अपने अंदर के रावण का परित्याग कर राम को जगाये
दस मुँह वाले रावण रूपी दस अवगुणों काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार,
आलस्य, हिंसा और चोरी का परित्याग करके अपने अंदर रामरूपी सद्गुणों को
ग्रहण करना ही जीवन का परम ध्येय होना चाहिए।
सफलता के लिए ईश्वर को केवल मानो मत, जानने की कोशिश भी करो!
आइए इस शुभ पर्व पर अपने जीवन को एक नया आयाम देने की शपथ लें - विश्वात्मा ग्लोबल सोल
एक ही छत के नीचे हो अब सब धर्मों की प्रार्थना!
- प्रदीप कुमार सिंह
दशहरा हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं तथा रामलीला का आयोजन होता है। दशहरे का उत्सव रखा गया है। दस मुँह वाले रावण रूपी दस प्रकार के पापों-काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आल...









