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Author: Dialogue India

राष्ट्र रक्षार्थ “जनसंख्या नियंत्रण कानून” बने…

राष्ट्र रक्षार्थ “जनसंख्या नियंत्रण कानून” बने…

राष्ट्रीय
श्रीराम जन्म भूमि पूजनोत्सव के  साथ ही भाजपा के राज्यसभा सांसद डा. अनिल अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण पत्र लिख कर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से बहुप्रतिक्षित "जनसंख्या नियन्त्रण कानून" बनाने की राष्ट्रीय मांग को मूर्त रूप देने का आग्रह किया है। निसन्देह यह सर्वविदित है कि आज हमारे देश में बढ़ती जनसँख्या एक भयानक  समस्या का रुप ले चुकी है। जिससे देश में विभिन्न धार्मिक जनसँख्या अनुपात निरंतर असंतुलित हो रहा है । इससे भविष्य में बढ़ने वाले अनेक संकटों का क्या हमको कोई ज्ञान है ? क्या हम अपने अस्तित्व पर आने वाले संकट के प्रति सतर्क है ? ऐसे में राम राज्य की स्थापना के लिये  बढती जनसंख्या एक बडी चुनौती बनती जा रही है। आज आत्मनिर्भर व विकसित भारत के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न का महत्व और भी अधिक बढ़ता जा रहा है। ऐसे में राष्ट्ररक्षार्थ "जनसंख्या नियन्त्रण कानून" भारत की अनिवार्य आवश्यक...
मेरे कृष्ण

मेरे कृष्ण

संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
श्री कृष्ण जन्मोत्सव वास्तव में एक बालक जन्म से कुछ अधिक है, ये पर्व मानव सभ्यता को जीवन मूल्यों के साथ जीवन से जुड़े विभिन्न मनोभावों जैसे प्रेम, विश्वास, क्रोध, अनुराग, घृणा आदि के प्रति जागरूक करता है। विचारणीय तथ्य है कि समस्त बंधनो में जन्म लेने वाला शिशु किस प्रकार समस्त बंधनों को पार करके एक नए परिवार में प्रवेश पाता है। उसको जन्म देने वाले, पालने वाले सब एक माध्यम है ताकि शिशु अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से समाज को जागरूक कर सके। श्री कृष्ण का जीवन एक प्रतिबिम्ब है जिसमे उनके अनेक रूप जीवन शैली की सकारात्मकता एवम नकारात्मकता को समाविष्ट किये हुए है। कृष्ण एक नटखट बालक है, एक बाँसुरी वादक है, एक भयंकर योद्धा है, एक राजनेता है, एक महायोगी है और एक प्रेमी है। वास्तव में कृष्ण जीवन का एक आचरण है जिसका संबंध पूरे समाज से है। यदि श्री कृष्ण के जीवन का अध्ययन करें तो पाते हैं कि श्...

पूर्वजों की खोज है चूड़ियाँ

Uncategorized
अधिकतर महिलायें चूड़ियाँ या कंगन अवश्य पहनती हैं। चूड़ियाँ और कंगन शादी शुदा महिला के लिए ख़ासा महत्व रखती हैं। कई प्रान्तों में तो इतना महत्व है की सोना नहीं तो कांच की चूड़ियाँ पहनना जरुरी होता है। बंगाल में शंका-पोला तो पंजाब में चूङे... अलग अलग प्रान्तों में अलग अलग चलन है। कहा जाता है की नई नवेली दुल्हन की कलाई चूड़ियों से भरी होती है। आमतौर पर इस सम्बन्ध में यही मान्यता है की चूड़ियाँ सुहाग की निशानी होती है और इसी कारण से पहनी जाती है। चूड़ियों की पहनने के पीछे सुहाग की निशानी के आलावा कई अन्य महत्वपूर्ण कारण भी हैं। 1- चिकत्सा के आधार पर चूड़ियों का महत्व 2- वैज्ञानिकता के आधार पर चूड़ियों का महत्व 3-मान्यता के आधार पर चूड़ियों का महत्व 1- चिकत्सा के आधार पर चूड़ियों का महत्व- चूड़ियों के हिलने और बजने से जो मधुर ध्वनि निकलती है, उस संगीत से मनुष्य को शारीरिक और मानसिक तोर पर बहु...

हिन्दू शौर्य दिवस

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11 अगस्त 1757, यह मुगलो की अंतिम सुबह थी इसके बाद सल्तनत ने ना सूर्योदय देखा न ही सूर्यास्त। लाल किले में भयंकर चिंता पसरी हुई थी मुगलो का वजीर ईमाद उल मुल्क पेशवा की शरण मे पुणे जा चुका था और पेशवा ने 30 हजार मराठो की फौज अपने भाई राघोबा के नेतृत्व में दिल्ली भेज दी। राघोबा ने लाल किले को घेरकर आग के गोले बरसाने शुरू कर दिए और लाहौर दरवाजे को ध्वस्त कर दिया। दूसरी ओर मल्हार राव होल्कर ने भी लाल किले की मजबूती को खत्म कर दिया और देखते ही देखते मराठा सेना दिल्ली में प्रवेश कर गयी। राघोबा ने सभी मराठो में जोश भरते समय छत्रपति संभाजी महाराज के साथ की गयी ज्यादती याद दिला दी थी। जिसके कारण मराठा सैनिक बहुत गुस्से में थे और क्रूर हो चुके थे, दिल्ली में प्रवेश करते ही लूट का एक भयंकर बवंडर मच गया। दिल्ली बाहर से खूबसूरत थी मगर अंदर से पांडवों की नगरी नही बल्कि अफगानिस्तान का इलाका जान पड़ती थी।...

नींद उड़ाते “हैकर” और “क्रिप्टो करेंसी

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आज हैकिंग  एक आम बात होती जा रही है | कभी कभी सरकारें भी  हैकिंग कराती  है, तो कभी प्रायवेट हैकर ठेके पर इस कारगुजारी को अंजाम देते हैं |“ हैकर’ शब्द का परिचय विश्व को १९८०  के दशक में मिला था | ‘द हैकर्स पेपर्स’ में ‘हैकर’ शब्द का उल्लेख आया था। इसके बाद १९८२ में आई फिल्म ‘ट्रॉन’ में एक पात्र कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ का अपना इरादा बताते हुए दिखा था। उस पात्र का डॉयलॉग था कि मैं इस कंप्यूटर में हैकिंग जैसा कुछ कर रहा हूं।इसके बाद  ‘हैकिंग’ शब्द का इस्तेमाल आम बोलचाल में किया जाने लगा। यहां तक कि कुछ देशों में यह चर्चा भी होने लगी कि कैसे हैकर बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। भारत में अब यह मर्ज फैल रहा है इससे पहले यह समस्या बने इसका इलाज़ जरूरी है | इसी की सहोदरा क्रिप्टो करेंसी है | आमतौर पर हैकर वह व्यक्ति कहलाता है जो सुरक्षा के सारे उपायों को धता बताते हुए किसी कंप्यू...
राजस्थानः कांग्रेस नेतृत्व की कंगाली

राजस्थानः कांग्रेस नेतृत्व की कंगाली

विश्लेषण
राजस्थान-कांग्रेस के दोनों गुटों—— गहलोत और सचिन— में सुलह तो हो गई है लेकिन जैसी कि कहावत है कि ‘काणी के ब्याह में सौ—सौ जोखम’ हैं। यदि दोनों में सुलह हो गई है तो कांग्रेस हायकमान ने तीन सदस्यों की कमेटी किसलिए बनाई है ? यह कमेटी क्या सचिन पायलट को दुबारा प्रदेशाध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री बनवाने की सलाह देगी ? यदि नहीं तो क्या सचिन को गहलोत के बोझ तले दबना नहीं पड़ेगा, जिसे मैंने पहले जीते-जी मर जाना कहा था। यों भी मुझे पता चला है कि सचिन गुट के 18 में से लगभग 10 सदस्य अपनी विधानसभा की सदस्यता खत्म होने से डरे हुए थे। 14 अगस्त को होनेवाले शक्ति-परीक्षण में यदि सचिन गुट कांग्रेस के विरुद्ध वोट करता या व्हिप के बावजूद गैर-हाजिर रहता तो उसकी सदस्यता ही खत्म हो जाती और फिर उप-चुनाव में पता नहीं कौन जीतता और कौन हारता। यों भी सचिन गुट के बिना भी गहलोत को बहुमत का समर्थन तो मिलना ही था। अब सचिन अप...
लौट के “पायलट” घर को आए

लौट के “पायलट” घर को आए

राष्ट्रीय, समाचार
राजस्थान की आकाश में उड़ रहा कांग्रेस का तैयारा क्रैश लैंडिंग से बच गया. बुआ की सक्रियता और कोझिकोड हादसे से पायलट में ऐसी हदस बैठी कि लैंडिंग से इंकार कर दिया.इस करतब से गाजियाबाद के राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी के छोरे ने 1981की हिट फ़िल्म का रोमांटिक गाना याद दिला दी. चित्रपट :-एक दूजे के लिए . गीतकार : आनंद बक्षी, सुर : लता - एस्. पी. बालसुब्रमण्यम, संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, बोल... तुम हो बुद्धू मान लो, you are handsome जान लो सब बातों को छोड़ के, आँखों को पहचान लो आँखों ने आँखों से वादे यही किए उसको क़सम लगे जो बिछड़ के इक पल भी जिए हम बने, तुम बने, एक दूजे के लिए...... कांग्रेस की सियासत में आज राहुल -प्रियंका के आगे सचिन पायलट नाच झूमकर यही गा रहे हैं. सचिन संग गहलोत की कुर्सी पलटने में लगा हर बंदा फिलहाल इसे गाने में लग गया है. मुख्यमंत्री गहलोत तुतलाती जुबा...

रामजन्म भूमि आंदोलन के चीफ आर्किटेट थे अशोक सिंघल

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हिन्दू आस्था और अस्मिता के प्रतिमान प्रभु राम के अयोध्या में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया गतिशील है, भूमि पूजन के साथ ही साथ हिन्दू आस्था और अस्मिता का प्रत्याशित आशा पूरी गयी। देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में उत्साह और हर्ष का विषय बन गया। दुनिया भर में रहने वाले हिन्दू, भूमि पूजन समारोह को अपने-अपने ढंग से मनाने और याद रखने की कोशिश काफी समय से कर रहे हैं। अयोध्या नगरी और प्रभु राम हिन्दू संघर्ष और बलिदान के भी प्रतीक बन गये हैं। कोई एक-दो साल का संघर्ष नहीं रहा है, पूरे पांच सौ साल का संघर्ष रहा है। तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा कारसेवकों पर बर्बर गोलियां चलवाने और कोठारी बंधुओं सहित दर्जनों कारसेवकों की हत्या कराने से लेकर जिहादियों द्वारा गोधरा कांड में लगभग एक सौ से अधिक कारसेवकों को जला कर मार डालने जैसे सैकड़ों बर्बर घटनाओं की याद ताजा हो रही है। कोई भी बड़ा आंदोलन और अभिय...
 ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करेगा प्रधानमंत्री का वित्तपोषण

 ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करेगा प्रधानमंत्री का वित्तपोषण

राज्य
(औपचारिक ऋण की सुविधा से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बन सके. वर्तमान लॉकडाउन अवधि के दौरान किसानों की सहायता के लिए लगभग 22,000 करोड़ रुपये विभिन्न  योजनाओं के जरिये देश भर के किसानों के लिए जारी किए गए.)     ---प्रियंका सौरभ  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कृषि अवसंरचना कोष के तहत 1 लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा का शुभारंभ किया। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मानिर्भर भारत ’ के हिस्से के रूप में यह फंड लॉन्च किया गया है। यह कोष कोष ‘कटाई बाद फसल प्रबंधन अवसंरचना’ और ‘सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों’ जैसे कि शीत भंडार गृह, संग्रह केंद्रों, प्रसंस्करण इकाइयों आदि बनाने में मददगार होगा। यह एक नयी पैन इंडिया सेंट्रल सेक्टर स्कीम है। इस योजना के बाद फसल प्रबंधन के लिए व्...
बनारस के घाट हमारे शक्ति के केंद्र हैं: डाॅ. सच्चिदानंद जोशी

बनारस के घाट हमारे शक्ति के केंद्र हैं: डाॅ. सच्चिदानंद जोशी

सामाजिक
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020 ‘बनारस के घाट’ वेबनार में हिंदू संस्कृति को सशक्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए बनारस के घाटों, वहां की संस्कृति, संगीत, कला, साहित्य, जीवनशैली की जीवंत एवं प्रभावी प्रस्तुति की गई। ये घाट न केवल वाराणसी के बल्कि हिंदुत्व के समृद्ध इतिहास एवं संस्कृति के प्रतीक है। इन संस्कृति एवं शक्ति केंद्रों को धुंधलाने की कोशिशों को नाकाम करने की जरूरत पर बल देते हुए विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। लाॅयंस क्लब नई दिल्ली अलकनंदा द्वारा आयोजित इस विशिष्ट वेबनार में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डाॅ. सच्चिदानंद जोशी प्रमुख वक्ता थे। जिसमें राजधानी दिल्ली की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के संयोजक श्री अरविंद शारदा एवं सहसंयोजक डाॅ. चंचल पाल ने इस वेबनार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि का...