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Author: Dialogue India

जी-20: अब भारत देगा दुनिया को दिशा

जी-20: अब भारत देगा दुनिया को दिशा

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जी-20: अब भारत करेगा दुनिया का नेतृत्व आर.के. सिन्हा भारत को जी-20 देशों के समूह की सांकेतिक रूप से अध्यक्षता आगामी 16 नवंबर को ही मिल जाएगी जब  इंडोनेशिया के शहर बाली में चल रहा जी-20 शिखर सम्मेलन समाप्त होगा। हां, भारत विधिवत रूप से जी-20 की अध्यक्षता अगले माह 1 दिसंबर से संभालेगा। भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है दुनिया को नेतृत्व प्रदान करने का और अपनी नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने का । जी-20 ऐसे देशों का समूह है, जिनका आर्थिक सामर्थ्य, विश्व की 85% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। जी-20 उन 20 देशों का समूह है, जो विश्व के 75% व्यापार का भी प्रतिनिधित्व करता है और भारत अब इसी जी-20 समूह का नेतृत्व करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में जी-20 ...
Is Pakistan Heading Towards A Civil War?

Is Pakistan Heading Towards A Civil War?

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Is Pakistan Heading Towards A Civil War?*By Balbir Punj What will happen in Pakistan? Is it heading towards a civil - war? Will it suffer another breakup the way it had during 1971? Certain unprecedented events that have shaken the Islamic state in the preceding few months have given rise to all sorts of speculations. After long, Pakistan has seen rise of a popular leader of stature of Imran Khan who has stood up-to the all-powerful army - the only stable institution in an otherwise volatile country. The possibility of a civil war was mentioned by Prime Minister Shehbaz during a recent press conference in Lahore. Imran Khan, on a warpath against the establishment, too has repeatedly warned about such an ominous possibility. Following a failed assassination attempt on his life, viole...
समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बारिश से संकट में मैंग्रोव आवास’

समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बारिश से संकट में मैंग्रोव आवास’

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पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं में मैंग्रोव सहायक होते हैं और तटीय पारिस्थितिक खतरों को कम करने में मदद करते हैं। लेकिन, जलवायु परिवर्तन, समुद्री जलस्तर में उतार-चढ़ाव और मानवीय गतिविधियों के कारण मैंग्रोव कवर दुनियाभर में तेजी से सिकुड़ रहा है। यही नहीं, मैंग्रोव आवास गंभीर रूप से संकटग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों में शामिल हो गए हैं। एक नये अध्ययन में पता चला है कि वर्ष 2070 तक भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर कई मैंग्रोव आवास क्षेत्र सिकुड़कर भूमि की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं। मैंग्रोव आवास क्षेत्रों के सिकुड़ने के लिए शोधकर्ताओं ने बरसात और समुद्री जलस्तर में बदलाव को जिम्मेदार ठहराया है। पूर्वी तट पर चिलिका एवं सुंदरबन और पश्चिमी घाट पर द्वारका तथा पोरबंदर क्षेत्रों में किये गए एक अध्ययन में यह बात उभरकर आयी है। पूर्वानुमान मॉडल पर आधारित यह अध्ययन भारत सरकार के विज्ञान ...
ऋषियों की संतान हैं भारत की समस्त जनजातियाँ

ऋषियों की संतान हैं भारत की समस्त जनजातियाँ

संस्कृति और अध्यात्म
--रमेश शर्मा भारतीय वैदिक चिंतन और विज्ञान का अनुसंधान आपस में मेल खाते हैं यदि इन दोनों को आधार बनाकर विचार करें तो हम इस निष्कर्ष पर सरलता से पहुँच जायेंगे कि भारत में निवासरत समस्त जनजातियाँ ऋषियों की संतान हैं ।सत्य के अन्वेषण केलिये यह आवश्यक है कि हमारा दृष्टिकोण व्यापक हो और हम किसी एक दिशा या धारणा से मुक्त होकर विचार करें। यह सिद्धांत जीवन के प्रत्येक आयाम पर लागू होता है । आज हमें भले वन में निवासरत सभी जनजातीय बंधु और नगरों में विलासिता का जीवन जीने वाले समाज पृथक लग सकते हैं किन्तु यदि अतीत की विकास यात्रा का अध्ययन करें तो यह जानकर हमें आश्चर्य होगा कि दोनों जीवन एक रूप हैं। और सभी ऋषियों की संतान हैं। ऐसा नहीं है कि नगरों में जीवन का अंकुरण अलग हुआ और वनों में अलग । नगर या ग्राम तो जीवन यात्रा का विकसित स्वरूप हैं। जो समय के साथ विकसित हुये । जीवन का अंकुरण तो वनों में ही...
भारत के लिए यह अपूर्व अवसर

भारत के लिए यह अपूर्व अवसर

Today News, राष्ट्रीय
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* इस सप्ताह दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहे हैं। एक कंपूचिया के नोम पेन्ह में और दूसरा इंडोनेशिया के शहर बाली में! पहले सम्मेलन में ‘एसियान’ संगठन के सदस्य-राष्ट्रों का 17 वां शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ और अब बाली में आजकल 20 राष्ट्रों के ‘ग्रुप-20’ संगठन का शिखर सम्मेलन हो रहा है। पहले सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया और अब बाली के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद जा रहे हैं। दोनों सम्मेलनों में विदेश मंत्री जयशंकर भी भाग ले रहे हैं और वे शिखर-वार्ता के लिए जमीनी तैयारी कर रहे हैं। पहले सम्मेलन में तो अमेरिका से प्रभावित पूर्व एशियाई राष्ट्रों ने चीनी विस्तारवाद के विरुद्ध अपनी चिंता पर सबसे ज्यादा जोर दिया। यद्यपि सभी राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने आपसी सहयोग के कई आयामों पर विस्तृत चर्चा भी की लेकिन उनकी परेशानी यह...
चंद्रचूड़ और अमित शाहः पते की बात*

चंद्रचूड़ और अमित शाहः पते की बात*

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* आज दो खबरों ने बरबस मेरा ध्यान खींचा। एक तो मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के बयान ने और दूसरा गृहमंत्री अमित शाह के बयान ने! दोनों ने वही बात कह दी है, जिसे मैं कई दशकों से कहता चला आ रहा हूं लेकिन देश के किसी न्यायाधीश या नेता की हिम्मत नहीं पड़ती कि भाषा के सवाल पर वे इतनी पुख्ता और तर्कसंगत बात कह दें। चंद्रचूड़ ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की संगोष्ठी में बोलते हुए कह दिया कि कोई यदि अच्छी अंग्रेजी बोल सकता है तो इसे उसकी योग्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता और उसकी योग्यता इस बात से भी नापी नहीं जा सकती कि वह व्यक्ति कौन से नामी-गिरामी स्कूल या काॅलेज से पढ़कर निकला है। हमारे देश में इसका एकदम उल्टा ही होता है। इसका एकमात्र कारण हमारे नेताओं और नौकरशाहों की बौद्धिक गुलामी है। अंग्रेजों की लादी हुई औपनिवेशिक व्यवस्था ने भारत की शिक्षा और चिकित्सा दोनों को चौपट कर र...
Diversity among India’s leadership is significant

Diversity among India’s leadership is significant

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By Balbir Punj The appointment of Indian-origin politician Rishi Sunak as the British Prime Minister (PM) last month was celebrated by Indians at home and abroad. But it also sparked a raft of rancour- bordering on self-flagellation - whether a similar event could happen in India, especially the appointment of a Muslim as PM. Former Union minister P Chidambaram said the British example was a template worthy of emulation. “First Kamala Harris, now Rishi Sunak…. I think there is a lesson to be learned by India,” he wrote. “As we Indians celebrate the ascent of Rishi Sunak let's honestly ask: Can it happen here?” asked Congress leader Shashi Tharoor. But it is important to remember that Sunak got the top job because the Conservative Members of Parliament (MPs) saw in him a thoroughb...
सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार –

सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार –

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इनके पतन का कारण बनेगा - वैसे तो यह काफी समय से चल रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार चरम पर चलता दिखाई दे रहा है और यही जुडिशरी के लिए हानिकारक साबित होगा परन्तु कुछ हाल के मसलों में पता चलता है जजों को एहसास ही नहीं होता कि वो क्या बोल रहे हैं - कुछ किस्से बता रहा हूँ - -कल CJI चंद्रचूड़ के सामने वकील शशांक शेखर झा की याचिका सुनवाई के लिए आई जिसमे उन्होंने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपील की थी - इस याचिका को चंद्र्कहुड ने सुनने से ही मना कर दिया और 80% पराली जलाने वाले पंजाब को एक तरह से निर्दोष बता दिया - चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या पराली जलने से रोकने से प्रदूषण ख़तम हो जायेगा, इसके लिए कुछ और तरींका ढूढ़ना होगा - इसका मतलब तो यही हुआ न मीलार्ड कि पराली जलाने से प्रदूषण नहीं होता बल्कि एक दिवाली की रात में पटाखे जलाने से सारा प्रदूषण होता है जिसे रोकने के लिए आप...
जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?*

जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?*

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जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?* सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार की जांच के संबंध में किये जाने वाले टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगा दी है और सत्य से परे एक बात कि शादीशुदा स्त्री का बलात्कार नहीं हो सकता, को विपरीत नजीर बना दिया है| सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाइकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सत्र न्यायालय के फैसले के विरुद्ध जा कर दुष्कर्म के दोषियों को रिहा कर दिया गया था, जबकि सत्र अदालत ने उन्हें दोषी माना था| सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी है|वैसे तो यह जांच एक तरह से स्त्री की यौन शुचिता से जुड़ी है| वह संभोग की आदी है या नहीं, यह देखने के लिए यह टेस्ट होता है| इसमें छिपी हुई एक बात यह भी है कि किसी विवाहिता के बारे में मान लिया जाता है कि उसका बलात्कार हो ही नहीं सकता| कुंआरेपन को जांचने के लिए यह टेस्ट किया जात...
Economic development schemes being run for tribal society

Economic development schemes being run for tribal society

TOP STORIES, आर्थिक
15 नवम्बर 2022 जनजाति गौरव दिवस के शुभ अवसर पर विशेष लेख जनजाति समाज के लिए चलाई जा रही आर्थिक विकास की योजनाएं जनजाति समाज बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए देश में दूर दराज इलाकों के सघन जंगलो के बीच वनों में रहता है। जनजाति समाज के सदस्य बहुत ही कठिन जीवन व्यतीत करते रहे हैं एवं देश के वनों की सुरक्षा में इस समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। चूंकि यह समाज भारत के सुदूर इलाकों में रहता है अतः देश के आर्थिक विकास का लाभ इस समाज के सदस्यों को कम ही मिलता रहा है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार एवं कई राज्य सरकारों ने विशेष रूप से जनजाति समाज के लिए कई योजनाएं इस उद्देश्य से प्रारम्भ की हैं कि इस समाज के सदस्यों को राष्ट्र विकास की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके एवं इस समाज की कठिन जीवनशैली को कुछ हद्द तक आसान बनाया जा सके। भारत में सम्पन्न हुई वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुस...