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Author: Dialogue India

सांकेतिक नियुक्ति के बाद भी केवल रबर स्टाम्प नहीं है राष्ट्रपति।

सांकेतिक नियुक्ति के बाद भी केवल रबर स्टाम्प नहीं है राष्ट्रपति।

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS
सांकेतिक नियुक्ति के बाद भी केवल रबर स्टाम्प नहीं है राष्ट्रपति। राष्ट्रपति केवल मंत्रिमंडल की सलाह पर फैसले लेंगे। उन्हें केंद्र या राज्य सरकार के कामकाज में दखल देने का अधिकार नहीं है। यह सच नहीं है। राजेंद्र प्रसाद और सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे राष्ट्रपति थे जो कुछ नीतिगत मुद्दों पर सरकार के साथ खुले तौर पर मतभेद रखते थे। राष्ट्रपति जो गंभीर शपथ लेता है, उसे करने की आवश्यकता होती है। -प्रियंका 'सौरभ' महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई, 2022 को समाप्त हो रहा है, भारत के 16 वें राष्ट्रपति के पद को भरने के लिए चुनाव 18 जुलाई को होगा। राष्ट्रपति कोविंद का उत्तराधिकारी चुनने के लिए मतदान में सांसदों और विधायकों सहित 4,809 मतदाता शामिल होंगे। 2017 में हुए पिछले चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार को हराकर रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बने थे. कोविंद को कुल 10...
सशक्त विपक्ष के बिना लोकतंत्र अधूरा

सशक्त विपक्ष के बिना लोकतंत्र अधूरा

राष्ट्रीय, विश्लेषण
सशक्त विपक्ष के बिना लोकतंत्र अधूरा-ः ललित गर्ग :-भारतीय लोकतंत्र के सम्मुख एक ज्वलंत प्रश्न उभर के सामने आया है कि क्या भारतीय राजनीति विपक्ष विहीन हो गई है? आज विपक्ष इतना कमजोर नजर आ रहा है कि सशक्त या ठोस राजनीतिक विकल्प की संभावनाएं समाप्त प्रायः लग रही हैं। इतना ही नहीं, विपक्ष राजनीति ही नहीं, नीति विहीन भी हो गया है? यही कारण है कि आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर तक पहुंचते हुए राजनीतिक सफर में विपक्ष की इतनी निस्तेज, बदतर एवं विलोपपूर्ण स्थिति कभी नहीं रही। इस तरह का माहौल लोकतंत्र के लिये एक चुनौती एवं विडम्बना है। भले ही पूर्व दशकों में कांग्रेस भारी बहुमत में आया करती थी परन्तु छोटी-छोटी संख्या में आने वाले राजनीतिक दल लगातार सरकार को अपने तर्कों एवं जागरूकता से दबाव में रखते थे, अपनी जीवंत एवं प्रभावी भूमिका से सत्ता पर दबाव बनाते थे, यही लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण था। लेकिन ...
मुफ्त की रेवड़ी  न तो टिकाऊ है और न ही चुनाव जीतने की गारंटी

मुफ्त की रेवड़ी न तो टिकाऊ है और न ही चुनाव जीतने की गारंटी

Current Affaires, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण
मुफ्त की रेवड़ी  न तो टिकाऊ है और न ही चुनाव जीतने की गारंटी यदि मतदाता बुद्धिमान और शिक्षित हैं, तो वे इस तरह की चालों के झांसे में नहीं आएंगे। मुफ्त उपहार स्वीकार करने के बाद भी, वे सरकार के प्रदर्शन या उसकी कमी के अनुसार मतदान करना चुन सकते हैं। यदि वे मुफ्त उपहारों और वादों को अस्वीकार करते हैं, तो राजनीतिक दल अधिक रचनात्मक कार्यक्रमों के लिए आगे बढ़ेंगे। अस्वीकृति की शुरुआत पंचायत राज और राज्य विधानसभा चुनावों से होनी चाहिए। मतदाताओं के केवल एक निश्चित वर्ग के लिए किसी विशेष क्षेत्र में सब्सिडी चुनाव में जीत का आश्वासन नहीं दे सकती है। -सत्यवान 'सौरभ' श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के पतन की हालिया खबरों ने राज्य की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दिया है। श्रीलंका की सरकार ने बोर्ड भर में करों में कटौती की और कई मुफ्त सामान और सेवाएं प्रदान कीं। नतीजतन, अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई और सरकार गिर...
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका

Current Affaires, TOP STORIES, सामाजिक, साहित्य संवाद
साइंस लेटर संस्था द्वारा “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए गए मेरे विचारो के प्रमुख अंश - कारपोरेट और सरकारें बाज़ारवाद व उपभोक्तावाद के जिस रास्ते पर दुनिया को ले गयीं हैं उसने पृथ्वी के संसाधनों को तेजी से समाप्त करना शुरू कर दिया है। हमारी स्थिति टाईटेनिक जहाज जैसी हो चुकी है । जीवाश्म ईंधनो और मांसाहार के साथ ही प्लास्टिक, रासायनिक खादों व कीटनाशकों ने आग में चिंगारी का काम किया है। हर और प्रदूषण , कूड़े व गंदगी के ढेर और पश्चिमी जीवन शैली व भवन निर्माण ने हालात बद से बदतर कर दिए। बाज़ार ज़्यादा से ज़्यादा माल बेचना चाहता है इसलिए उसने संयुक्त परिवार व अब एकल परिवार भी तोड़ दिया है जिस कारण सब आत्मकेंद्रित व स्वार्थी हो गए हैं। सरकारें बस बातें करती हैं किंतु ज़मीनी सच्चाई अलग है। सरकारों क...
जेंडर गैप इंडेक्स और हम

जेंडर गैप इंडेक्स और हम

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
जेंडर गैप इंडेक्स और हम ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में मानव के रूप में जन्म लेना एक दुर्लभ सौभाग्य की बात होती है। और जब वो जन्म एक स्त्री के रूप में मिलता है तो वो परमसौभाग्य का विषय होता है। क्योंकि स्त्री ईश्वर की सबसे खूबसूरत वो कलाकृति है जिसे उसने सृजन करने की पात्रता दी है। जेंडर गैप इंडेक्स और हम हाल ही में वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की ग्लोबल जेंडर गैप 2022 रिपोर्ट आई है जिसमें भारत 146 देशों की सूची में 135वें स्थान पर है। यानी लैंगिक समानता के मुद्दे पर भारत मात्र ग्यारह देशों से ऊपर है। हमारे पड़ोसी देशों की बात करें तो हम नेप...
विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे

विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे

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विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे अब समाप्त होगी मुफ्त रेवड़ी की राजनीति मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बुंदेलखंड यात्रा के दौरान जालौन के कैथेरी गांव में बने मंच से 14,800 करोड़ से निर्मित 296 किमी लम्बे 4 लेन(6 लेन विस्तारीकरण) बुंदेलखण्ड एक्सप्रेस वे राष्ट्र को समर्पित करते हुए भविष्य के विकास व राजनीति के नये आयामों का संदेश दिया । प्रधानमंत्री ने बुंदेली में जनसभा को संबोधित करना शुरू किया और हर बार की तरह इस बार भी प्रतीकों व महापुरूषों को नमन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई बडे़ संदेश दिए जिनसे यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी मिशन -2024 के कितनी सतर्क व सजग होकर अपनी तैयारी कर रही है। भाजपा आलाकमान स्वयं पूरी तरह सक्रिय है तथा अपने कार्यकर्ता को भी पूरी तरह से सक्रिय रख रहा है ताकि चुनावों के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाये। प्र...
समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव

समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव

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समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव" आर. विक्रम सिंह (लेखक पूर्व सैनिक अधिकारी एवं पूर्व प्रशासक हैं)  साभार::दैनिक जागरण 7.7.22 हमारे देश के कुछ समूहों, वर्गों और राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों में राष्ट्रवाद का अभाव ही हमारी कई समस्याओं की जड़ है। देशवासियों में प्रबल राष्ट्रवाद की भावना जगाकर अब तक हम वह सब कुछ हासिल कर सकते थे, जिनका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था। यदि आपके पास धन है तो कोई जरूरी नहीं कि प्रबल राष्ट्रदृष्टि भी हो। हमारे क्रांतिकारियों को धन चाहिए था। मजबूरी में उन्हें अंग्रेजों का खजाना लूटना पड़ा। कोई बिड़ला, कोई डालमिया या कोई भी अनाम भामाशाह उन्हें धन दे रहा होता तो क्रांतिकारी आंदोलन नए स्तरों पर जाता, पर देश का जनमानस गांधी को महात्मा मान कर उधर चला गया। जज्बा हो, विचार हो, पर धन न हो तो कुछ न हो पाएगा। यह बड़ा संकट है। हम इससे अवगत हैं कि ...
जिहादी सोच का दमन करना जरूरी

जिहादी सोच का दमन करना जरूरी

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जिहादी सोच का दमन करना जरूरी  लेखक::अवधेश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक) उदयपुर में कन्हैयालाल की गला काटकर की गई हत्या की भयानक घटना से देश उद्वेलित है। यदि कन्हैयालाल को नुपुर शर्मा के पक्ष में एक कथित पोस्ट के कारण जान गंवानी पड़ी तो उस कट्टर मानसिकता की वजह से, जिससे उसके हत्यारे रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद भरे हुए थे। इस कट्टर सोच के गिरफ्त में न जाने कितने अन्य रियाज और गौस मजहब के नाम पर अनेक कन्हैयालालों का कत्ल करने को तैयार बैठे हैं।  कन्हैयालाल की हत्या कुछ वैसे ही की गई, जैसे फ्रांस में अक्टूबर, 2020 में शिक्षक सैमुअल पैटी की एक चेचेन जिहादी आतंकी ने की थी। उस हत्यारे को बताया गया था कि पैटी ने अपनी कक्षा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लेक्चर देते हुए छात्रों को शार्ली आब्दो में छपे वे कार्टन दिखाए थे l जो पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर बनाए गए थे। इसके बाद...
कितने भारतीय कमला हैरिस से ऋषि सुनक तक की कतार में

कितने भारतीय कमला हैरिस से ऋषि सुनक तक की कतार में

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कितने भारतीय कमला हैरिस से ऋषि सुनक तक की कतार में आर.के. सिन्हा अगर ब्रिटेन के नये प्रधानमंत्री ऋषि सुनक बने जाते हैं, तो वे एक तरह से उसी  परंपरा को ही आगे बढ़ायेंगे, जिसका श्रीगणेश 1961 में सुदूर कैरिबियाई टापू देश गयाना में भारतवंशी छेदी जगन ने किया था। वे तब गयाना के निर्वाचित प्रधानमत्री बन गए थे। उनके बाद मॉरीशस में शिवसागर रामगुलाम से लेकर अनिरूध जगन्नाथ, त्रिनिदाद और टोबैगो में वासुदेव पांडे, सूरीनाम में चंद्रिका प्रसाद संतोखी,  अमेरिका में कमल हैरिस वगैरह उप-राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनते रहे। ये सभी उन मेहनतकश भारतीयों की संताने रहे हैं, जिन्हें गोरे दुनियाभर में लेकर गए थे, ताकि वे वहां के चट्टानों की सफाई कर वहां गन्ना की खेती कर लें। दरअसल सन 1834 में दुनिया में गुलामी प्रथा का अंत होने के बाद श्रमिकों की  भारी संख्या में की जरूरत पड़ी जिसके बाद गोरे भारत से एग्रीमेंट करक...
राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें*

राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें*

EXCLUSIVE NEWS, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें* यह सर्वविदित है कि जब मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के पद को त्यागकर प्रधानमंत्री के पद को गृहण किया तो उन्होंने अपने बैंक में संचित सम्पूर्ण धनराशि अपने सेवकों में वितरित कर दी और अपनी संचित निधि को शून्य कर दिया था। यदि वे चाहते तो उस संचित धनराशि को अपनी जन्मदात्री माता जी एवं अपने परिवार के सदस्यों को वितरित कर सकते थे। इतना ही नहीं अपितु उन्होंने समय-समय पर देश-विदेश के भ्रमण के पश्चात प्राप्त हुए कीमती उपहारों को तथा अपने बहुमूल्य वस्त्रों की भी निलामी कराकर उससे प्राप्त धनराशि को गरीबों के हितार्थ सरकारी कोषों में दान कर दिया। उन्होंने कभी भी निजी सेवाओं के लिए गुजरात सरकार से पेंशन अथवा अन्य कोई सरकारी सुविधा की मांग नहीं की। यह एक आदर्श नेता की पहचान है। आज भारतीय संसद में अधिकांश सांसद भाजपा के हैं, सम्भव है कि इस वर्ष राज्यसभा में भी...