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Author: Dialogue India

सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
भारत अखण्ड सम्प्रभुता और राष्ट्रीयता है। हम भारत के लोग प्राचीन राष्ट्र हैं। भारत खण्डों को जोड़ कर नहीं बना लेकिन कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी को संभवतः भारत टूटा फूटा दिखाई पड़ता है। इसीलिए वे भारत जोड़ने की अपील के साथ पद यात्रा पर हैं। उन्होंने राष्ट्रवादी विचार के महानायक विनायक दामोदर सावरकर पर अभद्र टिप्पणी की है। सावरकर को अंग्रेजी सत्ता का पेंशनर बताया है। कहा है कि ”उन्होंने अंग्रेजी सत्ता की मदद की। जेल से अपनी रिहाई कि लिए माफी मांगी थी।” राहुल गाँधी का वक्तव्य क्रांतिकारी सावरकर पर घटिया आरोप है। राहुल नहीं जानते कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक समिति के मंत्री पंडित बाखले ने सावरकर जन्म तिथि अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी को पत्र लिखा था। श्रीमती गाँधी ने मई 1980 के पत्र में बाखले को उत्तर दिया, ‘‘मुझे आपका पत्र मिला। सावरकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अति सा...
इतने बड़े घोटालों की जाँच में पक्षपात क्यों हो रहा है?

इतने बड़े घोटालों की जाँच में पक्षपात क्यों हो रहा है?

TOP STORIES, घोटाला
*विनीत नारायणबैंकों का धन लूटकर विदेशों में धन शोधन करने वाले बड़े औद्योगिक घरानों की जाँच को लेकर जाँच एजेंसियाँ आए दिनविवादों में घिरी रहती हैं। मामला नीरव मोदी का हो, विजय माल्या का हो या मेहुल चोक्सी का हो, इन भगोड़े वित्तीयअपराधियों को जेल की सलाख़ों के पीछे भेजने में हमारे देश की बड़ी जाँच एजेंसियाँ लगातार विफल रही हैं। ऐसी नाकामीके कारण ही इन एजेंसियों पर चुनिन्दा आरोपियों के ख़िलाफ़ ही कारवाई करने के आरोप भी लगते रहे हैं।पिछले दिनों कानपुर की रोटोमैक पेन कंपनी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 750 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड कामामला दर्ज किया है। पेन बनाने वाली इस नामी कंपनी पर आरोप है कि इन्होंने कई बैंकों से ऋण लेकर आज तक नहींलौटाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7 बैंकों के समूह के लगभग 2919 करोड़ रुपये इस कंपनी पर बकाया हैं। ग़ौरतलब है कि बैंकफ्रॉड का यह मामला नया नहीं है। बैंक को...
अच्छी आदतों के निर्माण का संकल्प लें

अच्छी आदतों के निर्माण का संकल्प लें

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-ललित गर्ग- आज का इंसान नकारात्मक को ओढ़े नानाप्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है,हर इंसान अपनी आदतों को लेकर परेशान है। ऐसा नहीं है कि आज का आदमी समय के साथ चलना न चाहे, बुरे आचरण एवं आदतों को छोड़कर अच्छी जिन्दगी का सपना न देखे, बुराई को बुराई समझने के लिये तैयार न हो। सोचना यह है कि हम गहरे में जमंे संस्कारों एवं जड़ हो चुकी आदतों को कैसे दूर करें। जड़ तक कैसे पहुंचे। बिना जड़ के सिर्फ फूल-पत्तों का क्या मूल्य? अच्छा जीवन जीने एवं श्रेष्ठता के मुकाम तक पहुंचने के लिये अच्छी आदतों को स्वयं में सहेजना होगा, बाहरी अवधारणाओं को बदलना होगा, जीने की दिशाओं को मोड़ देना होगा। अंधेरा तभी तक डरावना है जब तक हाथ दीये की बाती तक न पहुंचे। जरूरत सिर्फ उठकर दीये तक पहुंचने की है।विलियम जेम्स ने अपनी पुस्तक ‘दि प्रिसिंपल ऑफ साइकोलॉजी’ में मनोवैज्ञानिक ढंग से चर्चा करते हुए लिखा है-‘अच्छा जीवन जीने क...
भारत के लिए जी-20: ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर

भारत के लिए जी-20: ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर

BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
भारत के लिए जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सुधार पर वैश्विक सहमति बनाना, कोविड के बाद के युग के लिए एक नई विश्व व्यवस्था की ओर पहला कदम था। जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना कर रही दुनिया में जी20 की प्रासंगिकता बढ़ी है। भारत की अध्यक्षता समावेशी, महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई-उन्मुख होगी, जैसा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता थीम "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" द्वारा दर्शाया गया है। -प्रियंका सौरभ सदस्य वर्तमान में विश्व सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 80%, वैश्विक व्यापार का 75% और वैश्विक जनसंख्या का 60% हिस्सा हैं। प्रेसीडेंसी, इससे पहले और बाद में (ट्रोइका) प्रेसीडेंसी रखने वाले देशों द्वारा सहायता प्राप्त, प्रत्येक वर्ष के शिखर सम्मेलन के एजेंडे को निर्धारित क...
न्याय-व्यवस्थाः सुधार के संकेत

न्याय-व्यवस्थाः सुधार के संकेत

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* सर्वोच्च न्यायालय में आए एक ताजा मामले ने हमारी न्याय-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है लेकिन उसने देश के सारे न्यायालयों को नया रास्ता भी दिखा दिया है। हमारी बड़ी अदालत में 1965 में डाॅ. राममनोहर लोहिया ने अंग्रेजी का बहिष्कार करके हिंदी में बोलने की कोशिश की थी लेकिन कल शंकरलाल शर्मा नामक एक व्यक्ति ने अपना मामला जैसे ही हिंदी में उठाया, सर्वोच्च न्यायालय के दो जजों ने कहा कि वे हिंदी नहीं समझते। उनमें से एक जज मलयाली के एम. जोजफ थे और दूसरे थे बंगाली ​ऋषिकेश राय। उनका हिंदी नहीं समझना तो स्वाभाविक था और क्षम्य भी है लेकिन कई हिंदी भाषी जज भी ऐसे हैं, जो अपने मुवक्किलों और वकीलों को हिंदी में बहस नहीं करने देते हैं। उनकी भी यह मजबूरी मानी जा सकती है, क्योंकि उनकी सारी कानून की पढ़ाई-लिखाई अंग्रेजी में होती रही है। उन्हें नौकरियां भी अंग्रेजी के जरिए ही मिलत...
ये न ‘लव’ है और न ही ‘जिहाद’

ये न ‘लव’ है और न ही ‘जिहाद’

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* थोक वोट कबाड़ने के लिए हमारे राजनीतिक दल आजकल ऐसे-ऐसे पैंतरे अपना रहे हैं और बेसिर-पैर की दलीलें दे रहे हैं कि कई बार मुझे आश्चर्य होता है कि वे देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं। आजकल कुछ प्रदेशों में विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनावों हो रहे हैं। गुजरातियों और मुसलमानों के थोक वोट पटाने के लिए यदि कांग्रेस वीर सावरकर को बदनाम कर रही है तो आफताब-श्रद्धा कांड को भाजपा के कुछ नेता ‘लव जिहाद’ का नाम दे रहे हैं ताकि वे हिंदू वोट पटा सकें। वास्तव में आफताब ने श्रद्धा की जो बर्बरतापूर्ण हत्या की है, उसकी जितना निंदा की जाए, वह कम है। आफताब को तुरंत इतनी कड़ी सजा इस तरीके से दी जानी चाहिए कि हर भावी हत्यारे के रोंगटे खड़े हो जाएं लेकिन उसे ‘लव जिहाद’ कहने की तो कोई तुक नहीं है। आफताब और श्रद्धा के बीच न ‘लव’ था और न ही 'जिहाद'। दोनों के बीच प्रेम होना तो अपने आप में...
पिछले 32 वर्षों से सिक्योरिटी प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध संस्था है आईआईएसएसएम IISSM

पिछले 32 वर्षों से सिक्योरिटी प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध संस्था है आईआईएसएसएम IISSM

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इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट (आईआईएसएसएम) के दो दिवसीय 32वां अन्तरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव की शुरुआत आज दिल्ली में हुई। यह कॉन्क्लेव होटल क्राउन प्लाजा, ओखला फेज 1, नई दिल्ली के खचाखच भरे हॉल के साथ ही वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी आयोजित किया गया है। जिसमें पूरे विश्व के हजारों सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस बार कॉन्क्लेव का थीम “राष्ट्र निर्माण में सुरक्षा, सुरक्षा और हानि निवारण की भूमिका” है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईएसएसएम के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद आर.के सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण का विशेष महत्व है। सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर नई तकनीक से खुद को अपग्रेड करते रहना चाहिए। उन्होंने आईआईएसएसएम की स्थापना के उद्देश्य के विषय में बताते हुए कहा कि जब 1989 में मैं पटना में एक छोटी सी ही सिक्यूरिटी कम्पनी ...
न्यायिक अंधेरों में उम्मीद की किरण बनतेे चन्द्रचूड़-ललित गर्ग

न्यायिक अंधेरों में उम्मीद की किरण बनतेे चन्द्रचूड़-ललित गर्ग

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भारत की न्याय प्रणाली विसंगतियों एवं विषमताओं से घिरी है। संवैधानिक न्यायालय का गठन बड़ा अलोकतांत्रिक व दोषपूर्ण है। न्याय-व्यवस्था जिसके द्वारा न्यायपालिकाएं अपने कार्य-संचालन करती है वह अत्यंत महंगी, अतिविलंबकारी और अप्रत्याशित निर्णय देने वाली है। ‘न्याय प्राप्त करना और इसे समय से प्राप्त करना किसी भी राज्य व्यवस्था के व्यक्ति का नैसर्गिक अधिकार होता है।’ ‘न्याय में देरी न्याय के सिद्धांत से विमुखता है।’ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में विद्यमान इन चुनौतियों एवं विसंगतियों को दूर करने के लिये भारत के 50वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) के रूप में शपथ लेने के बाद से ही जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ लगातार सक्रिय एवं संकल्पित है। वे न्याय-प्रक्रिया की कमियों एवं मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं तो उनमें सुधार के लिये जागरूक दिखाई दे रहे हैं। निश्चित ही उनसे न्यायपालिका में छाये अंधेरे सायों में सुधार रूपी ...
कोरोनरी आर्टरी डिसीज के लिए अब प्राकृतिक बाईपास

कोरोनरी आर्टरी डिसीज के लिए अब प्राकृतिक बाईपास

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सेहतकोरोनरी आर्टरी डिसीज के लिए अब प्राकृतिक बाईपासडॉ. बिमल छाजेड़निदेशकसाओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी एवं बदलती हुई जीवनशैली के कारण व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि लोगों को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय ही नहीं मिलता जिसका परिणाम है दिन पर दिन बढ़ते हृदय संबंधी रोग। दिन प्रतिदिन बढ़ती हुई बीमारियों के कारण कई आधुनिक तकनीकों, दवाइयों आदि का विकास तो हुआ है, लेकिन ये सभी तकनीकें पर्याप्त नहीं है एवं ये सभी तकनीकें स्थाई भी नहीं है, क्योंकि इनके भी कुछ सीमित दायरें हैं। आज सबसे अधिक मात्रा में जो हृदय रोग पाया जाता है वह है कोरोनरी आर्टरी डिसी$ज। जिस प्रयोगात्मक तकनीक से इसका उपचार किया जाता है वह है कोरोनरी आर्टरी बाईपास (सी ए बी सी) जिससे कोरोनरी हार्ट डिसी$ज के मरीजों का इलाज किया जाता है। लेकिन यह तकनीक अस्थायी उपचार प्रदान करती है व यह अधिक खर्चीली पड़़ती है।...
भारत का अहिन्दूकरण

भारत का अहिन्दूकरण

TOP STORIES, समाचार
आज पुरे भारत में दलित जाति के हिन्दूओं को जोर शोर से इसाई बनाया जा रहा रहा है. हिन्दू सो रहा है. प्रायः हिन्दू समझता है कि मत/ मजहब बदलने से कुछ अंतर नहीं पड़ता. सच तो यह है कि मतान्तरण आगे चल कर राष्ट्रान्तरण में बदल जाता है. जो भी मुस्लिम बन जाता है उसकी तीसरी पीढ़ी अपनी जड़ें मक्का मदीना से जोडती है. जो ईसाई बन जाता है उसकी तीसरी पीढ़ी अपने को वेटिकन के अधिक निकट पाती है. भारत में जहाँ भी हिन्दू कंम है उन्ही राज्यों में अधिक अशांति है. जैसे कश्मीर और मिजोरम. यह समस्या कितनी जटिल है इसका जन सामान्य को अनुमान नहीं है. पाठको ने संभवतः मुहम्मद अली जिन्नाह (पाकिस्तान निर्माता) और मुहम्मद इकबाल (पाकिस्तान के वैचारिक जनक) का नाम सुना होगा. इनके पूर्वज भी हिन्दू से मुस्लिम बने थे. परन्तु इन्होने भारत विभाजन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई यह सभी जानते हैं. इसी तरह पण्डित नीलकंठ शास्त्री क...