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The hypocrisy of the ‘Freedom of the Press’ campaign

The hypocrisy of the ‘Freedom of the Press’ campaign

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"There is no such thing, at this date of the world's history, as an independent press. You know it and I know it. There is not one of you who dares to write your honest opinions, and if you did, you know beforehand that it would never appear in print. I am paid weekly for keeping my honest opinions out of the paper I am connected with. Others of you are paid similar salaries for similar things, and any of you who would be so foolish as to write honest opinions would be out on the streets looking for another job. If I allowed my honest opinions to appear in one issue of my paper, before twenty-four hours my occupation would be gone. The business of the journalist is to destroy the truth; to lie outright; to pervert; to vilify; to fawn at the feet of mammon, and to sell the country for hi...
Centre’s Aadhaar affidavit in Supreme Court: ‘Welfare of masses trumps privacy of elite’

Centre’s Aadhaar affidavit in Supreme Court: ‘Welfare of masses trumps privacy of elite’

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Krishnadas Rajagopal NEW DELHI, JUNE 09, 2017 23:39 IST A handful of people not affected by Aadhaar Act are questioning it and consequently, the benefits it gives to poor: Centre Calling Aadhaar a “transformational homegrown IT project”, the Centre said on Friday that the fundamental right of identity and various e-governance initiatives of the government to provide food security, livelihood, jobs and health to the “teeming masses” cannot be sacrificed at the altar of right to privacy of an “elite” few who have neither applied for nor want Aadhaar. The affidavit was the government’s response to petitions filed by several persons, including former NCPCR chairperson and Magsaysay winner Shanta Sinha, against 17 government notifications allegedly making Aadhaar mandatory to access wel...
Over-sale of medicines through change in packing: Strips of ten rather than fifteen may only be there

Over-sale of medicines through change in packing: Strips of ten rather than fifteen may only be there

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Many drug-manufacturers in order to increase sale of their medicines have started packing medicine-strips with fifteen tablets or capsules in a strip rather than earlier ten. Idea behind such a move is to over-sale medicines because chemists usually sell medicines in full strips only, and unused tablets or capsules in part-strip are total waste for consumers. Only recently many medicines including like Amaryl-1, Telma-40 and Glyzid-M, Pan-D etc have been started being marketed in strips other than earlier of ten tablets or capsules. Several manufacturers of commonly advertised medicines like cough-lozenges have moved in reverse direction by having just eight cough-lozenges per strip rather than ten, only because consumers normally judge price of such commonly advertised medicines per strip...
High Courts still named after old city-names?

High Courts still named after old city-names?

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There was a move from Central government sometime in January 2015 for renaming Bombay High Court and Madras High Court after long years of renaming these cities as Mumbai and Chennai. But till now change is not affected. Even Calcutta High Court is to be renamed as Kolkatta High Court. It is significant that except for these three High Courts at Mumbai, Chennai and Kolkata respectively, all other High Courts are named after states of their jurisdiction. An RTI response had revealed that while all the High Courts constituted after independence were named after respective main states of jurisdiction, these three High Courts constituted by British regime in pre-independence era continue to be named as per British legacy on basis of cities of their existence even after 70 long years of ind...
अंधविश्वास, तंत्र- मंत्र,  टोने-टोटके और पुजा पाठ  नही कर्म ही बचाएगा कुर्सी

अंधविश्वास, तंत्र- मंत्र, टोने-टोटके और पुजा पाठ नही कर्म ही बचाएगा कुर्सी

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जिस तरह से भारतीय समाज में अनेक तरह के अंधविश्वास और कुरूतियां फैली है ठीक वैसे ही राजनेताओं के बीच भी यह गहरे तक समाई है। असल में हम राजनेताओं को जितना सुलझा हुआ और व्यवहारिकता के धरातल पर चलने वाला इंसान मानते है वह उतना ही ईश्वर आश्रित और पंगु व्यवहार का पक्षधर रहा है। हाल ही में अंधविश्वास का एक मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर सामने आया है। दरअसल पीएम मोदी को नमामी देवी नर्मदे यात्रा के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहुंचना था। भारतीय राजनीति में अमरकंटक को लेकर कई तरह की शंका-कुशंका और मान्यताएं हैं। माना जाता है कि जिस भी राजनेता ने नर्मदा नदी को लांघा है, उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। भारतीय राजनीति के इतिहास पर नजर डालें तो पांच बड़ेे नेताओं के ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जिन्हे नर्मदा लांघने के बाद सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। अमरकंटक जाने के लिए नर्मदा...
मोदी राज – तीन साल जज्बा भी, जलवा भी

मोदी राज – तीन साल जज्बा भी, जलवा भी

TOP STORIES, राष्ट्रीय
मोदी सरकार को तीन साल हो गए हैं। विपक्ष खुश है क्योंकि उसे लगता है भाजपा सरकार कह कर भी अच्छे दिन नहीं ला पायी है। दूसरी तरफ भाजपा खुश है क्योंकि उसको लगता है कि उसने विपक्ष को नेस्तनाबूद कर दिया है। पक्ष और विपक्ष की इस लड़ाई में जनता कहाँ खड़ी है यह प्रश्न महत्वपूर्ण है। अच्छे दिन के वादे के साथ जिस सरकार ने शपथ ली थी उससे जितनी अपेक्षाएँ थीं उतनी अपेक्षाएँ इन तीन सालों में पूरी नहीं हुयी हैं। हाँ, योजनाओं और अभियानो के द्वारा एक भविष्य का खाका दिखने लगा है। जिस तरह से भाजपा लगातार राज्यों पर कब्जा करती जा रही है उससे लगता है कि जनता में भाजपा की विश्वसनीयता अभी बरकरार है। मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल पर विशेष संवाददाता अमित त्यागी एक विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं। रेंद्र मोदी सरकार तीन साल बाद भी विश्वसनीय नजर आ रही है जो इस सरकार की सबसे बड़ïी सफलता है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि सरक...
शिक्षा उद्योग में सहायक मगर उद्योग नहीँ – डायलॉग इंडिया कॉन्क्लेव में बोले उ प्र विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित

शिक्षा उद्योग में सहायक मगर उद्योग नहीँ – डायलॉग इंडिया कॉन्क्लेव में बोले उ प्र विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित

BREAKING NEWS, Today News, TOP STORIES
डायलाग इंडिया अकेडमिया कॉन्क्लेव और अवार्ड फंक्शन - 2017 के प्रथम चरण का लखनऊ में भव्य आयोजन सम्मानित किए गए दो दर्जन से अधिक संस्थान लखनऊ का होटल क्लार्क अवध कल 20 मई,2017 को एक भव्य आयोजन का साक्षी बना, जिसमें पूरे देश से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षण संस्थानों के साथ साथ जाने माने शिक्षाविद भी उपस्थित थे, और इसके साथ ही था शिक्षा के क्षेत्र में ज्वलंत मुद्दों पर चर्चाएँ. मौक़ा था डायलोग इंडिया के द्वारा आयोजित तीसरे डायलॉग इंडिया अकेडमिया कॉन्क्लेव और पांचवे डायलोग इंडिया एकेडमिया अवार्ड का, जिसमें न केवल शिक्षा जगत के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चाएँ थी बल्कि उसके साथ ही निजी क्षेत्र के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अखिल भारतीय रेंकिंग भी जारी की गयी। जिसे विभिन्न मानकों पर डायलोग इंडिया ...
Dialogue India Academia Conclave and Award Function – The grand finale of Lucknow in the first phase of 2017,                         More than two dozen institutes honored

Dialogue India Academia Conclave and Award Function – The grand finale of Lucknow in the first phase of 2017, More than two dozen institutes honored

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The grand finale of Lucknow in the first phase of 2017, More than two dozen institutes honored Lucknow's hotel, Clark Awadh, witnessed a grand event on 20th May, 2017, in which there was a well-known education academy along with educational institutions working in the field of higher education from all over the country, and also with the burning of education. Discussions on issues The occasion was the third Dialog India Akademia Conclave organized by Dialogue India and the fifth Dialogue India Academy Award, which not only discussed the burning issues of education but also all-India rankings for the private sector's higher education institutions. Which was prepared by Dialogue India's research team after several months of hard work on various parameters. Dialog...
समस्त जल प्रबंधन प्रणालियों की जांच का वक्त

समस्त जल प्रबंधन प्रणालियों की जांच का वक्त

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हमने कभी सिंचाई के नाम पर नदियों को बांधा और कभी बाढ मुक्ति़-बिजली उत्पादन के नाम पर। नदी के नफ़ा-नुकसान की समीक्षा किए बगैर यह क्रम आज भी जारी है। एक चित्र में नदियों को जहां चाहे तोड़ने-मोड़ने-जोड़ने की तैयारी है, तो दूसरे में भारत की हर प्रमुख नदी के बीच जलपरिवहन और नदी किनारे पर राजमार्ग के सपने को आकार देने की पुरजोर कोशिश आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। नोएडा से गाजीपुर तक गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को आगे बढ़ाने की मायावती सरकार की पैरोकारी को याद कीजिए। श्री नितिन गडकरी द्वारा परिवहन मंत्री बनते ही गंगा जलमार्ग के नाम पर इलाहाबाद से हल्दिया के बीच हर सौ किलोमीटर पर एक बैराज बनाने की घोषणा को याद कीजिए। श्री गडकरी ने अब ब्रह्मपुत्र किनारे भी राजमार्ग की परियोजना को आगे बढ़ा दिया है। तीसरे चित्र में साबरमती रिवर फ्रंट डेवलॅपमेंट माॅडल से निकला जिन्न, राजधानियों में मौजूद नदी भूमि को अपने को व्य...
बिहार की बदहाली पर क्यों बात नहीं करते लालू

बिहार की बदहाली पर क्यों बात नहीं करते लालू

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आर.के. सिन्हा बुनियादी सवालों से भटका कर जुमलेबाजी करने में लालू यादव वास्तव में बेजोड़ हैं। उसकी एक ताजा बानगी बिहार के राजगीर में हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल(राजद) में आयोजित सम्मेलन में देखने को मिली। वहां पर राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने यह बेहद गैर-राजनितिक और बेतुकी मांग कर दी कि देश के चारों पीठ में शंकराचार्य की नियुक्ति में भी आरक्षण लागू किया जाये। लालू यही ड्रामा बिहार में करते रहे हैं। उन्होंने बिहार में बेरोजगारी दूर करने, निवेश आकर्षित करने, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, इंफ्रास्ट्कचर वगैरह को दुरुस्त करने जैसे मुद्धों को कभी भी गंभीरता से लिया ही नहीं। वे तो मात्र वोट बैंक की राजनीति करना जानते हैंI उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि शंकराचार्य की नियुक्ति में आरक्षण करने से बिहार के सारे दुख दूर हो जाएंगे या उनके दुःख दूर हो जायेंगें? वे चाहते क्या हैं? पिछले बिहार विधानसभा ...