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Author: Dialogue India

गाय है भारतीय संस्कृति का तिलक

गाय है भारतीय संस्कृति का तिलक

संस्कृति और अध्यात्म
गाय है भारतीय संस्कृति का तिलक- ललित गर्ग - भारत त्यौहारों का धर्म परायण देश है। दीपावली पर्व श्रृंखला में एक पर्व गोपाष्टमी है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी पर गोपूजन उत्सव बड़े उल्लास से मनाया जाता है। विशेषकर गौशालाओं के लिए यह बड़े महत्व का उत्सव है। इस दिन गौशालाओं में एक मेला जैसा लग जाता है। गौ कीर्तन-यात्राएं निकाली जाती हैं। घर-घर व गांव-गांव में मनाये जाने वाले इस उत्सव में भंडारे किए जाते हैं, गौ को स्नान कराया जाता है, गौ पूजा की जाती है, जिनका शास्त्रीय महत्व है। भारत में गौ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष दात्री मानी गयी है। गौ को माता कहा गया है। गौ में सर्व देवी-देवताओं का वास कहा गया। उसके मूत्र में गंगा व गोबर में लक्ष्मी का वास है। गौ के समस्त उत्पाद जीवन-रक्षक होते हैं। गौ से जुड़ी आस्था एवं उपयोगिता को देखते हुए गतदिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ...
मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?

मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?

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मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* गुजरात के मोरबी में जो पुल टूटा है, उसमें लगभग डेढ़ सौ लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। मृतकों के परिजनों को केंद्र और गुजरात की सरकारें 6-6 लाख रु. का मुआवजा दे रही हैं और घायलों को 50-50 हजार का लेकिन यहां मूल प्रश्न यह है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी ही है? जो लोग मरे हैं, उनके परिजन 6 लाख रु. के ब्याज से अपना घर कैसे चलाएंगे? कई परिवार बिल्कुल अनाथ हो गए हैं। सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चों की मौत हुई है। कोई आश्चर्य नहीं कि उस पुल के हादसे में मृतकों की संख्या अभी और बढ़ जाए। लगभग 200 साल पुराने इस पुल की हालत काफी खस्ता थी। कई बार उस पर टूट-फूट हो चुकी है। गुजरात सरकार ने इस पुल के संचालन का ठेका एक गुजराती कंपनी को दिया था। पुल पर आने वाले हर यात्री को वह 17 रुपए का टिकट बेचती थी। लगभग 100 लोगों के ...
अवधारणाओं के असत्य आवरण

अवधारणाओं के असत्य आवरण

BREAKING NEWS, राष्ट्रीय
अवधारणाओं के असत्य आवरण--------------#विजयमनोहरतिवारीआजादी के बाद कुछ ऐसी अवधारणाएँ पतंगों की तरह उड़ाई गईं, जिनका कोई सिर-पैर था नहीं। इनसे एक ऐसी दूषित दृष्टि पैदा हुई, जिसके साइड इफेक्ट अंतहीन हुए। मैं सबसे पहले रखूंगा- ‘गंगा-जमनी रवायत’ को। कौमी एकता के लिए रचा गया एक ऐसा बनावटी गान, जिसकी पोल खुल चुकी है। गंगा-जमनी एकता की लाँचिंग कब और किसने किस तरह की थी, इसकी तलाश में मैं इतिहास में गया। ज्यादा दूर नहीं जाना था। केवल हजार साल की यात्रा करनी थी। यह दो संस्कृतियों के महामिलन का एक लुभावना रूपक था। गंगा तो यहीं की थी। मुझे लगा कि पीछे जाने पर कहीं गजनवी-गौरी या तुगलक-तैमूर कहीं दूर अरब से जमना जी को किसी अंडरग्राउंड टनल के जरिए लाते हुए और प्रयागराज में संगम पर समारोहपूर्वक गंगा में उसे मिलाने के साथ गले मिलते हुए दृष्टिगोचर होंगे। कौमों की एकता कोई मामूली काम तो है नहीं। उसे ऐसे ...
भारतीय त्योहारों में छिपे समरसता के सूत्र कथित उदार-पंथनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों को क्यों नहीं दिखाई देते?

भारतीय त्योहारों में छिपे समरसता के सूत्र कथित उदार-पंथनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों को क्यों नहीं दिखाई देते?

राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म
भारतीय त्योहारों में छिपे समरसता के सूत्र कथित उदार-पंथनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों को क्यों नहीं दिखाई देते? मैकॉले प्रणीत शिक्षा-पद्धत्ति का दोष कहें या छीजते विश्वास का दौर हमारा मन अपने ही त्योहारों, अपने ही संस्कारों, अपनी ही परंपराओं के प्रति सशंकित रहता है, सर्वाधिक सवाल-जवाब हम अपनी परंपराओं से ही करते हैं; भले ही वे परंपराएँ सत्य एवं वैज्ञानिकता की कसौटी पर खरे उतरते हों; सामूहिकता-सामाजिकता को सींचते हों; समय के शिलालेखों पर अक्षर-अक्षर अंकित और जीवंत हों! यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमारी शिक्षित कही जाने वाली पीढ़ी प्रायः परंपराओं को रूढ़ियों का पर्याय मान लेती है। जबकि रूढ़ियाँ कालबाह्य होती हैं और परंपराओं में गत्यात्मकता होती है। जो समयानुकूल है, वही परंपरा है। परंपरा में जड़ता या प्रतिगामिता के लिए कोई स्थान नहीं होता। जो लोग सतही तल पर सनातन परंपराओं का अध्ययन-विश्लेषण करते ...
भारतीय जीवन दर्शन और चिंतन

भारतीय जीवन दर्शन और चिंतन

TOP STORIES, साहित्य संवाद
ह्रदय नारायण दीक्षित जीवन इसी जगत में है और सुख दुख भी। आनंद भी इसी संसार में है। योग ध्यान भक्ति उपासना इसी संसार में है। भारतीय धर्म चिंतन में चार पुरुषार्थ धमर्, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति का क्षेत्र यही संसार है। संसार त्याग क्षेत्र नहीं है। यह कर्म क्षेत्र, धर्म क्षेत्र व भोग क्षेत्र है। कर्तापन भ¨क्तापन ही संसार है। लेकिन जीवन रहस्य जटिल हैं। भारतीय दर्शन और चिंतन में जिज्ञासा का महत्व है। ऋग्वेद प्राचीनतम ज्ञानकोष है। यह जिज्ञासा से भरापूरा है। इसके रचनाकाल से लेकर संपूर्ण वैदिक साहित्य में भरी पूरी प्रश्न जिज्ञासा है। मानने पर जोर नहीं है, जानने की इच्छा महत्वपूर्ण है। केन उपनिषद् बड़ी प्यारी पुस्तक है। इसमें अंतःकरण से जुड़े 5 प्रश्न हैं। पहली जिज्ञासा है, ‘‘यह मन किसके द्वारा प्रेरित होकर सक्रिय है?‘‘ सीधा सरल प्रश्न है। मन चंचल है। गीता में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, ‘‘हे ...
आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।

आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।

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पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (और राज्य पुनर्गठन आयोग की पूर्व सिफारिशों के अनुसार) के पारित होने के साथ, सरदार हुकम सिंह संसदीय समिति की सिफारिश पर हरियाणा 1966 में पंजाब से अलग होकर भारत का 17 वां राज्य बन गया। इस समिति के गठन की घोषणा 23 सितंबर 1965 को संसद में की गई थी। 23 अप्रैल, 1966 को हुकुम सिंह समिति की सिफारिश पर कार्य करते हुए, भारत सरकार ने विभाजन और विभाजन के लिए न्यायमूर्ति जे.सी. शाह की अध्यक्षता में शाह आयोग की स्थापना की। लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को ध्यान में रखते हुए पंजाब और हरियाणा की सीमाओं की स्थापना की। आयोग ने 31 मई, 1966 को अपनी रिपोर्ट दी। हरियाणा उत्तर पश्चिम भारत में 27 डिग्री 39' एन से 30 डिग्री 35' एन अक्षांश और 74 डिग्री 28' ई से 77 डिग्री 36' ई देशांतर के बीच और समुद्र तल से 700-3600 फीट की ऊंचाई के साथ स्थित है। हरियाणा की राजधानी, चंडीगढ़, इसके पड़ोसी रा...
आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन

आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन

TOP STORIES, राष्ट्रीय, समाचार
आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन अभी हाल ही में भारतीय मूल के राजनेता श्री ऋषि सुनक ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। इस समाचार से स्वाभाविक रूप से भारतीय समाज में भी खुशी की लहर दौड़ गई। परंतु, ब्रिटेन के अलावा विश्व के अन्य 7 देशों में भी भारतीय मूल के राजनेताओं ने प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्रपति का पद सम्भाला हुआ है। अमेरिका की उपराष्ट्रपति श्रीमती कमला हैरिस भारतीय मूल की हैं। इसी प्रकार भारतीय मूल के श्री प्रविंद जगन्नाथ वर्तमान में मॉरिशस के प्रधानमंत्री हैं। भारतीय मूल के ही श्री भरत जगदेव 2020 से गुयाना के उपराष्ट्रपति हैं। भारतीय मूल के एंटोनियो कास्टा वर्तमान में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री है। श्री चंद्रिका प्रसाद उर्फ श्री चान संतोखी वर्तमान में सूरीनाम के राष्ट्रपति है। सिंगापुर की वर्तमान राष्ट्रपति हलीमा भी भारतीय मूल की हैं।...
महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें

महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें

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महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें आर.के. सिन्हा महाराष्ट्र और गुजरात में आजकल निजी क्षेत्र का निवेश आकर्षित करने को लेकर स्वस्थ स्पर्धा चल रही है। यह अपने आप में सुखद है। ये दोनों राज्य 1 मई, 1960 को अलग-अलग प्रदेश के रूप में देश के मानचित्र में आने से पहले “बॉम्बे स्टेट” के ही अंग थे। यानी वे एक ही प्रदेश का हिस्सा थे। यह सब जानते हैं। ये भाषाई आधार पर अलग-अलग होने के बावजूद एक दूसरे के बेहद निकट हैं।  हाल के दिनों में ही “टाटा एयरबस परियोजना” गुजरात के पाले में गई। यह परियोजना पहले महाराष्ट्र के लिए तय थी, जिसे बाद में गुजरात में स्थापित करने का फैसला किया गया। परियोजना की जगह में बदलाव को लेकर मचे विवाद के बीच महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने सफाई दी। शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के लिए बड़े निवेश की तैयारी है। टाटा...
यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.

यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.

राज्य, सामाजिक
यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.  ( मीडिया रिलीज़ ) लखनऊ / सोमवार , 31 अक्टूबर 2022 …………………..  यूपी की राजधानी लखनऊ में गैरकानूनी रूप से स्वयंभू रूप से यौन रोग विशेषज्ञ बन बैठे आयुर्वेदिक डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन द्वारा लखनऊ की लाटूश रोड पर बांसमंडी चौराहे के आगे होटल आशा के पास डा. पी. के. जैन’s क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड तथा हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन गेट संख्या 2 के सामने होटल मेरा मन के पास डा. पी. के. जैन’s महराणा क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड नाम के आयुर्वेदिक क्लीनिक्स को यौन रोग ( सेक्स ) क्लीनिक्स के रूप में अवैधानिक रूप से प्रचारित-प्रसारित करने के खिलाफ सूबे के आयुष विभाग और लखनऊ के पुलिस महकमे ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. स्थानीय राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय...
कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

TOP STORIES, राज्य, सामाजिक
कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*====================आज फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती दहाड़े मार मार कर रो रहे हैं कि मोदी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया । कश्मीरी नोंजवानों पर सेना गोली बरसा रही है। हमारे लोगो को हिन्दू- मुस्लिम में बांटा जा रहा है । भाई चारा खत्म कर दिया इस सरकार ने । फारुख अब्दुल्ला जी दिलीप कुमार कौल वह शख्स हैं जिन्होंने बांदीपोरा,कश्मीर के एक चौराहे पर 25.6.1990 को गिरिजा टिक्कू की आरे से काटी गई सिर से लेकर 'नीचे' तक दो हिस्सों में बटी देह देखी थी । पोस्टमार्टम के बाद गिरिजा टिक्कू की देह को फिर से चमड़े के धागे से सिला गया था उम्र थी सिर्फ 23 वर्ष ज़िंदा शरीर को दो हिस्सों में काटने से पहले गिरिजा को हिन्दू होने की सज़ा दी गई थी, दर्जनों जेहादियों ने उनके साथ बर्बर बलात्कार भी किया था ।कश्मीरी पंडितों को ''काफिर हिन्दू' जा रहा है'' कहकर राह च...