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Author: Dialogue India

किन्हें नामंजूर है राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना

किन्हें नामंजूर है राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना

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17 वीं लोकसभा के चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद ही मात्र दिखावे भर के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश करने का नाटक किया। पर जैसी कि कांग्रेस में वंशवाद की संस्कृति बनी हुई है, उनके इस्तीफे को अस्वीकार करने का नाटक भी किया जा रहा है। कम से कम ऐसा मीडिया को कहा जा रहा है। उन्हें  कांग्रेस के वयोवृद्ध होते नेताओं जैसे मनमोहन सिंह और ए.के.एंटनी से पद पर बने रहने के लिए आग्रह करवाने का ढोंग कृत्य संपन्न किया जा रहा है । हारे हुए सेनापति राहुल को कांग्रेस के लिए अपरिहार्य बताया जा रहा है। सच में राहुल गांधी को अपने इस्तीफे को वापस लेने का दबाव डालने वालों ने या ढोंग करने वालों ने 125 बरस पुरानी कही जाने वाली पार्टी को तबाह करके ही रख दिया है। इन्हीं लोगों ने कांग्रेस के भीतर चमचागिरी की हद करते हुए जवाबदेही की संस्कृति को कभी भी पनपने ही नहीं दिया। दुर्भाग्यव...
हिन्दू राष्ट्र की मांग संवैधानिक

हिन्दू राष्ट्र की मांग संवैधानिक

प्रेस विज्ञप्ति
अष्टम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय अधिवक्ता अधिवेशन’ !   हिन्दू राष्ट्र की मांग संवैधानिक; संविधान में ‘सेक्युलर’ शब्द ही असंवैधानिक रूप से डाला गया है ! - रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति  हमारे देश के संविधान को ‘सेक्युलर’ बताया जाता है; परंतु इसी संविधान की धारा 370 के आधार पर जम्मू-कश्मीर राज्य के संविधान में ‘सेक्युलर’ शब्द डालने का विरोध किया जा रहा है । यद्यपि हमारा देश सेक्युलर है; किंतु उसका जम्मू-कश्मीर राज्य सेक्युलर नहीं है, ऐसी विचित्र स्थिति उत्पन्न हुई है । यदि भारत में प्रत्येक को संविधान ने विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता दी है, तो हिन्दू राष्ट्र की मांग असंवैधानिक कैसे ? इस तुलना में, जब वर्ष 1976 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित किया, तब उसका विरोध करने पर विरोधी दलों के लोगों को कारागार में डाल द...
मोदी सरकार में हिन्दी को प्राथमिकता मिले

मोदी सरकार में हिन्दी को प्राथमिकता मिले

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देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे चमत्कारी एवं ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही हैं। संभावना की जा रही है कि मोदी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय प्रतीकों मजबूती प्रदान करेंगी। जैसे राष्ट्रभाषा हिन्दी, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय पक्षी आदि को सम्मानजनक स्थान प्रदत्त किया जायेगा। मूल प्रश्न राष्ट्रभाषा हिन्दी को सशक्त बनाने का है। चुनाव में प्रचार का सशक्त माध्यम हिन्दी ही बनी, लेकिन जिस हिन्दी का उपयोग करके प्रत्याशी संसद में पहुंचते हैं, वहां पहुंचते ही हिन्दी को भूल जाते हैं, विदेशी भाषा अंग्रेजी के अंधभक्त बन जाते है, यह लोकतंत्र की एक बड़ी विसंगति है, राष्ट्रभाषा का अपमान है। हिन्दी की दुर्दशा एवं उपेक्षा आहत करने वाली है। इस दुर्दशा के लिये हिन्दी वालों का जितना हाथ है, उतना किसी अन्य का ...
हिमालय में ग्लेशियर के पिघलने से जुड़े खतरे

हिमालय में ग्लेशियर के पिघलने से जुड़े खतरे

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वर्तमान समय में पर्यावरण के समक्ष तरह-तरह की चुनौतियां गंभीर चिन्ता का विषय बनी हुई हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल कर समुद्र का जलस्तर तीव्रगति से बढ़ा रहे हैं। जिससे समुद्र किनारे बसे अनेक नगरों एवं महानगरों के डूबने का खतरा मंडराने लगा है। हिमालय में ग्लेशियर का पिघलना कोई नई बात नहीं है। सदियों से ग्लेशियर पिघलकर नदियों के रूप में लोगों को जीवन देते रहे हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में पर्यावरण के बढ़ रहे दुष्परिणामों के कारण इनके पिघलने की गति में जो तेजी आई है, वह चिंताजनक है। ग्लोबल वार्मिंग का खतरनाक प्रभाव अब साफतौर पर दिखने लगा है। देखा जा सकता है कि गर्मियां आग उगलने लगी हैं और सर्दियों में गर्मी का अहसास होने लगा है। इसकी वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल कर समुद्र का जलस्तर तीव्रगति से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में मुंबई समेत दुनिया के कई हिस्सों एवं महानगरों-नगरों के ड...
निशाचर तरणीसेन के वध उपरान्त विभीषण एवं श्रीराम रो पड़े

निशाचर तरणीसेन के वध उपरान्त विभीषण एवं श्रीराम रो पड़े

संस्कृति और अध्यात्म
श्री राम कथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग निशाचर तरणीसेन के वध उपरान्त विभीषण एवं श्रीराम रो पड़े यावत् स्थास्यन्ति गिरय: सरितश्च महीतले।। तावद् रामायणकथा लोकेषु प्रचरिष्यति। वा.रा.बा. २-३६-३७ इस पृथ्वी पर जब तक नदियों पर्वतों की सत्ता रहेगी, तब तक संसार में रामायण कथा का प्रचार होता रहेगा। कृत्तिवास रामायण बंगभाषा-भाषियों की रग-रग में कूट-कूट कर भरी है। चाहे धनी-निर्धन, पंडित-अल्पज्ञानी, शिक्षित-अशिक्षित, प्रत्येक सम्प्रदाय, समाज और वर्ग के लिये समान रूप से यह रामायण आनंदकारी-कल्याणकारी एवं सर्वहिताय है। यदि संस्कृत में महाकवि कालिदास और हिन्दी में गोस्वामी तुलसीदासजी है तो बंगला भाषा में महाकवि कृत्तिवास और उनकी रचना, ''कृत्तिवास रामायणÓÓ सर्वतोगामिनी, सर्वतोव्यापिनी और सर्वकालानुयायिनि-कालजयी है। अतुलनीय पांडित्यपूर्ण एवं भाव सरलता रचना की प्रमुख विशेषताएँ हैं। गोस्वामी तुलसीदासजी से...
सनातनता की विजय – मौलिक भारत के निर्माण का समय

सनातनता की विजय – मौलिक भारत के निर्माण का समय

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यह भारत की इंडिया पर जीत है। यह मोदीत्व की जय है। यह कर्मयोगियों की जीत है। यह सनातन संस्कृति के उन पहरुओं की जीत है जो 'राष्ट्र प्रथम’ बस इसी भाव से अपना सर्वस्व न्यौछावर कर इस भारत भूमि को पुष्पित पल्लवित करने को उद्धत हैं। यह उस आक्रामक राष्ट्रवाद की जीत है जो हम पर बुरी नजऱ रखने वाले दुश्मन देश की आंख निकाल लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति रखता है। यह 'नए भारत’ की उस संकल्पना की जीत है जो प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने देश की जनता के सामने रखी और जनता ने उस पर अपने भरोसे व समर्थन की मुहर लगा दी। टूटते वंशवाद के किलों और सम्प्रदाय-जाति की हवेलियों के बीच नए भारत की नयी इमारत बनकर सामने आ रही है जिसमें पहली बार इतनी व्यापक जनभागीदारी और जनसहभागिता है। एक जगे हुए आंदोलित राष्ट्र के एक एक जन ने उन स्वरों व भाषाओं के कहकरों को सुन समझ ताल से ताल मिला ली है और द्रुतगति से विश्वपटल पर अपनी खो...
लुप्त हो सकते हैं 2050 तक सतलज घाटी के आधे ग्लेशियर

लुप्त हो सकते हैं 2050 तक सतलज घाटी के आधे ग्लेशियर

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जलवायु परिवर्तन का हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। एक नए अध्ययन ने चेताया है कि चरम जलवायु परिवर्तन के परिदृश्य में सतलज नदी घाटी के ग्लेशियरों में से 55 प्रतिशत  2050 तक और 97 प्रतिशत 2090 तक तक लुप्त हो सकते हैं। इससे भाखड़ा बांध सहित सिंचाई और बिजली की कई परियोजनाओं के लिए पानी की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सतलज नदी घाटी में 1426 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र में छोटे-बड़े कुल 2026 ग्लेशियर हैं। जलवायु परिवर्तन का सबसे पहले प्रभाव छोटे ग्लेशियरों पर पड़ेगा, वे तेज़ी से पिघलेंगे। इस नए अध्ययन से यह निकलकर आया है कि एक वर्ग किलोमीटर से कम क्षेत्रफल वाले ग्लेशियर वर्ष 2050 तक 62 प्रतिशत तक लुप्त हो जायेंगे। सतलज नदी घाटी हिमालय क्षेत्र की दर्जनों घाटियों में से एक है जिसमें हजारों ग्लेशियर हैं । कुछ ग्लेशियर धीरे-धीरे सिकुड़ रहे हैं जबकि कुछ अब तक अप्...
जैव विविधता पर मंडराता खतरा

जैव विविधता पर मंडराता खतरा

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हमारी पृथ्वी काफी बेहतरीन व सुन्दर है जिसमें सभी जीव-जंतुओं का अपना-अपना अहम योगदान व महत्ता है। हरे-भरे पेड़-पौधे, विभिन्न प्रकार के जव-जंतु, मिट्टी, हवा,पानी, पठार, नदियां, समुद्र, महासागर,आदि सब प्रकृति की देन है, जो हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए आवश्यक है। पृथ्वी हमें भोजन ही नहीं वरन् जिंदगी जीने के लिए हर जरूरी चीजें मुहैया कराती है। असल में सभी जीवों व पारिस्थतिकी तंत्रों की विभिन्नता एवं असमानता ही जैव विविधता कहलाती है। इसलिए यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जैव विविधता का मानव जीवन के अस्तित्व में अहम योगदान है। जैव विविधता से जहां सजीवों के लिए भोजन तथा औषधियां तो वहीं उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है। पिछले वर्ष ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने आंकड़े जारी कर कहा था कि दुनियाभर में हर साल जितना भोजन तैयार होता है उसका लगभग एक-तिहाई बर्बाद हो जाता है। आलम तो यह है कि बर्बाद...
एक बहस वाया गांधी बनाम गोडसे

एक बहस वाया गांधी बनाम गोडसे

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यह सच है कि इसी मत भिन्नता ने गोडसे के हाथों, गांधी की हत्या कराई। किंतु सोचने की बात है कि यह कैसा मजहबी कट्टरवाद है, जो अपने ही मजहबी हाथों से अपने ही मजहब के एक दूसरे अनुयायी की हत्या करा देता है?   गांधी बनाम गोडसे यानी हिंदू बनाम हिंदू कट्टरता। जरा सोचिए, गोडसे भी हिंदू था और गांधी भी हिंदू; पक्का सनातनी हिंदू; रामराज्य का सपना लेने वाला हिंदू; एक ऐसा हिंदू, मृत्यु पूर्व जिसकी जिहृा पर अंतिम शब्द 'राम' ही था; बावजूद इसके नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को हिंदूवाद की राह में रोङा माना और हत्या की। क्यों ? क्योंकि गांधी का हिंदूवाद सिर्फ  किसी एक व्यक्ति, जाति, संप्रदाय, वर्ग या राष्ट्र विशेष से नहीं, बल्कि 'विश्व का कल्याण हो' और 'प्राणियों में सद्भावना रहे' के ऐसे दो नारे से परिभाषित होता था, पूजा-पाठ के बाद जिनका उद्घोष कराना हिंदू पुजारी आज भी कभी नहीं भूलते। गोडसे का राष्ट्रव...
Artificial Intelligence Readiness: Mind the gap

Artificial Intelligence Readiness: Mind the gap

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lobal ranking of countries in AI readiness released; Singapore leads among Asian countries; Japan and India among top 20 The Artificial Intelligence (AI) Readiness Index released by the International Development Research Centre (IDRC) and Oxford Insights launches has several Asian countries including Singapore, Japan and India among the first 20 in the world. The ranking examines 194 countries worldwide, assessing their governance, infrastructure and data, skills and education, and government and public services to measure how well these countries are prepared to manage the potentially transformative impacts of AI. Including countries from the Global South in its analysis for the first time, the 2019 Government AI Readiness Index shows that governments in the Global North are still bet...