श्रीराम की सेना के महाबली अंगदजी
अंगद किष्किन्धा के राजा बालि के पुत्र थे। उनकी माता का नाम तारा था। अंगद का विवाह मैद नामक वानर की ज्येष्ठ पुत्री के साथ हुआ था। अंगद के पुत्र का नाम ध्रुव था। ध्रुव भी पिता के समान महाबली था। अंगद बड़े ही वाक्पटु थे। इनके इस संक्षिप्त परिचय के उपरान्त श्रीरामकथा में इनके अद्भुत वीरता-प्रतिभा-वाकपटुता के बारे में जानना आवश्यक है। श्रीरामचरितमानस में अंगद का आगमन श्रीराम के द्वारा बालि के हृदय में बाण मारने के बाद होता है। श्रीराम द्वारा बालि को बाण मारा तब बालि ने कहा-
धर्म हेतु अवतेरहु गोसाईं। मारेहु मोहि व्याध की नाई।।
मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कवन नाथ मोहि मारा।।
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुन सठ कन्या सम ए चारी।।
इन्हहि कूदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछू पाप न होई।।
श्रीरामचरितमानस किष्किन्धाकाण्ड ९-३-४
हे गोसाईं! आपने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिया है और मुझे व्याध (शिकारी) की...
