ ही विपक्षी दलों के गठबंधन कोअवसरवादियों का जमावाड़ा बता रहा है। आने वाले दिनों में दोनों ओर से हमले तेज होंगे। कुछ अप्रत्याशित घटनाऐं भी हो सकती है। जिनसे मतोंका ध्रुवीकरण किया जा सके। पर चुनाव के बाद की स्थिति अभी  स्पष्ट नहीं है। हर दल अपने दिल में जानता है कि इस बार किसी की भीबहुमत की सरकार बनने नहीं जा रही। जो दूसरे दलों को अवसरवादी बता रहे हैं, वे भी सत्ता पाने के लिए चुनाव के बाद किसी भी दल के साथगठबंधन करने को तत्पर होंगे। इतिहास इस बात का गवाह है कि भजपा हो या कांग्रेस, तृणमूल हो या सपा, तेलगुदेशम् हो या डीएमके,शिवसेना हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस, रालोद हो या जनता दल, कोई भी दल, अवसर पड़ने पर किसी भी अन्य दल के साथ समझौता कर लेता है।तब सारे मतभेद भुला दिये जाते है। चुनाव के पहले ...
सफलता का मंत्र है कल नहीं, आज

सफलता का मंत्र है कल नहीं, आज

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‘कल नहीं आज’ यह ही सफलता का परम मंत्र है। हमें जीवन के हर क्षेत्र में उसका अनुसरण करना चाहिए। एक अंग्रेज विचारक ने लिखा है-भूतकाल इतिहास है, भविष्य रहस्य है, वर्तमान उपहार है। इसलिए वर्तमान को प्रजेंट कहते हैं। अतः हमें आज के प्रति वफादार और जागरूक बनना चाहिए। जो आज को सार्थक बनाता है, उसके भूत और भविष्य दोनों सफल बन जाते हैं। एक सबक हमेशा गांठ बांधकर रखना होगा कि खेल छोड़ देने वाला कभी नहीं जीतता और जीतने वाला कभी खेल नहीं छोड़ता। यदि बड़े काम नहीं कर सकते, तो छोटे काम बड़े ढंग से करने चाहिए। हर बार हां ही नहीं ना भी कहना सफलता के लिये जरूरी होता है। क्योंकि हमारी ‘हां’ की तरह ‘ना’ के भी मायने होते हैं। एक समय में हम सब कुछ नहीं चुन सकते। हमें अपनी और अपनों की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए चुनाव करने होते हैं। यूं भी हर ‘हां’, कहीं ‘ना’ होती है और हर ‘ना’, कहीं ‘हां’ हो ...
आखिर क्यों हम तोड़ते हैं कतार

आखिर क्यों हम तोड़ते हैं कतार

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हाल ही में कुछ अखबारों ने एक फोटो छापी थी। उसमें संसार के सबसे धनी इंसान बिल गेट्स कतार में खड़े हैं। वह तस्वीर अपने-आप में बहुत कुछ कहती है,   कतार के महत्व को भलीभांति समझाती है। हमारे अपने यहां रोज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सिनेमा घर वगैरह–वगैरह में, हर जगह कतारों के तोड़ने की घटना को दर्शाती घटनाओं की साक्षी हिन्दुस्तानियों के लिए उपर्युक्त चित्र अकल्पनीय अहसास दे जाते हैं। यकीन ही नहीं होता कि माइक्रोसाफ्ट कंपनी का संस्थापक बिल गेट्स कायदे से कतार में खड़ा है। उनके पास कतार में खड़े होने का वक्त है। वे अपने पैसे के रसूख से कतार को तोड़ते की हिमाकत नहीं करता। क्या आप भारत में इस तरह की घटना की कल्पना कर सकते हैं कि भारत का कोई नामवर या असरदार इंसान भी कतार में खड़ा हो?  असंभव है। कतार को तोड़ने के मामले में सारा देश एक है। भारत का अमीर और शक्तिशाली तो लाइन में खड़ा होना अपनी शान के खिला...
वैज्ञानिकों ने बनाया कमल की पत्तियों से प्रेरित ईको-फेंडली मैटेरियल

वैज्ञानिकों ने बनाया कमल की पत्तियों से प्रेरित ईको-फेंडली मैटेरियल

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प्रकृति से प्रेरणा लेकर वैज्ञानिक कई तरह की उपयोगी चीजों का निर्माण करते रहते हैं। भारतीय और स्विस वैज्ञानिकों ने कमल की पत्तियों से प्रेरित होकर जैविक रूप से अपघटित होने में सक्षम एक ऐसा मैटेरियल विकसित किया है, जिसकी सतह पर पानी नहीं ठहर पाता है। कमल की पत्तियों की सतह पर प्राकृतिक रूप से निर्मित मोम जल विकर्षक के रूप में कार्य करता है, जिसके कारण पानी में रहने के बावजूद कमल की पत्तियां सड़ती नहीं हैं। नया जल विकर्षक (Water Repellent) मैटेरियल इसी तरह काम करता है। इस मैटेरियल में सेलूलोज की मदद से सूक्ष्म स्तंभों (Micropillars) की संरचना बनायी गई है। सेलूलोज की ढलाई के लिए ट्रायफ्लुरोएसिटिक एसिड में सेलूलोज पाउडर को पहले विघटित किया गया है और फिर पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सुखाने की नियंत्रित प्रक्रिया से एसिड को हटा दिया गया। इसके बाद कमल के पत्तों में पाये जाने वा...
History and Literature: A comparative analysis

History and Literature: A comparative analysis

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What is History, how it is different from Literature, their inter-relation and how our Ramayana and Mahabharata are not just part of history but history themselves, and not literature: Explains Abhinav Shankar Anikul_ *===========================* What the history terms gruesomely, dismissively & witheringly otherwise; the literature treats in a generous, lenient & commiserative manner. In a way we see a strange paradox between these two here, but perhaps naturally so. Equally ironic is that today when it is a standard practice to look into literature while caricaturing the history, difficult to say how much of this paradox is acoounted while doing so. The History follows it's own simple & plain rules for describing things. It is utilitarian in it's basic purpose. It belie...
पृथ्वी और हमारी सेहत के लिए संतुलित भोजन का नया फॉर्मूला

पृथ्वी और हमारी सेहत के लिए संतुलित भोजन का नया फॉर्मूला

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अपनी सेहत के साथ अगर आप पृथ्वी को भी स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो डाइनिंग टेबल पर अभी से बदलाव शुरू कर दीजिए। पिछली करीब आधी सदी के दौरान खानपान की आदतों में विश्व स्तर पर बदलाव आया है और उच्च कैलोरी तथा पशु स्रोतों पर आधारित प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है। इस कारण मोटापा और गैर-संचारी बीमारियां बढ़ी हैं और पर्यावरण को नुकसान हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खुद को स्वस्थ रखने के साथ अपने ग्रह को भी स्वस्थ रखना है, तो आहार के कुछ ऐसे मानक तय करने होंगे, जो अपनी सेहत के साथ-साथ पृथ्वी की सेहत के अनुकूल हों। मेडिकल शोध पत्रिका लैन्सेट में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन में पृथ्वी के अनुकूल ऐसे आहार की सिफारिश की गई है, जो मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ टिकाऊ विकास के लिए भी अच्छा हो। शोधकर्ताओं के अनुसार, वैश्विक स्तर पर यदि आहार और खाद्य उत्पादन में बदलाव लाया जाए तो वर्ष 2050 और उसस...

विज्ञान संचार के लिए डीडी साइंस और इंडिया साइंस की शुरुआत

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और दूरदर्शन ने मिलकर विज्ञान संचार से जुड़ी दो परियोजनाओं डीडी साइंस और इंडिया साइंस की शुरुआत की है। विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से शुरू की गआ इन दोनों परियोजनाओं का उद्घाटन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने किया है। डीडी साइंस दूरदर्शन पर एक घंटे का स्लॉट है, जिस पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यक्रमों का प्रसारण सोमवार से शनिवार शाम 5 से 6 बजे तक किया जाएगा। वहीं, इंडिया साइंस इंटरनेट आधारित ओटीटी चैनल है, जिसे किसी भी इंटरनेट सक्षम डिवाइस पर देखा जा सकता है। इस संबंध में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ नकुल पाराशर और दूरदर्शन की महानिदेशक सुप्रिया साहू ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। विज्ञान संचार से जुड़े ये दोनों चैनल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की परिकल्पना और सम...
Congress-government in Chhatisgarh forces school-children back to non-vegetarianism with egg in menu of Mid Day meal

Congress-government in Chhatisgarh forces school-children back to non-vegetarianism with egg in menu of Mid Day meal

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At a time when vegetarianism is getting fast popularity world-wide, it is shocking Congress led Chhatisgarh government is forcing school-children to non-vegetarianism by inducing eggs in mid-deal meal programme for school-children. India is the only country in the world where vegetarianism is integral part of culture and religion. Even many restaurants observe non-vegetarianism twice a year for ten days in Navratras. Many non-vegetarian persons adopt vegetarianism during Navratras and Tuesdays as religious requirement. Under the circumstances, at least non-vegetarianism must not be allowed in government-sponsored schemes like mid-day meal programme.   MADHU AGRAWAL
Mistake by UPA regime by exempting CBI from RTI Act be undone to end controversies

Mistake by UPA regime by exempting CBI from RTI Act be undone to end controversies

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Recent happenings in affairs of Central Bureau of Investigation CBI resulting in big controversies even involving Supreme Court judges are result of great mistake done by earlier UPA regime by unlawfully putting CBI under second schedule of RTI Act for exempting the premium Investigating Agency out of purview of RTI Act under section 24 of the Act through DoPT notification dated 09.06.2011. Section 24 was incorporated in RTI Act for exempting intelligence authorities and not the investigating agencies. File-notings reveal that CBI was exempted from RTI Act on uncomfortable queries of CBI taking sudden U-turns on probes involving former or the then existing Chief Ministers according to requirement of the then political rulers. Even CBI at that time demanded only partial exemption from RT...