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Author: Dialogue India

राष्ट्रीय ध्वज और सैनिकों का सम्मान

राष्ट्रीय ध्वज और सैनिकों का सम्मान

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आर्य समाजी विद्यालय में शिक्षा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में समाजसेवा के संगम से मेरे दिल और दिमाग पर राष्ट्रभक्ति की विशेष छाप है। मेरा सारा राजनीतिक जीवन राष्ट्रभक्ति के भावों के बिना शून्य ही रह जाता। जब मन पर समाज और राष्ट्र की सुरक्षा से सम्बन्धित विचारों का प्रभाव होता है तो व्यक्ति स्वार्थ में बहकर राजनीतिक जीवन को भ्रष्टाचारी कार्यों की बलि नहीं चढ़ाता। आज यदि राजनीतिक जीवन में या किसी भी अन्य क्षेत्र में जब भी भ्रष्टाचार, अपराध, अनैतिकता, लड़ाई-झगड़ा या लूट-खसोट आदि अनैतिक आचरण दिखाई देते हैं तो एक सहज कल्पना की जा सकती है कि ऐसे कार्यों में लिप्त लोग राष्ट्रभक्ति की अवधारणाओं और मान्यताओं से कोसों दूर हैं। इसलिए मेरा यह निश्चित मत है कि समाज से यदि हर प्रकार की अनैतिकता और दुराचार आदि को समाप्त करना है तो हमें देश के नागरिकों को बचपन से ही राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा का भरपूर पाठ पढ़ान...
लोकतांत्रिक मज़बूती के पांच सूत्र

लोकतांत्रिक मज़बूती के पांच सूत्र

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पार्टिंयां चुनावों की तैयारी करती हैं। पार्टियां ही उम्मीदवार तय करती हैं। पांच साल वे क्या करेंगी; इसका घोषणापत्र भी पार्टियां ही बनाती हैं। चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जायेगा; मीडिया के साथ मिलकर ये भी पार्टियां ही तय कर रही हैं। मतदान की मशीन पर चुनने के लिए छपे हुए निशान भी पािर्टंयों के ही होते हैं। मतदाता भी अपना मत, उम्मीदवार से ज्यादा, पार्टियों को ध्यान में रखकर ही देता है। यह लोकसभा के लिए लोक-प्रतिनिधि चुनने का चुनाव है कि पार्टिंयां चुनने का ? लोगों  को अपना प्रतिनिधि चुनना है। क्या चुनाव से पूर्व कभी लोगों से पूछा जाता है, ''हां भई, आप बताइए कि किस-किस को उम्मीदवार बनाया जाए ?'' सोचिए।    स्वयं से पूछिए कि इस चुनाव में चुनाव आयोग है, मतदाता है, मतदान की मशीन है; किंतु इसमें लोक कहां है ? लोक-प्रतिनिधियों का चुनाव है, तो उम्मीदवार, चुनावी प्रक्रिया, और तौर-तरीके से लेकर चुनावी ए...
चीन, कश्मीर पर नेहरु की मूर्खतापूर्ण चूक से त्रस्त भारत

चीन, कश्मीर पर नेहरु की मूर्खतापूर्ण चूक से त्रस्त भारत

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जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को 'वैश्विक आतंकी' घोषित होने से बचाने के लिए चीन ने उस वीटो का इस्तेमाल किया जो उसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की जबर्दस्त पैरवी की बदौलत प्राप्त हुआ था। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने अपनी पुस्तक ' नेहरु-दि इनवेंशन आफ इंडिया' में लिखा है कि नेहरु ने (1950 के दशक में) अमेरिका के भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थायी सदस्य बनवाने की पेशकश को ठुकरा दिया था। तब नेहरु जी ने कहा कि भारत की जगह चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले लिया जाए। तब तक ताइवान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य था।’ नेहरुजी का अमेरिकी पेशकश को अस्वीकार करने सेसिद्ध होता है कि वे  देश के सामरिक हितों को लेकर कितने लापरवाह थे। क्या उन्होंने इतना बड़ा फैसला लेने से किसी बड़े कांग्रेसी नेता से पूछा था या पहले संसद को जानकारी दी थी? अब चीन ने जैश ए मोहम्मद को जीवदान ...
तो नाम लेवा तक नहीं रहेगा लेफ्ट दलों का

तो नाम लेवा तक नहीं रहेगा लेफ्ट दलों का

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लेफ्ट पार्टियों को लेकर इस चुनावी माहौल के कोलाहाल में किसी तरह की कोई खास हलचल सामने नहीं आ रही है। हां,बिहार में बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) ने कन्हैया कुमार को टिकट जरूर दे दिया है।  फिलहाल लेफ्ट दलों से कोई भी अन्य दल  सीटों कातालमेल करने के लिए भी तैयार नहीं है। चार लेफ्ट पार्टियों को 2004 के लोकसभा चुनावों में 59 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। लोकसभा चुनावों में वह शायद वामपंथी पार्टियों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। पर 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे मात्र 11सीटें ही मिलीं। एक तरह से कहा जा सकता है कि उन्हें देश के मतदाता ने धूल चटा मिला दिया । उसके बाद से लेफ्ट पार्टियों के सीताराम येचुरी, डी.राजा और वृंदा करात जैसे नेता सिर्फ सेमिनार सर्किट में ही देखे जाते हैं। वहां पर ये अपने विचार व्यक्त करके खुश हो जाते हैं। ये अंतिम  बार कब श्रमिक, किसान या गरीब-गुरुबा के हक में ल़ड...
चुनाव, राष्ट्रवाद और राजनीति

चुनाव, राष्ट्रवाद और राजनीति

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देश का राजनीतिक माहौल नए रंग ले रहा है। वजह घिसे पिटे चुनावी नारों व मुद्दों का हवा हो जाना है। देश की जनता आंदोलित है। वजह देश की सुरक्षा, राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान व सेना के शौर्य जैसे संवेदनशील मुद्दों का हावी हो जाना है। पुलवामा के आतंकी हमलों के बाद बालकोट में वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक व विंग कमांडर अभिरंजन कुमार प्रकरण में मिली भारतीय राजनय को मिली जय विपक्षी पार्टियों को पच नहीं रही है। उनकी खिसकती राजनीतिक जमीन के बीच कश्मीर में अलगाववादी नेताओं व संगठनों, बर्मा में उत्तर पूर्व के अलगाववादी व आतंकवादी नेताओं व संगठनों व अंतरिक्ष में भी सर्जिकल स्ट्राइक की क्षमता हासिल करने की खबरों ने दुश्मनों व महा शक्तियों को हिला दिया और लोकसभा चुनावों के चढ़ते माहौल के बीच विपक्षी पार्टियों की राजनीति को बेरंग कर दिया। अब पूरा देश आंदोलित है व राष्ट्ररक्षा व सेना के शौर्य व बलिदान के मुद्...
कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

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दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या आज के इस तथाकथित सभ्य समाज में भी मनुष्य इतना बेबस हो सकता है? क्या हमने कभी खबर के पार जाकर यह सोचने की कोशिश की है कि क्या बीती होगी उस 12 साल की बच्ची पर जो हर रोज़ बेफिक्र होकर अपने घर के आंगन में खेलती थी लेकिन एक रोज़ उसका अपना ही आंगन उसके लिए महफूज़ नहीं रह जाता? आखिर क्यों उस आंगन में एक दिन यकायक एक तूफान आता है और उसका जीवन बदल जाता है?  वो बच्ची जो अपने माता पिता के द्वारा दिए नाम से खुद को पहचानती थी आज वो नाम ही उसके लिए बेगाना हो गया। सिर्फ नाम ही नहीं पहचान भी पराई हो गई। कल तक वो रीना थी लेकिन आज "रेहाना" है। सिर्फ पहचान ही नहीं उसकी जिंदगी भी बदल गई। कल तक उसके सिर पर पिता का साया था और भाई का प्यार था लेकिन आज उसके पास एक  "शौहर" है। ...
सरकार बनाने से पहले हजारों करोड़ का घोटाला?

सरकार बनाने से पहले हजारों करोड़ का घोटाला?

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क्या कांग्रेस गरीबों को न्याय दिलाने के नाम पर फर्जी आंकड़ा बताकर चुनाव के पहले ही भविष्य में घोटाला करने की तैयारी कर रही है? 5 करोड़ परिवारों को 12 हजार रूपए प्रति माह देने के लिए साल में साढ़े तीन लाख करोड़ का भार पड़ने की संभावना जताई जा रही, जबकि गरीब परिवारों की संख्या मात्र पांचवां हिस्सा, 1 करोड़ के करीब है। ऐसे में क्या ढ़ाई लाख करोड़ का घोटाला करने की रणनीति बनाई जा रही है? लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को रिझाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि जब सरकार बनेगी तो देश के 20 प्रतिशत आबादी जो ग़रीबी रेखा के नीचे रहती है याने 5% परिवार को प्रति माह 12,000 ₹ की दर से न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाएगी। कांग्रेस पार्टी से न्याय योजना के रूप में प्रचारित कर रही है लेकिन इस योजना में गंभीर त्रुटियां है सबसे बड़ी त्रुटि ग़रीबी रेखा के बीच रहने वाले लोगों की संख्या को लेकर है। रंगराजन स...
विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं स्वस्थ दिखने वाले शहरी लोग

विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं स्वस्थ दिखने वाले शहरी लोग

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एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारत में स्वस्थ दिखने वाले अधिकतर शहरी लोग विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिक 30-70 वर्ष के लोगों में विटामिन के स्तर का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन में 270 प्रतिभागी (147 पुरुष और 123 महिलाएं) शामिल थे। शोधकर्ताओं ने रक्त के नमूनों की मदद से विटामिन के विभिन्न रूपों (ए, बी1, बी2, बी6, बी12, फोलेट और डी) तथा होमोसिस्टीन की मात्रा का मूल्यांकन किया है। शरीर में कोशिकीय एवं आणविक कार्यों, ऊतकों की वृद्धि और रखरखाव के लिए आवश्यक विटामिन एक प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। इस अध्ययन में आधे लोग विटामिन बी2 और 46 प्रतिशत लोग विटामिन बी6 की कमी से ग्रस्त पाए गए हैं। ये परिणाम महत्वपूर्ण हैं, जो विटामिन बी2 की कमी को गंभीरता से लेने का संकेत करते हैं। हालांकि, लोग विटामिन की कमी को आमत...
कुपोषण से हृदय रोग तक लड़ने में मदद कर सकते हैं गांधी के सिद्धांत

कुपोषण से हृदय रोग तक लड़ने में मदद कर सकते हैं गांधी के सिद्धांत

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पैदल चलना, शारीरिक गतिविधियां, ताजा सब्जियों व फलों का सेवन, शर्करा, नमक तथा वसा वाले खाद्य पदार्थों का कम सेवन, तंबाकू तथा शराब से दूरी और पर्यावरणीय एवं व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना। कुछ लोगों को ये बातें विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी गैर-संचारी एवं संचारी रोगों से बचाव के लिए जारी सलाह लग सकती हैं। पर, अच्छे स्वास्थ्य से जुड़े ये कुछ ऐसे सिद्धांत हैं, जिन पर एक सदी पहले खुद महात्मा गांधी अमल करते थे और लोगों के बीच इनका प्रचार भी करते थे। इनमें से कई विचारों को आज वैज्ञानिक साक्ष्यों का समर्थन प्राप्त है और पोषण विशेषज्ञ भी उन्हें प्रासंगिक मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषण से लेकर हृदय रोगों जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने में ये सिद्धांत मदद कर सकते हैं। जून 1945 में बिड़ला हाउस, मुंबई में वजन तोलते हुए महात्मा गांधी (फोटो : आईजेएमआर) गांधी का मानना था कि अत...
जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता के लिए 19 भाषाओं में रेडियो धारावाहिक

जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता के लिए 19 भाषाओं में रेडियो धारावाहिक

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ऑल इंडिया रेडियो और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार ने मिलकर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पर केंद्रित रेडियो धारावाहिक की विशेष श्रृंखला शुरू की है। जलवायु परिवर्तन के बारे में आम लोगों को जागरूक करने और इससे निपटने में जन-भागीदारी बढ़ाने में यह रेडियो धारावाहिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  यह जलवायु परिवर्तन के बहुआयामी पहलुओं पर केंद्रित 52 कड़ियों का रेडियो धारावाहिक है, जिसका निर्माण विज्ञान प्रसार और ऑल इंडिया रेडियो द्वारा किया गया है। इस रेडियो धारावाहिक का प्रसारण 31 मार्च  2019 को राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इंडिया रेडियो द्वारा 121 स्टेशनों से 19 भारतीय भाषाओं में किया जाएगा। इसमें 14 एफ.एम. स्टेशन तथा 107 मीडियम स्टेशन शामिल हैं। इस धारावाहिक का नाम हिंदी में ‘बदलती फिजाएं’ और अंग्रेजी में ‘व्हिस्परर्स ऑफ विंड’ है। धारावाहिक की प्रत्येक कड़ी 27...