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Author: Dialogue India

‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल”

‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल”

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‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल” यह एक सर्वविदित तथ्य है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए ये सबसे अच्छी उम्र होती है, क्योंकि वह इस उम्र में सबसे ज़्यादा सीखता है। एक बच्चा पांच साल से कम उम्र के घर पर ज़्यादातर समय बिताता है और इसलिए वह घर पर जो देखता है, उससे बहुत कुछ सीखता है। छत्रपति शिवाजी को उनकी माँ ने बचपन में नायकों की कई कहानियां सुनाईं और वो बड़े होकर कई लोगों के लिए नायक बने। बच्चों का पहला स्कूल घर घर पर ही एक बच्चा सबसे पहले समाजीकरण सीखता है। एक बच्चा पहले घर पर बहुत कुछ सीखता है। लेकिन आज, चूंकि अधिकांश माता-पिता कमाने वाले हैं, इसलिए वे अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय नहीं बिता पाते हैं। बच्चों को प्ले स्कूलों में भेजा जाता है और अक्सर उनके दादा-दादी द्वारा उनका पालन-पोषण किया जाता है। ये बच्चे उन लोगों की तुलना में नुकसान में हैं जो अपने माता-पिता के साथ ...
पीआरएस ओबराय यानी कोरपोरेट जगत के भीष्म पितामह

पीआरएस ओबराय यानी कोरपोरेट जगत के भीष्म पितामह

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पीआरएस ओबराय यानी कोरपोरेट जगत के भीष्म पितामह अथवा टाटा, नारायणमूर्ति, प्रेमजी जैसे आदरणीय ओबराय भी आर.के. सिन्हा एक अजीब सी मानसिकता हमारे देश में बन गई कि हम किसी भी क्षेत्र के कुछेक लोगों की प्रशंसा करके ही इतिश्री कर लेते हैं। यही स्थिति बिजनेस की दुनिया के लिए भी कही जाएगी। कुछ ज्ञानकार और गुणी लोग रतन टाटा, एन. नारायण मूर्ति, अजीम प्रेमजी, मुकेश अंबानी वगैरह की बात करके सोचने लगते हैं कि इससे आगे की चर्चा करना व्यर्थ है। ये ही हमारे कोरपोरेट संसार की सबसे श्रेष्ठ हस्तियां हैं। इसी सोच के कारण वे पृथ्वीराज सिंह ओबराय (पीआरएस) का नाम लेना या उनकी चर्चा करना भूल जाते हैं। उन्हें ‘बिक्की ओबेरॉय’ के नाम से भी जाना जाता है। भारत के होटल सेक्टर में लक्जरी को लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। उन्होंने लगभग 93 साल की उम्र में ओबराय होटल ग्रुप के चेयरमेन पद को छोड़ दिया। कहना होगा कि भार...
केजरीवाल जी, मत खाई पैदा करो महाराष्ट्र-गुजरात में

केजरीवाल जी, मत खाई पैदा करो महाराष्ट्र-गुजरात में

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केजरीवाल जी, मत खाई पैदा करो महाराष्ट्र-गुजरात में आर.के. सिन्हा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को महाराष्ट्र-गुजरात के घनिष्ठ संबंधों के बारे में अभी भी बहुत कुछ जानना-सीखना है। आई.आई.टी. में इन विषयों की पढाई तो होती नहीं, तो वे यह सब जानेगें कहाँ से I उन्होंने अपने हलिया गुजरात दौर के समय भारतीय जनता पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि “गुजरात भाजपा अध्यक्ष मराठी हैं। भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए एक भी गुजराती नहीं मिला? लोग कहते हैं, ये केवल अध्यक्ष नहीं, गुजरात सरकार यही चलाते हैं। असली मुख्यमंत्री यही हैं। ये तो गुजरात के लोगों का घोर अपमान हैं।” उनका इशारा भारतीय जनता पार्टी की गुजरात इकाई के प्रमुख सी आर पाटिल की तरफ था। अगर अरविंद केजरीवाल को महाराष्ट्र तथा गुजरात के मिले-जुले इतिहास के बारे में थोड़ा सा भी ज्ञान होता तो वे इस तरह की टिप्पणी करने से बचते। यह टिप्पणी ...
दिल्ली के 40 गांवों का बदला जाएगा नाम

दिल्ली के 40 गांवों का बदला जाएगा नाम

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आज शाम 8 बजे से जी सलाम न्यूज़ चैनल पर “दिल्ली के 40 गांवों का बदला जाएगा नाम! BJP ने AAP सरकार से की मांग” विषय पर चर्चा में शामिल रहां। बहस का यूटयूब व फ़ेसबुक लिंक - https://youtu.be/0unuvnxRrBg
दिल्ली को झीलों का शहर

दिल्ली को झीलों का शहर

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हिंदी खबर न्यूज़ चैनल पर पर “ दिल्ली को झीलों का शहर” बनाने की दिल्ली सरकार की योजना के मायने विषय पर आयोजित बहस में शामिल रहा। बहस का लिंक: https://youtu.be/5scy-bqxh0E
बैडरूम में सौतन और संतानोत्पति में बाधक बनते मोबाइल और लैपटॉप

बैडरूम में सौतन और संतानोत्पति में बाधक बनते मोबाइल और लैपटॉप

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बैडरूम में सौतन और संतानोत्पति में बाधक बनते मोबाइल और लैपटॉप -प्रियंका 'सौरभ' बैडरूम में देर रात तक मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप पर कार्य करने से पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहें है. आधुनिक युग के दम्पति साइको सेक्स डिसऑर्डर के शिकार हो रहें है. शरीर में डाई हाइड्रोक्सी इथाइल अमाइन नामक रसायन का स्तर तेजी से घट रहा है. जिसकी वजह से पुरुष व महिला का हॉर्मोन साइकिल प्रभावित हो रहा है. जो अब बच्चे पैदा करने में मुश्किल खड़ी कर रहा है, संतानोत्पति में बाधक बन रहा है. इंडियन मेडिकल एजुकेशन के रिसर्च के अनुसार कुदरत ने लड़कियों को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन एवं लड़को को टेस्टोस्ट्रोन हॉर्मोन तोहफे में दिया है ताकि वो अपनी वंश बेल को आगे बढ़ा सके. मगर बदलती दिनचर्या और आधुनिक उपकरणों की लत के कारण इन होर्मोनेस का स्तर गड़बड़ा रहा है. जिस स...
दिल्ली में यूरोपीय तर्ज पर सड़कों का सौंदर्यीकरण?

दिल्ली में यूरोपीय तर्ज पर सड़कों का सौंदर्यीकरण?

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दिल्ली में यूरोपीय तर्ज पर सड़कों का सौंदर्यीकरण? *रजनीश कपूर दिल्ली जैसे महानगरों में ट्रेफ़िक की समस्या आम बात है। सभी सम्बंधित एजेंसियां, वो चाहे ट्रेफ़िक पुलिस हो या लोक निर्माण विभाग, समय-समय पर इस समस्या का हल निकालने के लिए नए-नए तरीक़े ईजाद करती रहती हैं। परंतु इस बार दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की कुछ चुनिंदा सड़कों का यूरोपीय तर्ज़ पर सौंदर्यीकरण करने का निर्णय लेकर ये कार्य पर्यटन विभाग को दे दिया है। कहा जा रहा है कि यह एक ‘पाइलट प्रोजेक्ट’ है और फ़िलहाल दिल्ली की लगभग 32 किलोमीटर सड़कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जिस तेज़ी से दिल्ली में वाहनों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, उसके चलते इन सड़कों के सौंदर्यीकरण के नाम पर खड़ी होने वाली कुछ समस्याओं का अभी से आँकलन किया जाना अनिवार्य है। केजरीवाल सरकार ने यह दावा किया है इन सड़कों के सौंदर्यीकरण का कार्य अगस्त 2022...
सांप्रदायिकता एक राजनीतिक हथियार बनी हुई है।

सांप्रदायिकता एक राजनीतिक हथियार बनी हुई है।

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जोधपुर दंगा विशेष) सांप्रदायिकता एक राजनीतिक हथियार बनी हुई है। -सत्यवान 'सौरभ' रोजमर्रा की भाषा में, 'सांप्रदायिकता' शब्द धार्मिक पहचान की रूढ़िवादिता को दर्शाता है। ये अपने आप में एक ऐसा रवैया है जो अपने ही समूह को एकमात्र वैध या योग्य समूह के रूप में देखता है, अन्य समूहों को निम्न, नाजायज और विरोध के रूप में देखता है। इस प्रकार सांप्रदायिकता धर्म से जुड़ी एक आक्रामक राजनीतिक विचारधारा है। सांप्रदायिकता भारत में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि यह तनाव और हिंसा का एक  स्रोत रहा है। सांप्रदायिकता एक ऐसी राजनीति को संदर्भित करती है जो एक समुदाय को दूसरे समुदाय के शत्रुतापूर्ण विरोध में एक धार्मिक पहचान के इर्द-गिर्द एकजुट करने का प्रयास करती है। भारत में स्वतंत्रता पूर्व के समय से सांप्रदायिक दंगों का इतिहास रहा है, अक्सर औपनिवेशिक शासकों द्वारा अपनाई गई फूट डालो और राज ...
डीयू के 100 साल-  रहेगी अपने गुरुओं की ऋणि

डीयू के 100 साल- रहेगी अपने गुरुओं की ऋणि

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डीयू के 100 साल-  रहेगी अपने गुरुओं की ऋणि   आर.के. सिन्हा किसी भी स्कूल,कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पहचान होती है उसमें शिक्षित हुए विद्यार्थियों तथा शिक्षकों से। इस मोर्चे पर अपने 100 साल का सफर पूरा कर रही दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) जितना भी चाहे गर्व कर सकती है। डीयू की स्थापना 1922 में हुई थी और इसका पहला दीक्षांत समारोह 26 मार्च, 1923 को हुआ था।  उस समय तक डीयू में सिर्फ सेंट स्टीफंस कॉलेज, हिन्दू कॉलेज, रामजस कॉलेज और दिल्ली कॉलेज ( अब जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज) ही थे। ये उन दिनों की बातें हैं जब डीयू में सिर्फ साइंस और आर्ट्स की ही फैक्ल्टी हुआ करती थीं। और अब जब डीयू  में  70 से अधिक कॉलेजें हैं। एक महत्वपूर्ण बिन्दु यह भी है कि डीयू में राजधानी की दो अन्य विश्वविद्लायों क्रमश: जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी के विपरीत शांति तथा सौहार्द बना रहता है। यहां प...