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Author: Dialogue India

बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस

बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस

TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
-ललित गर्ग- भारतीय राजनीति में अक्सर बिना बात के बतंगड़ होते रहे हैं। ऐसे राजनेता चर्चित माने जाते हैं जो वास्तविक उपलब्धियों एवं सकारात्मक आयामों की भी आलोचना एवं छिद्रान्वेषण करने में चतुर होते हैं। बिना बात का बतंगड़ करने में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी एवं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का कोई मुकाबला नहीं है। कांग्रेस ने जी-20 सम्मेलन के लोगो में कमल को चित्रित करने पर आपत्ति जताकर बैठे-ठाले न केवल अपनी प्रतिष्ठा को बटा लगाया है बल्कि इस प्रकार उद्देश्यहीन, उच्छृंखल, विध्वंसात्मक नीति को ही प्रदर्शित किया है। आग्रह, पूर्वाग्रह एवं दुराग्रह से ग्रस्त ऐसे आरोपों एवं आलोचनाओं से किसी का भी हित सधता हो, प्रतीत नहीं होता। ऐसा लगता है कि इस पार्टी एवं उसके नेताओं को मोदी सरकार के हर काम और निर्णय का विरोध करने की आदत पड़ गई है। ऐसा तभी होता है, जब कोई अंधविरोध से ग्रस्त हो जाता है।...
भारत के आर्थिक विकास में जनजाति समाज का है भरपूर योगदान

भारत के आर्थिक विकास में जनजाति समाज का है भरपूर योगदान

आर्थिक
भारत भूमि का एक बड़ा हिस्सा वनों एवं जंगलों से आच्छादित है। भारतीय नागरिकों को प्रकृति का यह एक अनोखा उपहार माना जा सकता है। इन वनों एवं जंगलों की देखभाल मुख्य रूप से जनजाति समाज द्वारा की जाती रही है। जनजाति समाज की विकास यात्रा अपनी भूख मिटाने एवं अपने को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से केवल वनों के इर्द गिर्द चलती रहती है। वास्तविक अर्थों में इसीलिए जनजाति समाज को धरतीपुत्र भी कहा जाता है। प्राचीन काल से केवल प्रकृति ही जनजाति समाज की सम्पत्ति मानी जाती रही है, जिसके माध्यम से उनकी सामाजिक, आर्थिक एंव पारिस्थितिकीय आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहती है। ऐसा कहा जाता है कि अनादि काल से जनजाति संस्कृति व वनों का चोली दामन का साथ रहा है और जनजाति समाज का निवास क्षेत्र वन ही रहे हैं। इस संदर्भ में यह भी कहा जा सकता है कि वनों ने ही जनजातीय जीवन एंव संस्कृति के उद्भव, विकास तथा संरक्षण में अपनी आध...
इजरायल में सत्ता परिवर्तन. भारत के लिये मायने

इजरायल में सत्ता परिवर्तन. भारत के लिये मायने

TOP STORIES, राष्ट्रीय
आर.के. सिन्हा भारत के मित्र बेंजामिन नेतन्याहू के इजराइल के आम चुनावों में जीत से भारत का प्रसन्न होना स्वाभाविक है।  भारत-इजरायल संबंधों को नयी बुलंदियों पर लेकर जाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने अब तक कई शानदार इबारतें लिखी है।  दोनों नेताओं के बीच निजी मधुर संबंध स्थापित हो गये हैं जो अब तक कायम हैं! इसका लाभ यह हुआ कि दोनों देश तमाम क्षेत्रों में आपसी सहयोग करने लगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के आम चुनावों में अपने मित्र की विजय पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, "चुनाव में जीत पर मेरे प्रिय मित्र नेतन्याहू को बधाई। मैं भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए हमारे संयुक्त प्रयासों को जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।"  यह मानना होगा कि वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल के निवर्तमान प्रधानमंत्री न...
डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ*

डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ*

TOP STORIES, घोटाला, विश्लेषण
डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ* *डॉ. वैदिक* कर्नाटक और गुजरात के मेडिकल काॅलेजों ने गज़ब कर दिया है। उन्होंने अपने छात्रों की फीस बढ़ाकर लगभग दो लाख रु. प्रति मास कर दी है। याने हर छात्र और छात्रा को डाॅक्टर बनने के लिए लगभग 25 लाख रु. हर साल जमा करवाने पड़ेंगे। यदि डाॅक्टरी की पढ़ाई पांच साल की है तो उन्हें सवा करोड़ रु. भरने पड़ेंगे। आप ही बताइए कि देश में कितने लोग ऐसे हैं, जो सवा करोड़ रु. खर्च कर सकते हैं? लेकिन चाहे जो हो, उन्हें बच्चों को डाॅक्टर तो बनाना ही है। तो वे क्या करेंगे? बैंकों, निजी संस्थाओं, सेठों और अपने रिश्तेदारों से कर्ज लेंगे, उसका ब्याज भी भरेंगे और बच्चों को किसी तरह डाॅक्टर की डिग्री दिला देंगे। फिर वे अपना कर्ज कैसे उतारेंगे? या तो वे कई गैर-कानूनी हथकंडों का सहारा लेंगे या उनका सबसे सादा तरीका यह होगा कि वे अपने डाॅक्टर बने बच्चों से कहेंगे कि तुम मरीजो...
भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
अभी जिस दिन इस वर्ष का अंतिम चन्द्रग्रहण था, देर रात दिल्ली ने भूकम्प के झटके झेले | यह सही है अभी भारत में भूकंप का पूर्वानुमान संभव नहीं है । मैक्सिको जैसे देश ऐसे निगरानी तंत्र से ही अपना बचाव करते हैं। वहां भूकंप से बचने के लिए एजेंसियों को एक से डेढ़ मिनट का वक्त मिल जाता है। जाहिर है, एशिया में इस तरह का तंत्र बनाने के लिए हिमालय के आस-पास बसे सभी देशों को एक मंच पर आना होगा। नेपाल, चीन और भारत में आए भूकंप के ये झटके अस्वाभाविक नहीं थे। इसका केंद्र नेपाल का मणिपुर था और भूगोल के हिसाब से इंडियन टेक्टोनिट प्लेट पूर्व से पश्चिम तक फैला है, जिसमें हमारा पूर्वोत्तर का इलाका, हिंदुकुश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान के कुछ भाग आदि आते हैं। यहां इंडियन प्लेट अपने से कहीं भारी यूरेशियन प्लेट के भीतर समा रही है या टकरा रही है, जिससे न सिर्फ हिमालय ऊपर की ओर उठ रहा है, बल्कि यह पूरा इलाका ही भूक...
भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

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भारत के लिये यह गर्व एवं गौरव की बात है कि वह 1 दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता करेगा। भारत के लिए ये ऐतिहासिक अवसर है। आजादी के अमृतकाल में यह देश के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है, जहां से भारत के सशक्त होने एवं विश्व स्वीकार्यता की सार्थक दिशाओं का उद्घाटन होने जा रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्व नेता के रूप में उभर रही स्थितियों के कारण एक बड़ा अवसर देश को प्राप्त हो रहा है। जी-20  ऐसे देशों का समूह है जिनका आर्थिक सामर्थ्य विश्व की 75 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत अब इस जी-20 समूह का नेतृत्व करने जा रहा है, इसकी अध्यक्षता करने जा रहा है। निश्चित ही यह भारत के लिये एक नये सूरज के अभ्युदय का संकेत है। मोदी ने भारत की अध्यक्षता के शुभंकर और वेबसाइट का अनावरण करते हुए दुनिया को शांति के मार्ग पर अग्रसर करने के अपने संकल्प को दोहराया है। समूची दुनिया को सुखी होने ...
Why Catholic-Protestant churches must work in tandem

Why Catholic-Protestant churches must work in tandem

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
 Why Catholic-Protestant churches burying their differences Vivek Shukla As Christmas is not far away and All Souls day was recently observed in India and other parts of the world by Christians, the efforts to bury the differences between Catholic and Protestants so that they can work for the society and the country with vigour is going on. That should be celebrated.  On All Souls Day, some priests of Catholic and Protestant churches met at Rohtak in Haryana  and discussed ways forward to work in tandem as much as they can. To cement their ties with Catholic Church,  the Delhi Brotherhood Society is organising a series of Inter-faith and Inter community seminars and meetings to strengthen their ties with all the communities/ religions across India. Meanwhile, it...
सेमीकंडक्टर चिप 

सेमीकंडक्टर चिप 

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
सेमीकंडक्टर चिप  50 वर्ष पूर्व सेमीकंडक्टर चिप (कंप्यूटर, सेल फ़ोन, फ़्लैश ड्राइव इत्यादि में लगने वाली चिप) बनाने के लिए सिलिकॉन वेफर (पापड़ से कई गुना पतली प्लेट) पर कुछ विशेष रसायन की एक पतली फिल्म छिडकी जाती थी और फिर उस पर एक मास्क एवं लेंस के माध्यम से साधारण प्रकाश स्रोत डाला जाता था। वेफर के जिस भाग पर प्रकाश पुंज पड़ता था, वहां मास्क पर बना पैटर्न रसायन पर छप जाता था। ठीक वैसे ही जैसे एक समय नेगेटिव से फोटो डेवेलप की जाती थी। इस पैटर्न, जिस पर विद्युत् प्रवाह हो सकती थी, पर किसी आभूषण में जड़े हीरे के सामान ट्रांजिस्टर बैठा दिए जाते थे। इसे इंटीग्रेटेड सर्किट का नाम दिया गया जिसे चिप भी कहा जाता है। ट्रांजिस्टर की विशेषता यह है कि इन्हे विदूयत प्रवाह के द्वारा ऑन-ऑफ किया जा सकता है जो कंप्यूटर की भाषा भी है। अंक 1 - ऑन; अंक 0 - ऑफ। 1,0,1,0 … सभी सॉफ्टवेयर कोड इन्...
कुपोषण : किशोरावस्था में गर्भधारण से सीधा रिश्ता

कुपोषण : किशोरावस्था में गर्भधारण से सीधा रिश्ता

TOP STORIES, सामाजिक
देश के हर राज्य में इन दिनों पीढ़ीगत कुपोषण चिंता का विषय है ,इस मामले में पूर्वोत्तर राज्यों में तो यह और गहरी चिंता का विषय है | मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और असम में यह विषय ज्यादा गहरा रहा है | अध्ययन कहते हैं बच्चों में कुपोषण का मुख्य कारण बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण है, जिसके स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार पर दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं| राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के ताज़ा रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि तो करती है कि बाल विवाह में ठहराव है, लेकिन किशोर आयु में गर्भधारण बढ़ा है|पिछले सर्वे की तुलना में इस बार त्रिपुरा और असम में राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक बाल विवाह और कम आयु में गर्भधारण के मामले सामने आये हैं| मणिपुर और मेघालय में राष्ट्रीय औसत से अधिक किशोरावस्था में गर्भधारण हो रहा है| मेघालय में पांच साल से कम आयु के बच्चों के विकास में अवरोध की दर ४६.५ है, जो पूर...
बलात्कारियों की रिहाईः कहाँ तक ठीक?

बलात्कारियों की रिहाईः कहाँ तक ठीक?

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* बलात्कार और हत्या के अपराधियों को जिस तरह हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने बरी कर दिया है, उनके इस फैसले ने हमारी न्याय-व्यवस्था, शासन-प्रशासन और देश की इज्जत को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। 2012 में दिल्ली के छावला क्षेत्र में एक 19 वर्षीय लड़की के साथ तीन लोगों ने मिलकर बलात्कार किया, पीट-पीटकर उसके अंग-भंग किए और उसकी लाश को ठिकाने लगा दिया। वे पकड़े गए। निचली अदालत और दिल्ली उच्च-न्यायालय ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। पिछले लगभग नौ साल से वे जेल काट रहे थे, क्योंकि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिका लगा रखी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें यह कहकर बरी कर दिया है कि उनके विरुद्ध न तो पुलिस ने पर्याप्त प्रमाण जुटाए हैं और न ही निचली अदालतों में गवाहों की परीक्षा ठीक से की गई है। निचली अदालतों के फैसलों को रद्द करने का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को जरुर है लेक...