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Author: Dialogue India

घर पर मिली भावनात्मक और नैतिक शिक्षा बच्चों के जीवन का आधार है।

घर पर मिली भावनात्मक और नैतिक शिक्षा बच्चों के जीवन का आधार है।

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-सत्यवान 'सौरभ' बचपन एक बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि यह अवधि बच्चे के जीवन भर सीखने और कल्याण की नींव रखती है। इसलिए इसे जीवन में विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जो वयस्कों और फलस्वरूप कल के समाज को आकार देता है। इसलिए इस अवधि में बच्चों के विकास की रक्षा करना माता-पिता, राज्यों और उन सभी व्यक्तियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो एक बेहतर दुनिया के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।जैसे, बच्चों के शुरुआती अनुभव उनके पूरे जीवन को आकार देते हैं। ये शुरुआती अनुभव बच्चे के मस्तिष्क की वास्तुकला की नींव रखते हैं, और बच्चे की सीखने की क्षमता, उनके स्वास्थ्य और जीवन भर उनके व्यवहार की ताकत या कमजोरी को दृढ़ता से प्रभावित करते हैं। प्रत्येक बच्चा अपने पर्यावरण से प्रभावित होता है और बच्चे का सबसे पहला वातावरण घर होता है। माता-पिता बच्चे के जीवन में सबसे प्रभा...
गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता

गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता भारत का संविधान ऐतिहासिक अन्याय का निवारण करता है और “समानता” की भावना के साथ उच्च शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के मामलों में उत्पन्न असंतुलन को संतुलित करता है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और सभी के लिए कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। समानता का सिद्धांत मूल संरचना की एक अनिवार्य विशेषता है। इस ‘समानता संहिता’ में हुए किसी भी परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को एम.नागराज मामले में निर्धारित ‘पहचान’ और ‘आयाम’ के व्यापक रूप से स्वीकृत परीक्षणों से गुजरना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया था कि जब भी आरक्षण के संबंध में कोई संशोधन किया जाता है तो कानून में समता और समानता के बीच संतुलन बना रहे। -प्रियंका सौरभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए विशेष उपायों और आरक्षण की शुरुआत करने वाले 103 वें संविधान संशोधन अधिनियम क...
अब पाकिस्तान में क्या-क्या हो सकता है?

अब पाकिस्तान में क्या-क्या हो सकता है?

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अब पाकिस्तान में क्या-क्या हो सकता है?* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* पाकिस्तान की राजनीति अब एक तूफानी दौर में प्रवेश कर रही है। इमरान खान पर हुए जानलेवा हमले ने शाहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ उसी तरह का गुस्सा पैदा कर दिया है, जैसा कि 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या के समय हुआ था। मुझे लगता है कि इस वक़्त का गुस्सा उस गुस्से से भी अधिक भयंकर है, क्योंकि उस समय पाकिस्तान में जनरल मुशर्रफ की फौजी सरकार थी लेकिन इस वक्त सरकार मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता शाहबाज शरीफ की है। इमरान ने शाहबाज शरीफ, उनके गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह और आईएसआई के उच्चाधिकारी फैजल नसीर पर इस षड़यंत्र का इल्जाम लगाया है। शाहबाज के गृहमंत्री और उनके कई पार्टी नेताओं ने इमरान को बलूचिस्तान की मिर्ची जेल में डालने का इरादा जताया था और इमरान तथा उनकी पार्टी के नेताओं ने यह आशंका भी व्यक्त की थी कि इस रैली के दौरान इमरान की हत...
त्रिकोणीय गुजरात चुनाव में मतपेटियां ही राज खोलेंगी

त्रिकोणीय गुजरात चुनाव में मतपेटियां ही राज खोलेंगी

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य, समाचार
त्रिकोणीय गुजरात चुनाव में मतपेटियां ही राज खोलेंगी- ललित गर्ग - चुनाव आयोग द्वारा गुरुवार को गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मिया उग्र हो गयी है। किसी भी राष्ट्र एवं प्रांत के जीवन में चुनाव सबसे महत्त्वपूर्ण घटना होती है। यह एक यज्ञ होता है। लोकतंत्र प्रणाली का सबसे मजबूत पैर होता है। राष्ट्र के प्रत्येक वयस्क के संविधान प्रदत्त पवित्र मताधिकार प्रयोग का एक दिन। सत्ता के सिंहासन पर अब कोई राजपुरोहित या राजगुरु नहीं अपितु जनता अपने हाथों से तिलक लगाती है। गुजरात की जनता इन चुनावों में किसकों तिलक करेंगी, यह भविष्य के गर्भ में है। भले ही 1995 से ही भाजपा लगातार मजबूती से चुनाव जीतती रही है, क्या इस बार भी वह यह इतिहास दोहरायेगी? कांग्रेस यहां सफल एवं सक्षम प्रतिद्वंद्वी रही है, पिछली बार सत्ता के करीब पहुंचने में वह एक बार फिर चुकी थी, क्या इस बार वह ऐ...
इमरान पर हमला,पाक अराजकता की तरफ

इमरान पर हमला,पाक अराजकता की तरफ

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इमरान पर हमला,पाक अराजकता की तरफ आर.के. सिन्हा इमरान खान पर जानलेवा हमले के बाद पाकिस्तान  में अराजकता और अव्यवस्था के और व्यापक स्तर पर फैलने की आशंका है। इमरान पर हुये हमले से पहले ही जनता सड़कों पर आ गई थी। अवाम का अपने मौजूदा कर्णधारों पर कोई यकीन नहीं हो पा रहा है। यह सबको पता है कि इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को सेना के जनरलों द्वारा जोड़-तोड़ करके हटवाया गया था। इसके बावजूद इमरान खान की तहरीके इंसाफ पार्टी (पीटीआई)  की पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रदेश में सरकारें हैं। यानी  इमरान खान की हैसियत कोई छोटी नहीं है। उनकी राजनीति ईमानदारी पर भी कोई शक नहीं कर सकता। इस मोर्चे पर उनका अभी तक का जीवन बेदाग सा ही रहा है। पाकिस्तान में इमरान खान के सामने  नवाज शरीफ, उनके छोटे भाई शाहबाज शरीफ तथा आसिफ अली जरदारी हैं। इन सब पर अरबों रुपये...
भ्रष्टाचार मुक्ति का माध्यम बने सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा पत्र

भ्रष्टाचार मुक्ति का माध्यम बने सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा पत्र

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भ्रष्टाचार मुक्ति का माध्यम बने सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा पत्र- ललित गर्ग - नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री बनते ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प लिया। उन्होंने न खाऊंगा और न खाने दूंगा का शंखनाद किया, उनके दो बार के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने के लिये अनेक कठोर कदम उठाये गये है और उसके परिणाम भी देखने को मिले हैं, लेकिन भ्रष्टाचार फिर भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भ्रष्टाचार की जटिल से जटिल होती स्थितियों को देखते हुए ही केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सरकारी संस्थानों, मंत्रालयों और नागरिकों के लिए छह बिंदुओं का सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा पत्र जारी किया है, जिसमें उनसे भ्रष्टाचार मुक्त भारत की संकल्पना के साथ जुड़ने का आह्वान किया गया है। प्रतिज्ञा पत्र को आयोग ने भ्रष्टाचार मुक्त देश के लिए विशेष अभियान के तौर पर पेश किया है। राष्ट्र में भ्रष्टाचार ...
जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर

जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर

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जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर अथवा जेजे ईरानी में दिखाई देता था जेआरडी टाटा का अक्स आर.के. सिन्हा जेजे ईरानी एक अरसा पहले टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर पद से मुक्त होने के बाद खबरों की दुनिया से कमोबेश गायब से थे। पर उनके हाल ही में हुये निधन के बाद उन्हें जिस तरह से याद किया जा रहा है, उससे साफ है कि वे असाधारण कोरपोरेट हस्ती थे। 'स्टीलमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर जेजे ईरानी को झारखंड, बिहार और स्टील की दुनिया से जुड़े हर शख्स का खास सम्मान मिलता रहा। पुणे में जन्मे जेजे ईरानी ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जमशेदपुर में गुजारा। एक इंटरव्यू में अपनी इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा था कि जिस शहर में पूरी जिंदगी काम किया, आखिरी सांस भी उसी शहर में लेना चाहते हैं। ईश्वर ने उनकी यह इच्छा पूरी की। जेजे ईरानी में नेतृत्व के भरपूर ग...
प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित किया

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित किया

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प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित किया प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सीवीसी का नया शिकायत प्रबंधन प्रणाली पोर्टल भी लॉन्च किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह सरदार साहब की जन्म जयंती से शुरू हुआ है। उन्होंने कहा, ...
IIT-M researchers develop cost-effective agri-produce transportation system

IIT-M researchers develop cost-effective agri-produce transportation system

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New Delhi, Nov. 3rd (India Science Wire):Researchers at the Indian Institute of Technology Madras (IIT-M), jointly with a farmers’ NGO, Pothu Vivasayeegal Sangam, have developed a unique, efficient, and cost-effective agricultural transportation system that would address labour shortage, a major issue faced by Indian farmers. The lightweight monorail type transportation system can frugally carry agricultural yields from the fields to collection points near the farmland. “Steel posts can be erected easily adjacent to the farmland, on which the monorail system would be mounted. On this rail, trolleys for carrying the produces are to be fitted and they can move back and forth. Once the operation is over it can be dismantled and moved to other farmlands,” said Prof. Shankar Krishnapill...
औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अपने मुखपृष्ठ पर एक खबर छापी है कि अमेरिका में कई आदमी अब औरतों का वेश धारण करने लगे हैं और औरतें तो पहले से ही वहां आदमियों की वेशभूषा पहनते रही हैं। उनका कहना है कि कपड़ों में भी औरत-मर्द का भेद क्या करना? वह जमाना लद गया जब औरतों के लिए खास तरह की वेशभूषा, जेवर और जूते-चप्पल पहनना अनिवार्य हुआ करता था। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी। घूंघट और बुर्का लादना आवश्यक माना जाता था। हमारे संस्कृत नाटकों को देखें तो कालिदास और भवभूति जैसे महान लेखकों की रचनाओं में उनकी महिला पात्राएं संस्कृत में नहीं, प्राकृत में संवाद करती थीं। महिलाओं को पुरुषों के समान न हवन करने का अधिकार था और न ही जनेऊ धारण करने का! वेदपाठ करना तो उनके लिए असंभव ही था। आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की कृपा से भारतीय स्त्रियों को इन बंधनों से ...