भ्रष्ट एमसीआई पर भारी एनएमसी
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति से हर भारतीय पूरी तरह वाकिफ है। पूर्ववर्ती सरकारों ने स्वास्थ्य शिक्षा के विषय को कभी राष्ट्रीय महत्व समझा ही नहीं। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि आज हम चांद पर तो जा रहे हैं लेकिन अपने देश के लिए जरूरी चिकित्सकों की संख्या की आपूर्ति करने में असफल रहे हैं। मजबूत इच्छाशक्ति हो तो हर मैदान फ़तह की जा सकती है। मोदी सरकार-2 मजबूत राजनीतिक शक्ति के साथ इस बार मैदान में उतरी है। इसका अंदाजा इस बार के संसद सत्र में पास हुए बिलों के देखकर सहज ही लगाया जा सकता है। जिन बिलों पर दशकों से राजनीति होती आ रही थी आज वे कानून बन चुके हैं। इसी कड़ी में 8 अगस्त, 2019 का दिन स्वास्थ्य शिक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बन गया है। राष्ट्रपति ने 8 अगस्त को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग बिल-2019 पर अपना हस्ताक्षर कर दिया है। इस हस्ताक्षर के बाद अब राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के गठन का ...








