आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?
आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?
आज भारतवर्ष ही नहीं पूरा विश्व अर्थ अर्थात् भौतिकवाद की दौड़ में भाग रहा है। धर्म और काम नियन्त्रित नहीं है अत: अमर्यादित एषणाएँ पल्लवित, फलित एवं पुष्पित हो रही है। आबाल-वृहद, नर-नारी कामाचार अभक्ष्यभक्षण आदि दुष्ट प्रवृत्तियों का शिकार हो रहे हैं, व्यक्ति, समाज, देश एवं राष्ट्र के प्रति अपने पावन-पवित्र कर्तव्य से विमुख से दिखाई देते हैं। हम जहाँ कहीं थोड़ी बहुत धार्मिकता या आध्यात्मिकता के दर्शन करते हैं, देखा जाए तो वास्तव में वहाँ भी उनके आवरण में पाखण्ड, दम्भ दिखावा ही दिखाई देता है। इस विषम दु:खदायी-पीड़ादायी परिस्थिति में श्रीहनुमानजी की उपासना-भक्ति ही संजीवनी बूटी है।श्री हनुमानजी के चरित्र से बुद्धि, विवेक, शक्ति, अभिमान से मुक्ति एवं माता-पिता ही नहीं राष्ट्र की सेवा एवं समर्पण की भावना का उदय होगा। श्रीहनुमानजी के चरित्र से नई ...
