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Author: Dialogue India

माइग्रेन….. कई प्रकार से अटैक करता है

माइग्रेन….. कई प्रकार से अटैक करता है

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चारू (बदला हुआ नाम) को अक्सर सुबह उठते ही सिरदर्द होने लगता था। सिरदर्द की उत्तेजना इतनी अधिक होती थी कि उसे किसी तरह से आराम नहीं मिलता था। कभी-कभी तो वह अपना सिर दीवार में मारने लगती थी। तो, हारकर उसने डाक्टर को दिखाया तब पता चला कि वह सिरदर्द की ऐसी समस्या से ग्रस्त है जो कि जीवन भर उसका साथ नहीं छोड़ेगी। असल में, वह माइग्रेन की चपेट में आ चुकी थी। दर्द हमारे जीवन का एक अभिन्न भाग है। हर कोई कभी न कभी, कहीं न कहीं तो किसी न किसी प्रकार के दर्द से अवश्य ही जूझता है। कमर दर्द, दांत दर्द, पैर दर्द, गर्दन दर्द तो ऐसे आम दर्द हैं, जिनकी शिकायत रोजाना सुनने को मिल सकती है। ऐसा ही एक आम तौर पर उभरने वाला दर्द है-सिरदर्द। हम अक्सर ही सिरदर्द से परेशान हो जाते हैं। वैसे तो सिरदर्द को सामान्य ही समझा जाता है, लेकिन हर केस में अक्सर होने वाला सिरदर्द आम नहीं होता है। वास्तव में, बहुत सी बड़ी बीमार...
प्रेम विवाह, माँबाप के हक, मीडिया व कुछ यक्ष प्रश्न

प्रेम विवाह, माँबाप के हक, मीडिया व कुछ यक्ष प्रश्न

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स्यार की एक आदत होती है. एक बोलेगा तो धीरे-धीरे सब बोलने लगते हैं. फिर चारों ओर उनका ही शोर रहता है. बरेली के विधायक राजेश मिश्रा की बेटी, साक्षी की शादी,निजी आजादी और उसके अपने फैसले को लेकर देश के खबरिया चैनलों का शोर कुछ वैसा ही है. साक्षी अपने नए-नवेले पति के साथ चैनलों का न्योता फटाफट थाम रही हैं, और स्टूडियो-स्टूडियो घूम-घूमकर, पिता और परिवार की ज्यादतियों का फरचटनामा बांच रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर पहले ही डाल चुकी हैं कि मेरे पिता और भाई - मेरी और मेरे पति की जान के पीछे पड़े हैं. गुंडों को पीछे लगा रखा है. इन बातों का रट्टा वो चैनलों पर भी लगा रही हैं. स्वनामधन्य एंकर, बेटी के साहसिक फैसले, प्रेम की जंग, बाप के आतंक, सामंती सोच, वगैरह वगैरह के बैनर उड़ा उड़ा, अपने तरक्कीपसंद और लोकतांत्रिक अधिकारों का पैरोकार होने की मुनादी कर रहे हैं. गजब बहस कर रहे हैं.!! मुझे लगता है कि ...
क्यों जरूरी है मोदी जी की ‘हृदय योजना’?

क्यों जरूरी है मोदी जी की ‘हृदय योजना’?

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अपनी सनातनी आस्था और अंतराष्ट्रीय समझ के सम्मिश्रण से मोदी जी ने 2014 में ‘स्वच्छ भारत’ या ‘हृदय’ जैसी चिरप्रतिक्षित नीतियों को लागू किया। इनके शुभ परिणाम दिखने लगे हैं और भविष्य और भी ज्यादा दिखाई देंगे। हृदय योजना की राष्ट्रीय सलाहकार समिति का मैं भी पांच में से एक सदस्य था। इस योजना के पीछे मोदी जी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के प्राचीन नगरों की धरोहरों को सजा-संवाकर इस तरह प्रस्तुत किया जाय कि विकास की प्रक्रिया में कलात्मकता और निरंतरता बनी रहे। ऐसा न हो कि हर आने वाली सरकार या उस नगर में तैनात अधिकारी अपनी सीमित बुद्धि और अनुभहीनता से नये-नये प्रयोग करके ऐतिहासिक नगरों को विद्रुप बना द, जैसा आजतक करते आये हैं । जिन बारह प्राचीन नगरों का चयन ‘हृदय योजना’ के तहत भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने किया, उनमें से मथुरा भी एक था। राष्ट्रीय स्तर पर एक पारदर्शी चयन प्रक्रि...
युवा भारत 21वीं सदी में ‘जगत गुरू’ बनने की ओर

युवा भारत 21वीं सदी में ‘जगत गुरू’ बनने की ओर

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15 जुलाई - विश्व युवा कौशल दिवस पर हार्दिक बधाइयाँ! विश्व युवा कौशल दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 नवम्बर 2014 को श्रीलंका के प्रस्ताव पर की गयी थी। महासभा ने 15 जुलाई को प्रतिवर्ष विश्व युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के सभी देशों से यह आग्रह किया कि वे अपने देश में युवाओं को कौशल विकास में सहायता प्रदान करें ताकि ये युवा आगे चलकर बेहतर राष्ट्र तथा विश्व के निर्माण में योगदान दे सकें। 21वीं सदी की युवा पीढ़ी सारे विश्व में घूम-घूमकर अपनी सर्वोत्तम प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही है। इनोवेशन की 21वीं सदी में वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा साकार रूप लेने की ओर से तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित यह महत्वपूर्ण दिवस तकनीकी, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए कौशल के विकास के महत्व पर अधिक जागरूकता और विश्व बन्धुत्व की भावना वि...
सुविधा की खूनी एवं त्रासद सड़कें

सुविधा की खूनी एवं त्रासद सड़कें

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लखनऊ से दिल्ली की ओर जा रही उत्तरप्रदेश परिवहन की एक बस ड्राईवर को नींद की झपकी आ जाने से यमुना एक्सप्रेस-वे पर करीब तीस फुट गहरे नाले में जा गिरी। इस त्रासद हादसे में उनतीस लोगों की मौत हो गई और अठारह बुरी तरह घायल हो गए। इस तरह की कोई एक घटना बड़े सबक के लिए काफी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा लगता है कि हर कुछ समय के बाद एक्सप्रेस-वे के हादसों के बावजूद सरकार या संबंधित विभाग की नींद नहीं खुलती। इस त्रासद घटना ने एक बार फिर यह सोचने को मजबूर कर दिया कि आधुनिक और बेहतरीन सुविधा की सड़के केवल रफ्तार के लिहाज से जरूरी हैं या फिर उन पर सफर का सुरक्षित होना पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हर दुर्घटना को केन्द्र एवं राज्य सरकारें दुर्भाग्यपूर्ण बताती है, उस पर दुख व्यक्त करती है, मुआवजे का ऐलान भी करती है लेकिन एक्सीडेंट रोकने के गंभीर उपाय अब तक क्यों नहीं किए जा सके हैं? जो भी हो, सवाल यह है...
Dual drug delivery system may make heart stents safer

Dual drug delivery system may make heart stents safer

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Medicated stents are widely used to unblock heart arteries. While the drug prevents the growth of muscle cells around the stent, it however,  retards endothelial cells necessary for healing the wound site and may result in the formation of clots. That’s why anti-clotting medications are given, which must be taken life-long; also, they come with adverse side effects.  To minimise such stent-related complications, a group of Indian researchers has developed a dual drug delivery therapy. Laboratory tests have shown that the drug combination can inhibit the growth of muscle cells and prevent clotting at the stent site. Moreover, the drugs are loaded into a flexible polymer which eliminates problems that occur during crimping and implantation of stents. Two widely prescribed lipid-lowerin...
दो धूर्त पड़ोसी- तो भारत रक्षा क्षेत्र को करता रहेगा ठोस

दो धूर्त पड़ोसी- तो भारत रक्षा क्षेत्र को करता रहेगा ठोस

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जब देश के इर्द-गिर्द दो बड़े शत्रु राष्ट्रों की सरहदें मिलती हो तब भारत से यह अपेक्षा करना उचित ही नहीं होगा कि वह अपने रक्षा बजट में कटौती करने की सोचे भी। भारत की पाकिस्तान से 1947, 1955, 1971 और फिर करगिल में जंग हुई। चीन से भी हमारी भीषण जंग 1962 में हुई। पिछले वर्ष दोकलम में भी लड़ाई की ही नौबत आ चुकी थी । लेकिन, मोदी जी के कुशल कूटनीति और सुषमा जी और तत्कालीन विदेश सचिव जयशंकर जी की सफल कार्य शैली से युद्ध टल गया। जिन सीमा के सवालों पर जंग हुईं थीं वे सवाल अब भी तो अनसुलझे ही हैं। इसीलिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समझदारी पूर्वक रक्षा बजट के लिए 3.18 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए। आपको याद ही होगा अंतरिम बजट में भी इतनी ही राशि का आवंटन हुआ था। अब जरा भारत के रक्षा बजट की तुलना चीन के रक्षा बजट से भी कर लेते हैं। चीन ने सेना में आधुनिकीकरण अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हुए अप...
Only branded medicines should be allowed to be sold including in Allopathic, Unani, Ayurvedic and Homeopathic fields

Only branded medicines should be allowed to be sold including in Allopathic, Unani, Ayurvedic and Homeopathic fields

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It is quite usual that many a times some medical-practitioners including in Unani, Ayurvedic and Homeopathic fields mix strong doses of steroids in unbranded medicines like powders and syrups in a bid to exhibit their self-acclaimed expertise in curing diseases. (I have my own bitter experience when my mother died at an early age of just 58 years on 21.08.1980 due to such daily dose of steroid-mixed unbranded Ayurvedic powder). Central government should formulate some effective remedy to overcome the problem. Even though remedy lies in banning unbranded medicines, but the step is liable to open a pathway for minting money for drug manufacturers. Best remedy is that Central government may establish its own production units for all types of medicines including Allopathic, Unani, Homeopathic ...
Package of complete blood-tests being offered at rupees 999 through SMS: Pathological laboratories should be regulated

Package of complete blood-tests being offered at rupees 999 through SMS: Pathological laboratories should be regulated

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Presently there is a flood of SMSs on mobile-phones offering a complete package of so many blood-tests at just rupees 999 that too with facility to collect blood-samples from residences or work-places of desiring ones. But these SMSs do not give details and addresses of laboratories where blood-tests are to be conducted. Either such offers do not come from recognised and government-approved laboratories, or normal pathological laboratories are looting public. Union Ministry of Health and Family Welfare should probe into the matter. Those offering such economical packages should be directed to give details of laboratories in SMSs with compulsion to have a proper website of such laboratories. Union Health Ministry should also develop a software to be compulsorily used by all recognised...
Recycle waste ‘In-my-Backyard’

Recycle waste ‘In-my-Backyard’

आर्थिक
I am inside a dark and dingy “factory” looking at plastic waste being recycled. This was after I went to see how plastic waste — from our homes — was being separated and traded by the poor in our city. “Where does this plastic go?” I had asked in Tikri, located on the outskirts of Delhi. “To Bawana and Narela (industrial areas also in Delhi),” I was told. So, here I was standing inside one of the many factories that buy this waste and recycle it. Recycling is a big word, but what does it actually mean? It goes broadly like this. This waste has to be segregated carefully as each industry can only “process” one type of plastic. It is first cleaned in vats, then boiled, heated and made to run through coils until it becomes like wire. This plastic wire is shredded into granules of plast...