जंगलराज शब्द कभी विपक्ष का हथियार, अब सत्ता की बेबसी
जंगलराज शब्द कभी विपक्ष का हथियार, अब सत्ता की बेबसी
अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार
बिहार में ‘जंगलराज’ शब्द महज एक आरोप नहीं, बल्कि दशकों से सत्ता बदलने का सबसे कारगर हथियार रहा है। लालू-राबड़ी शासन के वक्त अगर कोई एक लाठी सबसे ज़्यादा चली तो वो थी जंगलराज के नाम की। नीतीश कुमार ने इसी के दम पर खुद को ‘सुशासन बाबू’ के तौर पर गढ़ा और एनडीए की गाड़ी को पटरी पर रखा। लेकिन आज वही जंगलराज फिर से चर्चा में है, फर्क बस इतना है कि बोलने वाले अब विरोधी हैं और चुप रहने वाले सत्ताधारी।बीते दो महीनों की घटनाएँ देखिए राजधानी पटना के बीचों बीच दिनदहाड़े कारोबारी गोपाल खेमका को गोली मार दी जाती है। पुलिस स्टेशन से कुछ ही दूरी पर व्यापारी का मर्डर बताता है कि अपराधियों को अब पुलिसिया कार्रवाई की परवाह नहीं रही। इससे पहले पारस अस्पताल में इलाजरत कुख्यात गैंगस्टर की हॉस्पिटल के अंदर घुसकर हत्या कर दी जाती...
