कोरोना और आयुर्वेद : राजीव कुमार
अगर हैंड सैनिटाइजर के अतिरिक्त भारत सरकार लोगों को गिलोय ,तुलसी ,अदरक ,हल्दी आदि युक्त आयुर्वेदिक काढ़ा वितरित करती । तो कम्युनिस्ट वायरस को काफी हद तक काबू किया जा सकता है । लेकिन भारत सरकार को केवल एलोपैथी पर विश्वास है । सरकार अपने हेल्थ बजट का 98% एलोपैथी पर खर्च करती है और आयुर्वेद को समाप्त करने के लिये नए नए हथकण्डे अपनाये जाते हैं । नीम पीपल और अन्य औषधि पेड़ों के स्थान पर विदेशी गुणरहित पेडों को बीजा जाता है । आयुर्वेद को झोला छाप की संज्ञा दी जाती है । आयुर्वेद के लिये आवश्यक संस्कृत का मजाक उड़ाया जाता है । जिस एलोपैथी पर सरकार को पूरा विश्वास था अब उसने हाथ खड़े कर दिए हैं । ले देकर मुश्किल से एक दवा HCQ ढूंढ़ी गई है जो मलेरिया की दवा है । इसका क्या कुछ प्रभाव होता है या नही अभी पता नहीं । अन्धेरे में तीर छोड़े जा रहें हैं । एलोपैथी में अधिकतर वायरस जनित बीमारी की कोई दवा नही ...
