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Author: Dialogue India

दङ्गे-फ़साद की मानसिकता बनाता कौन है?

दङ्गे-फ़साद की मानसिकता बनाता कौन है?

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मैं टीवी आमतौर पर नहीं देखता। परसों कई दिनों बाद देखा। दिल्ली के दङ्गों पर सवेरे एनडीटीवी पर रवीश कुमार की एक रिपोर्ट और शाम को जी-न्यूज़ पर सुधीर चौधरी की एक दूसरी रिपोर्ट। ‘आजतक’ भी खोला, पर वहाँ कुछ दूसरी चीज़ चल रही थी, जिसके ज़िक्र का यहाँ सन्दर्भ नहीं बनता। रवीश कुमार की रिपोर्टिङ्ग आमतौर पर मैं पसन्द करता हूँ, उनका समर्थन भी करता रहा हूँ, पर कल निराशा हाथ लगी। मैं सवेरे नौ बजे के बाद वाली रवीश जी की सिर्फ़ एक रिपोर्ट की बात कर रहा हूँ, इसलिए मेरी बात को सिर्फ़ वहीं तक सीमित करके देखें, क्योंकि हो सकता है कि उन्होंने दूसरी और तरह की कुछ बढ़िया रिपोर्टिङ्ग भी की हो। फिलहाल, रवीश की इस रिपोर्ट को शातिराना ढङ्ग की बेहूदा रिपोर्टिङ्ग कहूँगा। बॉडी लैङ्ग्वेज तक ईमानदार नहीं लग रही थी। ठीक इसके उलट, सुधीर चौधरी की रिपोर्टिङ्ग बढ़िया थी और यह सच को सच की तरह दिखा रही थी। इन दोनों को देखने ...
दिल्ली में आज वे भी डरे हुए हैं, जिन्होंने दंगा भड़काने में परोक्ष सहयोग किया

दिल्ली में आज वे भी डरे हुए हैं, जिन्होंने दंगा भड़काने में परोक्ष सहयोग किया

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दिल्ली में आज वे हिन्दू-मुसलमान भी डरे हुए हैं, जो पिछले ढाई महीनों से CAA-NRC-NPR के खिलाफ अफवाहें फैलाकर दो समुदायों को आमने-सामने खड़ा करके दंगा भड़काने में जुटे थे। दिल्ली में आज वे हिन्दू-मुसलमान भी अपनी जान बचाने के लिए पुलिस की ओर ही कातर दृष्टि से देख रहे हैं, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दंगाई गुंडों पर लाठीचार्ज के बाद पुलिस के खिलाफ ज़हर उगल रहे थे और लोगों की साम्प्रदायिक भावनाएं भड़का रहे थे। दिल्ली में आज वे हिन्दू-मुसलमान भी डरे हुए हैं, जिन्हें जामिया, एएमयू, आईआईटी कानपुर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद से की गई देशविरोधी और हिंदू विरोधी बातों में तो मज़ा आ रहा था, लेकिन आलोचना के शब्द केवल कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के बयानों पर फूटते थे। दिल्ली में आज वह हर हिन्दू-मुसलमान भी डरा हुआ है, जिसने परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से इन दंगों की बुनियाद रखी है।...
Delhi Burnt: Post-Violence Relief: A Ground Report

Delhi Burnt: Post-Violence Relief: A Ground Report

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Govt machinery needs to speed up basic relief needed to keep body and soul together. Government completely absent from relief operations in the aftermath of communal violence in Delhi Received from Ayesha Kidwai: Status report based on visit to Bhajanpura, Chaman Park and Shiv Vihar on February 29, 2020 By Anjali Bhardwaj, Annie Raja, Poonam Kaushik, Geetanjali Krishna, Amrita Johri We went to North-East Delhi where communal violence had broken out on February 24, 2020 and carried on till February 26, 2020. As per latest figures available, 42 people have died, more than 200 are injured and thousands have been rendered homeless due to destruction and looting of their houses. We met with Muslim and Hindu families in Bhajanpura, Chaman Park and Shiv Vi...
सोना’ कितना ‘सोना’ है

सोना’ कितना ‘सोना’ है

आर्थिक
कोई माने या न माने सोने [स्वर्ण] को लेकर एक बात बिल्कुल पक्की है, यह अनिश्चितता के दौर में सबसे महत्वपूर्ण निवेश   है और इसकी अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता है। अनिश्चितता, तनाव, युद्ध की स्थितियों में सोने के भाव इसीलिए ऊपर जाते हैं कि तमाम निवेशक सोने की तरफ दौड़ते हैं। सदियों से इसके प्रति इस कदर आकर्षण है कि लोग इसमें रकम लगाते हैं और लगाते जाते हैं। कारण इसका ग्लोबल आकर्षण है। तमाम केंद्रीय बैंक सोने को खरीदकर अपने भंडार में रखते हैं, जिस केंद्रीय बैंक के पास सोने के जितने ज्यादा भंडार होंगे, उसकी स्थिति उतनी ही मजबूत मानी जायेगी। इस समय खासतौर पर संकट, अनिश्चितता, तनाव के चलते तो सोने के भाव आसमान छू रहे हैं। सोने के भाव करीब ४४००० रुपये प्रति दस ग्राम तक जा पहुंचे हैं। बीते एक साल में सोने के भावों में करीब २७  प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। इसे बहुत जबरदस्त बढ़ोतरी माना जा सकता है...
तो क्या कश्मीर की तरह दिल्ली भी सेना के हवाले करनी पड़ेगी?

तो क्या कश्मीर की तरह दिल्ली भी सेना के हवाले करनी पड़ेगी?

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आप पार्षद हाजी ताहिर हसन जिनके घर से पत्थर और पेट्रोल बम की बरसात हुई है। पत्थर, तेज़ाब और पेट्रोल का जखीरा भी मिला है, आईबी कर्मचारी के परिवारीजन जिन पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। वह कह रहे हैं कि मुस्लिम आबादी छोड़कर वह हिंदू आबादी में रहने आए। यह ठीक वैसे ही है जैसे कुछ लोग कहते हैं कि हम बाई च्वायस हिंदुस्तान में रुके और पाकिस्तान नहीं गए। तो यह अहसान अपने ऊपर था कि हिंदुस्तान पर? हिंदुस्तान को अब सीरिया बनाने के लिए नहीं गए? जब देखो तब कहते फिरते हैं कि किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है और  हिंदुस्तान को जलाते फिरते रहते हैं। अपने बाप का हिंदुस्तान होता तो इस तरह नहीं जलाते आए दिन। अम्बेडकर ने पाकिस्तान बनने पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा है कि अच्छा हुआ इस्लाम नाम का अभिशाप हिंदुस्तान से पाकिस्तान गया। लेकिन आंबेडकर को नहीं मालूम था कि पाकिस्तान बनाने की लड़ाई लड़ने ...
Mutual understanding and unity is essential for the development of the nation

Mutual understanding and unity is essential for the development of the nation

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Mutual understanding and unity is essential for the development of the nation An appeal to all for the establishment of peace Hindus and Muslims are indispensable to each other in this country. To increase mutual trust in each other is the need of the time. The recent outbreak of violence in New Delhi, the national capital, has resulted in the loss of lives and wealth of the common people. Ahmadiyya Muslim community, India stands with those affected by this incident. More than 30 people including a police head constable have lost their lives in this tragic event. Ahmadiyya Muslim community expresses its heartfelt condolences to the families of the victims and pray for those injured and are undergoing treatment and for those who have suffered financially. Since its establishment, Ah...
देश में उपस्थित मिनी पाकिस्तान से हारते दिखे नरेंद्र मोदी

देश में उपस्थित मिनी पाकिस्तान से हारते दिखे नरेंद्र मोदी

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कश्मीर से लगायत दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद आदि समूचे देश में पुलिस पर पत्थरबाजी कौन लोग और क्यों करते हैं? यह भी क्या किसी से कुछ पूछने की ज़रूरत है? जुमे की नमाज के बाद शहर दर शहर बवाल समूचे भारत में क्यों होता है? मोहर्रम में दंगे क्यों होते हैं? होली और दुर्गा पूजा के विसर्जन जुलूस पर हमला कौन करता है? कभी किसी मंदिर, किसी चर्च, किसी गुरूद्वारे से किसी ख़ास मौके पर या सामान्य मौके पर किसी ने किसी को बवाल या उपद्रव करते हुए देखा हो तो कृपया बताए भी। अपने भाई को क्या बार-बार बताना होता है कि यह हमारा भाई है? तो यह भाईचारा, सौहार्द्र, गंगा-जमुनी तहजीब का पाखंड क्यों हर बार रचा जाता है। यह तो हद्द है। इस हद की बाड़ को तोड़ डालिए। इकबाल, फैज़ अहमद फ़ैज़, जावेद अख्तर, असग़र वजाहत जैसे तमाम-तमाम नायाब रचनाकार भी अंतत: क्यों लीगी और जेहादी जुबान बोलने और लिखने लगते हैं। भारतेंदु हरिश्चंद्र, मै...
‘काॅनक्लेव’ से नहीं कर्मठ लोगों से हल हांेगी समस्या

‘काॅनक्लेव’ से नहीं कर्मठ लोगों से हल हांेगी समस्या

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अक्सर देश के बडे़ मीडिया समूह, दिल्ली में राष्ट्रीय समस्याओं पर सम्मेलनों का आयोजन करते हैं। जिनमें देश और दुनिया के तमाम बड़े नेता और मशहूर विचारक भाग लेते हैं। देश की राजधानी में ऐसे सम्मेलन करना अब काफी आम बात होती जा रही है। इन सम्मेलनों में ऐसी सभी समस्याओं पर काफी आंसू बहाऐ जाते है और ऐसी भाव भंगिमा से बात रखी जाती है कि सुनने वाले यही समझे कि अगर इस वक्ता को देश चलाने का मौका मिले तो इन समस्याओं का हल जरूर निकल जाएगा। जबकि हकीकत यह है कि इन वक्ताओं में से अनेकों को अनेक बार सत्ता में रहने का मौका मिला और ये समस्यायें इनके सामने तब भी वेसे ही खड़ी थी जैसे आज खड़ी हैं। इन नेताओं ने अपने शासन काल में ऐसे कोई क्रान्तिकारी कदम नहीं उठाये जिनसे देशवासियों को लगता कि वो ईमानदारी से इन समस्याओं का हल चाहते है। अगर उनके कार्यकाल के निर्णयों कोे बिना राग-द्वेष के मूल्यांकन किया जाए तो यह स्पष्ट ...
मुसलमान भाइयों-बहनों को झूठ और अफवाहों से बचाने के लिए आगे आएं हिन्दू भाई-बहन

मुसलमान भाइयों-बहनों को झूठ और अफवाहों से बचाने के लिए आगे आएं हिन्दू भाई-बहन

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दिल्ली में दंगों की आग बुझ चुकी है, लेकिन चिंता की बात यह है कि देश के अनेक हिस्सों में मुसलमान भाइयों-बहनों के बीच अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि दिल्ली में गुजरात दंगों जैसा कोई मॉडल आजमाया गया है। मकसद साफ है कि अन्य जगहों पर भी उन्हें दंगे करने के लिए उकसाया जा सके। देखा जाए तो यह उनकी पूरी की पूरी कम्युनिटी को दंगाई बनाने की साज़िश है, जिससे उन्हें सावधान रहना होगा। जहां तक दिल्ली दंगों का सवाल है, मुसलमान भाइयों-बहनों को यह समझना होगा कि शातिर सियासतदानों ने उनके कंधों पर बन्दूकें रखकर 40 से ज़्यादा बेगुनाह लोगों को मरवा दिया, जिनमें दोनों समुदायों के अभागे लोग शामिल हैं। इन दंगों की तैयारी शाहीन बाग की स्थापना के साथ ही शुरू हो गई थी और मास्टरमाइंड सियासी दलों ने इसके लिए रेडिकल इस्लामिक एलिमेंट्स को इस्तेमाल किया। आइए, कुछ तथ्यों से आप समझ जाएंगे कि इन दंगों के पीछे रेडिकल हिं...
नई ऊंचाइयों पर भारत अमेरिका सम्बंध

नई ऊंचाइयों पर भारत अमेरिका सम्बंध

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे क्षेत्र को कवर करते हुए व्यापक वार्ता की, जिसमें रक्षा, सुरक्षा और व्यापार और निवेश के प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे। इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका का साझा बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि भारत-अमेरिका के बीच 3 अरब डॉलर के एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनाने के लिए बातचीत होगी। वहीं, साझा बयान से पहले मीडिया के समक्ष वार्ता में अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया और उन्हें भारत यात्रा के लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में पिछले दो दिन अद्भुत थे, विशेषकर अहमदाबाद के मोटेरा स्ट...