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Author: Dialogue India

भारत को परमाणु जंग की धमकी देने वाले पाक को कसे दुनिया

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जम्मू-कश्मीर  से धारा 370 और 35 ए हटाते ही पाकिस्तान  अपना आपा खो बैठा  है। वैसे पाकिस्तान तो पूरी दुनिया में भारत के खिलाफ वातावरण बनाने की जीतोड़लेकिन असफल कोशिश तो कर ही रहा है ।  लेकिन, उसे कहीं से भी कोई ठोस समर्थन या सफलता  नहीं मिल रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके कम से कम दो अन्य मंत्री  शेख राशिद  और एफ. हुसैन  भारत को परमाणु युद्ध  की भी बेशर्मी  से धमकियां भीदिये जा रहे हैं।  जरा देख लीजिए कि जिस देश का अवाम खाने के लिए भी दाने-दाने को मोहताज है, वहां के लीडर परमाणु जंग छेड़ने को लेकर कितने उत्साहित हैं।इससे साफ है कि वे अपने पड़ोसी मुल्क के तो क्या, अपने मुल्क के अवाम के भी सगे नहीं है।  पर हैरानी इस बात की भी है कि पाकिस्तान की भारत पर परमाणु बमसे हमला करने की बार-बार दी जा रही धमकियों पर विश्व बिरादरी भी अबतक चुप है। अमेरिका, जापान, रूस और यूरोप के तमाम देश ...
Failure of civic bodies in Delhi makes Supreme Court intervene for removing encroachments

Failure of civic bodies in Delhi makes Supreme Court intervene for removing encroachments

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It is indeed regretting that Supreme Court has to spend precious court-hours on issues like encroachments and parking-space in Delhi. It was welcome to note that the Division Bench of Apex Court gave Delhi government notify its parking policy in short time by 30.09.2019 with compliance-report to be submitted in the court by 04.10.2019. Concerned authorities in Delhi should also look into large-scale commercialisation of earlier purely posh residential colony Bhagirath Palace in Chandni Chowk area of Old Delhi with total buildings in the colony re-built with high level illegal constructions. Bhagirath Palace with adjoining Lajpat Rai Market, New Lajpat Rai Market and Pleasure Garden Market have thus become largest wholesale markets in India for so many commodities like medicines, surgica...
India can demand shifting of Kulbhushan Jadhav to UN or Red Cross office in Pakistan

India can demand shifting of Kulbhushan Jadhav to UN or Red Cross office in Pakistan

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It was on expected lines that Kulbhushan Jadhav had to speak during counsellor-access with Deputy High Commissioner of India in Pakistan on 02.09.2019 under tremendous pressure of Pakistani authorities in accordance with tune of Pakistan. Since he has to remain in torturous custody of Pakistan, he could not speak reality in fear of extended dose of torture later. India has sufficient evidence through photographs and videos that Kulbhushan Jadhav was beaten mercilessly by Pakistan authorities. India government should raise the issue on international forum to shift Kulbhushan Jadhav to office of either United Nations or Red Cross in Pakistan if it may not be feasible to demand his shifting to some neutral country of Pakistan. Demand should also be made for a complete and comprehensive med...
कश्मीर पुराण व पाक अधिकृत कश्मीर

कश्मीर पुराण व पाक अधिकृत कश्मीर

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जब भारत की रियासतों का एकीकरण हो रहा था तब रियासत के राजाओं को यह अधिकार दिया गया था कि वो चाहे तो पाकिस्तान में मिले या अपना स्वतंत्र राज्य बनाये या फिर भारत में मिले। वहां के राजा अपना एक अलग राज्य बनाना चाहते थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र समझकर कश्मीर पर हमला किया तो वहां के राजा ने हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री से सहायता मांगी। उस समय जवाहर लाल नेहरू ने भारत में विलय की शर्त पर मदद की और अंतत: कश्मीर भारत का हिस्सा बना। 1947 में ही एक तिहाई कश्मीर पर पाकिस्तान ने कब्जा तो किया पर उनके पास कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की रियासत पाकिस्तान में मिलाने का कोई आदेश नहीं था। 20 अक्तूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थित आजाद कश्मीर सेना ने राज्य के अग्रभाग पर आक्रमण किया। इस असामान्य स्थिति में, राज्य के शासक ने राज्य को भारत में विलय करने का निर्णय लिया। इसके अनुसार, 26 अक्तूबर, 1947...
अब गिलगित बाल्टिस्तान पर करनी होगी पहल

अब गिलगित बाल्टिस्तान पर करनी होगी पहल

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वास्तव में अगर जम्मू कश्मीर के बारे में बातचीत करने की जरूरत है तो वह है पीओके और अक्साई चीन के बारे में। इसके ऊपर देश में चर्चा होनी चाहिए। गिलगित जो अभी पीओके में है विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि 5 देशों से जुड़ा हुआ है अफगानिस्तान, तजाकिस्तान (जो कभी रूस का हिस्सा था), पाकिस्तान, भारत और तिब्बत -चाइना। वास्तव में जम्मू कश्मीर का महत्व जम्मू के कारण नहीं, कश्मीर के कारण नहीं, लद्दाख के कारण नहीं, वास्तव में अगर इसका महत्व है तो वह है गिलगित-बाल्टिस्तान के कारण। भारत के इतिहास में भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक (शक, हूण, कुषाण, मुग़ल) वह सारे गिलगित से हुए। हमारे पूर्वज जम्मू-कश्मीर के महत्व को समझते थे, उनको पता था कि अगर भारत को सुरक्षित रखना है तो दुश्मन को हिंदूकुश अर्थात गिलगित-बाल्टिस्तान उस पार ही रखना होगा। किसी समय इस गिलगित में अमेरिका बैठना चाह...
कश्मीर में कमाल : रक्तहीन क्रांति

कश्मीर में कमाल : रक्तहीन क्रांति

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  कश्मीर में केंद्र सरकार की बड़े बदलाव की कोशिशें कुछ महीनों से दिख रही थीं किंतु ये बदलाव इतने व्यापक व क्रांतिकारी होंगे इसका अंदाजा शायद ही किसी को था। अनुच्छेद 370 व धारा 35 ए की समाप्ति पर संसद की मुहर अपने आप में एक ऐसी पहल बन गयी जिसने पूरे राष्ट्र को एक सूत्र व एक विधान में बांध दिया। आजादी के समय से ही विभाजन के दंश व कश्मीर के जख्म सीने में लिए देश की जनता कश्मीर पर अपनी सरकारों व शासकों से एक मजबूत व निर्णयकारी पहल की अपेक्षा की बाट जोहती रही मगर सत्ता कश्मीर के तीव्र इस्लामीकरण की कोशिश करने वालों को शह देती रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वर्तमान सरकार ने जो साहसिक कदम उठाया है उसके लिए आने वाली पीढिय़ां भी उनकी ऋणी रहेंगी। इस युगांतकारी कदम ने जहां भारतीय राष्ट्रीयता को नए आयाम दिए वहीं वर्तमान में आक्रामक राजनय की आवश्यकता को भी स्थापित किया। ज...
भाजपाई एजेंडे पर उत्तर प्रदेश फार्म में योगी

भाजपाई एजेंडे पर उत्तर प्रदेश फार्म में योगी

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  एक समय था जब भाजपा से जनता कश्मीर, 370, राम मंदिर जैसे विषयों पर सवाल पूछती थी। 370 के हटने के बाद अब जनता का ध्यान विभिन्न राज्यों की गतिविधियों पर आकर टिक गया है। कर्नाटक में भाजपा सरकार बनने के बाद मध्य प्रदेश की उठापटक कुछ ऐसा संकेत दे रही है कि वहां भी भाजपा सरकार में आ सकती है। बिहार में नितीश कुमार हालांकि भाजपा के साथ गठबंधन में तो हैं किन्तु उनकी भाजपा के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। केन्द्रीय मंत्रीमंडल में भी उनको उतना प्रतिनिधित्व नहीं मिला जितने कि वह अपेक्षा कर रहे थे। अब बिहार के राजनीतिक हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि नितीश कुमार न अकेले चुनाव लड़ कर सत्ता में आ सकते हैं और न ही भाजपा के विरोध में जाकर आरजेडी से हाथ मिला सकते हैं। पूरे देश में जिस तरह से भाजपा ने विपक्ष को साफ किया है उसी तजऱ् पर अपने सहयोगियों को भी विपक्ष बनने से रोकने में भाजपा कामयाब दिख रही है। इन ...
सामाजिक एजेंडे से राष्ट्रनिर्माण तक

सामाजिक एजेंडे से राष्ट्रनिर्माण तक

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किसी भी राष्ट्र के विश्वगुरु बनने के क्रम में उसके नागरिकों में 'सिविक सैन्स’ का बड़ा योगदान होता है। सरकारें सिर्फ कानून बना सकती हैं। न्यायालय कानून पालन न होने की स्थिति में दंडित कर सकता है किन्तु यह सब समस्या का सिर्फ उपचार है। अकेले क़ानूनों के द्वारा सभ्य समाज का निर्माण संभव नहीं है। सभ्य समाज के निर्माण में क़ानूनों से ज़्यादा लोगों का योगदान महत्वपूर्ण होता है। जैसे मोटर व्हिकल एक्ट में हुये ताज़ा संशोधन में जुर्माने की राशि काफी हद तक बढ़ा दी गयी है। इस डर के द्वारा सड़क पर नियमों को मानने वालों की संख्या तो बढ़ सकती है किन्तु सड़क सुरक्षा की परिकल्पना तभी फलीभूत होगी जब लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे। आजकल सड़कों पर ट्रैफिक इतना ज़्यादा दिखता है कि सड़क पर चलना स्वयं में सिरदर्द बन जाता है। बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या एवं सड़कों के किनारे कटे हुये पेड़ स्थिति को और जटिल बना देते ...
निर्दोष कानूनी प्रक्रिया से साबित होते हैं प्रेस कांफ्रेंस से नहीं

निर्दोष कानूनी प्रक्रिया से साबित होते हैं प्रेस कांफ्रेंस से नहीं

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गैरों में कहां दम था हमें तो अपनों ने लूटा, हमारी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था। आज कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में कुछ ऐसा ही सोच रहे होंगे। क्योंकि 2007 के एक मामले में जब वे 2019 में गिरफ्तार होते हैं तो उसी के बयान के आधार पर जिसकी मदद करने का उनपर आरोप है। जी हां वो 'इंद्राणी मुखर्जी’ जो आज अपनी ही बेटी की हत्या के आरोप में जेल में है। अगर इंद्राणी मुखर्जी आज जेल में नहीं होती तो भी क्या वो सरकारी गवाह बनती? जवाब हम सभी जानते हैं और शायद यह खेल जो खुल तो 2007 में ही गया था बोफ़ोर्स घोटाले, 2जी घोटाले, यूटीआई घोटाले, ताज कॉरिडोर घोटाले, यूरिया घोटाले, एयरबस घोटाले, स्टैम्प पेपर घोटाले जैसे अनेक घोटालों की ही तरह सबूतों और गवाहों के अभाव में कागजों में ही दफन हो जाता। चिदंबरम दोषी हैं या नहीं ये फैसला तो न्यायालय करेगा लेकिन खुद एक वकील...
भ्रष्टाचार के चक्रवात में सोनिया से चमत्कार की उम्मीद?

भ्रष्टाचार के चक्रवात में सोनिया से चमत्कार की उम्मीद?

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सोनिया गांधी के पुन: अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेसियों में उम्मीद जगी थी कि उनके अच्छे दिन फिर आएंगे और सोनिया एक बार फिर विपक्ष का नेतृत्व करते हुए नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने और सरकार बनाने में सफल होंगी। पिछले लोकसभा चुनावों में सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी को 2004 के चुनाव याद दिलाए थे जब कांग्रेस अटलबिहारी वाजपेयी को हटा सरकार बनाने में सफल हुई थी। लेकिन क्या सोनिया गांधी अब वो कहानी दोहरा पाएंगी? क्या विपक्ष उनके नेतृत्व में एकजुट हो पाएगा? इसकी पड़ताल की जानी चाहिए। सोनिया गांधी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा तो उनके परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भ्रष्टाचार है। आजकल यूपीए सरकार में वित्त और गृह मंत्री रहे पी चिंदबरम के भ्रष्टाचार और उनकी गिरफ्तारी की खबरें सुर्खियों में हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जब आईएनएक्स मीडिया मामले में उनकी गिरफ्तारी से रोक हटाई तो वो अचानक फरा...