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चार सौ पार क्यों?

चार सौ पार क्यों?*

यूँ तो सुलझे हुए नेता और विचारक सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों में ही है। दोनों ख़ेमों में इन दिनों चर्चा का मुद्दा चार सौ पार की जरूरत क्यों? ही है। इसका स्पष्टीकरण देते हुए भाजपा के कर्नाटक से सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार हेगड़े ने कहा कि संविधान को बदलने के लिए पार्टी को 400 सीटों की जरूरत होगी। ‘‘कांग्रेस ने संविधान को विकृत कर दिया है। उसका मूल स्वरूप बदल दिया है। उसने संविधान में अनावश्यक चीजें ठूंस दी हैं। ऐसे कानून बनाए गए हैं जो हिन्दू समुदाय का दमन करते हैं। ऐसे में अगर इस स्थिति को बदला जाना है, अगर संविधान को बदला जाना है, तो वह उतनी सीटों से संभव नहीं है जितनी अभी हमारे पास हैं।’’

हालाँकि भाजपा ने इस बयान से दूरी बना ली है । उसने कहा कि वह अपने सांसद के वक्तव्य का अनुमोदन नहीं करती। मगर एक बात पक्की है, भाजपा में इस तरह के बयान और दावे कोई नई बात नहीं हैं। अनंत कुमार हेगड़े ने यही बात 2017 में भी कही थी जब वे बीजेपी की केन्द्र सरकार में मंत्री थे।

इसके विपरीत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कई अन्य का मानना है कि बीजेपी को 400 सीटें उसी उद्देश्य के लिए चाहिए, जिसकी बात हेगड़े कर रहे हैं। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘‘भाजपा सांसद का यह बयान कि पार्टी को संविधान बदलने के लिए 400 सीटों की जरूरत होगी, दरअसल, नरेंद्र मोदी और उनके संघ परिवार के गुप्त एजेण्डा की सार्वजनिक उद्घोषणा है। उनका कहना है नरेंद्र मोदी और भाजपा का अंतिम उद्देश्य बाबा साहेब के बनाए संविधान को नष्ट करना है।“

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि ‘‘समाज को बांटकर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाकर और स्वतंत्र संस्थाओं को पंगु कर संघ परिवार भारत के महान प्रजातंत्र को एक संकीर्ण तानाशाही में बदल देना चाहता है और एक षड़यंत्र के तहत विपक्ष को समाप्त किया जा रहा है।’’

एक और अवधारणा भी है सन 2000 में सर संघचालक बनने के बाद श्री के॰ सुदर्शन ने साफ़ -साफ़ कहा था कि भारत का संविधान पश्चिमी मूल्यों पर आधारित है और उसके स्थान पर एक ऐसा संविधान बनाया जाना चाहिए जो भारतीय पवित्र ग्रन्थों पर आधारित हो। सुदर्शन ने कहा था कि वर्तमान संविधान भारत के लोगों के लिए किसी काम का नहीं है क्योंकि वह गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें संविधान को पूरी तरह से बदल डालने में संकोच नहीं करना चाहिए।

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने सन् 1998 में सत्ता में आने के बाद संविधान की समीक्षा के लिए एक आयोग की नियुक्ति की थी । इस आयोग (वेंकटचलैया आयोग) की रिपोर्ट लागू नहीं की जा सकी क्योंकि संविधान के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का विरोध हुआ। भाजपा अपने बल पर 2014 से सत्ता में है और तब से उसने कई बार संविधान की उद्देशिका का प्रयोग, उसमें से धर्मनिरपेक्ष व समाजवादी शब्द हटाकर किया है।ऐसा कांग्रेस का आरोप है।

अपने बूते पर यदि भाजपा 400 सीटें जीत कर लाती है तो देश उस प्रक्रिया से भी गुजरना पढ़ सकता है जिसमें प्रजातंत्र का स्वरूप बदलता हुआ दिखाई दे।

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