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Author: Dialogue India

हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

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*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*=================== कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो निराशा की ओर ले जाती हैं, हताशा की ओर ले जाती हैं और भविष्य अंधकार में होने का संकेत देती हैं। ऐसी ही निराशाजनक चिंताजनक और भविष्य को अंधकार में ढकेलने वाली एक खबर अमेरिका से आ रही है। अमेरिका को ईसाई राष्ट्र घोषित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है । दुनिया के सबसे विकसित देश में मजहब आधारित देश घोषित करने की मांग एक आश्चर्य से कम नहीं है और निराशाजनक बात भी है। मजहर पर आधारित राष्ट्र की मांग के खतरे भी खतरनाक है , भीषण हैं और लोकतंत्र के भविष्य के प्रति नकारात्मक परिस्थितियां ही उत्पन्न करती हैं। मजहब आधारित व्यवस्था में लोकतंत्र की सभी प्रकार की संहिताएँ और प्रवृत्तियों का विलोप हो जाता है, एक तरह से लोकतंत्र का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है, जीवन की गतिशीलता टूट जाती है , भविष्य की उम्मीदें टूट जाती हैं , नए विचारो...
भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत

भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत

TOP STORIES, राष्ट्रीय
भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत*रजनीश कपूरमशहूर दवा कम्पनी रैनबैक्सी के व्हिसिल ब्लोअर और हेल्थ एक्टिविस्ट के नाम से जाने जाने वाले दिनेश ठाकुर कीनई किताब ‘द ट्रूथ पिल’ इन दिनों काफ़ी चर्चा में है। इसके लेखक ने जब इस नामी दवा कम्पनी में हो रहीगड़बड़ियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो इससे न सिर्फ़ भारत को बल्कि दुनिया भर के लोगों उनकी इस मुहिम सेफ़ायदा हुआ। उनके हाल ही के अभियान से हमें यह पता चलता है कि देश में ‘ड्रग रेगुलेटर’ या दवा नियामक काकितना ख़स्ता हाल है। दवा उद्योग में ज़रूरी मानकों की कमी के कारण आम जनता को मिलावटी दवाओं काशिकार होना पड़ता है और अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।दिनेश ठाकुर पेशे से डाक्टर नहीं हैं बल्कि एक केमिकल इंजीनियर हैं। भारत से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई केबाद उन्होंने अमरीका से स्नातकोत्तर की उपाधि भी हासिल की। 2003 में देश की सेवा की मंशा से उन्होंने मश...
भयावह व अनिश्चित भविष्य के बीच – अनुज अग्रवाल

भयावह व अनिश्चित भविष्य के बीच – अनुज अग्रवाल

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सभ्यताएँ जब अपने शिखर पर पहुँचती हैं तो उसके उपरांत बस पराभव की ओर ही जा सकती हैं। मानव सभ्यता क्या ऐसे ही दौर में है। विज्ञान व प्रौद्योगिकी व बाजार की उपलब्धियों के इस स्वर्णिमकाल में हम सबसे ज़्यादा डरे हुए हैं और हताश व निराश हैं। यूँ तो मानव अपने उद्भव काल से ही निरंतर संघर्ष कर आगे बढ़ता आया है। हमारा उद्विकास इसका गवाह है। प्रकृति से हमारा संघर्ष और सामंजस्य हमारी जीत की कहानी है। यह उपलब्धि हमारे लिए गर्व की बात रही है किंतु इस गर्व के “अभिमान” व “अति”में बदलने के कारण हम नियंत्रण खो बैठे हैं। उपलब्धियों के अभिमान में अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं कर पाए और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम प्रकृति का अनियंत्रित दोहन करने लगे। नतीजा ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन। भारत की ही बात करें तो वर्ष 2021 में हमारी जीडीपी वृद्धि 9% के आस पास थी ( इस बर्ष यह 6% के आसपास ही होगी)...
Vehicles the top polluters this Diwali

Vehicles the top polluters this Diwali

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
Vehicles top polluters in Delhi during Diwali week, High peak traffic for long hours due to surge in vehicle numbers Despite vehicles becoming the top polluter, action ontransport remains the weakest Among local pollution sources in Delhi, vehicles caused half of Delhi’s own contribution to PM2.5 during Diwali week (21-26 October)When pollution concentration from all sources (local, NCR and beyond) are added, Delhi’s vehicles account for nearly 17 per cent of total PM2.5 concentrationHigh traffic load during Diwali week increased congestion for long hours -- from 12 noon to 8 pm -- flattening the congestion peaksWith high traffic on pre-Diwali days, average speed plummeted to 27 km per hour against the design standard of 60 km/hr or regulated speed of 40 km/hr. On some stretches ...
प्रजा फाउंडेशन ने ‘स्टेट ऑफ पुलिसिंग एंड लॉ एंड ऑर्डर इन दिल्ली, 2022’ पर एक रिपोर्ट जारी की

प्रजा फाउंडेशन ने ‘स्टेट ऑफ पुलिसिंग एंड लॉ एंड ऑर्डर इन दिल्ली, 2022’ पर एक रिपोर्ट जारी की

BREAKING NEWS, TOP STORIES, प्रेस विज्ञप्ति
 2012 से 2021 तक, चोरी और चेन स्नैचिंग के पंजीकृत अपराधों में क्रमशः 827% और 552% की वृद्धि हुई। 2012 से 2021 तक छेड़छाड़, बलात्कार और अपहरण (किडनेपिंग)/अपहरण (अब्डक्शन) के अपराधों में क्रमशः251%, 194% और 39% की वृद्धि हुई। 2021 में बलात्कार के कुल मामलों में से 41% पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए। 2021 में कुल अपहरण (किडनेपिंग)/अपहरण (अब्डक्शन) पीड़ितों में से 91% बच्चे थे। 2021 में, महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए दोषसिद्धि दर 38% थी और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिएकेवल 52% थी। 2021 तक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध' के 99% मामलों की सुनवाई लंबित हैं। इस दर पर, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के 5 वर्षों (2017 से 2021 तक) में निर्णय/निकासी (3,373मामले) की औसत संख्या के आधार पर 2021 तक लंबित सभी मामलों को निर्णय देने में 27 साल लगेंगे।दिल्ली, 02 नवंबर 2022: प्रजा फाउंडेशन ...
महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

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संपादकीय प्रकाशन के संदर्भ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल निखिल अरविन्दु@NikhilArvindu "खेत खलियान से लेकर, देश की सीमाओं तकगगन से लेकर, समुद्री नौकाओं तकहै अब ऐसा कोई क्षेत्र नहीजहां आज महिलाएं नही" भारत की महिलाएं अब देश ही नहीं विदेश में भी बुलंदियों के झंडे गाड़ रही हैं, जहां भी महिलाओं को मौका मिलता है वहां भी अपना बेहतर प्रदर्शन दे रही हैं। महिला सशक्तिकरण को ले करके एक बार फिर से भारत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। वजह है विगत दिनों भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा महिला मैच की फीस पुरुषों की मैच फीस के बराबर कर दी है। जो की एक सराहनीय कदम है। एक शब्दों में कहें तो भारत की संस्थाएं महिला सशक्तिकरण को क्रियान्वित करने का काम कर रही है, उसे धार देने का काम कर रही है, उसे मुख्यधारा में लाने का काम कर रही हैं। लेकिन बात जब राजनीतिक दलों की आ...
कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया

कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया विश्व के कई देशों में मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वहां के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में लगातार वृद्धि की जा रही है। विशेष रूप से अमेरिका में ब्याज दरों में की जा रही वृद्धि का असर अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है क्योंकि अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर किए जाने वाले आर्थिक व्यवहारों के निपटान का एक सशक्त माध्यम है। इस कारण के चलते सामान्यतः कई देशों में विदेशी निवेश भी अमेरिकी डॉलर में ही किए जाते हैं। अभी हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक (यूएस फेड) ने अमेरिका में ब्याज दरों में लगातार तेज वृद्धि की है क्योंकि अमेरिका में मुद्रा स्फीति की दर पिछले 40 वर्षों के एतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। ब्याज दरों में की गई तेज वृद्धि के कारण अन्य देशों में विशेष रूप से वहां के पूंजी बाजार (शेयर मार्केट)...
CSE releases report on extreme weather events in India

CSE releases report on extreme weather events in India

प्रेस विज्ञप्ति
In just nine months in 2022, India witnessed some formof natural disaster almost every day, saysCSE’s new report on extreme weather Damage count: 2,755 lives lost, 1.8 million hectare of crop area affected, over 400,000 houses destroyed,nearly 70,000 heads of livestock killed India 2022: An Assessment of Extreme Weather Events released by CSE and Down To Earth magazine today. Report shows how vulnerable India is – as it continues to witness “the new abnormal in a warming world” To download the new report, please visit: https://www.downtoearth.org.in/climate-change To download Down To Earth’s special edition on loss and damage, please visit: https://www.downtoearth.org.in/ Check out our special CoP27 coverage here: https://www.downtoearth.org.in/...
J&K – The ‘Secular’ Fault Lines

J&K – The ‘Secular’ Fault Lines

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J&K - The ‘Secular’ Fault LinesBy Balbir Punj Recently the Union territory of Jammu and Kashmir figured prominently in national discourse. While defence Minister Rajnath Singh declared India’s intent to reclaim areas such as Gilgit and Baltistan in Pakistan occupied Kashmir (POK) in accordance with the 1994 Parliament resolution, Law Minister Kiran Rijju sought to set the record straight on who was responsible for the delay in the accession of the princely state into the Indian Union. October 27 last, marked the 75th anniversary of Shaurya Diwas which commemorates the landing of Indian troops (1 Sikh regiment) at Srinagar airport in 1947. The army was air-dashed post-haste to the beleaguered Valley to evict Pakistan – backed tribesmen, a day after Maharaja Hari Singh signed the ...
न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए?

न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
(धीमी गति से चलता न्याय का पहिया ) न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए? अवकाश की अवधारणा औपनिवेशिक नियमों से उत्पन्न हुई है। उस समय न्यायाधीश इंग्लैंड से आए थे, भारत की तुलना में ठंडी जगह और भारत की गर्मी उनके लिए असहनीय थी। अदालतों और स्कूलों को छोड़कर देश में कोई भी सरकारी संगठन नहीं है जहाँ छुट्टी होती है। भारतीय अदालतों में 3.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। भारत में अपर्याप्त न्यायिक शक्ति है (भारत में प्रति मिलियन जनसंख्या पर केवल 13 न्यायाधीश हैं, ब्रिटेन की 100 की तुलना में)। दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां कोर्ट में छुट्टियां नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए, फ्रांस और यू.एस. न्यायाधीशों के पास अवकाश नहीं होता है, लेकिन वे न्यायालय के कार्य को प्रभावित किए बिना अवकाश ले सकते हैं। भारत में भी अधीनस्थ आपराधिक न्यायालयों में कोई अवकाश नहीं होता है। लेकिन...