आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं
(ऐसे मामलों से निपटने के लिए आज हमें तत्काल उपायों की जरूरत है,भावनात्मक संकट लोगों को पहले स्थानीय, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से कोविद -19 संबंधित समाचार खपत की सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता है और ये सभी स्रोत सीडीसी और डब्ल्यूएचओ जैसे प्रामाणिक होने चाहिए।)
-- डॉo सत्यवान सौरभ,
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी,
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
हर 40 सेकंड में, दुनिया में कोई न कोई अपनी जान लेता है। समाजशास्त्री एमिल दुर्खीम ने प्रसिद्ध रूप से परिकल्पना की थी कि 'आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कारक भी हैं।'
दुनिया भर में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोग कोविड -19 संक्रमण, सामाजिक कलंक, अलगाव, अवसाद, चिंता, भावनात्मक ...
